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CBSE Sample Papers for Class 10 Hindi B Set 9 with Solutions

October 23, 2025 by Bhagya

Students can access the CBSE Sample Papers for Class 10 Hindi with Solutions and marking scheme Set 9 will help students in understanding the difficulty level of the exam.

CBSE Sample Papers for Class 10 Hindi Course B Set 9 with Solutions

समय : 3 घंटे
पूर्णांक : 80

सामान्य निर्देश
निम्नलिखित निर्देशों को बहुत सावधानी से पढ़िए और उनका सख्ती से अनुपालन कीजिए

  • इस प्रश्न पत्र में चार खंड हैं- क, ख, ग और घ।
  • इस प्रश्न पत्र में कुल 16 प्रश्न हैं। सभी प्रश्न अनिवार्य हैं।
  • प्रश्न पत्र में आंतरिक विकल्प दिए गए हैं।
  • प्रश्नों के उत्तर दिए गए निर्देशों का पालन करते हुए लिखिए।

खंड ‘क’ (अपठित बोध) (14 अंक)

इस खंड में अपठित गद्यांश से संबंधित तीन बहुविकल्पीय (1 × 3 = 3) और दो अतिलघूत्तरात्मक व लघूत्तरात्मक (2 × 2 = 4) प्रश्न दिए गए हैं।

प्रश्न 1.
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उस पर आधारित दिए गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर लिखिए (7)
अच्छी संगति से ही मनुष्य की वाणी अत्यधिक प्रभावित होती है। विधाता की ओर से मनुष्य को प्रदान की गई सबसे अनमोल निधि है उसकी वाणी। वाणी के कारण ही पंडित और मूर्ख, साधु और दुष्ट, सज्जन और दुर्जन की पहचान होती है। वाणी द्वारा हम न केवल अपने मन की अतल गहराइयों के विभिन्न भावों को व्यक्त करते हैं, बल्कि अपने परिवेश को संबोधित करके अपनी इच्छाओं को क्रियान्वित भी करते हैं। संगति का प्रभाव व्यक्ति के मस्तिष्क एवं व्यवहार पर अधिक इसलिए पड़ता है, क्योंकि व्यक्ति की यह स्वाभाविक प्रवृत्ति है कि वह समाजीकरण की प्रक्रिया में सीखे गए व्यवहारों को ही संपादित करता है। अपने परिवेश एवं वातावरण’ से व्यक्ति की भावनाएँ, चिंतन, भाषा आदि इतनी अधिक प्रभावित होती हैं कि उसे सामाजिक प्राणी कहा जाता है। समाजीकृत होकर ही वह विवेकशील एवं चिंतनशील बन पाता है। यदि समाजीकरण का व्यक्ति के लिए इतना अधिक महत्त्व है, तो स्वाभाविक है कि उसके लिए वह परिवेश, जिसमें वह लोगों के साथ अंतः क्रिया करता है, भी महत्त्वपूर्ण होगा अर्थात् वह किन लोगों के बीच विभिन्न प्रकार की गतिविधियों को क्रियान्वित करता है, इसका व्यक्ति पर अत्यधिक प्रभाव पड़ता है।

(क) गद्यांश के अनुसार, विधाता की ओर से मनुष्य को प्रदान की गई सबसे अनमोल निधि किसे माना गया है? (1)
1. परिवेश को
2. भावनाओं को
3. संगति को
4. वाणी को
कूट
(i) 1 और 4
(ii) 2 और 3
(iii) केवल 2
(iv) केवल 4
उत्तर:
(iv) केवल 4
अच्छी संगति से ही मनुष्य की वाणी अत्यधिक प्रभावित होती है। विधाता की ओर से मनुष्य को प्रदान की गई सबसे अनमोल निधि है, उसकी वाणी। वाणी के कारण ही पंडित और मूर्ख, साधु और दुष्ट, सज्जन और दुर्जन की पहचान होती है।

(ख) उपर्युक्त गद्यांश किस विषय वस्तु पर आधारित है? (1)
(i) मनुष्य की वाणी
(ii) संगति और वाणी का महत्त्व
(iii) मनुष्य के व्यक्तित्व का विकास
(iv) समाज और व्यक्ति का संबंध
उत्तर:
(ii) संगति और वाणी का महत्त्व
प्रस्तुत गद्यांश की मुख्य विषयवस्तु ‘संगति और वाणी का महत्त्व’ है। गद्यांश में बताया गया है कि अच्छी संगति से मनुष्य की वाणी और व्यवहार अत्यधिक प्रभावित होते हैं। संगति व्यक्ति के मस्तिष्क भावनाओं और सोच को प्रभावित करती है।

(ग) कथन (A): संगति का प्रभाव व्यक्ति के मन एवं व्यवहार पर पड़ता है। (1)
कारण (R): संगति का मनुष्य के व्यवहार से कोई संबंध नहीं है।
कूट
(i) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या करता है।
(ii) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं, परंतु कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या नहीं करता है।
(iii) कथन (A) सही है, किंतु कारण (R) गलत है।
(iv) कथन (A) गलत है, किंतु कारण (R) सही है।
उत्तर:
(iii) कथन (A) सही है, किंतु कारण (R) गलत है।
संगति का प्रभाव व्यक्ति के मस्तिष्क एवं व्यवहार पर अधिक पड़ता है, क्योंकि व्यक्ति की यह स्वाभाविक प्रवृत्ति है कि वह समाजीकरण की प्रक्रिया में सीखे गए व्यवहारों को ही संपादित करता है।

CBSE Sample Papers for Class 10 Hindi B Set 9 with Solutions

(घ) समाजीकरण मनुष्य के लिए महत्त्वपूर्ण क्यों है? (2)
उत्तर:
प्रस्तुत गद्यांश के आधार पर समाजीकरण मनुष्य के लिए महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि व्यक्ति इसके माध्यम से विवेकशील एवं चिंतनशील बनता है। समाजीकरण की प्रक्रिया में वह सीखे गए व्यवहारों को ही संपादित करता है। अतः समाजीकरण का व्यक्ति पर विशेष प्रभाव पड़ता है।

(ङ) प्रस्तुत गद्यांश का मूल भाव 20-25 शब्दों में लिखिए। (2)
उत्तर:
प्रस्तुत गद्यांश में संगति व वाणी के महत्त्व को उजागर किया गया है। वाणी मनुष्य को पंडित मूर्ख, साधु-दुष्ट और सज्जन-दुर्जन की पहचान करना सिखाती है। दूसरी ओर संगति सभ्य, ज्ञानवान व चिंतनशील बनाती है, जिससे मनुष्य समाजीकृत होकर सामाजिक प्राणी कहलाता है।

प्रश्न 2.
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उस पर आधारित दिए गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर लिखिए (7)
तुलसी जैसा कवि काव्य की विशुद्ध, मनोमयी, कल्पना-प्रवण तथा श्रृंगारात्मक भावभूमियों के प्रति उत्साही नहीं हो सकता। उनका संत हृदय परम कारुणिक राम के प्रति ही उन्मुख हो सकता है, जो जीवन के धर्ममय सौंदर्य, मर्यादापूर्ण, शील और आत्मिक शौर्य के प्रतीक हैं। विजय रथ के रूपक में उन्होंने संत जीवन की रूपरेखा उभारी है और अपनी रामकथा को इसी संतत्त्व की चरितार्थता बना दिया है। उनका काव्य भारतीय जीवन की सबसे बड़ी आकांक्षा मर्यादित जीवनचर्या अथवा ‘संत जीवन’ को वाणी देता है। धर्ममय जीवन की आकांक्षा भारतीय संस्कृति का वैशिष्टय है। तुलसी के काव्य में धर्म का अनाविल, अनावरण और अक्षुण्ण रूप ही प्रकट हुआ है। मध्य युग की आध्यात्मिकता का प्रतिनिधित्व करते हुए भी उनका काव्य भारतीय आत्मा के चिरंतन सौंदर्य का प्रतिनिधि है, जो सत्य, तप, करुणा और मैत्री में ही आरोहण के देवधर्मी मूल्यों को अनावृत्त करता है। उनके काव्य में हमें श्रेष्ठ कवित्व ही नहीं मिलता, उसके आधार पर हम संत कवित्व की रूपरेखा भी निर्धारित कर सकते हैं। भक्ति उनके जीवन की आंतरिक भाव-साधना है। इस भाव-साधना की वाणी की अप्रतिम क्षमता देकर उन्होंने निष्कंप दीपशिखा की भाँति अपनी काव्य-कला को निःसंग और निर्वैयक्तिक दीप्ति से भरा है।

(क) गद्यांश के आधार पर बताइए कि कवि तुलसी में किसके प्रति उत्साह नहीं है? (1)
(i) भक्ति भाव को अभिव्यक्त करने के प्रति
(ii) धर्ममय जीवन जीने के प्रति
(iii) विशुद्ध एवं कल्पनामय काव्य प्रणयन के प्रति
(iv) संत कवि के प्रणयन के प्रति
उत्तर:
(iii) विशुद्ध एवं कल्पनामय काव्य प्रणयन के प्रति
गद्यांश के अनुसार कवि तुलसी में काव्य की विशुद्ध, मनोमयी, कल्पना- प्रवण तथा श्रृंगारात्मक भावभूमियों के प्रति उत्साह नहीं है।

(ख) गद्यांश के अनुसार, तुलसी के राम किसके प्रतीक हैं? (1)
(i) करुणा, शील और संतत्त्व
(ii) मर्यादा, भक्ति और सौंदर्य
(iii) धर्म, करुणा और शील
(iv) मर्यादा, शील, शौर्य और सौंदर्य
उत्तर:
(iv) मर्यादा, शील, शौर्य और सौंदर्य
प्रस्तुत गद्यांश के आधार पर तुलसी के राम जीवन के धर्ममय सौंदर्य, मर्यादापूर्ण, शील और आत्मिक सौंदर्य के प्रतीक हैं। विजय रथ के रूपक में उन्होंने संत जीवन की रूपरेखा उभारी है और अपनी रामकथा को इसी संतत्त्व की चरितार्थता बना दिया है।

(ग) कथन (A): तुलसीदास का काव्य भारतीय जीवन की मर्यादित जीवनचर्या को वाणी देता है। (1)
कारण (R): तुलसीदास का काव्य भारतीय संस्कृति की आकांक्षाओं का प्रतीक है।
कूट
(i) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या करता है।
(ii) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं, परंतु कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या नहीं करता है।
(iii) कथन (A) सही है, किंतु कारण (R) गलत है।
(iv) कथन (A) गलत है, किंतु कारण (R) सही है।
उत्तर:
(i) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या करता है।
तुलसीदास जी का काव्य भारतीय जीवन की मर्यादित जीवनचर्या को वाणी देता है, जो भारतीय संस्कृति की आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करता है। तुलसीदास का काव्य धर्म और संस्कृति की गहराइयों को व्यक्त करता है।

(घ) तुलसी के काव्य में भारतीय जीवन की सबसे बड़ी आकांक्षा क्या है? (2)
उत्तर:
तुलसी के काव्य में भारतीय जीवन की सबसे बड़ी आकांक्षा मर्यादित जीवनचर्या अथवा ‘संत जीवन’ को वाणी देना है। धर्ममय जीवन की आकांक्षा भारतीय संस्कृति का वैशिष्टय है।

(ङ) तुलसी के काव्य में धर्म का कैसा रूप प्रकट हुआ है? (2)
उत्तर:
तुलसी के काव्य में धर्म का अनाविल, अनावरण और अक्षुण्ण रूप प्रकट हुआ है। मध्य युग की आध्यात्मिकता का प्रतिनिधित्व करते हुए भी उनका काव्य भारतीय आत्मा के चिरंतन सौदर्य का प्रतिनिधि है, जो सत्य, तप, करुणा और मैत्री में ही आरोहण के देवधर्मी मूल्यों को अनावृत्त करता है।

खंड ‘ख’ (व्यावहारिक व्याकरण) (16 अंक)

व्याकरण के लिए निर्धारित विषयों पर अतिलघूत्तरात्मक व लघूत्तरात्मक 20 प्रश्न दिए गए हैं, जिनमें से केवल 16 प्रश्नों (1 × 16 = 16) के उत्तर देने हैं।

प्रश्न 3.
निर्देशानुसार ‘पदबंध पर आधारित पाँच प्रश्नों में से किन्हीं चार प्रश्नों के उत्तर दीजिए। (1 × 4 = 4)
(क) ‘आज का दिन अनोखा और ऐतिहासिक था।’ (पदबंध छाँटकर उसका भेद भी लिखिए।) (1)
(ख) ‘जापान के लोग प्रकृति के साथ अद्भुत सामंजस्य बिठाते हैं।’ (संज्ञा पदबंध छाँटकर लिखिए।) (1)
(ग) ‘उनका स्वभाव बहुत गंभीर था।’ प्रस्तुत वाक्य में कौन सा पदबंध है? (1)
(घ) ‘वह तेज कदमों से चली गई और ठिठक गई।’ (क्रिया पदबंध छाँटिए।) (1)
(ङ) ‘बड़ी मुश्किल से भीड़ छँटी।’ रेखांकित शब्द में कौन-सा पदबंध है? (1)
उत्तर:
(क) प्रस्तुत वाक्य में ‘अनोखा और ऐतिहासिक’ विशेषण पदबंध है।
(ख) प्रस्तुत वाक्य में ‘जापान के लोग’ में संज्ञा पदबंध है।
(ग) प्रस्तुत वाक्य में ‘स्वभाव बहुत गंभीर’ विशेषण पदबंध है।
(घ) प्रस्तुत वाक्य में ‘चली गई और ठिठक गई।’ क्रिया पदबंध है।
(ङ) रेखांकित पदबंध ‘बड़ी मुश्किल’ में क्रिया विशेषण है।

प्रश्न 4.
निर्देशानुसार रचना के आधार पर वाक्य रूपांतरण पर आधारित पाँच प्रश्नों में से किन्हीं चार प्रश्नों के उत्तर दीजिए (1 × 4 = 4)
(क) ‘जब मैं कक्षा में अव्वल आता था, तब भाई साहब दुःखी होते थे।’ प्रस्तुत वाक्य को संयुक्त वाक्य में बदलिए। (1)
(ख) ‘रीति के अनुसार दोनों को एक ही गाँव का होना आवश्यक था।’ प्रस्तुत वाक्य को मिश्र वाक्य में बदलिए। (1)
(ग) मैंने बहुत चेष्टा की कि इस पहेली का कोई अर्थ निकालूँ।’ प्रस्तुत वाक्य को सरल वाक्य में बदलिए। (1)
(घ) ‘कलाकार का यह कर्त्तव्य है कि वह उपभोक्ता की रुचियों का परिष्कार करने का प्रयत्न करें।’ प्रस्तुत वाक्य को सरल वाक्य में बदलिए। (1)
(ङ) जो मनुष्य है, उसने अपनी स्वार्थ सिद्धि के लिए प्रकृति का संतुलन बिगाड़ दिया है। रचना की दृष्टि से वाक्य भेद लिखिए। (1)
उत्तर:
(क) मैं कक्षा में अव्वल आता था और भाई साहब दुःखी होते थे।
(ख) गाँव की जो रीति थी, उसके अनुसार दोनों को एक ही गाँव का होना आवश्यक था।
(ग) मैंने इस पहेली का कोई अर्थ निकालने की बहुत चेष्टा की।
(घ) उपभोक्ता की रुचियों का परिष्कार करने का प्रयत्न करना कलाकार का कर्त्तव्य है।
(ङ) रचना की दृष्टि से यह मिश्रित वाक्य है।

प्रश्न 5.
निर्देशानुसार ‘समास’ पर आधारित पाँच प्रश्नों में से किन्हीं चार प्रश्नों के उत्तर दीजिए। (1 × 4 = 4)
(क) ‘घुड़दौड़’ सामासिक पद का विग्रह करके भेद भी लिखिए। (1)
(ख) ‘यथासमय’ पद में कौन-सा समास प्रयुक्त है? (1)
(ग) महाविद्यालय’ शब्द का समास विग्रह कीजिए। (1)
(घ) ‘वन को गमन’ विग्रह-पद का समस्तपद बनाकर उसका भेद लिखिए। (1)
(ङ) कर्मधारय समास का एक उदाहरण लिखिए। (1)
उतर:
(क) ‘घुड़दौड़’ सामाजिक पद का विग्रह ‘घोड़ो की दौड़’ है तथा इसमें तत्पुरुष समास है।
(ख) ‘यथासमय’ पद में अव्ययीभाव समास प्रयुक्त है।
(ग) ‘महाविद्यालय’ शब्द का समास विग्रह ‘महान है, जो विद्यालय’ है।
(घ) ‘वन को गमन’ विग्रह-पद का समस्तपद ‘वनगमन’ होगा तथा इसमें तत्पुरुष समास है।
(ङ) समास का उदाहरण है- ‘नीलकमल’ इसका समास विग्रह है- ‘नीला है, जो कमल’

CBSE Sample Papers for Class 10 Hindi B Set 9 with Solutions

प्रश्न 6.
निर्देशानुसार ‘मुहावरे’ पर आधारित पाँच प्रश्नों में से किन्हीं चार प्रश्नों के उत्तर दीजिए। (1 × 4 = 4)
(क) रिक्त स्थान की पूर्ति उचित मुहावरे द्वारा कीजिए। (1)
उनकी कला में इतनी ताकत थी कि वे अपनी धुन से _____________ भी आग लगा देते थे।
(ख) नियम तोड़ने और वामीरो से प्रेम करने के कारण गाँव के मुखिया तताँरा को देखकर _____________ हो गए। (1)
(ग) ‘ओखली में सिर देना’ मुहावरा वाक्य में इस प्रकार प्रयोग करें कि अर्थ स्पष्ट हो जाए। (1)
(घ) ‘भाई साहब अकसर सूक्ति बाण छोड़ते थे।’ इस वाक्य से मुहावरा छाँटकर उसका वाक्य में प्रयोग कीजिए। (1)
(ङ) ‘महात्मा गांधी को अंग्रेजों ने कई बार नजरबंद करके रखा। दिए गए वाक्य में रेखांकित शब्द का क्या अर्थ है? (1)
उत्तर:
(क) पानी में
(ख) आग-बबूला
(ग) ‘ओखली में सिर देना’ मुहावरे का अर्थ है- ‘जानबूझकर मुसीबत मोल लेना’।
वाक्य प्रयोग नीम के पेड़ पर मधुमक्खियों के छत्ते की जानकारी होते हुए भी मोहन ने उस पेड़ पर पत्थर मारकर ओखली में सिर दे दिया।
(घ) मुहावरा सूक्ति बाण छोड़ना।
वाक्य प्रयोग मेरी परेशानी सुनकर उसने मदद करने के बजाय सूक्ति बाण छोड़ने शुरू कर दिए।
(ङ) दिए गए वाक्य में रेखांकित शब्द का अर्थ है- ‘कैद या हिरासत में रखना।’

खंड ‘ग’ (पाठ्यपुस्तक एवं पूरक पाठ्यपुस्तक) (28 अंक)

इस खंड में पाठ्यपुस्तक एवं पूरक पाठ्यपुस्तक से प्रश्न पूछे गए हैं, जिनके निर्धारित अंक प्रश्न के सामने अंकित हैं।

प्रश्न 7.
निम्नलिखित पठित गद्यांश पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए। (1 × 5 = 5)
मेरे और भाई साहब के बीच में अब केवल एक दरजे का अंतर और रह गया। मेरे मन में एक कुटिल भावना उदय हुई कि कहीं भाई साहब एक साल और फेल हो जाएँ, तो मैं उनके बराबर हो जाऊँ, फिर वह किस आधार पर मेरी फजीहत कर सकेंगे, लेकिन मैंने इस विचार को दिल से बलपूर्वक निकाल डाला। आखिर वह मुझे मेरे हित के विचार से ही तो डाँटते हैं। मुझे इस वक्त अप्रिय लगता है अवश्य, मगर यह शायद उनके उपदेशों का सही असर है कि मैं दनादन पास हो जाता हूँ और गद्यांश इतने अच्छे नंबरों से।
(क) ‘कुटिल भावना’ से क्या अभिप्राय है?
(i) मन में कपट और द्वेष रखने का भाव
(ii) दूसरे की प्रशंसा का भाव
(iii) आदर और सम्मान की पृष्ठभूमि
(iv) अकारण दुःखी होने का भाव
उत्तर:
(i) मन में कपट और द्वेष रखने का भाव
कुटिल भावना से अभिप्राय मन में कपट और द्वेष रखने के भाव से है। कक्षा में प्रथम आने पर छोटे भाई के स्वभाव में बहुत अंतर आ गया था। उसमें अभिमान और आत्मसम्मान का भाव बढ़ गया था। उसे लगा था कि बड़े भाई साहब उसे उपदेश देते थे, परंतु स्वयं फेल हो गए, इसलिए अब वह खेलकूद में निर्भीक होकर पहले से भी अधिक समय व्यतीत करने लगा।

(ख) ‘मेरे मन में एक कुटिल भावना उदय हुई कि कहीं भाई साहब एक साल और फेल हो जाएँ, तो मैं उनके बराबर हो जाऊँगा और फिर वह किस आधार पर मेरी फजीहत कर सकेंगे।’ पंक्ति में लेखक की कुटिल भावना क्या है? (1)
(i) बड़े भाई की इज्जत न करने की
(ii) बड़े भाई की शिकायत करने की
(iii) बड़े भाई साहब के एक बार और फेल हो जाने की
(iv) ये सभी
उत्तर:
(iii) बड़े भाई साहब के एक बार और फेल हो जाने की
इस दी गई पंक्ति में लेखक की कुटिल भावना बड़े भाई साहब के एक बार और फेल हो जाने की है।

(ग) छोटे भाई के मन में आए विचार को बलपूर्वक निकालने का क्या कारण था? (1)
(i) बड़े भाई के प्रति प्रेम
(ii) बड़े भाई के प्रति सम्मान
(iii) बड़े भाई के प्रति आत्मीयता
(iv) ये सभी
उत्तर:
(iv) ये सभी
छोटे भाई के बड़े भाई के प्रति मन में आए विचार को बलपूर्वक निकालने का कारण बड़े भाई के प्रति प्रेम, बड़े भाई के प्रति सम्मान और बड़े भाई के प्रति आत्मीयता है। छोटे भाई के द्वारा बताया गया है कि अपने से बड़ों की बातों को ध्यानपूर्वक सुनना चाहिए और उनका सम्मान करना चाहिए।

(घ) सुमेलित कीजिए (1)

सूची I सूची II
A. लेखक और भाई साहब के बीच का अंतर 1. एक कुटिल भावना का जन्म
B. लेखक के मन में जन्मी भावना 2. केवल एक दर्जे का
C. लेखक ने विचार को दिल से निकाला 3. भाई साहब की फजीहत न हो पाए
D. लेखक के पास होने का कारण 4. भाई साहब के उपदेशों का प्रभाव

कूट

A B C D
(i) 1 2 3 4
(ii) 4 3 1 2
(iii) 2 1 3 4
(iv) 3 4 2 1

उत्तर:
(iii) 2 1 3 4
गद्यांश में बताया गया है कि अब लेखक और भाई साहब के बीच केवल एक दर्जे का ही अंतर रह गया था। लेखक के मन में यह भावना आई कि अगर भाई साहब एक साल फेल हो जाएँ, तो मैं उनके बराबर हो जाऊँ। लेखक ने माना कि अगर ऐसा हुआ तो भाई साहब किस आधार पर मुझे डाँट पाएँगे। इसलिए उसने विचार छोड़ दिया। लेखक ने स्वयं माना कि शायद भाई साहब के उपदेशों का ही असर था कि वह पास हो जाता है।

(ङ) कथन (A) अंत में लेखक को बड़े भाई साहब का डाँटना उचित प्रतीत होता है। (1)
कारण (R) शायद बड़े भाई साहब के उपदेशों से ही लेखक पास होत है।
कूट
(i) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या करता है।
(ii) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं, परंतु कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या नहीं करता है।
(iii) कथन (A) सही है, किंतु कारण (R) गलत है।
(iv) कथन (A) गलत है, किंतु कारण (R) सही है।
उत्तर:
(i) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या करता है।
लेखक को अंत में बड़े भाई साहब का डाँटना उचित प्रतीत होता है, क्योंकि वह कैसे उसके भविष्य के कारण अपने बचपन का गला घोंट रहे हैं। उनकी बातें सुनकर छोटे भाई की आँखें खुल गईं। उसे समझ में आ गया कि उसके अव्वल आने के पीछे बड़े भाई की प्रेरणा रही है। इससे उसके मन में बड़े भाई के प्रति श्रद्धा उत्पन्न हो गई।

प्रश्न 8.
गद्य खंड पर आधारित निम्नलिखित चार प्रश्नों में से किन्हीं तीन प्रश्नों के उत्तर लगभग 25-30 शब्दों में दीजिए (2 × 3 = 6)
(क) ‘तताँरा-वामीरो’ पाठ के आधार पर बताइए कि तताँरा क्यों प्रसिद्ध था तथा सभी लोग उसे आमंत्रित क्यों करते थे? (2)
उत्तर:
‘तताँरा-वामीरो’ पाठ के आधार पर तताँरा अपने प्रभावशाली व्यक्तित्व के कारण अत्यधिक प्रसिद्ध था। वह सरल स्वभाव का तथा सभी की सहायता करने वाला व्यक्ति था। वह अपनी लकड़ी की तलवार की सहायता से अद्भुत शौर्य और साहस का परिचय देता था। तताँरा के आकर्षक व्यक्तित्व, समाज सेवा और त्याग की भावना तथा आत्मीय स्वभाव से प्रभावित होकर लोग उसके करीब रहना पसंद करते थे। अतः पर्व त्योहार के समय उसे दूसरे गाँवों में भी विशेष रूप से आमंत्रित किया जाता था।

(ख) वज़ीर अली अंग्रेज़ों से नफरत करता है तथा उन्हें वह किसी भी कीमत पर देश से बाहर निकालना चाहता है और देश को उनसे आज़ादी दिलाना चाहता है। ‘कारतूस पाठ के आधार पर वजीर अली के संघर्ष को लिखिए। (2)
उत्तर:
‘कारतूस’ पाठ में वज़ीर अली की वीरता और साहस को बताया गया है। वजीर अली का उद्देश्य अंग्रेज़ों से भारत की भूमि को आज़ाद कराना था। वस्तुतः जब जाँबाज वज़ीर अली समय के साथ-साथ इस तथ्य से परिचित हो गया कि ब्रिटिश शासन किसी भी दृष्टि से भारत एवं भारतवासियों के लिए श्रेयस्कर नहीं है अथवा लाभप्रद नहीं हैं, तो यह धारणा स्पष्ट होते ही उसने अंग्रेज़ों को भारत की भूमि से बाहर खदेड़ने की ठान ली। उसके जीवन का लक्ष्य ही अंग्रेज़ों को देश से बाहर निकालने का बन गया था।

(ग) लेखक के अनुसार कौन-सी सोच सबसे अधिक दुःखदायी है? ‘अब कहाँ दूसरों के दुःख से दुःखी होने वाले’ पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए। (2)
उत्तर:
ईश्वर ने यह धरती सभी के लिए एक समान बनाई है। पशु-पक्षी, मानव, नदी, पर्वत, समुद्र सभी की बराबर की हिस्सेदारी है, परंतु मनुष्य ने बुद्धि के बल पर बड़ी-बड़ी दीवारें खड़ी कर दी हैं। परिवार के समान दिखाई देने वाले संसार को टुकड़ों में विभाजित कर दिया है और विश्व को टुकड़ों में बाँटकर स्वयं को विजयी समझ रहा है, जबकि यही उसकी सबसे बड़ी हार है, क्योंकि जुड़े होने पर सभी एक-दूसरे की परवाह करते हैं, परंतु अलग होने पर सभी अपने-अपने लिए सोचते हैं। यह सोच सबसे अधिक दुःखदायी होती है। प्रस्तुत पाठ इस तथ्य को स्पष्ट करता है कि आज के युग में ऐसे लोग बहुत कम हैं, जो दूसरे के दुःख से दुःखी होते हैं।

(घ) ‘तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र पाठ के आधार पर बताइए कि ‘तीसरी कसम’ फिल्म को खरीदार नहीं मिलने का क्या कारण था? (2)
उत्तर:
‘तीसरी कसम’ फिल्म को खरीदार नहीं मिलने का कारण था कि फिल्म में किसी भी प्रकार के अनावश्यक मसाले (रोमांचित करने वाले दृश्य) नहीं दिए गए थे। अत: फिल्मकारों को इससे लाभ मिलने की उम्मीद नहीं थी। वे साहित्य के महत्त्व और गौरव को नहीं समझ सकते थे। इस कारण उन्होंने फिल्म को खरीदने से इनकार कर दिया।

प्रश्न 9.
निम्नलिखित पठित काव्यांश को पढ़कर दिए गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त विकल्पों का चयन कीजिए (1 × 5 = 5)
स्याम म्हाँने चाकर राखो जी,
गिरधारी लाला म्होंने चाकर राखो जी।
चाकर रहस्यूँ बाग लगास्यूँ नित उठ दरसण पास्यूँ,
बिंदरावन री कुंज गली में, गोविंद लीला गास्यूँ।
चाकरी में दरसण पास्यूँ, सुमरण पास्यूँ खरची,
भाव भगती जागीरी पास्यूँ, तीनूं बाताँ सरसी।

(क) मीरा श्रीकृष्ण की सेवा क्यों करना चाहती है?
(i) धन लाभ के लिए
(ii) दर्शन करने के लिए
(iii) यशस्वी बनने के लिए
(iv) अपना वर्चस्व स्थापित करने के लिए
उत्तर:
(ii) दर्शन करने के लिए
मीरा श्रीकृष्ण के सान्निध्य में रहकर प्रत्येक क्षण उनके दर्शन करना चाहती है। वह श्रीकृष्ण के लिए बाग-बगीचे लगाना चाहती हैं, जिसमें वे सुबह-शाम विचरण कर सकें और जब वे सुबह-शाम घूमने के लिए बाग में आएँ, तो मीरा उनके दर्शन प्राप्त कर सके।

(ख) प्रस्तुत पद्यांश में कवयित्री श्रीकृष्ण से क्या प्रार्थना कर रही है?
(i) मेरे कष्ट हर लो
(ii) मुझे अपनी दासी बना लो
(iii) मेरे जीवन को सुखों से भर दो
(iv) मेरा संसार में नाम कर दो
उत्तर:
(ii) मुझे अपनी दासी बना लो
प्रस्तुत पद्यांश में कवयित्री श्रीकृष्ण से प्रार्थना करती है कि हे गिरिधर! तुम मुझे अपनी दासी बना लो, जिससे आपकी सेवा करते हुए मुझे आपके दर्शन का अवसर मिल जाएगा।

(ग) श्रीकृष्ण के नाम स्मरण से कवयित्री को कौन-सा लाभ प्राप्त होगा ?
(i) स्मरण रुपी जेब खर्च का
(ii) श्रीकृष्ण के दर्शन करने का
(iii) (i) और (ii) दोनों
(iv) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(iii) (i) और (ii) दोनों
श्रीकृष्ण के नाम का स्मरण करने से कवयित्री को श्रीकृष्ण के दर्शन करने का लाभ प्राप्त होगा। मीरा कहती है कि नाम स्मरण के रूप में मुझे जेब खर्च भी प्राप्त हो जाया करेगा।

(घ) भाव भागती जागीरी पास्यूँ पंक्ति के संदर्भ में जागीरी शब्द का अर्थ है।
(i) सफलता
(ii) जीवन दर्शन
(iii) जेब खर्च
(iv) दर्शन, स्मरण व भक्ति रूपी सम्पत्ति
उत्तर:
(iv) दर्शन, स्मरण व भक्ति रूपी सम्पत्ति
पद्यांश में सम्पत्ति का अर्थ दर्शन, स्मरण व भक्ति रूपी जागीर से है।

(ड) कथन (A): मीरा श्रीकृष्ण की सेवा में बाग-बगीचे लगाना चाहती है।
कारण (R): मीरा श्रीकृष्ण के प्रेम में डूबी हुई है और उनकी भक्ति करना चाहती है।
कूट
(i) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या करता है।
(ii) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं, परंतु कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या नहीं करता है।
(iii) कथन (A) सही है, किंतु कारण (R) गलत है।
(iv) कथन (A) गलत है, किंतु कारण (R) सही है।
उत्तर:
(i) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या करता है।
पद्यांश के अनुसार, मीरा श्रीकृष्ण की सेवा में बाग-बगीचे लगाना चाहती है, क्योंकि मीरा श्रीकृष्ण के प्रति पूर्णरूप से प्रेम और समर्पण में डूबी हुई है।

CBSE Sample Papers for Class 10 Hindi B Set 9 with Solutions

प्रश्न 10.
काव्य खंड पर आधारित निम्नलिखित चार प्रश्नों में से किन्हीं तीन प्रश्नों के उत्तर लगभग 25-30 शब्दों में दीजिए (2 × 3 = 6)
(क) ‘विरुद्धवाद बुद्ध का दया प्रवाह में बहा।’ मनुष्यता पाठ की इस पंक्ति के आधार पर बताइए कि महात्मा बुद्ध ने समाज में अपना स्थान किस प्रकार बनाया? (2)
उत्तर:
‘विरुद्धवाद बुद्ध का दया प्रवाह में बहा।’ ‘मनुष्यता’ पाठ की प्रस्तुत पंक्ति के आधार पर महात्मा बुद्ध ने समाज अपना स्थान गलत नीतियों का विरोध करके बनाया है। बुद्ध के विरुद्धवाद का अर्थ समाज में व्याप्त गलत नीतियों का विरोध करने से है। उसी विरोध के कारण लोगों ने बुद्ध का समर्थन नहीं किया, परंतु जब बुद्ध की करुणा और दया का भाव सबके समक्ष प्रस्तुत हुआ, तो लोग बुद्ध के सामने नतमस्तक हो गए।

(ख) वर्षा ऋतु में पर्यटकों के आकर्षण का मुख्य केंद्र क्या है? ‘पर्वत प्रदेश में पावस पाठ के आधार पर बताइए। (2)
उत्तर:
वर्षा ऋतु में पर्यटकों के आकर्षण का मुख्य केंद्र ‘पर्वतों पर बहने वाले झरने’ से है। पर्वतीय प्रदेश में वर्षा ऋतु के बादल ऐसे लगते हैं, जैसे एक पूरा पर्वत विशाल पक्षी के समान अत्यधिक सफेद और चमकीले पंखों को फड़फड़ाता हुआ ऊपर आकाश में उड़ रहा हो। झरनों की केवल आवाज़ सुनाई दे रही है। इसके पश्चात् इन बादलों से इतनी तेज वर्षा हुई हो, जैसे आकाश धरती पर टूट पड़ा हो और उसने वर्षारूपी बाणों से धरती पर आक्रमण कर दिया हो। वर्षा के देवता इन्द्र बादलरूपी विमान में घूम-घूमकर अपने जादुई करतब दिखा रहे हैं, जिसके कारण पर्वतों पर क्षण-क्षण में विचित्र और अद्भुत दृश्य दिखाई दे रहे हैं।

(ग) जवानी की अवस्था ही वह अवस्था होती है, जिसमें सौंदर्य, प्रेम और जोश चरमोत्कर्ष पर होते हैं।’ पंक्ति के माध्यम से कवि देश के युवाओं को क्या संदेश दे रहा है? (2)
उत्तर:
‘जवानी की अवस्था ही वह अवस्था होती है, जिसमें सौंदर्य, प्रेम और जोश चरमोत्कर्ष पर होते हैं।’ इस पंक्ति के माध्यम से कवि देश के युवाओं को संदेश दे रहा है कि जवानी में जोश, उत्साह, शक्ति, ऊर्जा आदि भरपूर होती है। यदि इन गुणों का उचित लाभ उठाया जाए, तो जवानी को सार्थक बनाया जा सकता है। यदि युवा वर्ग अपने इस साहस, जोश तथा शक्ति का प्रयोग देशहित में करे, तो केवल युवावस्था (जवानी) ही नहीं, उनका पूरा जीवन सार्थक हो जाता है। कवि ने सैनिकों के माध्यम से देश के लिए अपने प्राणों को न्योछावर करने वाले लोगों की भावना को आलोकित किया है। देश की रक्षा में अपने प्राणों का उत्सर्ग करने वाला सैनिक ऐसी ही अपेक्षा आने वाली युवा पीढ़ियों से भी करता है।

(घ) मीठी वाणी बोलने से क्या प्राप्त होता है? ‘साखी’ कविता के आधार पर बताइए। (2)
उत्तर:
‘साखी’ कविता के आधार पर मीठी वाणी बोलने से दूसरों को सुख और अपने तन को शीतलता प्राप्त होती है। मीठे वचन बोलने से व्यक्ति के मन का अहंकार समाप्त हो जाता है। मीठी वाणी हमारे तन को शीतलता प्रदान करती है, साथ ही सुनने वाले को भी सुख और आनंद की अनुभूति कराती है। इसलिए हमें हमेशा मीठे वचन बोलने चाहिए, जो दूसरों को सुख और स्वयं को शीतलता प्रदान करें।

प्रश्न 11.
पूरक पाठ्यपुस्तक ‘संचयन’ पर आधारित निम्नलिखित तीन प्रश्नों में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 40-50 शब्दों मैं दीजिए (3 × 2 = 6)
(क) “हरिहर! यहाँ कोई किसी का नहीं है। सब मोहमाया का बंधन है।” इस कथन के आधार पर स्पष्ट कीजिए कि हरिहर काका को उनके घरवालों के चंगुल से किस प्रकार बचाया गया? ‘हरिहर काका’ पाठ के आधार पर उत्तर दीजिए। (3)
उत्तर:
‘हरिहर काका’ पाठ में महंत जी ने हरिहर काका को एकांत कमरे में बैठाकर समझाया कि यहाँ कोई किसी का नहीं है। सब मोहमाया का बंधन है। तुम धार्मिक प्रवृत्ति के व्यक्ति हो। इस बंधन में किस प्रकार फँस गए। ईश्वर की भक्ति में मन लगाओ, क्योंकि उसके अतिरिक्त तुम्हारा कोई और नहीं है। पत्नी, बेटा, भाई-बंधु सब-के-सब स्वार्थ के साथी हैं। जिस दिन उनको लगेगा कि तुमसे उनका स्वार्थ सधने वाला नहीं है, उस दिन वे तुम्हें पूछेंगे तक नहीं। इसलिए ज्ञानी, संत, महात्मा व ईश्वर के अतिरिक्त किसी से प्रेम नहीं करना चाहिए। तुम्हारे हिस्से में 15 बीघे जमीन है। जिस कारण से तुम्हारे भाई का परिवार तुम्हें पूछता है। यदि किसी दिन तुम उनसे बोल दो कि तुमने अपनी जायदाद किसी के नाम कर दी, तो वे तुमसे बोलना बंद कर देंगे। तुम्हारे बीच जो खून का रिश्ता है वह समाप्त हो जाएगा। तुम्हारे भले के लिए मैं तुमसे यह बात पहले ही कहना चाहता था, परंतु संकोचवश कह नहीं पाया।

(ख) “यहाँ तक कि परचूनिये, आदतीये भी अपने बच्चों को स्कूल भेजना ज़रूरी न समझते।” – पाठ ‘सपनों के-से दिन’ के इस कथन के आधार पर स्पष्ट कीजिए कि बच्चों की पढ़ाई को व्यर्थ समझने के पीछे अभिभावकों के क्या तर्क थे? (3)
उत्तर:
‘सपनों के से दिन’ पाठ के आधार पर अभिभावकों का बच्चों की पढ़ाई को व्यर्थ समझने का कारण सामाजिक वातावरण माना जा सकता है। प्रस्तुत पाठ में ज्यादातर बच्चों के माता-पिता किसान या मजदूर थे। कोई परचून की दुकान चलाता था, तो कोई अपना छोटा-मोटा काम-धंधा करता था। वे बच्चों को स्कूल भेजना समय की बर्बादी मानते थे, इसी कारण वे अपने बच्चे को स्कूल भेजने की अपेक्षा व्यवसाय में लगाने पर अधिक बल देते थे। वे अपने बच्चों को अफसर, डॉक्टर, वकील न बनाकर बहीखाता जाँचने और मुनीमी आदि का काम सिखाना चाहते थे। उनका मानना था कि उनके बच्चे भी बड़े होकर वही काम करेंगे, जो वे खुद कर रहे हैं। मेरे अनुमान से पारिवारिक पृष्ठभूमि का कम पढ़ा-लिखा होना तथा गरीब आदि कारण ही हो सकते हैं, जिससे अभिभावक पढ़ाई को व्यर्थ समझते थे।

(ग) जिस दिन इफ्फन की दादी का निधन हुआ था, उस दिन वे दोनों दोस्त बहुत रोए थे। खासतौर से टोपी को अपना जीवन इफ्फन की दादी के बिना अकेला लगने लगा और वह बेचैन रहने लगा। ‘टोपी शुक्ला’ पाठ के आधार पर बताइए कि टोपी को अपनी दादी से लगाव न होकर इफ्फन की दादी से क्यों लगाव था ? आपको इससे टोपी की किस विशेषता का पता चलता है? (3)
उत्तर:
टोपी को इफ्फन की दादी से अत्यधिक प्रेम मिला था। टोपी को उनके पास रहना अच्छा लगता था। दादी की भाषा, उनका भोलापन उसे अच्छा लगता था। टोपी दादी का असली रूप इफ्फन की दादी में देखता था। इसलिए वह इफ्फन के सामने दादी बदलने की बात कहता है। यह बच्चों के भोलेपन का सुंदर नमूना है तथा प्रेम की चाहत का स्वाभाविक चित्रण भी है। इससे टोपी के बालपन की इस विशेषता का पता चलता है कि बच्चों का मन अत्यंत भोला एवं निश्छल होता है। बालमन को केवल हृदय की सच्ची भावनाओं और प्यार के बंधनों से ही बाँधा जा सकता है। वह भाषा, जाति, धर्म व आयु के बंधन से परे होते हैं।

खंड ‘घ’ (रचनात्मक लेखन) (22 अंक)

इस खंड में रचनात्मक लेखन पर आधारित प्रश्न पूछे गए हैं, जिनके निर्धारित अंक प्रश्न के सामने अंकित हैं।

प्रश्न 12.
निम्नलिखित तीन विषयों में से किसी एक विषय पर दिए गए संकेत बिंदुओं के आधार पर लगभग 120 शब्दों में अनुच्छेद लिखिए (5)
(क) स्वास्थ्य की रक्षा
संकेत बिंदु

  • स्वस्थ रहने की आवश्यकता
  • पोषक भोजन
  • लाभकारी सुझाव
  • उपसंहार

उत्तर:
स्वास्थ्य की रक्षा
वर्तमान समय में प्रत्येक मनुष्य की जीवन शैली इतनी भागदौड़ से भर गई है कि वे अपने स्वास्थ्य की रक्षा कर पाने में असमर्थ हो चुके हैं। जहाँ पहले के समय में व्यक्ति की औसत आयु 75 वर्ष थी, आज वह घटकर 60 वर्ष हो गई है। स्वास्थ्य की रक्षा बहुत ही आवश्यक है। खराब स्वास्थ्य के साथ व्यक्ति कोई भी कार्य उचित तौर तरीके से नहीं कर पाता है। प्रत्येक व्यक्ति को आधारभूत वस्तुओं का संचय करने के लिए स्वस्थ रहने की आवश्यकता है। कहा जाता है स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मन का वास होता है, इसलिए स्वास्थ्य की रक्षा हमारे लिए आवश्यक है। स्वास्थ्य की रक्षा के लिए पोषक भोजन लेना अति आवश्यक है।

हरी सब्जियाँ, दूध, दही, फल आदि का सेवन हमारे शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हुए हमारे स्वास्थ्य की रक्षा करता है। आजकल जंकफूड और फास्टफूड का प्रचलन अपने चरम पर है। इसकी चपेट में लाखों लोग आ चुके हैं और इसी कारण वे अपना स्वास्थ्य खराब कर चुके हैं। आजकल के बच्चों को मोटापा, सुस्ती व भिन्न-भिन्न प्रकार की बीमारियों ने जकड़ लिया है। हमें जंकफूड एवं फास्टफूड से दूरी बनाते हुए पौष्टिक आहार लेने चाहिए, जिससे हम अपने स्वास्थ्य की रक्षा करते हुए, अपने और दूसरों के जीवन को खुशियाँ प्रदान कर सकें। स्पष्टतः स्वास्थ्य व्यक्ति की शारीरिक, मानसिक और सामाजिक अच्छाई को संदर्भित करता है। एक व्यक्ति को अच्छे स्वास्थ्य का आनंद लेते हुए तब कहा जाता है, जब वह किसी भी शारीरिक बीमारियों और मानसिक तनाव से रहित होता है और अच्छे पारस्परिक संबंधों का मज़ा उठाता है। जीवन में प्रत्येक कदम पर प्रतिस्पर्द्धा होती है। प्रत्येक व्यक्ति दूसरे की बराबरी करना चाहता है, चाहे वह स्कूल या कॉलेज स्तर पर हो या जीवन में स्वास्थ्य शैली को बनाए रखने की हो। लोगों को यह बात भली-भांति समझनी चाहिए कि हमारा स्वास्थ्य सर्वोपरि है।

(ख) एकता की शक्ति
संकेत बिंदु

  • एकता का अर्थ
  • एकता की शक्ति का महत्त्व
  • एकता की शक्ति के उदाहरण
  • एकता के अभाव के दुष्परिणाम
  • उपसंहार

उत्तर:
एकता की शक्ति
‘वचारों के मेल-जोल को एकता कहते हैं। जहाँ बहुत से लोग किसी एक विचार या उद्देश्य को ध्यान में रखकर एकमत होकर तन-मन से कार्य करते हैं, वहाँ एकता की भावना विद्यमान होती है। ‘एकता’ एक होने की भावना है। यह मनुष्य के विचारों को उसके निश्चय और मनोबल को मजबूत बनाती है। ऐसी अवस्था में कोई भी कार्य कठिन एवं असंभव नहीं लगता है। मनुष्य समाज में रहता है। इसके लिए वह एकता की कल्पना करता है, क्योंकि वह संसार में या समाज में अकेला जीवन नहीं बिता सकता। यह उसकी स्वाभाविक कमज़ोरी है। इस कमज़ोरी को दूर करने के लिए वह पहले अपने परिवार में, फिर पड़ोस में, फिर अपनी जाति या संप्रदाय में एकता की स्थापना करता है। यह एकता ही समाज का निर्माण करती है। सामाजिक जीवन बिताने के लिए एकता आवश्यक है। इसके बिना मनुष्य और पशु समान होते हैं। सभी अपने में स्वतंत्र और स्वछंद होते हैं। ऐसी अवस्था में नए-नए विचारों का जन्म नहीं होता और मनुष्य सामाजिक प्राणी नहीं रह जाता।

अतः एकता मनुष्य जीवन के लिए अनिवार्य है। परिवार को सुखी बनाने के लिए लोगों में एकता होनी चाहिए। समाज को खुशहाल करने व प्रगति हेतु सभी जातियों, संप्रदायों और वर्गों में एकता की भावना होना अनिवार्य है। किसी संस्था में भी श्रमिकों की एकता बहुत महत्त्वपूर्ण होती है यदि वे एक साथ हों, तो संगठन किसी भी प्रकार की चुनौती का सामना कर सकता है और यदि उनमें मतभेद हो, तो संपूर्ण संगठन को उसका दुष्परिणामं झेलना पड़ता है। कोई सेना अपने दुश्मनों को तभी पराजित कर सकती है, जब उसके सभी सैनिक साथ लड़ते हैं तथा एक दल तभी मैच जीतता है, जब सभी खिलाड़ी अच्छा खेलते हैं। एक अकेला सैनिक व एक अकेला खिलाड़ी कुछ नहीं कर सकता। कहा भी गया है ‘एकता हमें खड़ा रखती है, अलगाव हमें गिराता है।’ अतः यह सत्य है कि एकता में बल है। सभी सदस्यों की एकता परिवार को शक्ति देती है और मजबूत बनाती है। नागरिकों की एकता देश को, श्रमिकों की एकता संस्था को तथा खिलाड़ियों की एकता दल को मजबूत बनाती है।

(ग) भारत में गणतंत्र दिवस
संकेत बिंदु

  • राष्ट्रीय पर्व : 26 जनवरी
  • गणतंत्र दिवस का महत्त्व
  • समारोह का आयोजन
  • उपसंहार

उत्तर:
भारत में गणतंत्र दिवस
गणतंत्र दिवस भारत में 26 जनवरी को मनाया जाता है। यह भारत का एक राष्ट्रीय पर्व है। प्रत्येक वर्ष 26 जनवरी को प्रत्येक भारतीय के मन में देशभक्ति की लहर और मातृभूमि के प्रति अपार स्नेह भर उठता है। इस दिन भारतीय अधिनियम एक्ट को हटाकर भारतीय संविधान को लागू किया गया था तथा लोकतांत्रिक प्रणाली के साथ भारतीय संविधान को जोड़ा गया था। इस प्रकार यह सरकार के संसदीय रूप के साथ एक प्रभुत्वशाली समाजवादी लोकतांत्रिक गणतंत्र के रूप में भारत देश के सामने आया। इस दिन भारत के राष्ट्रपति द्वारा ध्वजारोहण किया जाता है। स्कूल, कॉलेजों व सरकारी संस्थानों में भी तिरंगा फहराया जाता है।

यह आयोजन हमें देश के सभी शहीदों के निःस्वार्थ बलिदान की याद दिलाता है, जिन्होंने आजादी के संघर्ष में अपने जीवन को बलिदान कर दिया और विदेशी आक्रमणों के विरुद्ध अनेक लड़ाइयाँ जीतीं। आजादी के पश्चात् एक ड्राफ्टिंग कमेटी को 28 अगस्त, 1947 की मीटिंग में भारत के स्थायी संविधान का प्रारूप तैयार करने को कहा गया। देश की आजादी के बाद भारतीय संविधान सभा का गठन हुआ। संविधान सभा में कुल 379 सदस्य थे, जिसमें 15 महिलाएँ थीं। संविधान की ड्राफ्टिंग समिति के अध्यक्ष डॉ. भीमराव अंबेडकर थे। 4 नवम्बर, 1947 को डॉ. बी. आर अंबेडकर की अध्यक्षता में भारतीय संविधान के प्रारूप को सदन में रखा गया। 2 वर्ष, 11 महीने और 18 दिन में संविधान बनकर ” तैयार हुआ। अंत में इंतजार की घड़ी 26 जनवरी, 1950 को इसे लागू होने के साथ ही समाप्त हुई।

भारत सरकार प्रत्येक वर्ष राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में एक कार्यक्रम आयोजित करती है, जिसमें इंडिया गेट पर खास परेड का आयोजन होता है। इसमें तीनों सेनाएँ विजय चौक से अपनी परेड को शुरू करती हैं। इसमें तरह-तरह के अस्त्र-शस्त्रों का भी प्रदर्शन किया जाता है। आर्मी बैण्ड, एन.सी.सी. कैडेट्स और पुलिस बल भी विभिन्न संघों के माध्यम से अपनी कला का प्रदर्शन करते हैं। राज्यों में भी इस उत्सव को राज्यपाल की मौजूदगी में बेहद शानदार तरीके से मनाया जाता है। इस दिन सभी को ये वादा करना चाहिए कि वे अपने देश के संविधान की सुरक्षा करेंगे, देश की संप्रभुता और शांति को बनाए रखेंगे, साथ ही देश के विकास में सहयोग करेंगे।

प्रश्न 13.
सांप्रदायिकता की समस्या पर अपने विचार प्रकट करते हुए ‘हिंदुस्तान’ समाचार-पत्र के संपादक को लगभग 100 शब्दों में एक पत्र लिखिए। (5)
अथवा
अपने घर में चोरी हो जाने की सूचना देते हुए पुलिस थाना अधिकारी को लगभग 100 शब्दों में एक पत्र लिखिए।
उत्तर:
परीक्षा भवन,
दिल्ली।

दिनांक 25 जून, 20XX

सेवा में,
माननीय संपादक महोदय,
हिंदुस्तान टाइम्स,
राजघाट, नई दिल्ली।

विषय सांप्रदायिकता की समस्या के संबंध में।

महोदय,
सविनय निवेदन है कि मैं आपके अखबार का नियमित पाठक हूँ। आपके अखबार की लोकप्रियता को देखते हुए मैं आपका ध्यान देश में फैल रही सांप्रदायिकता की समस्या की ओर आकर्षित करना चाहता हूँ। कुछ तथाकथित राजनेता सस्ती लोकप्रियता के लिए पक्षपात वाली बयानबाजी करते हैं, जिससे अनेक समुदायों को ठेस पहुँचती है। इस प्रकार की राजनीति करने का उनका उद्देश्य देश में उन्माद और नफ़रत की भावना को जागृत करना होता है और इसमें ये सफल भी हो जाते हैं। अतः मैं चाहता हूँ कि आप अपने प्रतिष्ठित समाचार पत्र ‘हिंदुस्तान’ के माध्यम से इन तथाकथित नेताओं की असलियत को प्रकट करें, जिससे दो समुदायों में उत्पन्न सांप्रदायिक तनाव कम हो सकें। यह आपकी एक अति महत्त्वपूर्ण देश सेवा होगी। देश में फैले सांप्रदायिक उन्माद को रोकने के लिए यदि आपने मेरे अनुरोध को स्वीकार कर लिया तो हम सभी आपके सदा आभारी होंगे।

धन्यवाद।

प्रार्थी
क.ख.ग.

अथवा

परीक्षा भवन,
दिल्ली।

दिनांक 29 अप्रैल, 20XX

सेवा में,
श्रीमान अधिकारी,
थाना विकास मार्ग,
नई दिल्ली।

विषय रात को घर में चोरी होने की शिकायत हेतु।

महोदय,
सविनय निवेदन है कि गत 28 अप्रैल को रात दो बजे मेरे घर से लगभग ₹ 1 लाख पाँच हजार तथा जेवरात की चोरी हो गई। कुत्तों के भौंकने पर जब तक हमारी और पड़ोसियों की नींद खुलती, तब तक चोर सब कुछ लेकर भाग चुके थे। इसलिए वे पहचाने तो नहीं जा सके, किंतु मुझे आस-पास के कुछ नए लोगों पर संदेह है, जिनका हाथ इस चोरी में हो सकता है, क्योंकि इस इलाके में ऐसी घटना कई बार हुई है। अतः महोदय आपसे अनुरोध है कि यथाशीघ्र छानबीन आरंभ कर चोरों को पकड़ा जाए, जिससे मेरे चोरी हुए रुपये व सामान मिल सके तथा चोरों को सजा मिल सके।

धन्यवाद।

भवदीय
क.ख.ग.

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प्रश्न 14.
आप सौरभ तँवर/सुरभि तँवर हैं। आप अपने स्कूल में कैप्टन के पद पर कार्यरत हैं। आपके विद्यालय में गांधी जयंती के अवसर पर वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया जाना है। इस संबंध में सभी विद्यार्थियों को सूचित करने के लिए लगभग 60 शब्दों में सूचना लिखिए। (4)
अथवा
आपको पार्क में एक बैग मिला है, जिसमें कुछ रुपये तथा जरूरी कागजात हैं। इस संबंध में 60 शब्दों में एक सूचना लिखिए।
उत्तर:
गौतमबुद्ध सीनियर सेकेंड्री स्कूल
गौतमबुद्ध नगर, उत्तर प्रदेश
सूचना

दिनांक 23 मई, 20XX

वृक्षारोपण कार्यक्रम के आयोजन के संबंध में
सभी छात्रों को सूचित किया जाता है कि गांधी जयंती के शुभ अवसर पर उनके सपनों को साकार करने के लिए विद्यालय के सामने वाली बस्ती में वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। जिसका उद्देश्य लोगों को वृक्षों के प्रति जागरूक करना है। यह कार्यक्रम प्रातः 9 बजे से अपराह्न 12 बजे तक चलेगा। इच्छुक छात्र-छात्राएँ अपना नामांकन अधोहस्ताक्षरी के पास 28 मई, 20XX तक अवश्य करा दें।

सौरभ तँवर
स्कूल कैप्टन

अथवा

कालिंदी कुंज, नई दिल्ली
सूचना

दिनांक 29 मई, 20XX

खोया-पाया के संबंध में
आप सभी को सूचित किया जाता है कि कालिंदी कुंज मार्ग के पास वाले पार्क की ओर से जब मैं जा रहा था, तो वहाँ मुझे पार्क के मध्य भाग में एक बैग मिला इस बैग में बहुत आवश्यक सामान पाया गया है। बैग से कुछ रुपये, मोबाइल फोन तथा अन्य कई महत्त्वपूर्ण दस्तावेज़ भी प्राप्त हुए हैं। जिस भी व्यक्ति का यह सामान है, वह इस नंबर 93XXXXXXXX पर संपर्क करके अपने बैग की निशानी बताकर अपना बैग ले जा सकता है।

धन्यवाद।

हरीलाल

प्रश्न 15.
‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान विषय पर 40 शब्दों में विज्ञापन लिखिए। (3)
अथवा
क्रिकेट खेल प्रतियोगिता हेतु 40 शब्दों में एक आकर्षक विज्ञापन तैयार कीजिए।
उत्तर:
CBSE Sample Papers for Class 10 Hindi B Set 9 with Solutions Q15
अथवा
CBSE Sample Papers for Class 10 Hindi B Set 9 with Solutions Q15.1

प्रश्न 16.
आप रोहित शर्मा/साक्षी शर्मा हैं। आप अपने बैंक प्रबंधक को एक ई-मेल लिखकर अपने खाते को आधार कार्ड से लिंक करवाकर उसमें अपना आधार नंबर अपडेट कराने के लिए लगभग 100 शब्दों में एक पत्र लिखिए।
अथवा
‘कोई भी धर्म आपस में दुश्मनी करने की शिक्षा नहीं देता।’ इस वाक्य को आधार बनाते हुए लगभग 100 शब्दों में लघुकथा लिखिए।
उत्तर:
From : [email protected]
To : Statebank of [email protected]
CC : [email protected]
BCC : –

विषय बैंक खाते से आधार कार्ड लिंक कराने न

महोदय,
सविनय निवेदन यह है कि मेरा नाम रोहित शर्मा है। आपकी शाखा में मेरा खाता पिछले 8 वर्षों से है। मेरा बचत खाता संख्या 392XXXXX है। महोदय, केंद्र सरकार की नई नीति के अनुसार बैंक खाता आधार कार्ड से लिंक कराना अनिवार्य हो गया है। अतः महोदय मेरा आपसे निवेदन है कि मेरे बचत खाते के साथ मेरा आधार कार्ड नंबर जोड़ (लिंक) दिया जाए। इसके लिए मैं आधार की प्रतिलिपि स्वप्रमाणित करके आपको मेल कर रहा हूँ। इस संबंध में आपसे त्वरित कार्यवाही की अपेक्षा करता हूँ।

सधन्यवाद।

भवदीय
रोहित शर्मा

अथवा

लघुकथा एक गाँव में राम और रहीम नाम के दो बच्चे रहते थे। दोनों आपस में अच्छे दोस्त थे। वे दोनों एक ही मोहल्ले में रहते थे और एकसाथ ही खेलते थे। एक दिन बहुत तेज बारिश हो रही थी, जिसके कारण कोई खेलने न जा सका। राम ने माँ से कहा कि “माँ बारिश को रोको, इसके कारण मैं अपने दोस्त रहीम के साथ खेल नहीं पा रहा हूँ।” राम की बात सुनकर उसकी माँ को लगा कि उनके बेटे में यह शैतानी उस मुस्लिम लड़के रहीम की वजह से आ रही है। उन्हें रहीम बिल्कुल पसंद नहीं था। कुछ दिनों बाद बगल के गाँव में हिंदू व मुसलमानों में दंगा हो गया। उसका प्रभाव इस गाँव पर भी पड़ा।

दंगे के कारण स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि पुलिस ने लोगों को घरों से बाहर न निकलने की चेतावनी जारी कर दी। उस समय राम अपने मित्र रहीम के घर पढ़ने गया हुआ था। राम की माँ अपने बेटे को लेकर बहुत चिंतित हो रही थी। राम के पिताजी ने माँ को समझाया कि रहीम के माता-पिता बहुत भले लोग हैं। अतः चिंता मत करो, लेकिन माँ को रहीम के परिवार पर बिल्कुल भरोसा नहीं था। वे उन्हें मुसलमान होने की वजह से शक की निगाह से देखती थीं, परंतु इस समय और कोई रास्ता भी नहीं था। वह दंगा समाप्त होने का इंतजार करने लगी। रात को दंगा समाप्त होते ही रहीम के माता-पिता राम को सही सलामत उसके घर छोड़ने आए। उन्हें देख राम की माँ को स्वयं की गलत सोच पर पछतावा होने लगा। एकाएक ही उनके मुँह से निकला- “मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना।”

सीख प्रस्तुत कथा से हमें यही सीख मिलती है कि हमें सभी धर्मों के प्रति प्रेम-भाव व आदर-सम्मान रखना चाहिए। धर्म के आधार पर भेदभाव करना गलत है। हमें सभी धर्मों का आदर करते हुए मिल-जुलकर रहना चाहिए।

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