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CBSE Sample Papers for Class 10 Hindi Course B Set 10 with Solutions
समय : 3 घंटे
पूर्णांक : 80
सामान्य निर्देश
निम्नलिखित निर्देशों को बहुत सावधानी से पढ़िए और उनका सख्ती से अनुपालन कीजिए
- इस प्रश्न पत्र में चार खंड हैं- क, ख, ग और घ।
- इस प्रश्न पत्र में कुल 16 प्रश्न हैं। सभी प्रश्न अनिवार्य हैं।
- प्रश्न पत्र में आंतरिक विकल्प दिए गए हैं।
- प्रश्नों के उत्तर दिए गए निर्देशों का पालन करते हुए लिखिए।
खंड ‘क’ (अपठित बोध) (14 अंक)
इस खंड में अपठित गद्यांश से संबंधित तीन बहुविकल्पीय (1 × 3 = 3) और दो अतिलघूत्तरात्मक व लघूत्तरात्मक (2 × 2 = 4) प्रश्न दिए गए हैं।
प्रश्न 1.
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उस पर आधारित दिए गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर लिखिए (7)
संस्कृतियों के निर्माण में एक सीमा तक देश और जाति का योगदान रहता है। संस्कृति के मूल उपादान तो प्रायः सभी सुसंस्कृत और सभ्य देशों की एक सीमा तक समान रहते हैं, किंतु बाह्य उपादानों में अंतर अवश्य आता है। राष्ट्रीय या जातीय संस्कृति का सबसे बड़ा योगदान यही है कि वह हमें अपने राष्ट्र की परंपरा से संपृक्त बनाती है, अपनी रीति-नीति की संपदा से विच्छिन्न नहीं होने देती । आज के युग में राष्ट्रीय एवं जातीय संस्कृतियों के मिलन के अवसर अति सुलभ हो गए हैं, संस्कृतियों का पारस्परिक संघर्ष भी शुरू हो गया है।
कुछ ऐसे विदेशी प्रभाव हमारे देश पर पड़ रहे हैं, जिनके आतंक ने हमें स्वयं अपनी संस्कृति के प्रति संशयालु बना दिया है। हमारी आस्था डिगने लगी है। यह हमारी वैचारिक दुर्बलता का फल है। अपनी संस्कृति को छोड़ विदेशी संस्कृति के विवेकहीन अनुकरण से हमारे राष्ट्रीय गौरव को जो ठेस पहुँच रही है, वह किसी राष्ट्र प्रेमी जागरूक व्यक्ति से छिपी नहीं है। भारतीय संस्कृति में त्याग और ग्रहण की अद्भुत क्षमता रही है। अतः आज के वैज्ञानिक युग में हम किसी भी विदेशी संस्कृति के जीवंत तत्त्वों को ग्रहण करने में पीछे नहीं रहना चाहेंगे, किंतु अपनी सांस्कृतिक निधि की उपेक्षा करके नहीं। यह परावलंबन राष्ट्र की गरिमा के अनुरूप नहीं है। यह स्मरण रखना चाहिए कि सूर्य की आलोकप्रदायिनी किरणों से पौधे को चाहे जितनी जीवन-शक्ति मिले, किंतु अपनी जमीन और अपनी जड़ों के बिना कोई पौधा जीवित नहीं रह सकता। अविवेकी अनुकरण, अज्ञान का ही पर्याय है।
(क) उपर्युक्त गद्यांश किस विषयवस्तु पर आधारित है? (1)
(i) भारतीय राजनीति
(ii) भारतीय संस्कृति और विदेशी प्रभाव
(iii) विज्ञान और तकनीकी प्रगति
(iv) भारत और जातिवाद
उत्तर:
(ii) भारतीय संस्कृति और विदेशी प्रभाव
प्रस्तुत गद्यांश में भारतीय संस्कृति और विदेशी प्रभावों के बारे में बताया गया है। लेखक बताता है कि किस प्रकार विदेशी संस्कृतियाँ हमारे देश पर प्रभाव डाल रही हैं। अतः हमें अपनी संस्कृति का विवेकपूर्ण तरीके से संरक्षण करते हुए विदेशी तत्त्वों को अपनाने की आवश्यकता है।
(ख) हम विदेशी संस्कृति के महत्त्वपूर्ण तत्त्वों को ग्रहण कर सकते हैं (1)
1. वैज्ञानिक युग की माँग के कारण।
2. भारतीय संस्कृति के त्याग एवं ग्रहण की अद्भुत क्षमता के कारण।
3. भारतीय संस्कृति के लेन-देन में विश्वास रखने के कारण।
4. विदेशी संस्कृति के जीवंत तत्त्वों द्वारा हमारी संस्कृति को समृद्ध करने के कारण।
कूट
(i) केवल 1
(ii) केवल 2
(iii) 1 और 2
(iv) 3 और 4
उत्तर:
(ii) केवल 2
गद्यांश के अनुसार, हम विदेशी संस्कृति के महत्त्वपूर्ण तत्त्वों को ग्रहण कर सकते हैं, क्योंकि भारतीय संस्कृति में त्याग एवं ग्रहण की अद्भुत क्षमता है।
(ग) कथन (A): हमारी संस्कृति में त्याग और ग्रहण की अद्भुत क्षमता रही है। (1)
कारण (R): त्याग और ग्रहण के विवेकपूर्ण निर्णय से हम अपनी संस्कृति को समृद्ध और आधुनिक बना सकते हैं?
(i) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या करता है।
(ii) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं, परंतु कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या नहीं करता है।
(iii) कथन (A) सही है, किंतु कारण (R) गलत है।
(iv) कथन (A) गलत है, किंतु कारण (R) सही है।
उत्तर:
(i) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या करता है।
गद्यांश के अनुसार, भारतीय संस्कृति में त्याग और ग्रहण की अद्भुत क्षमता रही है। अतः हमें आज के वैज्ञानिक और विकासशील युग में बिना अपनी सांस्कृतिक धरोहर की अपेक्षा किए हुए विदेशी संस्कृतियों के जीवंत (अच्छे) तत्त्वों को विवेकपूर्वक ढंग से अपनाने की आवश्यकता है।
(घ) प्रस्तुत गद्यांश के आधार पर बताइए कि राष्ट्र की गरिमा के लिए क्या उपयुक्त नहीं है? (2)
उत्तर:
गद्यांश के अनुसार, हमें किसी भी विदेशी संस्कृति के जीवंत तत्त्वों को ग्रहण करने में पीछे नहीं रहना चाहिए, परंतु इसके लिए हमें अपनी संस्कृति को छोड़कर विदेशी संस्कृति का विवेकहीन अनुकरण नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह हमारे राष्ट्र की गरिमा के लिए उपयुक्त नहीं है।
(ङ) प्रस्तुत गद्यांश से हमें क्या शिक्षा मिलती है? (2)
उत्तर:
प्रस्तुत गद्यांश से हमें अपनी संस्कृति में पूर्ण आस्था बनाए रखने की शिक्षा मिलती है। गद्यांश के अनुसार, हमें अन्य संस्कृतियों का विवेकहीन अनुकरण न करके हमें अपनी सांस्कृतिक निधि परम्परा पर ही पूर्णतः विश्वास रखना चाहिए व राष्ट्रीय गौरव बनाए रखना चाहिए, क्योंकि अपनी जमीन व जड़ों के बिना कोई भी पौधा जीवित नहीं रह सकता है।
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प्रश्न 2.
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उस पर आधारित दिए गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर लिखिए (7)
नागरिक के कर्त्तव्य और अधिकारों की समष्टि को नागरिकता कहा जाता है। नागरिकता ऐसी विशेषता है, जिसके अभाव में मनुष्य न तो समाज का आवश्यक अंग बन पाता है और न राज्य का। इसके बिना मनुष्य का जीवन एक प्रकार से या तो पशुवत् हो जाता है या महान विरागी संन्यासी के समान, जिसका सांसारिकता से कोई संबंध नहीं होता। अतः नागरिकता हर मनुष्य को नागरिक बनाने के लिए आवश्यक है। सदाचार का अर्थ है-सत् + आचार = सात्विक व्यवहार। किंतु साधारण अर्थ में इसका प्रयोग उन सभी व्यवहारों और कार्यों के लिए होता है, जो समाज द्वारा ग्राह्य हों और अच्छी सामाजिक क्रियाओं को नियंत्रित करते हों। इसकी आवश्यकता होती है, समाज को व्यवस्थित तथा मर्यादित रखने के लिए। झूठ न बोलना, चोरी न करना, किसी को अनावश्यक ढंग से न सताना, अनुचित रीति से कामाचार न करना आदि सदाचार माने जाते हैं। इन सब कार्यों का त्याग इसलिए आवश्यक होता है कि इनसे समाज में अव्यवस्था उत्पन्न होती है तथा समाज का ढाँचा लड़खड़ा जाता है। समाज उन्हीं गुणों का आदर-सम्मान करता है, जो सामाजिक विधियों को दृढ़ बनाने में तथा बहुजन हिताय और बहुजन सुखाय कार्यों में सहायक होते हैं।
(क) निम्न में से कौन-सा शब्द गद्यांश में दिए गए ‘ग्राह्य’ शब्द के सही अर्थ को दर्शाता है? (1)
(i) घृणित
(ii) ग्रहण करने योग्य
(iii) अनुकरणीय
(iv) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(ii) ग्रहण करने योग्य
प्रस्तुत गद्यांश के अनुसार, ‘ग्राह्य’ शब्द का अर्थ ग्रहण करने योग्य होता है। गद्यांश में समाज द्वारा नागरिकों को ऐसा व्यवहार करने के लिए कहा गया है, जिसे समाज द्वारा ग्रहण किया जा सके।
(ख) “समाज उन्हीं गुणों का आदर-सम्मान करता है, जो बहुजन हिताय व बहुजन सुखाय कार्यों में सहायक होते हैं।” इस पंक्ति के माध्यम से लेखक मनुष्य को _______________ बनने की प्रेरणा दे रहा है। (1)
(i) परोपकारी
(ii) सदाचारी
(iii) (i) और (ii) दोनों
(iv) स्वार्थी
उत्तर:
(iii) (i) और (ii) दोनों
प्रस्तुत पंक्ति के माध्यम से लेखक मनुष्य को परोपकारी व सदाचारी बनने की प्रेरणा दे रहा है, क्योंकि ऐसे लोग ही समाज में आदर-सम्मान पाते हैं।
(ग) कथन (A): सदाचार समाज के लिए हितकर है। (1)
कारण (R): सदाचार समाज में अनुशासन व मर्यादा बनाए रखता है।
(i) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या करता है।
(ii) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं, परंतु कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या नहीं करता है।
(iii) कथन (A) सही है, किंतु कारण (R) गलत है।
(iv) कथन (A) गलत है, किंतु कारण (R) सही है।
उत्तर:
(i) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या करता है।
सदाचार का अर्थ है- सात्विक व्यवहार। सदाचार समाज के लिए हितकर है। यह समाज में अनुशासन और मर्यादा बनाए रखने के लिए अत्यंत आवश्यक है। सदाचार से ही समाज में व्यवस्था और नैतिकता स्थापित रहती है।
(घ) प्रस्तुत गद्यांश के आधार पर नागरिकता की अवधारणा स्पष्ट कीजिए। (2)
उत्तर:
गद्यांश के अनुसार, नागरिकता का संबंध नागरिक के कर्तव्यों व अधिकारों से है। नागरिकता के अभाव में मनुष्य न तो समाज का आवश्यक अंग बन पाता और न ही राज्य का। इसके बिना मनुष्य पशु के समान या विरागी संन्यासी के समान माना जाता है।
(ङ) उपर्युक्त गद्यांश से हमें समाज में किस तरह का व्यवहार करने की शिक्षा मिलती है? किन्हीं दो बिंदुओं का उल्लेख कीजिए। (2)
उत्तर:
उपर्युक्त गद्यांश से हमें समाज में निम्नलिखित व्यवहार करने की शिक्षा मिलती है।
- इससे हमें समाज में व्यवस्थित व मर्यादित व्यवहार करने की शिक्षा मिलती है।
- सभी का आदर-सम्मान करने व सामाजिक विधियों को दृढ़ करने की प्रेरणा भी हमें समाज द्वारा मिलती है।
खंड ‘ख’ (व्यावहारिक व्याकरण) (16 अंक)
व्याकरण के लिए निर्धारित विषयों पर अतिलघूत्तरात्मक व लघूत्तरात्मक :20 प्रश्न दिए गए हैं, जिनमें से केवल 16 प्रश्नों (1 × 16 = 16) के उत्तर देने हैं।
प्रश्न 3.
निर्देशानुसार ‘पदबंध’ पर आधारित पाँच प्रश्नों में से किन्हीं चार प्रश्नों के उत्तर दीजिए (1 × 4 = 4)
(क) वजीर अली कर्नल के सामने अत्यंत चतुराई से पेश आया। (क्रिया-विशेषण पदबंध छाँटिए।) (1)
(ख) ‘मीराबाई श्रीकृष्ण के रूप सौंदर्य पर अत्यंत मोहित है।’ (विशेषण पदबंध छाँटकर लिखिए।) (1)
(ग) तताँरा को देखकर वह फूट-फूटकर रोने लगी। पदबंध छाँटकर उसका भेद भी बताइए। (1)
(घ) उनकी किताबों पर हजारों रुपये की लागत वाली जिल्द चढ़ी रहती थी। रेखांकित पदबंध का भेद बताइए। (1)
(ङ) स्त्रियाँ मोटी-मोटी पगड़ियाँ बाँधकर आई थीं। रेखांकित पदबंध का भेद बताइए। (1)
उत्तर:
(क) प्रस्तुत वाक्य ‘अत्यंत चतुराई से’ पदबंध में क्रिया-विशेषण पदबंध है।
(ख) दिए गए वाक्य में श्रीकृष्ण के रूप सौंदर्य’ पदबंध में विशेषण पदबंध है।
(ग) प्रस्तुत वाक्य के ‘फूट-फूटकर रोने लगी।’ पदबंध में क्रिया पदबंध है।
(घ) प्रस्तुत वाक्य के ‘हजारों रुपये की लागत वाली जिल्द पदबंध में संज्ञा पदबंध है।
(ङ) रेखांकित पद ‘मोटी-मोटी पगड़ियाँ’ पदबंध में विशेषण पदबंध है।
प्रश्न 4.
निर्देशानुसार ‘रचना के आधार पर वाक्य रूपांतरण पर आधारित पाँच प्रश्नों में से किन्हीं चार प्रश्नों के उत्तर दीजिए (1 × 4 = 4)
(क) ‘शैलेंद्र एक संवेदनशील कवि थे, उन्होंने फिल्म निर्माण का निश्चय किया।’ (1)
प्रस्तुत वाक्य को संयुक्त वाक्य में रूपांतरित कीजिए।।
(ख) ‘अमीरों ने अपनी आलीशान कोठियाँ बना लीं। प्रस्तुत वाक्य को मिश्र वाक्य में रूपांतरित कीजिए। (1)
(ग) धूप थी और वह पेड़ों से छनकर आ रही थी।’ प्रस्तुत वाक्य को सरल वाक्य में रूपांतरित कीजिए। (1)
(घ) ‘झंडे लेकर निकले लोगों को पकड़ लिया गया।’ प्रस्तुत वाक्य को मिश्रित वाक्य में रूपांतरित कीजिए।
(ङ) ‘वह आदमी जो वर्षों से समुद्र के किनारे रहता था, अब विस्थापित हो गया है।’ प्रस्तुत वाक्य को सरल वाक्य में रूपांतरित कीजिए। (1)
उत्तर:
(क) शैलेंद्र एक संवेदनशील कवि थे और उन्होंने फिल्म निर्माण का निश्चय किया।
(ख) जो अमीर थे, उन्होंने अपनी आलीशान कोठियाँ बना लीं।
(ग) धूप पेड़ों से छनकर आ रही थी।
(घ) जो लोग झंडे लेकर निकले थे, उन्हें पकड़ लिया गया।
(ङ) समुद्र के किनारे वर्षों से रहने वाला आदमी अब विस्थापित हो गया है।
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प्रश्न 5.
निर्देशानुसार ‘समास’ पर आधारित पाँच प्रश्नों में से किन्हीं चार प्रश्नों के उत्तर दीजिए (1 × 4 = 4)
(क) ‘विद्याभ्यास’ शब्द में कौन-सा समास है? (1)
(ख) ‘प्राणीजगत’ समस्तपद का विग्रह क्या होगा? (1)
(ग) अजन्म’ शब्द का सही समास विग्रह और समास बताइए। (1)
(घ) बहुव्रीहि समास का एक उदाहरण लिखिए। (1)
(ङ) ‘कानों कान’ समास के किस भेद का उदाहरण है और क्यों? (1)
उत्तर:
(क) ‘विद्याभ्यास’ में तत्पुरुष समास है।
(ख) ‘प्राणीजगत’ समस्तपद का विग्रह ‘प्राणियों का जगत’ होगा।
(ग) ‘अजन्म’ शब्द का समास विग्रह ‘जन्म पर्यन्त’ है, जिसमें अव्ययीभाव समास है।
(घ) बहुव्रीहि समास का उदाहरण है- परशुधर इसका समास विग्रह ई-परशु धारण करता है, जो (परशुराम)
(ङ) कानों-कान अव्ययीभाव समास का उदाहरण है। इसका समास विग्रह है कान ही कान में इसमें पूर्व पद प्रधान व अव्यय है तथा इसके योग से समस्त पद भी अव्यय बन गया है अतः इसमें अव्ययीभाव समास है।
प्रश्न 6.
निर्देशानुसार ‘मुहावरे’ पर आधारित पाँच प्रश्नों में से किन्हीं चार प्रश्नों के उत्तर दीजिए। (1 × 4 = 4)
(क) पुलिस अधिकारियों ने बार-बार लोगों को _______________ पर देशभक्त डरे नहीं। (उपयुक्त मुहावरे द्वारा रिक्त स्थान को भरिए।) (1)
(ख) फिल्म ‘तीसरी कसम’ को बनाने में शैलेंद्र के _______________ आ गया (उपयुक्त मुहावरे द्वारा रिक्त स्थान की पूर्ति कीजिए।) (1)
(ग) ज्ञान और तर्क के बल पर गाँधीजी ने भारत में अपना सिक्का जमाया था।’ इस वाक्य से मुहावरा छाँटकर उसका वाक्य में प्रयोग कीजिए। (1)
(घ) ‘इज्जत उतारना’ अर्थ के लिए उपयुक्त मुहावरा बताइए तथा इसका वाक्य में प्रयोग कीजिए। (1)
(ङ) जो धूर्त हैं उनसे टक्कर लेने से क्या लाभ यहाँ रेखांकित वाक्यांश का क्या अर्थ है? (1)
उत्तर:
(क) आँखें दिखाई
(ख) दाँतों पसीना
(ग) मुहावरा सिक्का जमाना।
वाक्य प्रयोग अपनी योग्यता के बल पर रोहन ने कक्षा में सिक्का जमाया है।
(घ) ‘इज्जत उतारना’ वाक्यांश के लिए उपयुक्त मुहावरा ‘नाक कटाना’ होगा।
वाक्य प्रयोग महेश ने चोरी करके अपने परिवार की नाक कटा दी।
(ङ) ‘जो धूर्त हैं उनसे टक्कर लेने से क्या लाभ यहाँ रेखांकित वाक्यांश का अर्थ ‘बराबरी करना’ है।
खंड ‘ग’ (पाठ्यपुस्तक एवं पूरक पाठ्यपुस्तक) (28 अंक)
इस खंड में पाठ्यपुस्तक एवं पूरक पाठ्यपुस्तक से प्रश्न पूछे गए हैं, जिनके निर्धारित अंक प्रश्न के सामने अंकित हैं।
प्रश्न 7.
निम्नलिखित पठित गद्यांश पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए (1 × 5 = 5)
वे दिन में कई-कई बार आते-जाते हैं और क्यों न आएँ जाएँ आखिर उनका भी घर है, लेकिन उनके आने-जाने से हमें परेशानी भी होती है। वे कभी किसी चीज को गिराकर तोड़ देते हैं। कभी मेरी लाइब्रेरी में घुसकर कबीर या मिर्जा गालिब को सताने लगते हैं। इस रोज-रोज की परेशानी से तंग आकर मेरी पत्नी ने उस जगह, जहाँ उनका आशियाना था, एक जाली लगा दी है, उनके बच्चों को दूसरी जगह कर दिया है। उनके आने की खिड़की को भी बंद किया जाने लगा है। खिड़की के बाहर अब दोनों कबूतर रातभर खामोश और उदास बैठे रहते हैं।
(क) कथन (A): लेखक की पत्नी ने कबूतरों से परेशान होकर भी उनका आशियाना दूसरी जगह नहीं किया। (1)
कारण (R): लेखक की पत्नी को उनका आना-जाना अच्छा नहीं लगता था।
कूट
(i) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या करता है।
(ii) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं, परंतु कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या नहीं करता है।
(iii) कथन (A) सही है, किंतु कारण (R) गलत है।
(iv) कथन (A) गलत है, किंतु कारण (R) सही है।
उत्तर:
(iv) कथन (A) गलत है, किंतु कारण (R) सही है।
लेखक की पत्नी ने कबूतरों से परेशान होकर उनके आशियाने पर एक जाली लगवा दी थी तथा उनके बच्चों को दूसरी जगह कर दिया था, क्योंकि लेखक की पत्नी को कबूतरों का आना-जाना अच्छा नहीं लगता था।
(ख) कबूतर लेखक के घर में दिन में कई बार क्यों आते-जाते रहते थे?
(i) लेखक से घनिष्ठ प्रेम के कारण
(ii) अपने अंडों के कारण
(iii) लेखक की माता के स्नेह के कारण
(iv) अपने अधिकार के कारण
उत्तर:
(ii) अपने अंडों के कारण
कबूतर ने लेखक के घर में घोंसला बना रखा था, जिसमें उनके अंडे भी थे, इसलिए कबूतर लेखक के घर में दिन में कई बार आते-जाते रहते थे।
(ग) लेखक व उसकी पत्नी को कबूतरों का आना-जाना अच्छा क्यों नहीं लगता था?
(i) कबूतर उनका नुकसान करते थे
(ii) कबूतर के प्रति उनमें घृणा भाव था
(iii) वे कबूतर से डरते थे
(iv) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(i) कबूतर उनका नुकसान करते थे
कबूतर लेखक के घर में चीजों को गिराकर तोड़ दिया करते थे तथा अन्य प्रकार से भी नुकसान पहुँचाते थे, इसलिए लेखक व उनकी पत्नी को कबूतरों का घर में आना-जाना अच्छा नहीं लगता था।
(घ) कबूतरों के आने से लेखक को क्या नुकसान झेलना पड़ा?
(i) पुस्तकालय की किताबें गंदी हो गई
(ii) चीजें गिरकर टूट गईं
(iii) (i) और (ii) दोनों
(iv) भोजन खा जाते थे
उत्तर:
(iii) (i) और (ii) दोनों
दोनों कबूतर लेखक की पुस्तकालय में रखी किताबों को गंदा कर दिया करते तथा चीज़ों को गिराकर तोड़ दिया करते थे।
(ङ) सुमेलित कीजिए
| सूची I | सूची II |
| A. कबूतरों का आना-जाना | 1. पुस्तकालय में घुस जाना |
| B. कबूतरों की शरारतें | 2. खिड़कियाँ बंद कर दी गई |
| C. कबूतरों से तंग पत्नी | 3. बच्चों को दूसरी जगह कर दिया |
| D. कबूतरों के कारण खामोशी | 4. परेशानी और उदासी |
कूट
| A | B | C | D | |
| (i) | 1 | 2 | 3 | 4 |
| (ii) | 2 | 1 | 3 | 4 |
| (iii) | 3 | 4 | 1 | 2 |
| (iv) | 4 | 3 | 2 | 1 |
उत्तर:
(ii) 2 1 3 4
गद्यांश के अनुसार कबूतर के बार-बार आने से परेशानी होती है, इसलिए खिड़कियाँ बंद कर दी गई। कभी-कभी कबूतर लाइब्रेरी में घुसकर कबीर या मिर्जा गालिब की किताबों को गिरा देते हैं। यह उनकी शरारत को दर्शाता है। रोज़-रोज की परेशानी से तंग आकर पत्नी ने उस स्थान पर जाली लगा दी, जहाँ उनका आशियाना था और बच्चों को दूसरी जगह भेज दिया। अब पति पत्नी रात भर खामोश और उदास रहते हैं। क्योंकि कबूतरों के कारण उनका चैन और सुकून खत्म हो गया है।
प्रश्न 8.
गद्य खंड पर आधारित निम्नलिखित चार प्रश्नों में से किन्हीं तीन प्रश्नों के उत्तर लगभग 25-30 शब्दों में दीजिए (2 × 3 = 6)
(क) वामीरो की माँ ने तताँरा को अपमानित क्यों किया? ‘तताँरा-वामीरा कथा’ के आधार पर बताइए। (2)
उत्तर:
पास गाँव में जब पशु-पर्व का आयोजन हो रहा था, तब वहाँ तताँरा वामीरो को तलाश रहा था और जब वह वहाँ वामीरो से मिला, तो वामीरो उसे देखकर फूट-फूटकर रोने लगी, यह सब वामीरो की माँ ने देख लिया था। दोनों को साथ देखकर वामीरो की माँ ने सबके सामने तताँरा का तरह-तरह से अपमान किया।
(ख) सुभाषचंद्र बोस को जेल में क्यों डाल दिया गया? ‘डायरी का एक पन्ना पाठ के आधार पर बताइए। (2)
उत्तर:
26 जनवरी, 1931 को जुलूस में सुभाष द्वारा जोर-जोर से वंदे मातरम् बोलने पर उन पर लाठियाँ पड़ीं, परंतु वे पीछे नहीं हटे और जब स्त्रियों द्वारा मोनुमेंट की सीढ़ियों पर झंडा फहरा दिया गया, तब सुभाष चंद्र बोस को गिरफ्तार करके जेल में डाल दिया गया।
(ग) लेखक क्या समझ गया था? ‘बड़े भाई साहब’ पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए। (2)
उत्तर:
लेखक बड़े भाई साहब की इस बात को भली-भाँति समझ गया था कि बड़ा और अधिक अनुभवी होने के कारण बड़े भाई साहब को उससे अधिक समझ है। वह समझ गया था कि अधिक अनुभव होने के कारण बड़े भाई साहब को उसे डाँटने और समझाने का पूरा अधिकार है।
(घ) ‘कारतूस’ नाटिका में कर्नल ने वजीर अली की प्रशंसा में क्या कहा? ‘कारतूस पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए। (2)
उत्तर:
‘कारतूस’ नाटिका में कर्नल ने वजीर अली की प्रशंसा में कहा कि वह एक जाँबाज सिपाही है। कर्नल वजीर अली को जाँबाज या बहादुर सिपाही इसलिए मानता था, क्योंकि वह लंबे समय से उनके हाथ नहीं आ रहा था। एक अकेले व्यक्ति ने ब्रिटिश शासन की एक पूरी फौज को परेशान कर रखा था।
प्रश्न 9.
निम्नलिखित पठित काव्यांश को पढ़कर दिए गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त विकल्पों का चयन कीजिए (1 × 5 = 5)
‘मनुष्य मात्र बंधु है’ यही बड़ा विवेक है,
पुराणपुरुष स्वयंभू पिता प्रसिद्ध एक है।
फलानुसार कर्म के अवश्य बाह्य भेद हैं,
परंतु अंत॒क्य में प्रमाणभूत वेद है।
अनर्थ है कि बंधु ही न बंधु की व्यथा हरे,
वही मनुष्य है कि जो मनुष्य के लिए मरे।।
(क) निम्नलिखित वाक्यों को ध्यानपूर्वक पढ़िए
1. सच्चा मनुष्य वही है, जो अन्य मनुष्यों के लिए जीता व मरता है।
2. कवि के अनुसार, जिस मार्ग पर भी चलना हो हँसी-खुशी से चलो।
3. जिसने जैसे कर्म किए, उसे वैसा ही जन्म मिला।
4. सहानुभूति के गुणों से सज्जित व्यक्ति को ही पूजनीय माना जाता है।
पद्यांश से मेल खाते वाक्यों के लिए उचित विकल्प चुनिए
(i) 1 और 2
(ii) 1, 3 और 4
(iii) 1 और 3
(iv) 2 और 4
उत्तर:
(iii) 1 और 3
प्रस्तुत पद्यांश से मेल खाते हुए वाक्यों के अनुसार सच्चा मनुष्य वही है, जो अन्य मनुष्यों के लिए जीता व मरता है अर्थात् स्वार्थ से ऊपर परमार्थ में विश्वास रखता है तथा इस संसार में सबका पिता (परमेश्वर) एक ही हैं, जिनके अनुसार जिसने जैसे कर्म किए, उसे वैसा ही जन्म मिला है।
(ख) प्रस्तुत पद्यांश के अनुसार, प्रत्येक मनुष्य मात्र बंधु किस प्रकार है?
(i) एक राष्ट्र में जन्म लेने के कारण
(ii) एक प्रांत में जन्म लेने के कारण
(iii) एक जैसा भोजन करने के कारण
(iv) एक परमेश्वर की संतान होने के कारण
उत्तर:
(iv) एक परमेश्वर की संतान होने के कारण
पद्यांश के अनुसार, प्रत्येक मनुष्य संसार के सभी मनुष्यों को अपना बंधु समझे, क्योंकि सभी मनुष्यों का पिता एक ही परमात्मा है अर्थात् हम सभी मनुष्य एक ही परमेश्वर की संतान हैं।
(ग) कथन (A): जो मनुष्य बंधु की व्यथा को नहीं हरता, वह सच्चा मनुष्य नहीं है।
कारण (R): बन्धुत्व की भावना के बिना मनुष्यता अधूरी है।
कूट
(i) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या करता है।
(ii) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं, परंतु कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या नहीं करता है।
(iii) कथन (A) सही है, किंतु कारण (R) गलत है।
(iv) कथन (A) गलत है, किंतु कारण (R) सही है।
उत्तर:
(i) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या करता है।
पद्यांश के अनुसार, जो मनुष्य बंधु की व्यथा को नहीं हरता, वह सच्चा मनुष्य नहीं है, क्योंकि बंधुत्व की भावना के बिना मनुष्यता अधूरी है और बंधु की सहायता करना ही सच्ची मनुष्यता का प्रतीक है।
(घ) प्रस्तुत पद्यांश के माध्यम से कवि ने क्या संदेश दिया है?
(i) ईश्वर के प्रति कृतज्ञता का भाव
(ii) आपसी भाईचारे का अभाव
(iii) पर के प्रति अन्य का भाव
(iv) पर के प्रति अपनत्व का भाव
उत्तर:
(iv) पर के प्रति अपनत्व का भाव
प्रस्तुत पद्यांश के माध्यम से कवि ने यह संदेश दिया है कि हमें दूसरे व्यक्ति के प्रति अपनेपन की भावना रखनी चाहिए, क्योंकि वास्तव में सच्चा मनुष्य वही है, जो अन्य मनुष्यों के लिए जीता और मरता है।
(ङ) संसार में सबसे बड़ा अनर्थ क्या है?
(i) जब कोई मनुष्य केवल अपने लिए ही जीता है
(ii) जब कोई व्यक्ति अपने ही बंधु के दुःखों को दूर नहीं करता
(iii) जब कोई व्यक्ति अपने ही बंधु के दुःख हरता है।
(iv) जब व्यक्ति दीन-दुखियों की सहायता करता है।
उत्तर:
(ii) जब कोई व्यक्ति अपने ही बंधु के दुःखों को दूर नहीं करता
कवि के अनुसार, संसार में सबसे बड़ा अनर्थ यह है कि जब कोई व्यक्ति अपने ही बंधु के दुःखों को दूर नहीं करता अर्थात् उसके कष्ट में उसके काम नहीं आता।
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प्रश्न 10.
काव्य खंड पर आधारित निम्नलिखित चार प्रश्नों में से किन्हीं तीन प्रश्नों के उत्तर लगभग 25-30 शब्दों में दीजिए (2 × 3 = 6)
(क) “द्रौपदी री लाज, आप बढ़ायो चीर ।” प्रस्तुत पंक्तियों में मीरा श्रीकृष्ण से क्या प्रार्थना कर रही है? (2)
उत्तर:
प्रस्तुत पंक्तियों में मीराबाई अपने आराध्य श्रीकृष्ण से प्रार्थना करते हुए कहती है कि हे प्रभु! केवल आप ही हैं, जो अपनी इस दासी के कष्टों को दूर कर सकते हो। आपने ही भरी सभा में द्रौपदी का चीर (वस्त्र) बढ़ाकर उसकी लाज बचाई थी और उसे अपमानित होने से बचाया था। इसी प्रकार हे प्रभु! आप मेरे कष्टों को भी दूर कर मुझे प्रत्येक प्रकार के सांसारिक बंधन से छुटकारा दिलाइए।
(ख) ‘आत्मत्राण’ कविता में कवि किसे सर्वोच्च सत्ता मानता है तथा वह किसकी अपेक्षा नहीं करता? (2)
उत्तर:
‘आत्मत्राण’ कविता में कवि ईश्वर को सर्वोच्च सत्ता मानता है, लेकिन उनसे सहायता की अपेक्षा नहीं करता, क्योंकि वह कहता है कि मुझमें आत्मविश्वास की कमी न हो। मेरे जीवन में कोई भी मुसीबत आने पर मेरा बल, शक्ति और मेरा पराक्रम न डगमगाए।
(ग) ‘कर चले हम फ़िदा कविता में हिमालय पर्वत को किसके प्रतीक के रूप में बताया गया है? (2)
उत्तर:
‘कर चले हम फ़िदा’ कविता में हिमालय पर्वत को देश की अस्मिता एवं इसके सिर के ताज के प्रतीक के रूप में बताया गया है। भारत-चीन युद्ध के दौरान हिमालय की वादियों में शत्रुओं को रोकने के लिए जवानों ने अपना जीवन त्याग दिया। भारतीय सैनिकों ने अपने बलिदान के द्वारा हिमालय के गौरव को पद-दलित होने से रोका, क्योंकि हिमालय हमारे स्वाभिमान का प्रतीक है।
(घ) पर्वत प्रदेश में पावस’ कविता के आधार पर ‘सहस्र दृग-सुमन’ का अर्थ बताइए। (2)
उत्तर:
‘पर्वत प्रदेश में पावस’ कविता के आधार पर ‘सहस्र दृग-सुमन’ से तात्पर्य हजारों पुष्प रूपी आँखों से है। कवि ने इसका प्रयोग पर्वत पर खिले फूलों के लिए किया है, क्योंकि वर्षाऋतु में पर्वत पर हजारों की संख्या में फूल खिलते हैं।
प्रश्न 11.
पूरक पाठ्यपुस्तक ‘संचयन’ पर आधारित निम्नलिखित तीन प्रश्नों में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 40-50 शब्दों में दीजिए (3 × 2 = 6)
(क) “हर साल अप्रैल में जब पढ़ाई का नया साल आरंभ होता तो शर्मा जी एक साल पुरानी पुस्तकें ले आते।” ‘सपनों के से दिन’ पाठ के आधार पर बताइए कि आप किस प्रकार गरीब व मध्यमवर्गीय बच्चों की अध्ययन में सहायता कर सकते हैं? (3)
उत्तर:
(क) ‘सपनों के-से दिन’ पाठ के आधार पर हम गरीब व मध्यमवर्गीय बच्चों की निम्न प्रकार से सहायता कर सकते हैं; जैसे
- हम गरीब बच्चों को पुस्तकें, कॉपियाँ, पुरानी व सस्ती वेशभूषा दिलाकर उनकी सहायता कर सकते हैं।
- उनकी फीस या अन्य शैक्षिक खर्चों में आर्थिक सहयोग देकर भी हम (गरीब या मध्यम वर्गीय बच्चों की) सहायता कर सकते हैं।
- माता-पिता को शिक्षा के अधिकार के प्रति जागरूक कर उनके बच्चों को विद्यालय भेज सकते हैं।
- उन्हें आगे बढ़ने के लिए भावनात्मक सहयोग व प्रोत्साहन देकर भी हम उनकी सहायता कर सकते हैं।
- घर पर कुछ गरीब बच्चों को निःशुल्क अध्ययन करा सकते हैं।
(ख) “अम्मी शब्द सुनकर टोपी के घरवालों की प्रतिक्रिया संकीर्ण मानसिकता की द्योतक है।” ‘टोपी शुक्ला’ पाठ के आधार पर उक्त कथन के संदर्भ में अपने विचार व्यक्त कीजिए। (3)
उत्तर:
एक दिन जब टोपी अपने घर में सभी घरवालों के साथ बैठकर खाना खा रहा था, तब अचानक टोपी के मुँह से ‘अम्मी’ शब्द सुनाई दिया। अम्मी शब्द सुनकर टोपी की दादी और उसकी माँ के चेहरे की हवाइयाँ उड़ गई। इसके पश्चात् दोनों ने टोपी के साथ अमानवीय व्यवहार किया। घरवालों की यह प्रतिक्रिया उनकी संकीर्ण सोच (मानसिकता) का प्रतिनिधित्व करती है। मैं उसके घरवालों की इस प्रतिक्रिया को अनुचित मानता हूँ, क्योंकि किसी भाषा को किसी धर्म से जोड़ने पर सदैव गलत धारणा प्रतिपादित होती है। अतः हमें धर्म, जाति, वर्ण आदि से ऊपर उठकर मानवीय संबंधों को अहमियत देने की आवश्यकता है।
(ग) महंत द्वारा हरिहर काका का अपहरण किया जाना, महंत के चरित्र की किस सच्चाई को सामने लाता है? ठाकुरबाड़ी जैसी संस्थाओं से कैसे बचा जा सकता है? विचार व्यक्त कीजिए। (3)
उत्तर:
महंत द्वारा हरिहर काका का अपहरण महंत के चरित्र की इस सच्चाई को सामने लाता है कि महंत स्वार्थी एवं धनलोलुप व्यक्ति है। महंत ने हरिहर काका की जमीन-जायदाद हड़पने के लिए पहले उन्हें फुसलाया और जब इससे काम न बना तो उन्होंने उनका अपहरण कर लिया। उनके इस व्यवहार से यह सच्चाई उजागर होती है कि धर्म के क्षेत्र में दुर्जनों एवं दुराचारी लोगों का प्रवेश हो चुका है और ऐसे ही लोगों के कारण धर्म के क्षेत्र में अनाचार की प्रवृत्तियाँ बढ़ती जा रही हैं। ठाकुरबाड़ी जैसी संस्थाओं से व्यक्ति का मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण ही उसे बचा सकता है, क्योंकि व्यक्ति का विवेक ही उसे सही निर्णय लेने में सहायता करता है और उसे धर्म के ठेकेदारों के स्वार्थों से बचा सकता है।
खंड ‘घ’ (रचनात्मक लेखन) (22 अंक)
इस खंड में रचनात्मक लेखन पर आधारित प्रश्न पूछे गए हैं, जिनके निर्धारित अंक प्रश्न के सामने अंकित हैं।
प्रश्न 12.
निम्नलिखित तीन विषयों में से किसी एक विषय पर दिए गए संकेत बिंदुओं के आधार पर लगभग 120 शब्दों में अनुच्छेद लिखिए (5)
(क) आत्मनिर्भर भारत
संकेत बिंदु
- आत्मनिर्भर का अर्थ
- आत्मनिर्भर भारत का लक्ष्य
- आत्मनिर्भर भारत अभियान की शुरुआत
उत्तर:
आत्मनिर्भर भारत
आत्मनिर्भरता का आशय है किसी भी परिस्थिति में स्वयं पर निर्भर रहना और अपनी आवश्यकताओं को स्वयं पूरा करना । आत्मनिर्भरता केवल व्यक्तिगत स्तर पर ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी महत्त्वपूर्ण है। जब एक देश आत्मनिर्भर होता है, तो वह अपनी आवश्यकताओं के लिए दूसरे देशों पर निर्भर नहीं रहता, बल्कि अपनी घरेलू क्षमता और संसाधनों का उपयोग करता है। आत्मनिर्भर भारत का लक्ष्य भारत को एक स्वावलंबी और स्वदेशी अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित करना है। इसका मुख्य उद्देश्य यह है कि भारत अपनी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए विदेशी वस्तुओं और सेवाओं पर निर्भर न रहे, बल्कि घरेलू उत्पादन और संसाधनों का उपयोग करे। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सरकार ने विभिन्न क्षेत्रों में सुधार और प्रोत्साहन योजनाओं की शुरुआत की है। आत्मनिर्भर भारत का लक्ष्य केवल आर्थिक स्वतंत्रता ही नहीं, बल्कि तकनीकी, कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य और रक्षा क्षेत्रों में भी स्वावलंबन प्राप्त करना है।
आत्मनिर्भर भारत अभियान की शुरुआत वर्ष 2020 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा की गई थी। इस अभियान के अंतर्गत सरकार ने कई नीतियों और योजनाओं की घोषणा की; जैसे- मेक इन इंडिया, स्टार्टअप इंडिया और वोकल फॉर लोकल। इन नीतियों का उद्देश्य घरेलू उद्योगों को प्रोत्साहित करना, छोटे उद्योगों को समर्थन देना और नवाचार को बढ़ावा देना है। इसके अतिरिक्त सरकार ने आत्मनिर्भर भारत पैकेज के अंतर्गत विभिन्न आर्थिक सुधारों की घोषणा की, जिसमें कृषि, एमएसएमई और वित्तीय क्षेत्रों के लिए विशेष योजनाएँ शामिल हैं। अतः कहा जा सकता है कि आत्मनिर्भर भारत का यह अभियान देश को एक सशक्त और स्वावलंबी राष्ट्र बनाने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है। इसके माध्यम से न केवल देश की आर्थिक स्थिति को मजबूत किया जा सकता है, बल्कि रोजगार के अवसरों में भी वृद्धि की जा सकती है। आत्मनिर्भरता के माध्यम से भारत अपनी स्वतंत्रता और स्वाभिमान को बनाए रखते हुए वैश्विक मंच पर एक महत्त्वपूर्ण स्थान प्राप्त कर सकता है, इसलिए हमें सभी स्तरों पर आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए समर्पित रहना चाहिए।
(ख) नर हो, न निराश करो मन को
संकेत बिंदु
- आत्मविश्वास और सफलता
- आशा के साथ संघर्ष में विजय
- महापुरुषों की सफलता का आभार
उत्तर:
नर हो, न निराश करो मन को
मानव जीवन को संघर्ष की संज्ञा दी गई है। इस जीवन संघर्ष में उसे कभी सुख मिलता है, तो कभी दुःख सुख मन में आशा एवं प्रसन्नता का संचार करते हैं, जबकि दुःख उसे निराशा एवं शोक के सागर में डुबो देते हैं। इसी समय व्यक्ति के आत्मविश्वास की परीक्षा होती है, जो व्यक्ति इन प्रतिकूल परिस्थितियों में भी अपना विश्वास नहीं खोता है और आशावादी बनकर संघर्ष करता है, वही सफलता प्राप्त करता है। आत्मविश्वास के बिना सफलता की कामना करना दिवास्वप्न देखने के समान है। मनुष्य के मन में यदि आशावादिता नहीं है और वह निराश मन से संघर्ष करता भी है, तो उसकी सफलता में संदेह बना रहता है। कहा भी गया है कि ‘मन के हारे हार है, मन के जीते जीत।’ मन में जीत के प्रति हमेशा आशावादी बने रहना जीत का आधार बन जाता है। यदि मन में आशा, संघर्ष करने की इच्छा और कर्मठता हो, तो मनुष्य के लिए कुछ भी असंभव नहीं है।
विपरीत परिस्थितियों में भी वही व्यक्ति विजय प्राप्त करता है, जिसने आत्मविश्वास नहीं खोया। निराशा काम में हमें मन नहीं आने देती और आधे-अधूरे मन से किया गया कार्य कभी सफल नहीं होता। संसार के महापुरुषों ने आत्मविश्वास, दृढ़ निश्चय और संघर्षशीलता के बल पर आशावादी बनकर सफलता प्राप्त की। अब्राहम लिंकन हों या थॉमस एडिसन, महात्मा गांधी हों या सरदार पटेल, सभी ने प्रतिकूल परिस्थितियों में भी आशावान बने रहकर अपना लक्ष्य प्राप्त किया। उनकी सफलता का मुख्य आधार उनका आत्मविश्वास और संघर्षशीलता थी। सैनिकों के मन में यदि एक पल के लिए भी निराशा का भाव आ जाए, तो देश को गुलाम बनने में देर न लगेगी, इसलिए मनुष्य को सफलता पाने के लिए सदैव आशावादी बने रहना चाहिए। हमें प्रत्येक परिस्थिति में आत्मविश्वास बनाए रखना चाहिए और आशावादी दृष्टिकोण के साथ जीवन के संग्राम में आगे बढ़ना चाहिए। ‘नर हो, न निराश करो मन को’ का मूलमंत्र हमें सदैव प्रेरित करता है कि हम किसी भी परिस्थिति में हार न मानें और अपने लक्ष्य की ओर दृढ़ संकल्प के साथ बढ़ते रहें।
(ग) अंधविश्वास से घिरा समाज
संकेत बिंदु
- अंधविश्वास की अवधारणा
- अंधविश्वास का समाज पर प्रभाव
- अंधविश्वास समाप्त करने के उपाय
उत्तर:
अंधविश्वास से घिरा समाज
अंधविश्वास एक ऐसी अवधारणा है, जिसमें व्यक्ति तथ्यों और विज्ञान पर आधारित सोच के बजाय अज्ञात और अविश्वसनीय विश्वासों पर निर्भर रहता है। यह विश्वास आमतौर पर किसी विशिष्ट घटना या परिस्थिति के बिना प्रमाण के ही होता है। अंधविश्वास लोगों के मन में डर भ्रम और गलत धारणाएँ पैदा करता है, जो समाज की प्रगति और विकास में बाधा उत्पन्न करती हैं। अंधविश्वास के विविध रूप समाज में गहराई से जड़ें जमा चुके हैं। इनमें से कुछ सामान्य अंधविश्वासों में काली बिल्ली का रास्ता काटना, छींकने पर काम रोक देना, किसी विशेष दिन पर नए काम की शुरुआत न करना और ग्रह-नक्षत्रों के आधार पर फैसले लेना आदि शामिल हैं।
अंधविश्वास का समाज पर गहरा और नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। यह लोगों को तार्किक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने से रोकता है। इसके परिणामस्वरूप शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सुधार के प्रयासों में बाधा उत्पन्न होती है। अंधविश्वास के कारण लोग अवैज्ञानिक उपचारों पर विश्वास कर बीमारियों का सही इलाज नहीं करा पाते, जिससे स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ बढ़ जाती हैं। इसके अतिरिक्त अंधविश्वास सामाजिक भेदभाव और अत्याचार को भी बढ़ावा देता है, जैसे कि डायन प्रथा, जाति आधारित भेदभाव और महिलाओं के प्रति गलत धारणाएँ । अंधविश्वास को समाप्त करने के उपायों में सबसे महत्त्वपूर्ण है- शिक्षा और जागरूकता का प्रसार शिक्षा के माध्यम से लोगों को वैज्ञानिक सोच और तर्कसंगत दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रेरित किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त सरकार और सामाजिक संगठनों को मिलकर अंधविश्वास के खिलाफ अभियान चलाने चाहिए।
मीडिया फिल्में और साहित्य भी इस दिशा में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। समाज के प्रभावशाली व्यक्तियों और धार्मिक नेताओं को भी अंधविश्वास के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए और लोगों को सचेत करना चाहिए। अतः कहा जा सकता है कि अंधविश्वास समाज के विकास में एक बड़ी बाधा है। इसे समाप्त करने के लिए शिक्षा, जागरूकता और तार्किक दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है। हमें अपने समाज को अंधविश्वास के बंधनों से मुक्त कर एक वैज्ञानिक और प्रगतिशील समाज की ओर अग्रसर करना चाहिए। केवल तब ही हम एक समृद्ध और सशक्त समाज का निर्माण कर सकते हैं।
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प्रश्न 13.
बस में यात्रा करते हुए आपके कुछ आवश्यक कागज़ात बस में ही छूट गए। उन्हें प्राप्त करने हेतु बस सेवा के ‘खोया-पाया’ अनुभाग के कार्यालय में अधिकारी को अपने कागज़ों का विवरण देते हुए एक पत्र लगभग 100 शब्दों में लिखिए। (5)
अथवा
अपने नगर के स्वास्थ्य अधिकारी को लगभग 100 शब्दों में पत्र लिखकर अपने क्षेत्र में खाने की वस्तुओं में मिलावट की घटनाओं के प्रति उनका ध्यानाकृष्ट कीजिए।
उत्तर:
परीक्षा भवन,
मेरठ।
दिनांक 19 मार्च, 20XX
सेवा में,
श्रीमान मुख्य प्रबंधक महोदय,
‘खोया-पाया’ अनुभाग,
परिवहन विभाग, मेरठ।
विषय बस में यात्रा के दौरान खोए हुए आवश्यक कागजात की पूछताछ हेतु।
महोदय,
मैं दिनांक 18 मार्च, 20XX को प्रातः 10 बजे मेडिकल कॉलेज से सिटी रेलवे स्टेशन की लो फ्लोर बस (बस संख्या UP-15 F 89XX) में यात्रा कर रहा था। मुझे ठीक 10:30 बजे सहारनपुर पैसेंजर गाड़ी पकड़नी थी और मैं बहुत जल्दी में था। मुझे सहारनपुर में अपनी घायल बहन को जिला अस्पताल में देखने जाना था और मेरा सारा ध्यान उसी ओर लगा हुआ था। यही कारण था कि सिटी रेलवे स्टेशन आने पर मैं अपना बैग बस में ही भूल गया। यह बैग हल्के नीले रंग का था। इसमें मेरे बहुत-से आवश्यक कागजात रखे हुए थे। इस बैग पर ‘स्माइल प्लीज़’ लिखा हुआ था। इसमें मेरे नाम तथा पते की एक स्लिप भी लगी हुई थी। महोदय, यदि किसी संवाहक ने इस प्रकार का कोई बैग इस अनुभाग में जमा कराया हो, तो नीचे लिखे पते पर सूचित करने की कृपा करें।
धन्यवाद।
प्रार्थी
क.ख.ग.
दीप विला एच-125
शास्त्रीनगर, मेरठ।
अथवा
परीक्षा भवन,
दिल्ली।
दिनांक 15 जुलाई, 20XX
सेवा में,
स्वास्थ्य अधिकारी महोदय,
नगर निगम,
दिल्ली।
विषय खाद्य वस्तुओं में मिलावट की सूचना हेतु।
महोदय,
मैं आपको एक गंभीर समस्या से अवगत कराना चाहता हूँ। हमारे नगर में खाद्य पदार्थों में मिलावट की समस्या बढ़ती ही जा रही है। कल शाम 6 बजे मैंने अपने क्षेत्र की एक प्रतिष्ठित दुकान से मिठाइयाँ खरीदीं। घर आने पर मैंने देखा कि मिठाइयों में मिलावटी तेल व अन्य दोषपूर्ण सामग्री प्रयोग की गई है। इस प्रकार के खाद्य पदार्थों के सेवन से निर्दोष नागरिक बीमार पड़ जाते हैं और कुछ लोगों की जान तक चली जाती है, परंतु ये लालची और निर्दयी दुकानदार केवल अपना हित साधते हैं। मेरा आपसे विनम्र अनुरोध है कि दिन के व्यस्त वातावरण में दुकानों पर जाकर निरीक्षण करें तथा सभी खाद्य पदार्थों की जाँच कराएँ इसके लिए हम सब आपके अत्यंत आभारी रहेंगे।
सधन्यवाद।
भवदीय
क.ख.ग.
कमला नगर,
दिल्ली।
प्रश्न 14.
प्रधानाचार्य के द्वारा विद्यालय में कक्षा सातवीं से लेकर ग्यारहवीं तक के विद्यार्थियों के लिए विशेष कक्षाओं का आयोजन किया गया है। इस संदर्भ में लगभग 60 शब्दों में सूचना तैयार कीजिए, जो विद्यार्थियों को आवश्यक जानकारी और निर्देश प्रदान करे। (4)
अथवा
आप फैरी पब्लिक स्कूल, मॉडल टाउन, दिल्ली की छात्रा आरोही गुप्ता हैं। विद्यालय में आपको एक पर्स मिला है। इस संबंध में लगभग 60 शब्दों में सूचना लिखिए।
उत्तर:
प्रतिभा विकास विद्यालय, दिल्ली
सूचना
दिनांक 1 दिसंबर, 20XX
विशेष कक्षा का आयोजन
सभी विद्यार्थियों को सूचित किया जाता है कि कक्षा सात से लेकर ग्यारहवीं तक की सभी कक्षाओं के लिए सभी विषयों की विशेष कक्षा का प्रबंध किया गया है। अतः उचित समय पर आकर शिक्षार्थी अपने-अपने विषय की समस्या का समाधान शिक्षक से प्राप्त करने का प्रयास करें तथा अपने अध्ययन को सफल व आसान बनाएं। साथ ही प्रत्येक छात्र से अनुरोध है कि वे अपनी-अपनी समस्या को घर से लिखकर लाएँ, जिससे अधिक समय व्यर्थ न हो और प्रत्येक समस्या का समाधान हो सके।
श्री राघवेंद्र प्रपन्ना (प्रधानाचार्य)
प्रतिभा विकास विद्यालय
नई दिल्ली, अशोक विहार- 52
अथवा
फैरी पब्लिक स्कूल, दिल्ली
सूचना
दिनांक 3 जुलाई, 20XX
खोया-पाया के संबंध में
सभी को सूचित किया जाता है कि 2 जुलाई, 20XX को विद्यालय के खेल परिसर में मुझे एक पर्स मिला है, जिसमें कुछ रुपये तथा कार्ड हैं। यह पर्स जिस विद्यार्थी का हो, वह पर्स की पहचान बताकर प्रधानाचार्य के कक्ष से इसे ले सकता है। पर्स प्रधानाचार्य के पास पूर्णतः सुरक्षित है तथा विद्यालय समय में ही आकर अपना पर्स लें।
आरोही गुप्ता
कक्षा-दसवीं ‘ब’
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प्रश्न 15.
पेन बनाने वाली कंपनी के प्रचार-प्रसार हेतु 40 शब्दों में आकर्षक विज्ञापन कीजिए। (3)
अथवा
दीपावली के उत्सव पर किसी इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद की कंपनी की ओर से धमाका सेल का विज्ञापन 40 शब्दों में लिखिए।
उत्तर:

अथवा

प्रश्न 16.
आप राम कपूर/ नीता कपूर हैं। आपकी कॉलोनी में सड़क अत्यंत टूटी-फूटी हैं तथा उसमें बहुत-से गड्ढे हैं, जिससे प्रतिदिन कोई-न-कोई दुर्घटना होती रहती है। आप अपने क्षेत्र के मुख्य अभियंता को लगभग 80 शब्दों में ई-मेल लिखकर उनको इस समस्या से अवगत कराइए। (5)
अथवा
‘प्रत्येक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति को उपदेश देता है पर उसके स्वयं का आचरण उसके उपदेश के विपरीत होता है।’ इस विषय को आगे बढ़ाते हुए लगभग 100 शब्दों में एक लघुकथा लिखिए।
उत्तर:
From : [email protected]
To : [email protected]
CC : [email protected]
BCC : –
विषय सड़क सही कराने के संबंध में।
महोदय,
सादर निवेदन इस प्रकार है कि हमारी कॉलोनी की सड़कों की स्थिति बहुत खराब है। सड़कें अत्यंत टूटी-फूटी हैं, जिससे बारिश आने पर गड्ढों में पानी भर जाता है, जिसके कारण प्रतिदिन कोई-न-कोई दुर्घटना होती रहती है और सामान्य जनता परेशान होती रहती है। अतः आपसे निवेदन है कि आप एक बार आकर स्थिति का निरीक्षण करें और जल्द से जल्द सड़क को सही करवाने की कृपा करें, जिससे दुर्घटनाओं से बचा जा सके और यातायात का संचालन सुगमतापूर्वक हो सके।
धन्यवाद।
भवदीय
राम कपूर
(आर.डब्लू.ए.) सचिव
अथवा
लघुकथा प्राचीन समय की बात है किसी गाँव में एक साधु महात्मा रहते थे। उनके सैकड़ों भक्त थे। लोग उनके प्रवचन सुनने के लिए दूर-दूर से आते थे। वे लोगों को तरह-तरह की नैतिक कथाएँ सुनाते तथा ज्ञानवर्धक बातें बताते। वे अकसर मोह माया से दूर रहने का उपदेश देते। एक दिन पास के गाँव में रहने वाली एक वृद्ध माता ने अपने बेटे से उस महात्मा के प्रवचन सुनने की इच्छा व्यक्त की। उसका बेटा अपनी माँ की इच्छा टाल न सका और अगले ही दिन अपनी माँ को लेकर महात्मा के आश्रम में जा पहुँचा और उनके प्रेरक वचन सुनकर अत्यंत प्रसन्न हुआ। अब वह अपनी माता के साथ महात्मा के प्रवचन सुनने आने लगा।
एक दिन आश्रम से घर जाते समय सड़क दुर्घटना में उसकी माता का देहांत हो गया। वह अत्यंत दुःखी रहने लगा तथा उसने आश्रम में जाना भी छोड़ दिया। जब महात्मा को इस बात का पता चला, तो वह उस व्यक्ति के घर पहुँचे और उसे सांत्वना दी। शरीर की नश्वरता के संदर्भ में उसे विभिन्न उपदेश भी दिए। महात्मा की बातों को सुनकर वह आदमी धीरे-धीरे सहज होने लगा और अपने दुःख से उभरने लगा, जब उस आदमी ने अपनी पूर्णतः भावनाओं पर नियंत्रण कर लिया, तो वह महात्मा को धन्यवाद कहने उनके आश्रम में गया। वहाँ जाकर उसने देखा कि महात्मा जी जोर-जोर से रो रहे थे। सभी भक्तजन उन्हें घेरकर खड़े थे। एक भक्त से पता चला कि अपने सर्वप्रिय खरगोश की मृत्यु से दुःखी होकर महात्मा फूट-फूटकर रो रहे हैं, तब वह आदमी महात्मा के पास गया और कहने लगा कि मेरी माँ की मृत्यु पर आप मुझे इतने उपदेश दे रहे थे और आज एक खरगोश की मृत्यु से आप इतने दुःखी हो रहे हैं। आपने तो ‘पर उपदेश कुशल बहुतेरे उक्ति को चरितार्थ कर दिया और वहाँ से चला आया।
सीख इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि दूसरों को उपदेश देना बहुत सरल है तथा स्वयं उस पर अमल करना कठिन होता है। अतः दूसरों को उपदेश देने से पहले स्वयं के आचरण में भी उन बातों को अपनाना चाहिए।