Teachers often provide Class 8 Hindi Notes Malhar Chapter 3 एक आशीर्वाद Summary in Hindi Explanation to simplify complex chapters.
एक आशीर्वाद कविता Class 8 Summary in Hindi
एक आशीर्वाद Class 8 Hindi Summary
एक आशीर्वाद कविता का सारांश – एक आशीर्वाद Class 8 Summary in Hindi
दुष्यंत कुमार की कविता ‘एक आशीर्वाद’ एक प्रेरणादायक और सशक्त रचना है जो सपनों को बड़ा रखने, उन्हें साकार करने और संघर्ष करने के लिए आत्मनिर्भर बनने का संदेश देती है।
‘एक आशीर्वाद’ कविता का सार इस प्रकार है-
इस कविता में कवि आशीर्वाद देते हुए कहते हैं कि-
- बड़े सपने देखें – उनके सपने बड़े हों और वे केवल कल्पनाओं में न रहें, बल्कि वास्तविकता की ज़मीन पर उतरकर उन्हें पूरा करने के लिए प्रयास करें।
- लक्ष्यों के लिए मचलना सीखें – जिस तरह चाँद-तारों जैसी अप्राप्य ऊँचाइयों के लिए बच्चे रूठते-मचलते हैं, उसी तरह व्यक्ति भी अपने बड़े लक्ष्यों को पाने के लिए बेचैन रहे और उनके लिए संघर्ष करें।
- खुशी और उत्साह – जीवन में हँसते – मुसकुराते रहें और गाते रहें, यानी हमेशा उत्साह और सकारात्मकता बनाए रखें।
- अनुभवों से सीखें – हर दीये की रोशनी देखकर ललचाएँ और भले ही उँगली जल जाए, लेकिन नए अनुभवों को पाने से न डरें। इससे यह दर्शाता है कि जीवन में जोखिम लेना और गलतियों से सीखना महत्त्वपूर्ण है।
- आत्मनिर्भर बने-अंततः, कवि यह आशीर्वाद देते हैं कि व्यक्ति अपने पैरों पर खड़ा हो, यानी आत्मनिर्भर बने और अपने जीवन का मार्ग स्वयं प्रशस्त करे ।

संक्षेप में, ‘एक आशीर्वाद’ कविता व्यक्ति को बड़े सपने देखने, उन्हें पूरा करने के लिए संघर्ष करने, अनुभवों से सीखने और आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा देती है। यह एक सकारात्मक और उत्साहवर्धक संदेश है जो हर व्यक्ति को अपने जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करता है ।
एक आशीर्वाद कविता कीव परिचय

दुष्यंत कुमार हिंदी के लोकप्रिय रचनाकारों में से एक हैं। इनका जन्म बिजनौर (उत्तर प्रदेश) में हुआ था। बहुत कम समय में ही इन्होंने हिंदी साहित्य को (1933-1975) विविधतापूर्ण रचनाओं एवं जीवंत भाषा से समृद्ध किया। साये में धूप इनका सर्वाधिक चर्चित गज़ल संग्रह है। इनका संपूर्ण रचना-संसार दुष्यंत कुमार रचनावली चार खंडों में प्रकाशित है।
![]()
एक आशीर्वाद कविता हिंदी भावार्थ Pdf Class 8
1. जा,
तेरे स्वप्न बड़े हों
भावना की गोद से उतरकर
जल्द पृथ्वी पर चलना सीखें
चाँद-तारों-सी अप्राप्य सच्चाइयों के लिए
रूठना-मचलना सीखें (पृष्ठ 36)
शब्दार्थ :
स्वप्न – सपना ।
पृथ्वी – धरती ।
अप्राप्य – जो प्राप्त न हो।
मचलना – हठ करना।
भावार्थ- कवि सपनों से संबोधित होकर कहता है- तेरे सपने ऊँचे और महान हों। लेकिन वे सिर्फ कल्पनाओं और भावनाओं की गोद में पलने वाले न रहें। अब समय है कि वे ज़मीन पर उतरें, धरातल पर चलना सीखें। सपनों को केवल आकाश में उड़ते रहना नहीं, बल्कि सच्चाई की ज़मीन पर चलना भी आना चाहिए। वे चाँद-सितारों जैसी दूर- दूर की असंभव लगने वाली सच्चाइयों के लिए रूठना मचलना (संघर्ष करना) भी सीखें। यानी, अपने सपनों को पाने के लिए भावुकता से आगे बढ़कर संघर्ष, प्रयास और जिद की भी जरूरत है।
संक्षेप में, कवि यह कहता है कि सपने बड़े और ऊँचे हों, लकिन वे केवल कल्पना न बने रहें। उन्हें साकार करने के लिए धरातल पर संघर्ष करना जरूरी है। सपनों को केवल देखा नहीं जाता, उन्हें जिया और पाया भी जाता है – और इसके लिए मेहनत, धैर्य और जिद चाहिए ।

2. हँसें
मुसकराएँ
गाएँ
हर दीये की रोशनी देखकर ललचाएँ
उँगली जलाएँ
अपने पाँवों पर खड़े हों।
जा,
तेरे स्वप्न बड़े हों। (पृष्ठ 36)
शब्दार्थ :
दीये – दीपक ।
रोशनी – प्रकाश ।
पाँव – पैर ।
तेरे – तुम्हारे ।
स्वप्न – सपना ।
![]()
भावार्थ – यह काव्यांश आत्मनिर्भरता, आत्मविश्वास और प्रेरणा का संदेश देता है । कवि कहता है कि तुम्हें दूसरों की सफलता या चमक देखकर लालच नहीं करना चाहिए। तुम्हें अपने अंदर की शक्ति को पहचानना चाहिए, अपने बलबूते पर खड़ा होना चाहिए और अपने सपनों को साकार करने के लिए मेहनत करनी चाहिए।
यह एक प्रेरणादायक संदेश है कि हमें दूसरों की रोशनी से प्रभावित होने के बजाय अपनी रोशनी खुद जलानी चाहिए और अपने जीवन का रास्ता खुद तय करना चाहिए।
Class 8 Hindi Chapter 3 Summary एक आशीर्वाद
जा,
तेरे स्वप्न बड़े हों
भावना की गोद से उतरकर
जल्द पृथ्वी पर चलना सीखें
चाँद-तारों-सी अप्राप्य सच्चाइयों के लिए
रूठना-मचलना सीखें
हँसें
मुसकराएँ
गाएँ
हर दीये की रोशनी देखकर ललचाएँ
उँगली जलाएँ अपने पाँवों पर खड़े हों।
जा,
तेरे स्वप्न बड़े हों।
— दुष्यंत कुमार