Teachers often provide Class 8 Hindi Notes Malhar Chapter 6 एक टोकरी भर मिट्टी Summary in Hindi Explanation to simplify complex chapters.
एक टोकरी भर मिट्टी Class 8 Summary in Hindi
एक टोकरी भर मिट्टी Class 8 Hindi Summary
एक टोकरी भर मिट्टी का सारांश – एक टोकरी भर मिट्टी Class 8 Summary in Hindi
इस कहानी के लेखक माधवराव सप्रे हैं। इसमें बताया गया है कि एक श्रीमान् ज़मीदार के महल के पास एक गरीब, अनाथ वृद्धा की झोंपड़ी थी। ज़मींदार अपने महल
के अहाते को झोंपड़ी तक बढ़ाना चाहते थे किंतु वृद्धा कई ज़माने से वहीं बसी थी । उसका प्रिय पति और इकलौता पुत्र भी मर चुके थे। पतोहू भी एक पाँच बरस की कन्या को छोड़कर चल बसी थी। इस कन्या के अतिरिक्त वृद्धा का कोई सहारा न था । जबसे उसे ज़मींदार की इच्छा के बारे में पता चला तो वह मृतप्राय हो गई थी। वह अपने मरने से पहले इस झोंपड़ी को छोड़ना नहीं चाहती थी। जब श्रीमान् के सब प्रयत्न निष्फल हुए तब उन्होंने चाल चली और वकीलों की थैली गरम करके अदालत से उस झोंपड़ी पर कब्ज़ा कर लिया और वृद्धा को वहाँ से निकाल दिया।
वृद्धा अनाथ थी इसलिए पास-पड़ोस में कहीं जाकर रहने लगी। एक दिन श्रीमान् झोंपड़ी के आस-पास टहल रहे थे और लोगों को काम बतला रहे थे कि इतने में वृद्धा हाथ में एक टोकरी लेकर वहाँ पहुँची। श्रीमान् ने तुरंत अपने नौकरों से उसे वहाँ से निकालने के लिए कहा। इस पर वृद्धा ने कहा कि अब तो झोंपड़ी आपकी ही हो गई है। मैं उसे लेने नहीं आई हूँ। बस एक विनती करने आई हूँ। ज़मींदार के हामी भरने पर उसने बताया कि जबसे झोंपड़ी टूटी है उसकी पोती ने खाना-पीना छोड़ दिया है। वह कहती है कि घर चलो, मैं अपने घर पर ही रोटी खाऊँगी। वृद्धा ज़मींदार से कहती है कि मैंने सोचा है कि एक टोकरी – भर मिट्टी लेकर उसी का चूल्हा बनाकर रोटी पकाऊँगी। मुझे विश्वास है कि वह रोटी खाने लगेगी। इसलिए आप मुझे एक टोकरी मिट्टी ले जाने दीजिए।
ज़मींदार सहमत हो गया । वृद्धा झोंपड़ी में गई । उसे सारी पुरानी बातें याद आ गई और वह रोने लग गई। खुद पर काबू पाकर उसने टोकरी में मिट्टी भरी और उसे हाथ से उठाकर बाहर ले आई। फिर हाथ जोड़कर श्रीमान् से विनती करने लगी कि वह ज़रा-सा हाथ लगाकर उस टोकरी को वृद्धा के सिर पर
रखवाने में मदद कर दें। उसके बार – बार हाथ जोड़ने पर श्रीमान् ने ज्यों ही टोकरी को ऊपर उठाना चाहा त्यों ही पाया कि यह काम उनकी शक्ति के बाहर है। उन्होंने फिर कोशिश की किंतु वह टोकरी को एक हाथ से न उठा पाए। उन्होंने लज्जित होकर कहा कि यह टोकरी वह नहीं उठा पाएँगे। इस पर वृद्धा ने कहा कि आप नाराज न हों किंतु अगर आपसे एक टोकरी – भर मिट्टी नहीं उठाई जाती तो सोचिए इस झोंपड़ी में तो हजारों टोकरियाँ मिट्टी पड़ी हैं। उसका भार आप जन्म-भर कैसे उठा सकेंगे? ज़मीदार साहब धन-मद से गर्वित हो अपना कर्तव्य भूल गए थे पर वृद्धा के वचन सुनते ही उनकी आँखें खुल गईं। कृतकर्म का पश्चाताप कर उन्होंने वृद्धा से माफ़ी माँगी और उसकी झोंपड़ी वापस दे दी।
लेखक की भाषा एवं विचारधारा
यह कहानी माधवराव सप्रे द्वारा लिखी गई है। माधवराव सप्रे हिंदी के आरंभिक कहानीकारों में से एक हैं। इस कहानी द्वारा उन्होंने यह बताया कि इंसान का अहंकार उसे अन्याय करने के लिए प्रेरित करता है। इस हेतु वह छल, झूठ, धोखा और षड्यंत्र करने से भी नहीं चूकता परंतु सत्य और ईमानदारी की चोट उसे हकीकत के धरातल पर ला पटकती है। यह कहानी छोटी और कर्तव्य श्रेष्ठ कहानी है। इसका कथानक बहुत ही सरल और सहज है।
कहानी में वृद्धा द्वारा सामाजिक संवेदना को वाणी दी गई है। इसमें बताया गया है कि मनुष्य को अपनी ज़रूरतों से अधिक की लालसा होने लगी है, जिसके कारण वह अपने पथ से भ्रष्ट हो जाता है। यह कहानी यथार्थ से जुड़ी हुई है। यह वर्ग-भेद पर आधारित कहानी है तथा इसमें एक गरीब वृद्धा के शोषण का चित्रण बखूबी किया गया है। ज़मींदार के रूप में अहंकार और स्वार्थ का चित्रण किया गया है अंत में एक गरीब वृद्धा द्वारा ज़मींदार का हृदय परिवर्तन सराहनीय है। लेखक ने एक छोटे-से कथानक को बड़ी ही कुशलता से प्रभावी बना दिया है।
एक टोकरी भर मिट्टी पाठ लेखक परिचय

हिंदी की प्रारंभिक कहानियों में ‘एक टोकरी भर मिट्टी’ का भी उल्लेख आता है। इसके लेखक माधवराव सप्रे हैं। ऐसा माना जाता है कि ये लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की प्रेरणा से हिंदी में आए थे। इनकी मातृभाषा मराठी थी। इनका जन्म दमोह (मध्य प्रदेश) में हुआ था। इन्होंने लोकमान्य तिलक के चर्चित ग्रंथ गीता रहस्य का मराठी से हिंदी में अनुवाद किया था। स्वदेशी आंदोलन और बायकॉट इनकी प्रमुख कृतियाँ हैं।
‘एक टोकरी भर मिट्टी’ जैसी कहानियाँ केवल घटनाएँ नहीं सुनातीं, बल्कि मिट्टी से उठते हुए उन प्रश्नों को उठाती हैं जो हमारे सामाजिक ताने-बाने में गाँठ बनकर अटके हैं।
एक टोकरी भर मिट्टी शब्दार्थ
पृष्ठ 76
श्रीमान् – धनी, संपन्न, संपत्तिशाली, शोभायुक्त, पुरुषों के नाम के पूर्व आदर सूचनार्थ लगाया जाने वाला शब्द।
अनाथ – जिसके माँ-बाप न हों, असहाय ।
अहाता – चारदीवारी।
पतोहू – बहू ।
फूट-फूट कर रोना – बुरी तरह से रोना (यह हिंदी का एक मुहावरा है। यह मुहावरा किसी व्यक्ति की गहरी पीड़ा को व्यक्त करता है।) ।
मृतप्राय – मरे हुए के समान ।
निष्फल – व्यर्थ, बेकार ।
बाल की खाल निकालना – अनावश्यक बारीकी में जाना या बहुत मीन-मेख निकालना (यह एक मुहावरा है। इसका अर्थ है किसी बात में बहुत गहराई से छानबीन करना, जो कि आवश्यक भी न हो) ।
थैली गरम करना – रिश्वत देना या मुँहमाँगी रकम देना (यह भी एक मुहावरा है जिसका अर्थ है कि किसी काम को करवाने के लिए पैसे देना खासकर जब कोई अनुचित काम करवाना हो) ।
अदालत – न्यायालय ।
कब्जा–अधिकार ।
पृष्ठ 77
स्मरण – याद करना।
आँसुओं की धारा बहना – बहुत रोना या लगातार आँसू बहाना (यह भी एक मुहावरा है) ।
आंतरिक – अंदर का ।
लज्जित होना – शर्म महसूस करना ।
गर्वित – गर्व महसूस करना ।
कर्तव्य – करने योग्य, जिम्मेदारी |
उपर्युक्त – ऊपर कहा गया।
आँखें खुलना – होश में आना (यह भी एक मुहावरा है। इसका मतलब किसी बात का एहसास होना)।
कृतकर्म – किया गया कार्य ।
पश्चाताप – दुख, पछतावा ।
Class 8 Hindi Chapter 6 Summary एक टोकरी भर मिट्टी
किसी श्रीमान् ज़मींदार के महल के पास एक गरीब, अनाथ वृद्धा की झोंपड़ी थी। ज़मींदार साहब को अपने महल का अहाता उस झोंपड़ी तक बढ़ाने की इच्छा हुई । वृद्धा से बहुतेरा कहा कि अपनी झोंपड़ी हटा ले, पर वह तो कई ज़माने से वहीं बसी थी । उसका प्रिय पति और इकलौता पुत्र भी उसी झोंपड़ी में मर गया था। पतोहू भी एक पाँच बरस की कन्या को छोड़कर चल बसी थी। अब यही उसकी पोती इस वृद्धावस्था में एकमात्र आधार थी। जब उसे अपनी पूर्वस्थि की याद आ जाती तो मारे दुख के फूट-फूट कर रोने लगती थी और जब से उसने अपने श्रीमान् पड़ोसी की इच्छा का हाल सुना, तब से वह मृतप्राय हो गई थी।
उस झोंपड़ी में उसका ऐसा कुछ मन लग गया था कि बिना मरे वहाँ से वह निकलना ही नहीं चाहती थी। श्रीमान के सब प्रयत्न निष्फल हुए, तब वे अपनी ज़मींदारी चाल चलने लगे। बाल की खाल निकालने वाले वकीलों की थैली गरम कर उन्होंने अदालत से उस झोंपड़ी पर अपना कब्ज़ा कर लिया और वृद्धा को वहाँ से निकाल दिया । बिचारी अनाथ तो थी ही, पास-पड़ोस में कहीं जाकर रहने लगी।

एक दिन श्रीमान् उस झोंपड़ी के आस-पास टहल रहे थे और लोगों को काम बतला रहे थे कि इतने में वह वृद्धा हाथ एक टोकरी लेकर वहाँ पहुँची। श्रीमान् ने उसको देखते ही अपने नौकरों से कहा कि उसे यहाँ से हटा दो। पर वह गिड़गिड़ाकर बोली, “महाराज, अब तो झोंपड़ी तुम्हारी ही हो गई है। मैं उसे लेने नहीं आई हूँ। महाराज क्षमा करें तो एक विनती है।” ज़मींदार साहब के सिर हिलाने पर उसने कहा, “जब से यह झोंपड़ी छूटी है, तब से मेरी पोती ने खाना-पीना छोड़ दिया है। मैंने बहुत कुछ समझाया, पर वह एक नहीं मानती। यही कहा करती है कि अपने घर चल, वहीं रोटी खाऊँगी। अब मैंने यह सोचा कि इस झोंपड़ी में से एक टोकरी भर मिट्टी लेकर उसी का चूल्हा बनाकर रोटी पकाऊँगी। इससे भरोसा है कि वह रोटी खाने लगेगी। महाराज कृपा करके आज्ञा दीजिए तो इस टोकरी में मिट्टी ले जाऊँ!” श्रीमान् ने आज्ञा दे दी।
वृद्धा झोंपड़ी के भीतर गई। वहाँ जाते ही उसे पुरानी बातों का स्मरण हुआ और उसकी आँखों से आँसू की धारा बहने लगी। अपने आंतरिक दुख को किसी तरह सँभाल कर उसने अपनी टोकरी मिट्टी से भर ली और हाथ से उठाकर बाहर ले आई। फिर हाथ जोड़कर श्रीमान् से प्रार्थना करने लगी कि, “महाराज, कृपा करके इस टोकरी को ज़रा हाथ लगाइए जिससे कि मैं उसे अपने सिर पर धर लूँ।”
ज़मींदार साहब पहले तो बहुत नाराज हुए। पर जब वह बार-बार हाथ जोड़ने लगी और पैरों पर गिरने लगी तो उनके भी मन में कुछ दया आ गई। किसी नौकर से न कहकर आप ही स्वयं टोकरी उठाने को आगे बढ़े। ज्यों ही टोकरी को हाथ लगाकर ऊपर उठाने लगे त्यों ही देखा कि यह काम उनकी शक्ति के बाहर है। फिर तो उन्होंने अपनी सब ताकत लगाकर टोकरी को उठाना चाहा, पर जिस स्थान पर टोकरी रखी थी, वहाँ से वह एक हाथ भी ऊँची न हुई। वह लज्जित होकर कहने लगे कि, “नहीं, यह टोकरी हमसे न उठाई जाएगी।”
यह सुनकर वृद्धा ने कहा, “महाराज, नाराज न हों… आपसे तो एक टोकरी भर मिट्टी उठाई नहीं जाती और इस झोंपड़ी में तो हजारों टोकरियाँ मिट्टी पड़ी है। उसका भार आप जन्म-भर कैसे उठा सकेंगे? आप ही इस बात पर विचार कीजिए।”
ज़मींदार साहब धन-मद से गर्वित हो अपना कर्तव्य भूल गए थे पर वृद्धा के उपर्युक्त वचन सुनते ही उनकी आँखें खुल गईं। कृतकर्म का पश्चाताप कर उन्होंने वृद्धा से क्षमा माँगी और उसकी झोंपड़ी वापस दे दी।
– माधवराव सप्रे