Students can access the CBSE Sample Papers for Class 10 Hindi with Solutions and marking scheme Set 7 will help students in understanding the difficulty level of the exam.
CBSE Sample Papers for Class 10 Hindi Course B Set 7 with Solutions
समय : 3 घंटे
पूर्णांक : 80
सामान्य निर्देश
निम्नलिखित निर्देशों को बहुत सावधानी से पढ़िए और उनका सख्ती से अनुपालन कीजिए
- इस प्रश्न पत्र में चार खंड हैं- क, ख, ग और घ।
- इस प्रश्न पत्र में कुल 16 प्रश्न हैं। सभी प्रश्न अनिवार्य हैं।
- प्रश्न पत्र में आंतरिक विकल्प दिए गए हैं।
- प्रश्नों के उत्तर दिए गए निर्देशों का पालन करते हुए लिखिए।
खंड ‘क’ (अपठित बोध) (14 अंक)
इस खंड में अपठित गद्यांश से संबंधित तीन बहुविकल्पीय (1 × 3 = 3) और दो अतिलघूत्तरात्मक व लघूत्तरात्मक (2 × 2 = 4) प्रश्न दिए गए हैं।
प्रश्न 1.
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उस पर आधारित दिए गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर लिखिए (7)
साक्षात्कार की सफलता बहुत कुछ इस बात पर निर्भर करती है कि आपकी अभिव्यक्ति की क्षमता कैसी है। यदि आप अपनी बात स्पष्ट रूप से प्रभावशाली तरीके से रख पा रहे हैं, तो निश्चित रूप से उसका बहुत अच्छा प्रभाव पड़ता है। इसलिए विद्यार्थियों को प्रयास करना चाहिए कि वे अपनी बोलने की शक्ति को बढ़ाएँ। अच्छे शब्दों का चुनाव करें। घटिया एवं द्विअर्थी शब्दों के प्रयोग से बचना चाहिए। इसी प्रकार आपके वाक्य जटिल न होकर सरल और सुबोध हों। कठिन शब्दों एवं जटिल वाक्यों का प्रयोग आपकी भाषा को कृत्रिम बना देता है।
इसके अतिरिक्त बोर्ड के समक्ष आपका व्यवहार अत्यंत संतुलित और सौम्य होना चाहिए अर्थात् आपके बोलचाल के लहजे में सौम्यता होनी चाहिए। यदि आप सदस्य की किसी बात से सहमत नहीं हैं, तो पूरी विनम्रता के साथ उसका खंडन करें। यदि आप ऐसे अवसरों पर उग्रता अपनाते हैं, तो वह आपके असंतुलित व्यक्तित्व का परिचायक होगा। यदि आप किसी प्रश्न का उत्तर दे पाने की स्थिति में नहीं हैं, तो उसके लिए अफसोस व्यक्त करने में संकोच नहीं करना चाहिए। सदस्य इस बात को समझते हैं कि जरूरी नहीं कि आप सभी प्रश्नों के उत्तर दे सकें। गलत उत्तर देकर सदस्यों को मूर्ख बनाने का प्रयत्न कदापि न करें। इसी तरह साफ एवं स्पष्ट उत्तर न देने पर आप स्वयं फँस सकते हैं, क्योंकि ऐसी स्थिति में सदस्य आपसे उस उत्तर का स्पष्टीकरण माँगेंगे और आप अनावश्यक उलझते चले जाएँगे। इसलिए बोलना साक्षात्कार की एक आदर्श नीति मानी जाती है। जो जितना अधिक बोलेगा, उसके पकड़ में आने की आशंका उतनी ही अधिक होगी।
(क) उपर्युक्त गद्यांश किस विषयवस्तु पर आधारित है? (1)
(i) व्यक्तित्व विकास और आत्म अभिव्यक्ति
(ii) भाषा और संप्रेषण के सिद्धांत
(iii) साक्षात्कार में सफलता के रहस्य
(iv) पेशेवर जीवन में नैतिकता और अनुशासन
उत्तर:
(iii) साक्षात्कार में सफलता के रहस्य
उपर्युक्त गद्यांश साक्षात्कार में सफलता के रहस्य विषयवस्तु पर आधारित है, क्योंकि इसमें साक्षात्कार के दौरान सफलता प्राप्त करने के महत्त्वपूर्ण पहलुओं जैसे- अभिव्यक्ति की क्षमता, शब्दों का चयन, बोलचाल का लहजा और साक्षात्कार के दौरान विनम्रता से उत्तर देने की रणनीति आदि पर चर्चा की गई है।
(ख) बोर्ड की बात पर असहमत होकर उग्रता अपनाना किस बात का परिचायक है? (1)
(i) असंतुलित व्यक्तित्व का
(ii) संतुलित व्यवहार का
(iii) परिवार द्वारा दिए गए आदर्श का
(iv) समाज द्वारा सीखे गए आचरण का
उत्तर:
(i) असंतुलित व्यक्तित्व का
बोर्ड की बात पर असहमत होकर उग्रता अपनाना असंतुलित व्यक्तित्व का परिचायक है। यदि आप बोर्ड के किसी सदस्य की किसी बात से सहमत नहीं हैं, तो पूरी विनम्रता के साथ उसका खंडन करें। यदि आप ऐसे अवसरों पर उग्रता अपनाते हैं, तो वह आपके असंतुलित व्यक्तित्व का परिचायक होगा।
(ग) कथन (A): साक्षात्कार की सफलता और अभिव्यक्ति की क्षमता का आपस में कोई संबंध नहीं है। (1)
कारण (R): साक्षात्कार और अभिव्यक्ति ये दोनों ही मनुष्य जीवन के अलग-अलग पहलू हैं।
कूट
(i) कथन (A) तथा कारण (R) दोनों सही हैं।
(ii) कथन (A) गलत है, किंतु कारण (R) सही है।
(iii) कथन (A) तथा कारण (R) दोनों गलत हैं।
(iv) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या करता है।
उत्तर:
(iii) कथन (A) तथा कारण (R) दोनों गलत हैं।
साक्षात्कार की सफलता बहुत कुछ प्रभावशाली अभिव्यक्ति पर निर्भर करती है। यदि आपका अपनी बात को रखने का तरीका प्रभावशाली है, तो निश्चित रूप से उसका बहुत अच्छा प्रभाव पड़ता है। सफलता और अभिव्यक्ति की क्षमता का आपस में संबंध है। ये दोनों ही मनुष्य जीवन के एक जैसे पहलू हैं।
(घ) गद्यांश के आधार पर बताइए कि साक्षात्कार की आदर्श नीति क्या है? (2)
उत्तर:
गद्यांश के आधार पर साक्षात्कार की आदर्श नीति ज्यादा न बोलना है। इसी तरह साफ़ एवं स्पष्ट उत्तर न देने पर आप स्वयं फँस सकते हैं, क्योंकि ऐसी स्थिति में सदस्य आपसे उस उत्तर का स्पष्टीकरण माँगेगे और आप अनावश्यक उलझते चले जाएँगे। इसलिए बोलना साक्षात्कार की एक आदर्श नीति मानी जाती है, जो जितना अधिक बोलेगा, उसके पकड़ में आने की आशंका उतनी ही अधिक होगी।
(ङ) अपनी बात को स्पष्ट एवं प्रभावशाली तरीके से रखने के लिए क्या-क्या करना चाहिए? किन्हीं दो बिंदुओं का उल्लेख कीजिए। (2)
उत्तर:
गद्यांश के अनुसार, अपनी बात को स्पष्ट एवं प्रभावशाली तरीके से रखने के लिए निम्नलिखित दो बिंदुओं का प्रयोग किया गया है।
(i) अपनी बोलने की शक्ति बढ़ानी चाहिए। अच्छे शब्दों का चुनाव करना चाहिए। घटिया या द्विअर्थी शब्दों का प्रयोग नहीं करना चाहिए।
(ii) इसी प्रकार आपके वाक्य जटिल न होकर सरल और सुबोध होने चाहिए तथा आपके बोलचाल के तरीके में सौम्यता होनी चाहिए।
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प्रश्न 2.
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उस पर आधारित दिए गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर लिखिए (7)
गीता के इस उपदेश की लोग प्रायः चर्चा करते हैं कि कर्म करें, फल की इच्छा न करें। यह कहना तो सरल है पर पालन करना उतना सरल नहीं। कर्म के मार्ग पर आनंदपूर्वक चलता हुआ उत्साही मनुष्य यदि अंतिम फल तक न भी पहुँचे, तो भी उसकी दशा कर्म न करने वाले की अपेक्षा अधिकतर अवस्थाओं में अच्छी रहेगी, क्योंकि एक तो कर्म करते हुए उसका जो जीवन बीता, वह संतोष या आनंद में बीता, उसके उपरांत फल की अप्राप्ति पर भी उसे यह पछतावा न रहा कि मैंने प्रयत्न नहीं किया। फल पहले से कोई बना-बनाया पदार्थ नहीं होता। अनुकूल प्रयत्न कर्म के अनुसार, उसके एक-एक अंग की योजना होती है। किसी मनुष्य के घर का कोई प्राणी बीमार है। वह वैद्यों के यहाँ से तब तक औषधि ला-लाकर रोगी को देता जाता है, जब तक उसके चित्त में संतोष रहता है, प्रत्येक नए उपचार के साथ जो आनंद का उन्मेष होता रहता है, यह उसे कदापि प्राप्त न होता यदि वह रोता हुआ बैठा रहता। प्रयत्न की अवस्था में उसके जीवन का जितना अंश संतोष, आशा और उत्साह में बीता, अप्रयत्न की दशा में उतना ही अंश केवल शोक और दुःख में कटता। इसके अतिरिक्त रोगी के न अच्छे होने की दशा में भी वह आत्मग्लानि के उस कठोर दुःख से बचा रहेगा, जो उसे जीवनभर यह सोच-सोचकर होता कि मैंने पूरा प्रयत्न नहीं किया। कर्म में आनंद अनुभव करने वालों का नाम ही कर्मण्य है। धर्म और उदारता के उच्च कर्मों के विधान में ही एक ऐसा दिव्य आनंद भरा रहता है कि कर्ता को वे कर्म ही फलस्वरूप लगते हैं। अत्याचार का दमन और शमन करते हुए कर्म करने से चित्त में जो तुष्टि होती है, वही लोकोपकारी कर्मवीर का सच्चा सुख है।
(क) कर्मवीर का सुख किसे माना गया है? (1)
(i) अत्याचार का दमन
(ii) कर्म करते रहना
(iii) कर्म करने से प्राप्त संतोष
(iv) फल के प्रति तिरस्कार भावना
उत्तर:
(iii) कर्म करने से प्राप्त संतोष
कर्मवीर का सुख कर्म करने से प्राप्त संतोष को माना गया है। व्यक्ति का कर्म करते हुए उसका जो जीवन बीता वह संतोष या आनंद में बीता, उसके उपरांत फल की अप्राप्ति पर भी उसे यह पछतावा न रहा कि मैंने प्रयत्न नहीं किया।
(ख) ‘कर्म में आनंद अनुभव करने वालों का नाम ही कर्मण्य है पंक्ति के माध्यम से लेखक मनुष्य को किसके लिए प्रेरित कर रहे हैं? (1)
(i) कर्म करने हेतु
(ii) फल की इच्छा करने हेतु
(iii) अकर्मण्य बने रहने हेतु
(iv) प्रतीक्षा करने हेतु
उत्तर:
(i) कर्म करने हेतु
‘कर्म में आनंद अनुभव करने वालों का नाम ही कर्मण्य है’ पंक्ति के माध्यम से लेखक मनुष्य को कर्म करने हेतु प्रेरित कर रहे हैं धर्म और उदारता के उच्च कर्मों के विधान में ही एक ऐसा दिव्य आनंद भरा रहता है कि कर्ता को वे कर्म ही फलस्वरूप लगते हैं।
(ग) कथन: प्रयत्न न करने वाले को मानसिक शांति और संतोष की प्राप्ति नहीं होती। (1)
कारण: कर्म न करने से मनुष्य शोक और दुःख में फँसा रहता है।
(i) कथन सही है, लेकिन कारण गलत है।
(ii) कथन और कारण दोनों सही हैं।
(iii) कथन गलत है, लेकिन कारण सही है।
(iv) कथन और कारण दोनों गलत हैं।
उत्तर:
(ii) कथन और कारण दोनों सही हैं।
गद्यांश के अनुसार, प्रयत्न न करने पर उसे जीवनभर आत्मग्लानि का सामना करना पड़ता है, जिससे उसे मानसिक शांति और संतोष की प्राप्ति नहीं होती और कर्म न करने से मनुष्य शोक और दुःख में फँसा रहता है।
(घ) कर्म करने वाले को फल न मिलने पर भी पछतावा क्यों नहीं होता? (2)
उत्तर:
कर्म करने वाले को फल न मिलने पर भी पछतावा नहीं होता, क्योंकि वह अपने द्वारा किए गए कर्म से संतुष्ट होता है। गीता के इस उपदेश की लोग प्रायः चर्चा करते हैं कि कर्म करें, फल की इच्छा न करें। यह कहना तो सरल है पर पालन करना उतना सरल नहीं होता। कर्म के मार्ग पर आनंदपूर्वक चलता हुआ उत्साही मनुष्य यदि अंतिम फल तक न भी पहुँचे तो भी उसकी दशा कर्म न करने वाले की अपेक्षा अधिकतर अवस्थाओं में अच्छी रहेगी।
(ङ) घर के बीमार सदस्य का उदाहरण किस संदर्भ में दिया गया है? (2)
उत्तर:
घर के बीमार सदस्य का उदाहरण सेवा के संतोष भाव को प्रदर्शित करने के लिए दिया गया है। किसी मनुष्य के घर का कोई प्राणी बीमार है, तो वह वैद्यों के यहाँ से तब तक औषधि ला लाकर रोगी को देता जाता है, जब तक उसके चित्त में संतोष रहता है। साथ ही प्रत्येक नए उपचार के साथ जो आनंद का उंमेष होता रहता है, यह उसे कदापि प्राप्त न होता, यदि वह रोता हुआ बैठा रहता।
खंड ‘ख’ (व्यावहारिक व्याकरण) (26 अंक)
व्याकरण के लिए निर्धारित विषयों पर अतिलघूत्तरात्मक व लघूत्तरात्मक 20 प्रश्न दिए गए हैं, जिनमें से केवल 16 प्रश्नों (1 × 16 = 16) के उत्तर देने हैं।
प्रश्न 3.
निर्देशानुसार ‘पदबंध’ पर आधारित पाँच प्रश्नों में से किन्हीं चार प्रश्नों के उत्तर दीजिए। (1 × 4 = 4)
(क) ‘तताँरा नामक एक युवक को वामीरो से प्रेम हो गया।’ रेखांकित पदबंध का भेद बताइए। (1)
(ख) ‘तीसरी कसम’ फिल्म का निर्माण शैलेंद्र द्वारा किया गया था। (क्रिया पदबंध को छाँटिए।) (1)
(ग) पक्षी सायंकालीन चहचहाहट कर रहे थे।’ (क्रिया पदबंध छाँटिए।) (1)
(घ) ‘टोपी और इफ़्फ़न की दादी अलग-अलग मजहब और जाति के थे, पर एक अटूट रिश्ते से बँधे थे।’ (रेखांकित पदबंध का भेद लिखिए।) (1)
(ङ) ‘मैं चुपचाप वहाँ से खिसक लेता।’ (क्रिया-विशेषण पदबंध छाँटिए।) (1)
उत्तर:
(क) रेखांकित पदबंध ‘तताँरा’ में संज्ञा पदबंध है।
(ख) प्रस्तुत वाक्य में ‘किया गया था’ में क्रिया पदबंध है।
(ग) ‘चहचहाहट कर रहे थे’ में क्रिया पदबंध है।
(घ) रेखांकित वाक्यांश टोपी और इफ्फन की दादी में संज्ञा पदबंध है।
(ङ) ‘चुपचाप’ क्रिया-विशेषण पदबंध है।
प्रश्न 4.
निर्देशानुसार ‘रचना के आधार पर वाक्य रूपांतरण पर आधारित पाँच प्रश्नों में से किन्हीं चार प्रश्नों के उत्तर दीजिए (1 × 4 = 4)
(क) जो उपदेश भाई साहब देते थे, वे मुझे बहुत बुरे लगते थे। (रचना की दृष्टि से वाक्य भेद लिखिए) (1)
(ख) स्त्रियाँ भी जुलूस में शामिल होने के लिए निकल पड़ी थीं। (रचना की दृष्टि से वाक्य भेद लिखिए।) (1)
(ग) तताँरा के पास एक बहुत चमकीली तलवार थी। (मिश्रित वाक्य में बदलिए।) (1)
(घ) ‘माँ के दूसरा अंडा बचाने के प्रयास में अंडा गिर गया।’ प्रस्तुत वाक्य को मिश्रित वाक्य में रूपांतरित कीजिए। (1)
(ङ) सुभाष बाबू को पकड़कर जेल भेज दिया। प्रस्तुत वाक्य को संयुक्त वाक्य में रूपांतरित कीजिए। (1)
उत्तर:
(क) प्रस्तुत वाक्य रचना की दृष्टि से मिश्रित वाक्य है।
(ख) प्रस्तुत वाक्य रचना की दृष्टि से सरल वाक्य है।
(ग) जो तलवार तताँरा के पास थी, वह बहुत चमकीली थी।
(घ) जैसे ही माँ दूसरे अंडे को बचाने का प्रयास करने लगी, वैसे ही माँ से वह अंडा भी गिर गया।
(ङ) सुभाष बाबू को पकड़ा और जेल में भेज दिया।
प्रश्न 5.
निर्देशानुसार ‘समास’ पर आधारित पाँच प्रश्नों में से किन्हीं चार प्रश्नों के उत्तर दीजिए। (1 × 4 = 4)
(क) ‘अध्यात्म ज्ञान’ पद का विग्रह कीजिए और भेद भी लिखिए। (1)
(ख) ‘कड़ी मेहनत’ किस समास का उदाहरण है और कैसे? (1)
(ग) कथा की वस्तु विग्रह का समस्त पद बनाकर भेद का नाम लिखिए। (1)
(घ) बहुव्रीहि समास का एक उदाहरण दीजिए। (1)
(ङ) ‘जो वजीर में आजम है उसकी सलाह के बिना, भला कौन-सा काम मुमकिन हो पाता? रेखांकित पदों की जगह उपयुक्त समस्त पद लिखिए। (1)
उत्तर:
(क) विग्रह-‘अध्यात्म का ज्ञान’ होगा तथा इसका भेद तत्पुरुष समास है।
(ख) कड़ी मेहनत ‘कर्मधारय समास’ का उदाहरण है। यहाँ ‘कड़ी’ विशेषण हैं, जो ‘मेहनत’ (विशेष्य) की विशेषता बता रहा है।
(ग) ‘कथा की वस्तु’ विग्रह का समस्त पद ‘कथा वस्तु’ होगा तथा यह तत्पुरुष समास है।
(घ) निशाचर-निशा में विचरण करने वाला अर्थात् राक्षस।
(ङ) रेखांकित पद के लिए उपयुक्त समस्त पद ‘वजीर-ए-आज़म’ है।
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प्रश्न 6.
निर्देशानुसार ‘मुहावरे’ पर आधारित पाँच प्रश्नों में से किन्हीं चार प्रश्नों के उत्तर दीजिए। (1 × 4 = 4)
(क) ‘गणित के ऐसे-ऐसे कठिन सवाल होते थे कि उन्हें हल करते-करते दाँतों पसीना आ जाता था।’ इस वाक्य में से मुहावरा छाँटकर उसका वाक्य में प्रयोग कीजिए। (1)
(ख) ‘चेहरा मुरझा जाना’ मुहावरे का वाक्य में इस प्रकार प्रयोग कीजिए कि अर्थ स्पष्ट हो जाए। (1)
(ग) बहुत अधिक परिश्रम करना’ अर्थ के लिए उचित मुहावरा लिखिए। (1)
(घ) सिर पर भूत सवार होना’ मुहावरे का प्रयोग अपने वाक्य में कीजिए। (1)
(ङ) रिक्त स्थान की पूर्ति उचित मुहावरे द्वारा कीजिए (1)
जैसे ही तताँरा ने क्रोध में अपनी तलवार निकाली, सभा में एक पल के लिए __________।
उत्तर:
(क) मुहावरा दाँतों पसीना आ जाना।
वाक्य प्रयोग पहाड़ी रास्ते पर साइकिल चलाते चलाते दाँतों पसीना आ गया।
(ख) मनपसंद खिलौना न मिलने पर बालक का चेहरा मुरझा गया।
(ग) ‘बहुत अधिक परिश्रम करना’ अर्थ के लिए उचित मुहावरा है- जी तोड़ मेहनत करना।
(घ) गर्मियों की छुट्टियों में पतंग उड़ाने का भूत बच्चों के सिर पर सवार हो जाता है।
(ङ) सन्नाटा छा गया।
खंड ‘ग’ (पाठ्यपुस्तक एवं पूरक पाठ्यपुस्तक) (28 अंक)
इस खंड में पाठ्यपुस्तक एवं पूरक पाठ्यपुस्तक से प्रश्न पूछे गए हैं, जिनके निर्धारित अंक प्रश्न के सामने अंकित हैं। (1 × 5 = 5)
प्रश्न 7.
निम्नलिखित पठित गद्यांश पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प: चुनकर लिखिए ग्वालियर से मुंबई की दूरी ने संसार का काफी कुछ बदल दिया है। वर्सोवा में जहाँ आज मेरा घर है, पहले यहाँ दूर तक जंगल था। पेड़ थे, परिंदे थे और दूसरे जानवर थे। अब यहाँ समंदर के किनारे लंबी-चौड़ी बस्ती बन गई है। इस बस्ती ने न जाने कितने परिंदों-चरिंदों से उनका घर छीन लिया है। इनमें से कुछ शहर छोड़कर चले गए हैं। जो नहीं जा सके हैं, उन्होंने यहाँ-वहाँ डेरा डाल लिया है। इनमें से दो कबूतरों ने मेरे फ्लैट के एक मचान में घोंसला बना लिया है।
(क) ग्वालियर से मुंबई की दूरी ने संसार को कैसे बदल दिया है? (1)
(i) बस्तियाँ बसाकर
(ii) पशु-पक्षियों को रहने की जगह देकर
(iii) प्रकृति से संतुलन बनाकर
(iv) जीवन-शैली को सार्थक बनाकर
उत्तर:
(i) बस्तियाँ बसाकर
ग्वालियर से मुंबई की दूरी ने संसार को बस्तियाँ बसाकर बदल दिया है। जहाँ पहले दूर-दूर तक जंगल थे, पेड़-पौधे, पशु-पक्षियों का वास था, वहाँ पर अब बस्तियाँ बसने लगी हैं। इन बस्तियों ने प्राणियों से उनके घर छीन लिए हैं।
(ख) लेखक का घर किस क्षेत्र में है? (1)
(i) ग्वालियर
(ii) दिल्ली
(iii) जंगल
(iv) मुंबई
उत्तर:
(iv) मुंबई
लेखक का घर पहले ग्वालियर में था, लेकिन अब मुंबई के वर्सोवा में है।
(ग) गद्यांश के अनुसार ‘डेरा डालने से क्या अभिप्राय है? (1)
(i) अस्थायी घरों का निर्माण
(ii) एक जगह से दूसरी जगह जाना
(iii) प्रकृति की दया पर पलना
(iv) अस्थिर रहना
उत्तर:
(i) अस्थायी घरों का निर्माण
गद्यांश के अनुसार ‘डेरा डालने’ से अभिप्राय अस्थायी घरों का निर्माण है। शहरों के विस्तार ने पशु-पक्षियों के वास्तविक घर को समाप्त कर दिया है। पेड़-पौधों को काटकर बस्तियों का निर्माण हुआ है। पहले जहाँ दूर तक जंगल थे, परिंदे चहचहाते थे, वातावरण में आकर्षण था, वहीं अब परिंदे बेघर हो गए हैं।
(घ) लेखक के घर पर किसने डेरा डाल लिया था? (1)
(i) बिल्डरों ने
(ii) कबूतरों ने
(iii) चिड़ियों ने
(iv) सरकारी अधिकारियों ने
उत्तर:
(ii) कबूतरों ने
लेखक के घर पर कबूतरों ने डेरा डाल लिया था। लेखक के मकान के रोशनदान में कबूतर के एक जोड़े ने घोंसला बना लिया था।
(ड) कथन (A): कुछ परिंदे शहर छोड़कर चले गए। (1)
कारण (R): इस बस्ती ने न जाने कितने परिंदों चरिंदों से उनका घर छीन लिया है।
कूट
(i) कथन (A) तथा कारण (R) दोनों गलत हैं।
(ii) कथन (A) सही है, किंतु कारण (R) गलत है।
(iii) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या करता है।
(iv) कथन (A) गलत है, किंतु कारण (R) सही है।
उत्तर:
(iii) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या करता है।
गद्यांश के अनुसार, कुछ परिंदे शहर छोड़कर चले गए, क्योंकि बस्तियों के निर्माण से बहुत से परिंदे बेघर हो गए, जिस कारण कई परिंदों ने शहर छोड़ दिया तथा घर की खोज में दूसरे शहर चले गए और जो नहीं गए, उन्होंने यहाँ वहाँ डेरा डाल लिया।
प्रश्न 8.
गद्य खंड पर आधारित निम्नलिखित चार प्रश्नों में से किन्हीं तीन प्रश्नों के उत्तर लगभग 25-30 शब्दों में दीजिए (2 × 3 = 6)
(क) ‘तीसरी कसम’ फिल्म को लेखक ने अन्य फिल्मों से भिन्न क्यों कहा? (2)
उत्तर:
‘तीसरी कसम’ फिल्म को लेखक ने अन्य फिल्मों से भिन्न इसलिए कहा, क्योंकि इस फिल्म में ऐसा कुछ नहीं जो सामान्य फिल्मों में होता है। यह शुद्ध रूप से एक साहित्यिक रचना पर आधारित फिल्म थी, जिसमें करुणा को स्थान दिया गया था। फिल्म के वितरक उसके साहित्यिक महत्त्व और गौरव को समझ नहीं सकते थे। इसमें साहित्यिक और कलात्मक पक्ष पर पूरा-पूरा ध्यान रखा गया था। इस फिल्म के भाव किसी कविता की तरह गहरे और सूक्ष्म थे, इसलिए लेखक ने इस फिल्म को अन्य फिल्मों से भिन्न कहा है।
(ख) मनुष्य ने बुद्धि के बल पर आशातीत उन्नति की है, किंतु उन्नति के साथ-साथ वह अवनति की ओर भी बढ़ गया है कैसे? ‘अब कहाँ दूसरों के दुःख से दुःखी होने वाले’ पाठ के आधार पर उत्तर दीजिए। (2)
उत्तर:
‘अब कहाँ दूसरे के दुःख से दुःखी होने वाले’ पाठ के आधार पर मनुष्य ने बुद्धि के बल पर बड़ी-बड़ी दीवारें खड़ी कर दी हैं। परिवार के समान दिखाई देने वाले संसार को टुकड़ों में बाँट दिया है और विश्व को टुकड़ों में बाँटकर वह स्वयं को विजयी समझ रहा है, जबकि यही उसकी सबसे बड़ी हार है क्योंकि जुड़े होने पर सभी एक दूसरे की परवाह करते हैं, परंतु अलग होने पर सभी अपने-अपने लिए सोचते हैं। यह सोच सबसे अधिक दुःखदायी होती है। प्रस्तुत पाठ में इस तथ्य को स्पष्ट किया जा सकता है कि आज के युग में ऐसे लोग बहुत कम हैं, जो दूसरों के दुःख से दुःखी होते हैं।
(ग) छोटे भाई के मन में बड़े भाई साहब के प्रति श्रद्धा क्यों उत्पन्न हुई थी? ‘बड़े भाई साहब’ पाठ के आधार पर उत्तर दीजिए। (2)
उत्तर:
छोटे भाई को खेलना बहुत पसंद था। जब बहुत खेलने के बाद भी उसने अपनी कक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त किया, तो उसे स्वयं पर अभिमान हो गया। अब उसके मन से बड़े भाई का डर भी जाता रहा। एक दिन पतंग उड़ाते समय उसे बड़े भाई ने पकड़ लिया। उन्होंने उसे समझाया और अगली कक्षा की पढ़ाई की कठिनाइयों का अहसास भी दिलाया। उन्होंने बताया कि वह कैसे उसके भविष्य के कारण अपने बचपन का गला घोंट रहे हैं। उनकी बातें सुनकर छोटे भाई की आँखें खुल गईं। उसे समझ में आ गया कि उसके अव्वल आने के पीछे बड़े भाई की ही प्रेरणा रही है। इससे उसके मन में बड़े भाई के प्रति श्रद्धा उत्पन्न हो गई।
(घ) ‘चाय पीने के बाद लेखक ने स्वयं में क्या परिवर्तन पाया?’ ‘पतझर में टूटी पत्तियों पाठ के आधार पर बताइए। (2)
उत्तर:
‘पतझर में टूटी पत्तियाँ’ पाठ के ‘झेन की देन’ के अनुसार चाय पीने के बाद लेखक को यह महसूस हुआ जैसे कि उसके दिमाग की गति मंद हो गई हो तथा उसका दिमाग धीरे-धीरे चलना बंद हो गया हो, उसे सन्नाटे की आवाजें सुनाई देने लगी। लेखक को ऐसा लगा मानो वह अनंतकाल से जी रहा है। वह भूत और भविष्य की चिंता न करके वर्तमान में जी रहा है। उसे ये पल सुखद लगने लगे।
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प्रश्न 9.
निम्नलिखित पठित काव्यांश को पढ़कर दिए गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त विकल्पों का चयन कीजिए (1 × 5 = 5)
कर चले हम फिदा जान-ओ-तन साथियों
अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों
साँस थमती गई, नब्ज़ जमती गई
फिर भी बढ़ते कदम को न रुकने दिया
कट गए सर हमारे तो कुछ गम नहीं
सर हिमालय का हमने न झुकने दिया
मरते-मरते रहा बाँकपन साथियों
अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों
(क) मरते-मरते रहा बाँकपन साथियों से तात्पर्य है (1)
(i) अंतिम साँस तक साहस से शत्रुओं का सामना किया
(ii) मरते-मरते मार्ग से विचलित हो गए
(iii) शरीर में बाँकपन आ गया
(iv) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(i) अंतिम साँस तक साहस से शत्रुओं का सामना किया
‘मरते-मरते रहा बाँकपन साथियों’ से तात्पर्य यह है कि मरते समय तक भी हमारे मन में बलिदान और संघर्ष का जोश बना रहा। अंतिम समय तक भी हमने हिम्मत और साहस से शत्रुओं का सामना किया।
(ख) सैनिकों ने साँसें रुकने और नब्ज़ जमने पर भी क्या नहीं रोका? (1)
(i) गीत गाना
(ii) अपने कदम आगे बढ़ाना
(iii) दुश्मनों को खोजना
(iv) युद्ध करना
उत्तर:
(ii) अपने कदम आगे बढ़ाना
सैनिकों ने साँसे रुकने और नब्ज़ जमने पर भी अपने कदम को आगे बढ़ने से नहीं रोका। सैनिकों ने स्वयं को मिटाकर भी हिमालय का मस्तक झुकने न दिया।
(ग) युद्ध भूमि में सैनिकों का सिर कट जाने पर भी उन्हें किस बात का गर्व है? (1)
(i) हिमालय पर्वत के सिर को झुकने नहीं दिया
(ii) देश के मान-सम्मान को ठेस नहीं लगने दी
(iii) मरते समय भी मन में बलिदान व संघर्ष का जोश बना रहा
(iv) ये सभी
उत्तर:
(iv) ये सभी
युद्ध भूमि में सैनिकों के सिर कटने का गम भारतीय सैनिकों को नहीं है, क्योंकि वह अपनी भारत माता की रक्षा एवं सेवा के लिए सदैव तत्पर रहते हैं। वह अपने कर्त्तव्यों का पालन ईमानदारी के साथ करते हैं। उन्होंने हिमालय का सिर नहीं झुकने दिया, देश के मान-सम्मान को ठेस नहीं लगने दी व मरते समय में भी उनके मन में बलिदान व संघर्ष का जोश बना रहा। अपने प्राणों को देश के प्रति समर्पित करके वह गौरवान्वित महसूस करते हैं। इसलिए वह देश की रक्षा के लिए हँसते-हँसते बलिदान देने को तैयार रहते हैं।
(घ) मरते समय सैनिकों के मन में क्या बना रहा? (1)
(i) भय और आतंक का भाव
(ii) बलिदान और संघर्ष का जोश
(iii) राष्ट्र के गुलाम होने का विचार
(iv) अन्य साथियों से बिछड़ने का दुःख
उत्तर:
(ii) बलिदान और संघर्ष का जोश।
मरते समय भी सैनिकों के मन में बलिदान और संघर्ष का जोश बना रहा अर्थात् अंतिम समय तक भी सैनिकों ने हिम्मत और साहस से शत्रुओं का सामना किया।
(ङ) कथन (A): सैनिक युद्ध भूमि में देश की रक्षा करते हुए अपने प्राण न्योछावर कर देते हैं। (1)
कारण (R): सैनिकों के लिए देश की रक्षा करना सबसे बड़ा कर्त्तव्य है।
कूट
(i) कथन (A) गलत है, किंतु कारण (R) सही है।
(ii) कथन (A) और कारण (R) दोनों गलत हैं।
(iii) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या करता है।
(iv) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही है, किंतु कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या नहीं करता है।
उत्तर:
(iii) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या करता है।
पद्यांश के अनुसार सैनिक युद्ध भूमि में देश की रक्षा करते हुए अपने प्राण न्योछावर कर देते हैं, क्योंकि सैनिकों के लिए देश की रक्षा करना सर्वोच्च कर्त्तव्य है, इसलिए वे युद्ध भूमि में अपने प्राणों की परवाह किए बिना इसे निभाते हैं। वे देश की सुरक्षा के लिए अपने जीवन का बलिदान कर देते हैं।
प्रश्न 10.
काव्य खंड पर आधारित निम्नलिखित चार प्रश्नों में से किन्हीं तीन प्रश्नों के उत्तर लगभग 25-30 शब्दों में दीजिए (2 × 3 = 6)
(क) ‘मनुष्यता’ पाठ में कवि ने किन-किन महान दानवीर राजाओं का उल्लेख कर मनुष्यता शब्द के वास्तविक अर्थ को परिभाषित किया है? विस्तार से लिखिए। (2)
उत्तर:
‘मनुष्यता’ पाठ में कवि ने परोपकार, दया तथा उदारता जैसे गुणों के संदर्भ में दधीचि कर्ण इत्यादि महान व्यक्तियों की चर्चा कविता में की है। दधीचि ने देवताओं की रक्षा के लिए अपनी हड्डियों को दान कर दिया, जिससे इंद्र के अस्त्र ‘वज्र’ का निर्माण हुआ तथा असुरों की पराजय हुई। दधीचि का परोपकार मनुष्यता के इतिहास में प्रशंसित है। दानवीर कर्ण ने अपने वचन को पूरा करने के लिए, अपने शरीर पर धारण कवच-कुण्डल का दान कर दिया। राजा शिवि ने पक्षी के प्राणों की रक्षा हेतु अपने शरीर का मांस काटकर दे दिया। रंतिदेव ने भूखे अतिथियों के लिए अपने हिस्से का भोजन ग्रहण करने हेतु दे दिया। इस प्रकार कहा जा सकता है कि ये उदाहरण हमें त्याग, बलिदान व परोपकार का संदेश देते हैं।
(ख) ‘अब तो उसके ऊपर बैठकर
चिड़ियाँ ही अकसर करती हैं गपशप’
प्रस्तुत पंक्तियों के आधार पर बताइए कि वर्तमान समय में तोप की क्या स्थिति है तथा वह हमें क्या सीख देती है? (2)
उत्तर:
एक समय था, जब तोप अत्यंत शक्तिशाली और सामर्थ्यवान थी, परंतु अब अकसर छोटे बच्चे उस पर बैठकर उसकी सवारी करते हैं, चिड़ियाँ उसके ऊपर बैठकर आपस में गपशप करती हैं, गौरैया तो शैतानी में इसके मुँह के भीतर ही घुस जाती हैं, जो यह दर्शाता है कि अब उन्हें कभी भयानक मानी जाने वाली इस तोप से डर नहीं लगता है। एक समय बेशक यह जबरदस्त शक्तिशाली वस्तु रही थी, परंतु वर्तमान समय में उसका मुँह बंद हो गया है। अतः यह स्पष्ट है कि समय के साथ तोप की स्थिति में बदलाव हो गया है और एक समय शक्ति की परिचायक तोप आज मात्र संग्रहालयों में प्रदर्शनी व मनोरंजन की वस्तु बनकर रह गई है।
(ग) कवयित्री मीरा ने श्रीकृष्ण को उनकी क्षमताओं की याद क्यों दिलाई? (2)
उत्तर:
कवयित्री मीरा श्री कृष्ण की अनन्य भक्त और उपासक थीं। उन्होंने अपने प्रभु की दयालु प्रकृति की कहानियाँ सुनी हुई थीं। मीरा जानती थी कि उनके प्रभु के लिए उनकी पीड़ा व उनका दर्द मिटाना कठिन कार्य नहीं है, क्योंकि उन्होंने पहले भी इस तरह के अनेक कार्य किए हैं। अतः श्रीकृष्ण उनकी पुकार को शीघ्र सुने, इसलिए मीरा ने श्रीकृष्ण को उनकी क्षमताएँ याद दिलाई।
(घ) ईश्वर कण-कण में व्याप्त है, परंतु हम ईश्वर को क्यों नहीं देख पाते हैं? किन्हीं दो बिन्दुओं का उल्लेख कीजिए। (2)
उत्तर:
ईश्वर कण-कण में व्याप्त है, परंतु हम ईश्वर को नहीं देख पाते हैं। इसे निम्नलिखित दो बिंदुओं से समझ सकते हैं
(i) हमारे चारों ओर ईश्वरीय चेतना के अतिरिक्त कुछ भी नहीं है, परंतु यह सब हम अपनी भौतिक आँखों से नहीं देख सकते। जब तक ईश्वर की कृपा से हमें दिव्य चक्षु (आँखें) प्राप्त नहीं हो जाते, तब तक हम कण-कण में ईश्वर के वास को नहीं देख सकते हैं और उनका अनुभव भी नहीं कर सकते हैं।
(ii) हमारा अज्ञान, अविश्वास, अहंकार हमें ईश्वर तक पहुँचाने नहीं देता तथा हम सांसारिक आडंबरों में फँसकर रह जाते हैं। और ईश्वर के दर्शन नहीं कर पाते हैं।
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प्रश्न 11.
पूरक पाठ्यपुस्तक ‘संचयन’ पर आधारित निम्नलिखित तीन प्रश्नों में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 40-50 शब्दों में दीजिए (3 × 2 = 6)
(क) “भाइयों के परिवार के प्रति मोहभंग की शुरुआत इन्हीं क्षणों में हुई थी।” ‘हरिहर’ काका कहानी के आधार पर स्पष्ट कीजिए कि यह मोहभंग किन घटनाओं का परिणाम था और इसका हरिहर काका पर क्या प्रभाव पड़ा? (3)
उत्तर:
हरिहर काका के लिए उनके भाइयों का परिवार ही सब कुछ था, क्योंकि वे निःसंतान थे और उनकी पत्नी भी जीवित नहीं थी। वे अपने भाइयों के सहारे ही जीवन व्यतीत कर रहे थे। भाइयों के प्रति प्रेम एवं लगाव का जल्दी ही भ्रम टूटने लगा और उनका मोहभंग होना शुरू हो गया। ज़मीन के लालच में उनके भाइयों ने उनसे मारपीट तक की। इससे पहले मठ के महंत ने भी उनके साथ बुरा व्यवहार किया था। इन घटनाओं के कारण हरिहर काका को बहुत सदमा पहुँचा। उन्होंने अपने भाइयों एवं निकट संबंधियों से इसकी उम्मीद नहीं की थी। सदमे के कारण ही हरिहर काका बिल्कुल मौन हो गए।
(ख) टोपी दो साल लगातार फेल हो गया। पिछली कक्षा वाले बच्चों के साथ बैठना आसान काम नहीं था, उस पर अध्यापकों की बेरुखी ‘टोपी शुक्ला कहानी के आधार पर बताइए कि एक अध्यापक द्वारा टोपी जैसे विद्यार्थियों के साथ किस प्रकार का व्यवहार करना उचित है? (3)
उत्तर:
‘टोपी शुक्ला’ कहानी में टोपी दो साल लगातार फेल हो गया। फेल होने में उसका कोई दोष नहीं था। अपने से छोटे बच्चों के साथ कक्षा में बैठना बहुत कठिन काम था, उस पर अध्यापक द्वारा यह कहकर व्यंग्य कसना कि क्या बलभद्र की तरह इसी दर्जे में टिके रहना चाहते हो, तीन बरस से यही किताब पढ़ रहे हो, तुम्हें तो सारे जवाब याद हो गए होंगे, इन लड़कों की अगले साल हाईस्कूल की परीक्षा है आदि टिप्पणियाँ टोपी के लिए बहुत पीड़ादायक थीं और उसके मनोबल को तोड़ने का कार्य करती थीं। शिक्षकों द्वारा बालकों के साथ इस प्रकार का व्यवहार नहीं किया जाना चाहिए। इस प्रकार के व्यवहार से वे कुंठाग्रस्त एवं अवसाद के शिकार हो सकते हैं।
(ग) सपनों के-से दिन’ पाठ में लेखक ने बताया कि उस समय बच्चों को शारीरिक दण्ड देना आम बात थी। वर्तमान समय में विद्यालयों की स्थिति में क्या-क्या परिवर्तन आए हैं तथा वे किस प्रकार विद्यार्थी की शिक्षा में सहायक बन रहे हैं? पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए। (3)
उत्तर:
पाठ में बताया गया है कि उस समय बच्चों को शारीरिक दण्ड देना आम बात थी। छात्र-शिक्षक संबंध में भी डर का माहौल था। सीखने-सिखाने के तरीके पारंपरिक थे, जिसमें रटने पर जोर दिया जाता था, किंतु वर्तमान समय में विद्यालयों की स्थिति में कई परिवर्तन आए हैं। जीवन मूल्यों के विकास हेतु शिक्षा व्यवस्था को पूर्ण रूप से प्रयोगवादी बनाना चाहिए। इसमें शिक्षा बाल केंद्रित होती है और अनुशासन लचीला होता है। आधुनिक समय में शिक्षा सभी के लिए अनिवार्य है, परंतु अब शिक्षा प्रणाली पूरी तरह बदल चुकी है। अब सभी अभिभावक बच्चों पर उतना ही ध्यान देते हैं, जितना शिक्षक देते हैं। विद्यालय में लिखित कार्य के साथ प्रायोगिक कार्यों पर भी ज़ोर दिया जाता है। दंड के स्थान पर धैर्यपूर्वक प्रोत्साहित करने पर ज़ोर दिया जाता है। वर्तमान में शारीरिक दंड देना अपराध माना जाता है। ऐसी कोई भी टिप्पणी करने पर पाबंदी है, जो छात्रों में हीनता की भावना को जन्म दे। अतः कहा जा सकता है कि ये ही परिवर्तन विद्यार्थियों की शिक्षा में सहायक बन रहे हैं।
खंड ‘घ’ (रचनात्मक लेखन) (22 अंक)
इस खंड में रचनात्मक लेखन पर आधारित प्रश्न पूछे गए हैं, जिनके निर्धारित अंक प्रश्न के सामने अंकित हैं।
प्रश्न 12.
निम्नलिखित तीन विषयों में से किसी एक विषय पर दिए गए संकेत बिंदुओं के आधार पर लगभग 120 शब्दों में अनुच्छेद लिखिए (5)
(क) बिना विचारे जो करें, सो पाछे पछताए
संकेत बिंदु
- चंचल मानव मन
- विवेकपूर्ण कर्म से ही सफलता
- मानव विवेकशील प्राणी
उत्तर:
बिना विचारे जो करै सो पाछे पछताए
यह सर्वविदित है कि मानव का मन चंचलता से युक्त होता है। चंचलता के कारण मानव कई बार सत्य के मार्ग से विचलित हो जाता है और अनेक प्रकार की कठिनाइयों और बुराइयों में फँस जाता है। मनुष्य की इस चंचलता को नियंत्रित करने के लिए विवेक की अत्यंत आवश्यकता होती है। विवेकपूर्ण कर्म से ही सफलता प्राप्त होती है।
मानव एक विवेकशील प्राणी है। यही विवेक मनुष्य को अन्य प्राणियों से अलग और श्रेष्ठ बनाता है। विवेक ही उसे सन्मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करता है। जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में, चाहे वह व्यक्तिगत हो या सामाजिक, विवेक, विचारशील और सुमति की अत्यंत आवश्यकता होती है। बिना विचार किए गए कार्य सामान्यतः निरर्थक और हानिकारक साबित होते हैं, जिससे मनुष्य को अंततः पछताना पड़ता है। इतिहास में ऐसे अनेक उदाहरण हैं, जहाँ अविवेकपूर्ण निर्णयों के कारण महान व्यक्तियों का पतन हुआ है। रावण जैसा महाप्रतापी, महापंडित, शूरवीर और शिव भक्त राजा अपने अविवेकपूर्ण निर्णय के कारण ही सपरिवार विनाश को प्राप्त हुआ। उसने सीता का अपहरण करने से पहले सोच-समझकर निर्णय नहीं लिया, जिसका परिणाम उसे अपने साम्राज्य और जीवन की बलि देकर भुगतना पड़ा।
हमें सोच-समझकर ही कदम बढ़ाना चाहिए। विचारपूर्वक लिए गए निर्णय ही सफलता का मूलमंत्र हैं। किसी भी कार्य को करने से पहले उसके परिणामों पर विचार करना आवश्यक है। विवेकपूर्ण निर्णय से ही मनुष्य अपनी उन्नति और सफलता सुनिश्चित कर सकता है। इसलिए हमें बिना विचारे न तो बोलना चाहिए और न ही कोई ऐसा कार्य करना चाहिए, जो हमारे प्रगति के मार्ग को अवरुद्ध करता हो। सोच-समझकर, विवेकपूर्ण ढंग से ही आगे बढ़ना चाहिए, ताकि हमें अपने कार्यों पर पछताना न पड़े। विवेक और विचारशीलता के साथ किए गए कार्य ही मनुष्य को सच्ची सफलता और संतोष प्रदान कर सकते हैं।
(ख) ग्लोबल वार्मिंग (भूमंडलीय तापक्रम)-मानवता के लिए खतरा
संकेत बिंदु
- ग्लोबल वार्मिंग क्या है?
- ग्लोबल वार्मिंग के कारण
- ग्लोबल वार्मिंग के प्रभाव
- समस्या का समाधान
उत्तर:
ग्लोबल वार्मिंग (भूमंडलीय तापक्रम)-मानवता के लिए खतरा
ग्लोबल वार्मिंग, वैश्विक तापमान में वृद्धि आज की प्रमुख पर्यावरणीय समस्याओं में से एक है। यह पृथ्वी की सतह के औसत तापमान में निरंतर वृद्धि को दर्शाता है। ग्लोबल वार्मिंग द्वारा हमारी जलवायु प्रणाली में व्यापक बदलाव हो रहा है, जिससे मानवता के अस्तित्व के लिए गंभीर खतरा पैदा हो गया है। पिछले दशक में जिस समस्या ने मनुष्य का ध्यान खींचा है वह है ग्लोबल वार्मिंग। ग्लोबल वार्मिंग का सीधा सा अर्थ है- पृथ्वी के तापमान में लगातार बढ़ोतरी। हालाँकि यह समस्या विकसित देशों के कारण बढ़ी है, लेकिन पूरी पृथ्वी इससे पीड़ित है।
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ग्लोबल वार्मिंग का मूल कारण मनुष्य की बढ़ती जरूरतें और उसका स्वार्थ है। मनुष्य प्रगति की अंधाधुंध दौड़ में शामिल होकर पर्यावरण को नुकसान पहुँचा रहा है। कारखानों की स्थापना, नई बस्तियाँ बसाने और सड़कों को चौड़ा करने के लिए जंगलों को अंधाधुंध काटा गया है। इससे पेड़ों व पौधों की कमी से ऑक्सीजन, वर्षा व हरियाली की कमी के कारण पर्यावरण को दो तरह से नुकसान पहुँचा है। पहला इससे वैश्विक तापमान बढ़ रहा है, ग्लोबल वार्मिंग के कारण एक ओर पृथ्वी की सुरक्षात्मक ओजोन परत में छेद हो गया है और दूसरा पर्यावरण असंतुलित हो गया है। असमय बारिश, भारी बारिश, सूखा, सर्दी और गर्मी के मौसम में भारी बदलाव ग्लोबल वार्मिंग के प्रभाव हैं। उनकी देखभाल के लिए और प्रकृति के साथ छेड़छाड़ रोकने के लिए अधिक पौधे लगाए जाने चाहिए।
इस गंभीर समस्या का समाधान करने के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं। हमें जीवाश्म ईंधनों के उपयोग को कम करके नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों जैसेसौर और पवन ऊर्जा को बढ़ावा देना चाहिए। वृक्षारोपण और वनों की रक्षा के माध्यम से कार्बन डाइऑक्साइड के स्तर को नियंत्रित किया जा सकता है। ग्लोबल वार्मिंग के खतरों को समझते हुए, हमें तत्काल और प्रभावी कदम उठाने होंगे, ताकि भविष्य की पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित और स्वस्थ पर्यावरण सुनिश्चित किया जा सके। इसके अतिरिक्त जनसंख्या वृद्धि पर भी नियंत्रण करना होगा। आइए, इसे आज ही शुरू करें, क्योंकि कल तक बहुत देर हो जाएगी।
(ग) महिला सशक्तीकरण
संकेत बिंदु
- सशक्तीकरण क्या है?
- महिलाओं के लिए सशक्तीकरण क्यों आवश्यक है?
- महिला सशक्तीकरण का प्रभाव
उत्तर:
महिला सशक्तीकरण
महिला सशक्तीकरण एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें महिलाओं को सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और शैक्षिक क्षेत्र में समान अधिकार और अवसर प्रदान किए जाते हैं। इसका उद्देश्य महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना और उन्हें समाज में अपनी क्षमता तथा प्रतिभा को पहचानने और प्रयोग करने के लिए प्रोत्साहित करना है। महिलाओं के लिए सशक्तीकरण आवश्यक है, क्योंकि यह समाज के समग्र विकास के लिए महत्त्वपूर्ण है। समाज में महिलाओं को समान अधिकार और अवसर प्रदान करने से न केवल उनकी व्यक्तिगत उन्नति होती है, बल्कि इसका व्यापक प्रभाव समाज और देश की प्रगति पर भी पड़ता है। सशक्त महिलाएँ अपने परिवार, समाज और देश के विकास में महत्त्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं।
महिला सशक्तीकरण का प्रभाव व्यापक और दूरगामी है। जब महिलाएँ शिक्षित और आत्मनिर्भर होती हैं, तो वे अपने परिवारों की आर्थिक स्थिति को सुधारने में सक्षम होती हैं। इससे बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य में भी सुधार होता है। सशक्त महिलाएँ समाज में नेतृत्व की भूमिका निभा सकती हैं और महत्त्वपूर्ण निर्णय ले सकती हैं, जिससे समाज में सकारात्मक बदलाव आते हैं। इसके अतिरिक्त महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता से देश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलती है। महिला सशक्तीकरण के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सुधार की आवश्यकता है।
सरकारी और गैर-सरकारी संगठनों द्वारा विभिन्न योजनाएँ तथा कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं; जैसे-बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, महिला सुरक्षा कानून और महिलाओं के लिए रोजगार के अवसरों का विस्तार। इन प्रयासों से महिलाओं को समाज में समान अधिकार और सम्मान प्राप्त करने में मदद मिल रही है। अतः यह कहा जा सकता है कि महिलाओं का सशक्तीकरण समाज की प्रगति और विकास के लिए अनिवार्य है। हमें सभी स्तरों पर महिलाओं के सशक्तीकरण के लिए प्रयासरत रहना चाहिए।
प्रश्न 13.
विद्यालय में सामान्य ज्ञान की मासिक पत्रिकाएँ मँगवाने के लिए प्रधानाचार्य को लगभग 100 शब्दों में पत्र लिखिए। (5)
अथवा
आपकी कक्षा में गणित की पढ़ाई न होने से कोर्स पिछड़ गया है। इस संबंध में अमित/अमिता की ओर से अपने विद्यालय के प्रधानाचार्य को गणित की अतिरिक्त कक्षाएँ आयोजित करवाने के लिए लगभग 100 शब्दों में प्रार्थना-पत्र लिखिए।
उत्तर:
परीक्षा भवन,
नई दिल्ली।
दिनांक 27 मई, 20XX
सेवा में,
प्रधानाचार्य महोदय,
केंद्रीय विद्यालय,
नई दिल्ली-32
विषय: विद्यालय में सामान्य ज्ञान की मासिक पत्रिकाएँ मँगवाने हेतु।
महोदय,
सविनय निवेदन यह है कि हमारे विद्यालय के पुस्तकालय में सामान्य ज्ञान जैसे कि ज्ञान-विज्ञान व खेल संबंधी हिंदी की मासिक पत्रिकाओं का अभाव है। यहाँ पर अन्य पुस्तकें तो आती हैं, लेकिन विद्यार्थियों के ज्ञानवर्धन हेतु सामान्य ज्ञान की पत्रिकाओं की आवश्यकता है। अतः आपसे निवेदन है कि पुस्तकालय में क्रिकेट सम्राट, सामान्य अध्ययन, प्रतियोगिता दर्पण, विज्ञान प्रगति, नंदन आदि पत्रिकाएँ नियमित रूप से मँगवाई जाएँ, जिससे कि अधिक-से-अधिक छात्र पुस्तकीय ज्ञान के साथ-साथ सामान्य ज्ञान भी अर्जित कर सकें। आशा है कि आप हमारी आवश्यकताओं को समझकर इसे जल्द से जल्द उपलब्ध कराएँगे।
धन्यवाद।
आपका आज्ञाकारी शिष्य
नाम : क.ख.ग.
कक्षा : दसवीं ‘ब’
अथवा
परीक्षा भवन,
नई दिल्ली।
दिनांक 20 दिसम्बर, 20XX
सेवा में,
श्रीमान प्रधानाचार्य जी,
राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय,
नजफगढ़,
नई दिल्ली।
विषय : गणित विषय की अतिरिक्त कक्षा हेतु।
महोदय,
सविनय निवेदन यह है कि मैं इस विद्यालय की कक्षा 10वीं का प्रतिनिधि हूँ। महोदय, हमारी अर्द्धवार्षिक परीक्षा बहुत ही नज़दीक है, लेकिन हमारा गणित का पाठ्यक्रम अभी तक पूरा नहीं हुआ है। इसका कारण यह है कि गणित के अध्यापक का स्थानांतरण किसी अन्य विद्यालय में हो गया है। इधर दिसंबर माह का दूसरा सप्ताह भी बीत चुका है। ऐसे में बिना अतिरिक्त कक्षाएँ आयोजित करवाए पाठ्यक्रम समय पर पूरा होना असंभव है। अत: हम छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए छुट्टी के बाद अतिरिक्त कक्षाएँ आयोजित करवाकर हमारा पाठ्यक्रम पूर्ण करवाया जा सकता है। अतः आपसे प्रार्थना है कि गणित विषय की अतिरिक्त कक्षा आयोजित करवाने की कृपा करें।
धन्यवाद।
आपका/आपकी आज्ञाकारी शिष्य/शिष्या
अमित/अमिता
कक्षा दसवीं ‘ब’
प्रश्न 14.
आप ‘महिला समिति की अध्यक्ष रचना शास्त्री हैं और समिति के सभी सदस्यों के साथ ‘नारी सुरक्षा’ के संदर्भ में एक बैठक करना चाहती हैं। इसकी सूचना लगभग 60 शब्दों में लिखिए। (4)
अथवा
पुलिस थाना, सिविल लाइंस, लुधियाना के थानाध्यक्ष की ओर से एक सूचना पत्र लगभग 60 शब्दों में लिखिए, जिसमें नगरवासियों को शहर में निरंतर बढ़ रही वाहन चोरियों के प्रति सतर्क किया गया हो।
उत्तर:
महिला विकास समिति, दिल्ली
सूचना
दिनांक 15 अप्रैल, 20XX
‘नारी सुरक्षा’ के संदर्भ में बैठक
महिला समिति की ओर से सभी महिलाओं को यह सूचित किया जाता है कि 25 मई, 20XX को दोपहर 12:30 बजे बाल विकास महिला सभागार में महिला समिति की अध्यक्ष रचना शास्त्री की अध्यक्षता में नारी के लिए होने वाले उत्थान के विषयों पर चर्चा करने हेतु बैठक होगी। आप सभी लोगों को आने के लिए आमंत्रित किया जाता है।
रचना शास्त्री
(महिला समिति अध्यक्ष)
अथवा
पुलिस थाना सिविल लाइंस, लुधियाना
सूचना
दिनांक 15 फरवरी, 20XX
वाहन चोरी के संबंध में
सभी लुधियाना नगरवासियों को सूचित किया जाता है कि वाहन चोरियाँ दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही हैं। इस पर रोक लगाने हेतु हमें कुछ नियमों का पालन करना होगा। आपको अपने वाहनों को घर में या पार्किंग में पार्क करना होगा। वाहन को सड़क पर एकांत स्थान पर खड़ा मत कीजिए और अपने वाहन को उपयोग न करने पर उन्हें सदैव लॉक करके रखें।
धन्यवाद।
जोगिंदर सिंह माखा
लुधियाना थानाध्यक्ष
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प्रश्न 15.
आप एक अच्छे चित्रकार हैं। अपने चित्रों की प्रदर्शनी के लिए एक विज्ञापन तैयार कीजिए। (3)
अथवा
सोलर पंखे बनाने वाली संस्था सूर्य-शक्ति के प्रचार-प्रसार के लिए एक आकर्षक विज्ञापन तैयार कीजिए।
उत्तर:

अथवा

प्रश्न 16.
आप अंकित गुप्ता/शालिनी गुप्ता हैं। बस में यात्रा करते समय आपका एटीएम कार्ड कहीं गिर गया है तथा बहुत खोजने पर भी नहीं मिल रहा है? बैंक प्रबंधक महोदय को इसकी जानकारी देते हुए नया कार्ड बनाने के लिए लगभग 80 शब्दों में एक ई-मेल भेजिए। (5)
अथवा
“गाँव में दो मित्र रहते थे __________ एक विनम्र, सत्य व दयालु था, तो दूसरा मतलबी और झूठा __________ पैसा कमाने शहर की ओर निकले __________ सत्य छिपाया नहीं जा सकता।” इन वाक्यों से प्रारम्भ हुई लघुकथा को 100 शब्दों में पूरा कीजिए।
उत्तर:
From : [email protected]
To : Sbibankgmail.com
CC : [email protected]
BCC : –
विषय एटीएम कार्ड गुम हो जाने पर नया कार्ड बनवाने हेतु।
महोदय,
सविनय निवेदन है कि मैं शालिनी गुप्ता आपके बैंक की खाताधारिका हूँ। कल बस में यात्रा करते समय मेरा एटीएम कार्ड कहीं गिर गया था। मैंने बहुत ढूँढने का प्रयास किया, परंतु मुझे मेरा एटीएम कार्ड नहीं मिला। मुझे डर है कि कहीं मेरे एटीएम कार्ड से कोई पैसे न निकाल ले। अतः आपसे निवेदन करती हूँ कि आप मेरे खाते का एटीएम कार्ड बंद करके मुझे नया एटीएम कार्ड बनाकर देने की कृपा करें। इसके लिए मैं सदा आपकी आभारी रहूंगी।
धन्यवाद।
भवदीया
नाम शालिनी गुप्ता
खाता नं. 3140XXXXXXXX
मोबाइल नं. 8131XXXX
दिनांक : 24 मई, 20XX
हस्ताक्षर : शालिनी गुप्ता
अथवा
लघुकथा किसी गाँव में दो मित्र रहते थे उनका नाम नेकीराम और फेकूराम था। नेकीराम बहुत ही विनम्र सत्य और दयालु व्यक्ति था, जबकि फेकूराम बहुत ही मतलबी और झूठा था। एक दिन दोनों मित्र पैसा कमाने के लिए शहर की ओर निकले। उन लोगों बहुत धन कमाया। जैसे ही वे गाँव जाने के लिए निकले, तो फेकूराम के मन में एक विचार आया कि क्यों ना हम अपना धन इस पेड़ के खोखले में छिपा दें और जब हम दोनों सुबह लौटेंगे, तो सारा धन अपने साथ ले जाएँगे। दूसरे दिन जब दोनों दोस्त धन लेने जंगल में पहुँचे तो उन्हें कुछ भी नहीं मिला।
फेकूराम, नेकीराम से कहने लगा कि तुमने मेरा पैसा चुराया है, तो नेकीराम बोला मैंने नहीं चुराया मेरे पास पैसे नहीं हैं और मेरे पैसे भी चोरी हो गए। नेकीराम के चोरी से इंकार करने पर फेकूराम उसे सरपंच के पास सजा दिलाने के लिए ले गया और बोला सरपंच यह चोर है। हमने जो धन छिपा रखा था वह सब इसने चुरा लिया है।
नेकीराम ने कहा – यह तुम कैसे कह सकते हो?
फेकूराम – मेरे पास इसका सिर्फ़ एक सबूत है। सरपंच ने पूछा- वो सबूत कौन है?
फेकूराम बोला – वो देवदूत जो उस पेड़ में रहते हैं हमें उनसे पूछना चाहिए, सब लोग पेड़ के पास पहुँचे और फेकूराम जोर से बोला- ओ इस पेड़ में रहने वाले देवदूत, कृपया बताइए, कल रात क्या हुआ था?
पेड़ से आवाज़ आई – नेकीराम कल रात यहाँ आया था और सारा धन चुराकर ले गया। ये सुनकर नेकीराम भौचक्का रह गया और बोला अरे बेवकूफ पेड़ मैं तुम्हें सबक सिखा के रहूँगा।
ये कहते हुए नेकीराम ने लकड़ी के छोटे-छोटे टुकड़े इकट्ठे करने शुरू कर दिए और पेड़ के चारों तरफ बिछा दिए और उनमें आग लगा दी। कुछ ही देर में फेकूराम के पिताजी चीखते हुए पेड़ से बाहर निकले और बोले हे भगवान! मेरी मदद करो, मैं जल रहा हूँ।
गाँव के सरपंच ने पूछा, तुमने ऐसा क्यों किया, तो फेकूराम के पिताजी बोले कि मेरे बेटे ने मुझसे छिपने के लिए कहा और कहा कि नेकीराम सारा धन चुराकर ले गया। असल में धन मेरे बेटे फेकूराम ने चुराया है। फेकूराम के हाथ-पैर थरथराने लगे। सरपंच ने फेकूराम को सज़ा दी और नेकीराम को धन लौटा दिया।
सीख सत्य की हमेशा जीत होती है। सत्य को कभी भी छिपाया नहीं जा सकता।