Students must start practicing the questions from CBSE Sample Papers for Class 9 Hindi B with Solutions Set 10 are designed as per the revised syllabus.
CBSE Sample Papers for Class 9 Hindi B Set 10 with Solutions
समय: 3 घंटे
पूर्णांक : 80
सामान्य निर्देश
निम्नलिखित निर्देशों को बहुत सावधानी से पढ़िए और उनका सख्ती से अनुपालन कीजिए
- इस प्रश्न-पत्र में चार खंड है-क, ख, ग और घ।
- इस प्रश्न-पत्र में कुल 17 प्रश्न हैं। सभी प्रश्न अनिवार्य हैं।
- प्रश्न-पत्र में आंतरिक विकल्प दिए गए हैं।
- प्रश्नों के उत्तर दिए गए निर्देशों का पालन करते हुए लिखिए।
खंड ‘क’
(अपठित बोध) (14 अंक)
इस खंड में अपठित गद्यांश से संबंधित तीन बहुविकल्पीय (1×3=3) और दो अतिलघूत्तरात्मक व लघूत्तरात्मक (2×2=4) प्रश्न दिए गए हैं।
प्रश्न 1.
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उस पर आधारित दिए गए प्रश्नों के उपयुक्त उत्तर लिखिए। (7)
विज्ञापनों का संसार बहुत विस्तृत है। सर्वाधिक विज्ञापन वस्तुओं के होते हैं। साबुन, तेल, कपड़े, कंप्यूटर, टी.वी. आदि के विज्ञापन व्यापारिक विज्ञापन कहलाते हैं। सामाजिक-धार्मिक विज्ञापनों में सामाजिक कार्यक्रमों, महापुरुषों, यज्ञों, समारोहों, कवि-सम्मेलनों आदि के विज्ञापन आते हैं। शैक्षिक विज्ञापनों में पुस्तकों, पत्र-पत्रिकाओं, कोचिंग कक्षाओं, विद्यालयों आदि के विज्ञापन आते हैं। हमारी सारी दिनचर्या विज्ञापनों से प्रभावित होती है।
हम दुकान पर नमक माँगते हैं-टाटा का, पेस्ट माँगते हैं-कोलगेट का, साबुन माँगते हैं- लक्स का, शेविंग क्रीम माँगते हैं-पामोलिव की, सिरदर्द की गोली माँगते हैं-एनासिन या सैरिडॉन। जरा पूछें-क्यों? क्योंकि हमारे रेडियो, टी.वी., समाचार-पत्र दिन में बार-बार इन्हीं की रट लगाए रहते हैं। ये हमारे दिलों-दिमाग पर इस तरह प्रभावी हो जाते हैं कि हम दुकानदार से चाहे-अनचाहे इन्हीं की माँग कर बैठते हैं।
विज्ञापनों का संसार बड़ा मायावी है। यहाँ कुरूप और भद्दे लोगों के भी अति सुंदर चित्र पेश किए जाते हैं। इनके द्वारा बेकार सामग्री को बहुत प्रभावशाली बनाकर प्रस्तुत किया जाता है। टी.वी. तो चित्रों, शब्दों और संवादों के माध्यम से बहुत बड़ा श्रमजाल फैला देता है, मानो एक हफ़्ते में कोई भी फ़र्राटेदार अंग्रेज़ी बोलना सीख लेगा, एक महीने में गंजे सिर में बाल उग आएँगे आदि। ऐसे भ्रामक विज्ञापनों पर तुरंत रोक लगनी चाहिए। सरकार को विज्ञापनों की सत्यता की जाँच अवश्य करनी चाहिए तथा भ्रामक विज्ञापनदाताओं पर कठोर जुर्माना लगाना चाहिए।
(क) विज्ञापनों की दुनिया को कैसी बताया गया है? (1)
(i) वास्तविक
(ii) पारंपरिक
(iii) मायावी
(iv) इंद्रलोक
उत्तर:
(iii) मायायी विज्ञापनों की दुनिया को मायावी बराया गया है, क्योंकि इनमें कुरूप लोगों के अति सुंदर चित्र पेश किए जाते हैं तथा बेकार सामग्री को अत्यंत प्रभावशाली बनाकर प्रस्तुत किया जाता है, जो लोगों को श्रमित करता है।
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(ख) विज्ञापनों के सर्वाधिक विस्तृत भ्रमजाल का माध्यम क्या है? (1)
(i) रेडियो
(ii) टेलीविजन
(iii) पुस्तक
(iv) कंप्यूटर
उत्तर:
(ii) टेलीविजन विज्ञापनों के सर्वाधिक विस्तूत भ्रमजाल का माध्यम टेलीविजन है, क्योंकि यह अपने चित्र, शब्द और संवादों के द्वारा दर्शक वर्ग को अपनी ओर आकर्षित कर, उन्हें विशेष रूप से प्रभावित करता है।
(ग) कथन (A) विज्ञापनों के माध्यम से वेकार सामग्री को प्रभावशाली बनाया जाता है। (1)
कारण ( R ) विज्ञापनों में प्रस्तुत सामग्री अकसर वास्तविकता से भिन्न होती है।
कूट
(i) कथन (A) और कारण (R) दोनों सहीं हैं तथा कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या करता है।
(ii) कथन ( A ) और कारण ( R ) दोनों सहीं हैं, परंतु कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या नहीं करता है।
(iii) कथन (A) सही है, किंतु कारण (R) गलत है।
(iv) कथन (A) गलत है, किंतु कारण (R) सही है।
उत्तर:
(i) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या करता है। गद्यांश के अनुसार विज्ञापनों में वस्तुओं को अधिक प्रभावशाली और आकर्षक तरीके से प्रस्तुत किया जाता है, जिससे सामग्री की वास्तविकता छुपाई जाती है। यह दर्शाता है कि विज्ञापन अकसर वास्तविकता से भिन्न होते हैं और उपभोक्ताओं को ज्रमित करते है।
(घ) प्रस्तुत गद्यांश में कौन-कौन से विज्ञापनों की चर्चा की गई है? स्पष्ट कीजिए। (2)
उत्तर:
प्रस्तुत गहांश में अनेक विज्ञापनों की चर्चां की गई है; जैसेवस्तुओं के विज्ञापन-सायुन, कपड़े, कंप्यूटर, टी. वी. आदि, सामाजिक-धार्मिक विज्ञापन-सामाजिक कार्यक्रमों, महापुरुषों, कवि सम्मेलन आदि, शैक्षिक विज्ञापन-पुस्तकों, कोचिंग-कक्षाओं, विद्यालय आदि के विज्ञापन।
(ङ) भ्रामक विज्ञापनों हेतु क्या किया जाना चाहिए? (2)
उत्तर:
গ्रामक विज्ञापनों पर तुरंत रोक लगाई जानी चाहिए। इस दिशा में सरकार का कर्त्तव्य है कि वह विज्ञापनों की सत्यता की कठोरता से जाँच करे तथा कोई भी त्रुटि पाए जाने पर कठोर जुमनि का प्रावधान बनाए। हमें भी विज्ञापनों पर आँख बंद करके भरोसा नहीं करना चाहिए।
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प्रश्न 2.
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उस पर आधारित दिए गए प्रश्नों के उपयुक्त उत्तर लिखिए।
हम चाहते हैं कि भविष्य में अच्छे नागरिक मिलें, तो हमें विद्यार्थियों को सभी दृष्टि से योग्य बनाना पड़ेगा। पहली बात उनमें राष्ट्रभक्ति की भावना का संचार कराने की है। छमारा विद्यार्थी वर्ग स्वयं को राष्ट्र की धरोहर समझकर अपनी रक्षा करे। उसे यह बात मन में ठान लेनी है कि उसके ऊपर भारत की रक्षा का भार है। उसे स्मरण रखना होगा कि वह उस महान राष्ट्र का नागरिक होने जा रहा है, जिसने आदिकाल में ही ‘वसुषैव कुटुंबकम्’ की उद्घोषणा की थी। उसे इसका हमेशा पालन करना है। दूसरी बात यह है कि उसे कर्मठ बनना है। आलस्य को अपना महान शत्रु समझकर उसकी छाया से भी घृणा करनी है। विदेशों से होड़ करने के लिए हमारे छात्रों को समय से काम करने की आदत डालनी होगी। अधिक समय तक काम करने के लिए धैर्य के गुण का विकास करना होगा। आज सामूहिक प्रयत्नों की आवश्यकता है, तथी देश से दरिद्रता खत्म होगी और अज्ञान का अंधकार दूर होगा।
(क) प्रस्तुत गद्यांश किस विषय-वस्तु पर आधारित है? (1)
(i) देश की आर्थिक स्थिति और सुधार
(ii) विदेशी प्रतियोगिता और तैयारी
(iii) विद्यार्थी जीवन और नैतिक शिक्षा
(iv) सामाजिक और सांस्कृतिक विकास
उत्तर:
(iii) विद्यार्थी जीवन और नैतिक शिक्षा प्रस्तुत गद्यांश विद्यार्थी जीवन और नैतिक शिक्षा पर आधारित है। इसमें विद्यार्थियों को राष्ट्रभावित, कर्मठता और धैर्य के गुणों को अपनाने की सलाह दी गई है, ताकि वे एक जिम्मेदार नागरिक बन सके और देश के विकास में योगदान कर सकें।
(ख) देश से दरिद्रता और अज्ञानता का अंधकार कैसे दूर होगा? (1)
(i) देश द्वारा
(ii) सामूहिक प्रयत्नों द्वारा
(iii) विद्यार्थियों की रक्षा द्वारा
(iv) अक्षानता की छाया द्वारा
उत्तर:
(ii) सामूहिक प्रयत्नों द्वारा देश के विद्यार्थियों और नागरिकों के द्वारा देश के विकास के लिए किए गए सामूहिक प्रयत्नों द्वारा देश से दरिद्रता और अज्ञानता का अंधकार दूर होगा।
(ग) कथन (A) विद्यार्थियों को कर्मठ बनना है।
कारण (R) आलस्य को अपना महान शत्रु समझकर उससे घृणा करनी है। (1)
कूट
(i) कथन ( A ) और कारण ( R ) दोनों सही हैं तथा कारण ( R ), कथन ( A ) की सही व्याख्या करता है।
(ii) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही है, परंतु कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या नहीं करता है।
(iii) कथन (A) सही है, किंतु कारण (R) गलत है।
(iv) कथन (A) गलत है, किंतु कारण (R) सही है।
उत्तर:
(i) कथन (A) और कारण (R) दोनों सहीं हैं तथा कारण (R), कथन (A) सही व्याख्या करता है। गद्यांश के अनुसार, विद्यार्थी को कर्मठ बनना है और आलस्य को त्यागना है, क्योंकि आलस्य मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु होता है। आलस्य मनुष्य को बन्नति की तरफ नहीं, बल्कि अवनति की ओर अग्रसर करता है।
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(घ) वियार्थियों को विदेशों से होड़ करने के लिए क्या करना चाहिए? स्पष्ट कीजिए। (2)
उत्तर:
विद्यार्थियों को विदेशों से होड़ करने के लिए समय से कार्य करने की आदत डालनी चाहिए। इसके लिए विद्यार्थियों को अधिक समय तक कार्य करने के लिए धैर्य के गुण का विकास करना होगा।
(ङ) देश के विकास के लिए विद्यार्थियों को क्या करना चाहिए? (2)
उत्तर:
देश के विकास के लिए विद्यार्थियों को स्वयं को राष्ट्र की धरोहर समझना चाहिए तथा अपनी रक्षा करनी चाहिए। उनको यह बात मन में निश्चित कर लेनी चाहिए कि देश की रक्षा का भार उनके कपर है।
खंड ‘ख’
(व्यावहारिक व्याकरण) (16 अंक)
व्याकरण के लिए निर्धारित विषयों पर अतिलघूत्तरात्मक 20 प्रश्न दिए गए हैं, जिनमें से केवल 16 प्रश्नों (1×16=16) के उत्तर देने हैं।
प्रश्न 3.
निर्देशानुसार ‘शब्द और पद’ पर आधारित तीन प्रश्नों में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर दीजिए। (1×2=2)
(क) एकार्थी तथा अनेकार्थी शब्द में अंतर स्पष्ट कीजिए। (1)
उत्तर:
जिन शब्दों का प्रयोग केवल एक ही अर्थ में किया जा सकता है, उन्हें एकार्थी शब्द कहते हैं तथा जिन शब्दों का प्रयोग अनेक अर्थों के लिए किया जा सकता है, वे अनेकार्थी शब्द कहलाते हैं।
(ख) संज्ञा किसे कहते हैं? उदाहरण सहित लिखिए। (1)
उत्तर:
जिन शब्दों से किसी प्राणी, व्यक्ति, वस्तु, स्थान या भाव का बोध हो, उसे संज्ञा कहते हैं। उदाहरण- राम, पुस्तक, सुंदरता, कुत्ता।
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(ग) विशेषण किसे कहते हैं? (1)
उत्तर:
‘संज्ञा’ अथवा ‘सर्वनाम’ की विशेषता प्रकट करने वाले शब्द ‘विशेषण’ कहलाते हैं; जैसे-सुंदर, मोटा, काला आदि।
प्रश्न 4.
निर्देशानुसार ‘अनुस्वार व अनुनासिक’ पर आधारित तीन प्रश्नों में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर दीजिए। (1×2=2)
(क) निम्नलिखित शब्दों में से अनुस्वार चिह्नों के प्रयोग वाले दो शब्द छाँटकर लिखिए (1)
प्रपंच, हँसमुख, व्यंजन, बूँद
उत्तर:
प्रपंच, व्यंजन
(ख) निम्नलिखित शब्दों में से अनुनासिक चिह्हों के प्रयोग वाले दो शब्द छाँटकर लिखिए (1)
चाँद, चंदा, चहुँमुखी, हुंकार
उत्तर:
चाँद, चहुँमुखी
(ग) निम्नलिखित शब्दों में से अनुनासिक व अनुस्वार शब्दों को अलग-अलग छाँटकर लिखिए (1)
पंछी, बाँधना, पंकज, साँस, पंडित, गाँव
उत्तर:
अनुनासिक बाँधना, गाँव, साँस
अनुस्वार पंछी, पंकज, पंडित
प्रश्न 5.
निर्देशानुसार ‘उपसर्ग और प्रत्यय’ पर आधारित पाँच प्रश्नों में से किन्हीं चार प्रश्नों के उत्तर दीजिए। (1×4=4)
(क) ‘निडर’ और ‘विक्रय’ शब्दों में प्रयुक्त मूल शब्द व उपसर्ग को अलग-अलग करके लिखिए। (1)
उत्तर:
नि (उपसर्ग), डर (मूल शब्द)
वि (उपसर्ग), क्रय (मूल शब्द)
(ख) ‘लघुता’ और ‘शक्तिशाली’ शब्दों में प्रयुक्त मूल शब्द व प्रयुक्त प्रत्यय को अलग-अलग करके लिखिए। (1)
उत्तर:
लघु (मूल शब्द), ता (प्रत्यय)
शक्ति (मूल शब्द), शाली (प्रत्यय)
(ग) ‘संचालन’ और ‘प्रवास’ शब्दों में प्रयुक्त मूल शब्द व उपसर्ग को अलग-अलग करके लिखिए। (1)
उत्तर:
सम् (उपसर्ग), चालन (मूल शब्द)
प्र (उपसर्ग), वास (मूल शब्द)
(घ) ‘आणविक’ और ‘राष्ट्रीय’ शब्दों में प्रयुक्त मूल शब्द व प्रत्यय को अलग-अलग करके लिखिए। (1)
उत्तर:
अणु (मूल शब्द), इक (प्रत्यय)
राष्ट्र (मूल शब्द), ईय (प्रत्यय)
(ङ) निम्नलिखित प्रत्ययों से दो-दो शब्दों की रचना कीजिए (1)
(i) पन
(ii) कार
उत्तर:
(i) पन अकेलापन, अपनापन
(ii) कार गीतकार, पत्रकार
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प्रश्न 6.
निर्देशानुसार ‘स्वर संधि’ पर आधारित चार प्रश्नों में से किन्हीं तीन प्रश्नों के उत्तर दीजिए। (1×3=3)
(क) ‘अति + अंत’ का संधि युक्त शब्द क्या होगा? इसमें कौन-सी संधि है? (1)
उत्तर:
‘अति + अंत’ का संधि युक्त शब्द ‘अत्यंत’ होगा। यहाँ यण संधि है।
(ख) ‘शयन’ शब्द में कौन-सी संधि है? इसका संधि-विच्छेद क्या होगा? (1)
उत्तर:
‘शयन’ शब्द में अयादि संधि है। इसका संधि-विच्छेद ‘शे + अन’ होगा।
(ग) ‘नरोत्तम’ शब्द में कौन-सी संधि है? (1)
उत्तर:
‘नरोत्तम’ शब्द में गुण संधि है।
(घ) ‘सेवार्थ’ शब्द का संधि-विच्छेद करके इसमें प्रयुक्त संधि का नाम लिखिए। (1)
उत्तर:
‘सेवार्थ’ शब्द का संधि-विच्छेद ‘सेवा + अर्थ’ है। इसमें दीर्घ संधि प्रयुक्त है।
प्रश्न 7.
निर्देशानुसार ‘विराम चिह्न’ पर आधारित तीन प्रश्नों में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर दीजिए। (1×2=2)
(क) लिखते समय कुछ अंश छूट जाने पर किस चिह्न को लगाकर उसके ऊपर लिख दिया जाता है? (1)
उत्तर:
हंसपद चिह्न (∧) या त्रुटिसूचक चिह्न।
(ख) अग्निपथ कवि हरिवंशराय बच्चन की प्रसिद्ध कृति है। (1)
उपर्युक्त वाक्य को सही चिह्नों का प्रयोग करके लिखिए।
उत्तर:
‘अग्निपथ’ कवि हरिवंशराय बच्चन की प्रसिद्ध कृति है।
(ग) अतिथि! तुम्हारे जाने के लिए यह उच्च समय अर्थात् हाईटाइम है। (1)
उपर्युक्त वाक्य में प्रयोग किए गए चिह्नों के नाम लिखिए।
उत्तर:
वाक्य में विस्मयवाचक (!) और पूर्ण विराम (।) चिह्तों का प्रयोग हुआ है।
प्रश्न 8.
निर्देशानुसार ‘अर्थ की दृष्टि से वाक्य भेद’ पर आधारित चार प्रश्नों में से किन्हीं तीन प्रश्नों के उत्तर दीजिए। (1×3=3)
(क) ‘तुम्हें अब घर चले जाना चाहिए।’ आज्ञावाचक वाक्य में परिवर्तित कीजिए। (1)
उत्तर:
तुम अभी घर जाओ।
(ख) ‘यह बात सत्य नहीं है कि महादेवी वर्मा ने गिल्लू की देखभाल नहीं की।’ विधानवाचक वाक्य में परिवर्तित कीजिए। (1)
उत्तर:
यह सत्य है कि महादेवी वर्मा ने गिल्लू की वहुत देखभाल की।
(ग) ‘क्या आज तुम विद्यालय नहीं जाओगे?’ अर्थ के आधार पर वाक्य का भेद बताइए। (1)
उत्तर:
प्रस्तुत वाक्य अर्थ के आधार पर प्रश्नवाचक वाक्य है।
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(घ) ‘हम इस सर्दी में भी पहाड़ों की ओर बाहर घूमने जाते हैं।’ इच्छावाचक वाक्य में परिवर्तित कीजिए। (1)
उत्तर:
काश! हम सदीं में बाहर घूमने जाते।
खंड ‘ग’
(पाठ्यपुस्तक एवं पूरक पाठ्यपुस्तक) (30 अंक)
इस खंड में पाठ्यपुस्तक एवं पूरक पाठ्यपुस्तक से प्रश्न पूछे गए हैं, जिनके निर्धारित अंक प्रश्न के सामने अंकित हैं।
प्रश्न 9.
निम्नलिखित पठित गद्यांश पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए। (1×5=5)
महादेव के हाथों के लिखे लेख, टिप्पणियाँ, पत्र, गाँधीजी के व्याख्यान, प्रार्थना-प्रवचन, मुलाकातें, वार्तालापों पर लिखी गई टिप्पणियाँ, सब कुछ फुलस्केप के चौथाई आकारवाली मोटी अभ्यास पुस्तकों में लंबी लिखावट के साथ, जेट की सी गति से लिखा जाता था। वे ‘शॉटैंड’ जानते नहीं थे। बड़े-बड़े देशी-विदेशी राजपुरुष, राजनीतिज, देश-विदेश के अग्रगण्य समाचार-पत्रों के प्रतिनिधि, अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के संचालक, पादरी, ग्रंथकार आदि गाँधीजी से मिलने के लिए आते थे।
ये लोग खुद या इनके साथी-संगी भी गाँधीजी के साथ बातचीत को ‘शॉर्टैंड’ में लिखा करते थे। महादेव एक कोने में बैठे-बैठे अपनी लंबी लिखावट में सारी चर्चा को लिखते रहते थे। मुलाकात के लिए आए हुए लोग अपने मुकाम पर जाकर सारी बातचीत को टाइप करके जब उसे गाँधीजी के पास ‘ओके’ करवाने के लिए पहुँचते तो भले ही उनमें कुछ भूलें या कमियाँ-खामिया मिल जाएँ, लेकिन महादेव की डायरी में या नोट-बही में मजाल है कि कॉमा मात्र की भी भूल मिल जाए। गाँधीजी कहते : महादेव के लिखे ‘नोट’ के साथ थोड़ा मिलान कर लेना था न और लोग दाँतों तले अँगुली दबाकर रह जाते।
(क) महादेव के नोट्स में क्या अद्वितीयता थी? (1)
(i) वे केवल शॉटहैंड में लिखते थे
(ii) उनके नोट्स में कोई भूल नहीं होती थी
(iii) वे हमेशा टाइप किए हुए होते थे
(iv) उनके नोट्स को गाँधीजी कभी चेक नहीं करते थे
उत्तर:
(ii) उनके नोट्स में कोई भूल नहीं होती धी गच्चांश के अनुसार, जो लोग बैठक के लिए आते थे वे मुकाम पर जाकर पूरी बातचीत टाइप करके जब इसे ‘ओंके’ करखाने के लिए गाँधीजी के पास पहुँचते तो भले ही उनमें कुछ भूलें या कमियों- खामियाँ मिल जाएँ, लेकिन महादेव के नोट्स में कॉमा मात्र की भी भूल नहीं होती थी।
(ख) गाँधीजी के पास कौन-कौन लोग मुलाकात के लिए आते थे? (1)
(i) केवल देशी राजपुरुष
(ii) केवल विदेशी राजपुरुष
(iii) केवल अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के संचालक
(iv) देशी-विदेशी राजपुरुष, राजनीतिज, पत्रकार, पादरी, ग्रंथकार
उत्तर:
(iv) देशी-विदेशी राजपुरुष, राजनीतिज्ञ, पत्रकार, पादरी, ग्रंथकार गद्धांश में स्पष्ट किया गया है कि कई प्रकार के लोग गाँधीजी से मिलने आते थे, जिनमें देशी-विदेशी राजपुरुष, राजनीतिज, पत्रकार, पादरी, प्रंथकार आदि शामिल थे।
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(ग) गाँधीजी से मिलने वाले लोग बातचीत को कैसे दर्ज करते थे? (1)
(i) महादेव के साथ मिलकर
(ii) ऑडियो रिकॉर्डिंग करके
(iii) शॉटहैंड में लिखकर
(iv) ये सभी
उत्तर:
(iii) शॉर्टैंड में लिखकर गद्धांश के अनुसार, लोग स्वयं या इनके साथी-संगी भी गाँधीजी के साथ बातचीत को ‘शाँटहैंड’ में लिखा करते थे।
(घ) कथन (A) गाँधीजी महादेव के लिखे ‘नोट’ की सटीकता पर भरोसा करते थे। (1)
कारण (R) महादेव की लिखावट में कोई गलती नहीं होती थी।
कूट
(i) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या करता है।
(ii) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं, परंतु कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या नहीं करता है।
(iii) कथन (A) सही है, किंतु कारण (R) गलत है।
(iv) कथन (A) गलत है, किंतु कारण (R) सही है।
उत्तर:
(i) कथन (A) और कारण (R) दोनों सहीं हैं तथा कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या करता है। गद्यांश के अनुसार, गाँधीजी महादेव के लिखे ‘नोट’ की सटीकता पर भरोसा करते थे, क्योंकि महादेव की लिखावट में कोई गलती नहीं होती थी। वे नोट्स में कॉमा मात्र की भी भूल नहीं करते थे।
(ङ) महादेव के लेखन के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सत्य है? (1)
(i) वे शॉटहैंड में लिखते थे।
(ii) वे फुलस्केप के चौथाई आकारवाली मोटी अभ्यास पुस्तकों में लिखते थे।
(iii) वे केवल अपनी टिप्पणियाँ टाइप करके रखते थे।
(iv) वे केवल गाँधीजी के व्याख्यान लिखते थे।
उत्तर:
(ii) वे फुलस्केप के चौथाई आकारवाली मोटी अथ्यास पुस्तकों में लिखते थे। गधांश के अनुसार, महादेव के हाथों के लिखे लेख, टिप्पणियाँ आदि सब कुछ वे फुलस्केप के चौथाई आकारवाली मोटी अभ्यास पुस्तकों में लिखते थे।
प्रश्न 10.
गद्य खंड पर आधारित चार प्रश्नों में से किन्हीं तीन प्रश्नों के उत्तर लगभग 25-30 शब्दों में लिखिए। (2×3=6)
(क) लोग खरबूजे वाली स्त्री से घृणा क्यों कर रहे थे? ‘दुःख का अधिकार’ पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए। (2)
उत्तर:
लोग खरबूले वाली स्थी से इसलिए घृणा कर रहे थे, क्योंकि उसके जवान लडके की एक दिन पहले ही मृत्यु हुई थी और वह अपने लड़के की मृत्यु को भूलकर दुकान लगाकर बैठी थी। लोगों के अनुसार, यह कार्य सही नहीं या, क्योंकि उसके लड़के की तेरहवीं तक कोई कार्य नहीं होना चाहिए था।
(ख) ‘एवरेस्ट : मेरी शिखर यात्रा’ पाठ के आधार पर बताइए कि डॉ. मीनू मेहता कौन थीं तथा उन्होंने किस प्रकार अन्य यात्रियों को सहयोग किया? उनके सहयोग से आपको क्या सीख मिलती है? (2)
उत्तर:
‘एवरेस्ट : मेरी शिखर की यात्रा’ में डॉक्टर मीनू मेहता एक अन्व पर्वतारोही थीं, जो लेखिका बहेंद्री पाल के दल में झामिल थीं। उन्होंने शिखर यात्रा में शामिल अन्य सभी सदस्यों को एल्वुमीनियम की सीढ़ियों से अस्थायी पुलों को बनाने, लट्टों और रस्सियों का उपयोग करने, वर्फ़ की आडी-तिरही दीवारों पर रस्सियों को बाँधने और अन्य अभियांत्रिकी कार्बों के बारे में विस्तृत जानकारी देकर सहयोग किया। उनके इस सहखोग से हमें सीख मिलती है कि कठिन परिस्थितियों में तकनीकी ज्ञान और सहयोग की भावना टीम को लक्ष्य तक पतुँचाने में अत्यंत सहायक होती है। सच्चा सहयोगी वही होता है, जो अपने कौशल से दूसरों का मार्गदर्शन करें।
(ग) “तुम्हारे सामीप्य की बेला एकाएक यों रबर की तरह खिंच जाएगी, इसका मुझे अनुमान न था”-पंक्ति का अभिप्राय स्पष्ट करते हुए बताइए कि लेखक ने ऐसा क्यों कहा? ‘तुम कब जाओगे, अतिथि’ पाठ के आधार पर लिखिए। (2)
उत्तर:
‘तुम कब जाओगे, अतिथि’ पाठ में उन्त पंक्ति का प्रयोग लेखक ने अतिथि द्वारा धोबी को कपडे दिए जाने की इच्छा व्यक्त करने पर किया है। इस पंक्ति का तात्पर्य यह है कि अतिथि के आने के बाद लेखक को लगा था कि वह एक-दो दिन रुककर चला जाएगा। इसी आशा में लेखक अतिथि का अच्छे-से सतकार करता है, लेकिन जब अतिथि ने अपने गेदे कपड़ों को धोरी से घुलवाने की इच्छा व्यक्त की, तो लेखक को गहरा आघात पहुँचा। उसे अब लगने लगा कि उसके यहाँ आवा अर्तिधि अभी वापस जाने की ब्रह्दी में नहीं है। प्रस्तुत पंक्ति में लेखक ने व्यंग्यात्मक रारीके से अत्रिथि के प्रति अरुचि प्रकट की है।
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(घ) ‘वैज्ञानिक चेतना के वाहक चंद्रशेखर वेंकट रामन्’ पाठ से यह स्पष्ट होता है कि रामन् को भारतीय संस्कृति से गहरा लगाव था। लेखक इस प्रसंग के माध्यम से रामन् के किस पक्ष को उजागर करना चाहता है? (2)
उत्तर:
रामन् में राष्ट्रिय स्वाभिमान कूट-कूटकर भरा हुआ था। विदेशी वैज्ञानिकों के बीच बैठकर भी वे अपने भारतीय संस्कारों को कभी नहीं भूले। उन्हें भारतीय संस्कृति से गहरा लगाख था। उन्होंने दक्षिण भारतीय पहनावे को नहीं छोड़ा तथा कमी मदिरापान नहीं किया। नोबेल पुरस्कार लेने के अवसर पर भी उन्होने जराब पीने से मना कर दिया। वे जीवनभर शुद्ध शाकाहारी बने रहे। लेखक इस प्रसंग के माध्यम से रामन के राष्ट्रीय स्वाभिमान, सांस्कृतिक निष्ठा और सादगीपूर्ण जीवन को उजागर करता है। यह दिखाता है कि एक वैज्ञानिक होते हुए भी कोई व्यक्ति अपनी संस्कृति को सम्मान देकर देश की गरिमा बढ़ा सकता है।
प्रश्न 11.
निम्नलिखित काव्यांश को पढ़कर दिए गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त विकल्पों का चयन कीजिए। (1×5=5)
बैठा शुक उस घनी डाल पर
जो खोते पर छाया देती।
पंख फुला नीचे खोंते में
शुकी बैठ अंडे है सेती।
गाता शुक जब किरण वसंती
छूती अंग पर्ण से छनकर।
कितु, शुकी के गीत उमड़कर
रह जाते सनेह में सनकर
गूँज रहा शुक का स्वर वन में,
फूला मग्न शुकी का पर हैं।
गीत, अगीत, कौन सुंदर है?
(क) काव्यांश के अनुसार, शुक कैसी हाल पर बैठा है? (1)
(i) सूखी और पतली
(ii) हरी और मोटी
(iii) घनी और छायादार
(iv) फूलों से लदी
उत्तर:
(iii) घनी और छायादार काव्यांश में कवि कहता है कि शुक पेड़ की उस घनी डाल पर बैठा है, जिसकी छाया उसके घोसले पर पह रही है। उसी सोसले में शुकी बैठी है।
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(ख) शुकी अपने अंडों को कैसे से रही है? (1)
(i) उन्हें दाना खिलाकर
(ii) अपने पंख को फैलाकर
(iii) उन्हें अपनी चोंच से साफकर
(iv) उन्हें पानी में डुबोकर
उत्तर:
(ii) अपने पंख को फैलाकर काव्यांश के अनुसार, शकी पंखों को फैलाकर अपने अंडों को से रही है।
(ग) शुकी के प्रेम भरे गीत क्यों उमड़ कर रह जाते हैं? (1)
(i) शुक की आवाज्ञ में डूबकर
(ii) भय से दबकर
(iii) थकान के कारण
(iv) वात्सल्य भाव में डूबकर
उत्तर:
(iv) वात्सल्य भाव में दूबकर काव्यांश के अनुसार, शुकी के प्रेम भरे गीत वात्सल्य भाव में ड्रूबकर रह जाते हैं, क्योंकि वह अपने बच्चों के प्रेम में विभोर होकर उन गीतों को अपने अंदर अनुभव करती है।
(घ) कथन (A) शुक प्रसन्नता से गा उठता है।
कारण (R) जब वसंती किरणें पत्तों से छनकर शुक के अंगों को छूती है। (4)
कूट
(i) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या करता है।
(ii) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही है, परंतु कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या नहीं करता है।
(iii) कथन (A) सही है, कितु कारण (R) गलत है।
(iv) कथन (A) गलत है, किंतु कारण (R) सही है।
उत्तर:
(i) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या करता है। काष्यांश के अनुसार, जब सूरज की वसंती किरणें पत्तों से छनकर आती हैं और शुक के अंगों को छूती है, तब वह प्रसन्नता से गा उठता है।
(ङ) निम्नलिखित वाक्यों को ध्यानपूर्वक पढ़िए (1)
1. कवि ने गीत-अमीत के अंतर को दर्शाया है।
2. शुक का मौन ‘अगीत’ कहलाता है।
3. शुकी का स्वर ‘गीत’ कहलाता है।
4. शुक का प्रेम व स्नेह मुखर है।
काव्यांश से मेल खाते हुए वाक्यों के लिए उचित विकल्प चुनिए।
(i) 1,2,3 और 4
(ii) 1 और 4
(iii) केवल 3
(iv) 1,2 और 4
उत्तर:
(ii) 1 और 4 प्रस्तुत काव्यांश में कवि ने गीत-अगीत के अंतर को दर्शाने के लिए शुक व शुकी का उदाहरण दिया है। जिसमें शुक के गीत चारों ओर गूँजते हैं, परंतु शुकी के मन में उठने वासे गीत वात्सल्य भाव में ही ड्रूबकर रह जाते हैं। यहाँ शुक का स्नेह मुखर है, पर शुकी का मौन। एक (शुक) का स्वर ‘गीत’ कहलाता है। दूसरे (शुकी) का मौन ‘अगीत’ कहलाता है।
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प्रश्न 12.
काव्य खंड पर आधारित निम्नलिखित चार प्रश्नों में से किन्हीं तीन प्रश्नों के उत्तर लगभग 25-30 शब्दों में लिखिए। (2×3=6)
(क) ‘प्रभु जी, तुम घन बन हम मोरा, जैसे चितवत चंद चकोरा’ पंक्ति के आधार पर भक्त और भगवान के संबंध को रैदास किस प्रकार व्यक्त करते हैं? किन्हीं दो बिंदुओं का उल्लेख कीजिए। (2)
उत्तर:
रैदास उपर्युक्त पंक्ति के माध्यम से भक्त और भगवान के संबंध को अत्यंत आत्मिक व अटूट मानते हैं। वे इस संबंध को निम्न दो बिंदुओं में स्पष्ट करते हैं —
- पूर्ण समर्पण का भाव भक्त स्वयं को पूरी तरह प्रभु को समार्पित कर देता है, जैसे मोर वादल को देखकर नाच उठता है या चकोर चाँद की ओर निहारता है।
- गहरा और प्राकृतिक संखंध भक्त और भगवान का संबंध इतना स्वाभाविक और गहरा है कि वे एक-दूसरे के बिना अधूरे प्रतीत होते हैं, जैसे प्रकृति में घन-मोर या चाँद-चकोर का संबंध।
(ख) ‘खुशबू रचते हैं हाथ’ शीर्षक कविता में कौन-सी सामाजिक विंडबनाएँ उभरकर आती हैं? (2)
उत्तर:
‘खुशबू रचते हैं हाथ’ शीर्षक कविता में इस विंडबना का चित्रण दुआ है कि दूसरों की सुख-सुविधाओं के लिए मेहनत करने वाले निर्धन असहाय लोग किस प्रकार से स्वयं नरकीय जीवन जीने को विवश हैं। उन्हें किसी भी प्रकार की सुख-सुविधाएँ प्रदान नहीं की जाती।
(ग) हमें लघु वस्तु को तिरस्कृत वयों नहीं करना चाहिए? रहीम के ‘दोहे’ पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए। (2)
उत्तर:
कवि रहीम का मानना है कि प्रत्येक छोटी-बड़ी वस्तु की अपनी अलग-अलग उपयोगिता होती है, इसलिए कमी भी धनी या झवितिशाली मित्रों को पाकर निर्धन या कमझार मित्रों को नहीं भूलना चाहिए। इसके लिए रहीम कहते हैं कि जहाँ सुई का काम होता है, वहाँ तलवार व्यर्थ हो जाती है। अतः हमें बड़ी वस्तु को अधिक मूल्यवान समझकर छोटी वस्तु को तिरस्कृत नहीं करना चाहिए।
(घ) संघर्ष पथ पर चलने वाले व्यवित को वृक्षों की छाया किस प्रकार प्रभावित कर सकती है? ‘अम्निपथ’ कविता के आधार पर स्पष्ट कीजिए (2)
उत्तर:
‘अग्निपथ’ कविता में कवि ने संघर्ष पथ पर चलने वाले व्यक्ति को वृक्षों की छाया में विश्राम करने से मना किया है। यहाँ वृक्षों की छाया वस्तुत: जीवन में सुख की प्राप्ति का प्रतीक है। यदि अपनी मंड्रिल पर पहुँचे बिना सुखों का आनंद लेने की प्रवृत्ति उत्पन्न होती है, तो वह मनुष्य को अपनी मज्ञिल तक पहुँचने से रोकेगी। अतः व्यक्ति को इनके बहकावे में नहीं आना चाहिए।
प्रश्न 13.
पूरक पाठ्यपुस्तक ‘संचयन’ पर आधारित निम्नलिखित तीन प्रश्नों में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 50-60 शब्दों में लिखिए। (4×2=8)
(क) ‘स्मृति’ पाठ में लेखक ने भ्रातृ-स्नेह के ताने-बाने को चोट लगने की बात कही है। लेखक के इस कथन को स्पष्ट कीजिए। (4)
उत्तर:
जब कुएँ में साँप से लेखक का सामना हुआ, तो साँप और लेखक के आवसी द्वेद में होने वाली क्रियाओं के फलस्वरूप कपर कुएँ के पास खड़े उसके छोटे भाई को ऐसा प्रतीत हुआ कि उसके बडे भाई को साँप ने काट लिखा है। इसी कारण उसका मन व्यथित हो उठता है और वह चीख पड़ता है। लेखाक के छोटे भाई का चीखना धातृ-प्रेम का ही उदाहरण है। लेखक ने धातृ-सेह के ताने-बाने को चोट लगने की बात कहते हुए भाई-भाई के पारस्परिक प्रेम को सामान्य लोकानुभव से जोड़कर देखा है।
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(ख) ‘गिल्लू’ पाठ में लेखिका से गित्लू को कैसा लगाव था? पाठ से दो उदाहरण दीजिए। आजकल लोग पालतू जानवर रखते तो हैं, परंतु उनकी उचित देखभाल नहीं करते। आप ऐसे लोगों को क्या सुझाव दैंगे? (4)
उत्तर:
गिल्लू को लेखिका महादेवी वर्मा से गहरा लगाव था। पाठ के अंतर्गत इसके कई प्रमाण विद्यामान हैं
- जब भी लेखिका महादेवी वर्मा अपना कमरा खोलकर अंदर जाती थीं, तो गिल्लू उनके शरीर पर ऊपर से नीचे दौड़ने लगता था, लेकिन यदि कोई अन्य व्यक्ति अंदर आता, तो वह ऐसा नहीं करता था।
- गर्मियों के दिनों में वह लेखिका के पास रहने के लालच में उनके पास रखी सुराही के साथ चिपका रहता था।
जो लोग पालतू जानवर रखत्रे हैं, उन्हें केवल मन बहलाने के लिए नहीं, वाल्कि पूरी जिम्मेदारी और संवेदनशीलता के साथ उनकी देखभाल करनी चाहिए, क्योकि वे भी स्नेह, सुरक्षा और सम्मान के पात्र हैं।
(ग) त्रिपुरा में लेखक को अचानक प्रसिद्ध संगीतकार एस. डी. बर्मन की याद क्यों आई? लेंखक को स्थानीय हस्तियों ने किस प्रकार से प्रभावित किया? ‘कल्लू कुम्हार की उनाकोटी’ पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए। (4)
उत्तर:
त्रिपुरा में अगरतला के टीलियामुरा कस्बे में लेखक की मुलाकात स्थानीय कोकबारोक बोली के प्रसिद्ध लोकगायक एवं संगीत नाटक अकादमी द्वारा पुरस्कृत हेमंत कुमार जमातिया से हुई। वहाँ के संगीत से प्रभावित लेखक को अचानक प्रसिद्ध संगीतकार एस. डी. बर्मन की याद आ गई, जो त्रिपुरा के एक राजपरिवार से संबंधित थे।
यहीं पर एक और गायिका मंजु ॠणिदास से भी लेखक की मुलाकात हुई। लेखक बताता है कि गायिका मंजु ॠपिदास निरक्षर एवं अछूत समुदाय की महिला होते हुए भी नगर पंचायत में अपने वार्ड का प्रतिनिधित्व करने वाली जनग्रतिनिधि और कुशल गृहिणी भी थीं। उन्होंने लेखक को चाय पिलाई। लेखक मंजु ॠफिदास के क्यक्तित्व से बेहद प्रभावित होता है और सामाज़िक कार्यों में उनकी सहभागिता को त्रिपूरा की प्रगतिशील सोच से जोड़कर देखता है।
खंड ‘घ’
(रचनात्मक लेखन) (20 अंक)
इस खंड में रचनात्मक लेखन पर आधारित प्रश्न पूछे गए हैं, जिनके निर्धारित अंक प्रश्न के सामने अंकित है।
प्रश्न 14.
निम्नलिखित तीन विषयों में से किसी एक विषय पर दिए गए संकेत बिंदुओं के आधार पर लगभग 120 शब्दों में अनुच्छेद लिखिए। (5)
(क) हमारा स्वाभिमान : स्वतंत्रता विवस
संकेत बिंदु
- परिचय
- स्वतंत्रता दिवस का महत्त्व
- हमारा कर्तब्य
- स्वतंत्रता दिवस का संदेश
उत्तर:
हमारा स्वाभिमान : स्वतंश्रता दिवस
स्वतंत्रता मनुष्य की स्वाभाविक वृत्ति है। कहा थी गया है-‘पराथीन सपनेद्ध सुख नाहिं।’ अंग्रेजों की गुलामी को भारतवासी कैसे सहन कर सकते थे? वे इस गुलामी की बंजीरों को काटने का अनवरत प्रयास करते रहे और अंतरा: 15 अगसत, 1947 को शताब्दियों से खोई स्वतंत्रता हमें पुन: प्राप्त हो गई। इसे हम ‘स्वतंत्रता दिवस’ के रूप में मनाते हैं। स्वतंत्रता दिवस भारतीयों के लिए विशेष महत्व रखता है, क्योंकि यह दिन हमें आजादी के लिए स्वतंत्रता सेनानियों द्वारा किए गए श्याग और बलिदान की याद दिलाता है। देश का प्रत्येक नागरिक आनंद और उर्मा से भरकर इस पावन दिन को एक पर्व के रूप में मनाता है। इस दिन घर-घर, गाँव-गाँव तथा सभी नगरों में लोगों का उल्लास देखरे ही बनता है।
आज की युवा पीढ़ी का परिचय उनके गौरवपूर्ण इतिहास से होना चाहिए। यह हमारा कर्तव्य है कि अनेक बलिद्वानों से प्राप्त इस स्वतंश्रता की रक्षा के लिए हमें सर्वदा सजग रहना चाहिए। स्वार्थवश हम कोई भी ऐसा कार्य न करें, जिससे भारत कलंकित हो अथवा इसकी स्वतंत्रता को कोई हानि पहुँचे। हमें अपने देश की स्ववंत्रता व समृद्धि के लिए सदैव तत्पर रहना चाहिए। यह पर्व हमें वीरों के बलिदान के साथ-साथ इविहास को न भूलने का संदेश देता है, ताकि दोबारा किसी को व्यापार के बहाने यहाँ ज्ञासन का मौका न दिया जाए।
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(ख) सोशल मीडिया और युवा
संकेत बिंदु
- सोशल मीडिया और युवा
- युवा वर्ग के आकर्षण का कारण
- नकारात्मक प्रभाव
- उपसंहार
उत्तर:
सोशल मीडिया और युवा
सोशल मीडिया एक ऐसा विशाल नेटवर्क है, जो पूरे विश्व को जोड़ने का कार्य करता है। यह संचार का सर्वश्रेष्ठ माध्यम है। फेसवुक, क्रॉटसएप्प, गूगल, ट्विटर आदि प्रमुख सोशल मीडिया के माध्यम हैं। आधुनिक समय में युवा वर्ग सोशल मीडिया के जाल में फैसता जा रहा है। सोशल मीडिया उनके दैनिक जीवन का अपरिहार्य अंग बन गया है। वर्तमान युग की भाग-दौड़ और तनाव युक्त जिंदगी तथा एकांतपन से मुक्ति पाने के लिए युवा वर्ग में इसका प्रचलन बहुत अधिक बढ़ गया है। वह अपना अधिकांश समय सोशल मीडिया पर ही व्यतीत करता है। विच्यालय में प्रदत्त परियोजना कार्यों को निपटाने के लिए युवा घंटों तक गूगल एवं विकिपीडिया पर समय व्यतीत करते हैं। सोशल मीडिया के माध्यम से अपने विचार, विभिन्न प्रकार की सूचनाएँ, ई-मेल, वींडियो इत्यादि द्वारा एक-दूसरे से साझा करते रहते हैं।
इसके साथ ही मनोरंजन, लुभावने खेल, देश-विदेश के लोगों से परिचय कराने एवं संपर्क स्थापित करने के कारण भी युवा वर्ग इस ओर आकर्षित हुआ है, परंतु सोशल मीडिया के अत्यधिक प्रयोग के परिणामस्वरूप युवाओं पर नकारात्मक प्रभाव भी दिखाई पड़ते हैं। सोशल मीडिया पर भइकाऊ व आपत्तिजनक संदेश भी प्रचारित-प्रसारित होते हैं, जिससे प्रभावित होकर युवा कई बार घिनौना अपराष कर बैठते है। विभिन्न सामाजिक साइट्स के माध्यम से संपर्क में आए अपरिचित व्यक्तियों के संपर्क में आकर ठगी का शिकार हो जाते है। अत: यह आवश्यक है कि सोशल मीडिया का संतुलित व संयमित प्रयोग करें तथा इसके सदुपयोग पर ध्यान केंद्रित करें।
(ग) युवाओं में बढ़ता मानसिक तनाव
संकेत बिंदु
- भारत युवाओं का देश
- विभिन्न समस्याओं से घिरा युवा वर्ग
- तनाव के दुष्यरिणाम
- तनाव से मुक्ति का उपाय
उत्तर:
युवाओं में बढ़ता मानसिक तनाव
युवा वर्ग किसी देश की आंतरिक तथा विकासात्मक ऊर्जा को गति प्रदान करने वाला स्रोत है। देश की उन्नति तथा घुशहाली युवाओं के उत्साह तथा कार्यक्षमता पर आधारित है। भारत युवाओं का देश है। एक आर्थिक महाइक्ति बनने के लिए देश को युवाओं पर भरोसा कर उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा देना आज की अनिवार्यता है। यदि हमारा युवा वर्ग सबल और सक्षम हुआ, तो इस देश को प्रगति की दौड़ में सबसे आगे रखा जा सकता है।
आजकल युवा वर्ग विभिन्न समस्याओं में घिर गया है। समस्याओं ने तनाव का रूप ले लिया है। युवा वर्ग के मानसिक तनाव तथा अवसादों से घिरने का सबसे बड़ा कारण भविष्य की चिंता है। परीक्षा में सफलता तथा अच्छी नौकरी पाने की लालसा के कारण एक दबाव उत्पन्न होता है। असफलता के कारण यह दबाव अधिक घनीभूत होता है और अवसाद का रूप ग्रहण करने लगता है, जिसका दु्यरिणाम यह होता है कि कम उम्र में ही युवा रक्तचाप, मधुमेह, हुदयाघात आदि गंभीर बीमारियों के शिकार हो जाते हैं, यहाँ तक कि कुछ युवा आत्महत्या तक कर लेते हैं। युवा वर्ग के जीवन को तनाव से गुक्त करने के लिए स्कूली शिक्षा को आसान तथा रोजगारोन्मुख बनाकर युवाओं की क्षमता को उचित मार्ग दिखाया जाना चाहिए। इससे युवा वर्ग की धमताओं का उचित लाभ समाज तथा राष्ट्र को मिल सकता है।
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प्रश्न 15.
आप दिल्ली के एक प्रतिष्ठित वियालय में नवप्रबेशी छात्र/छात्रा हैं। विद्यालय की सुंदरता, अनुशासन, शिक्षण व्यवस्था तथा अन्य सुविधाओं से आप अधिक प्रभावित हुए हैं। अपने मित्र को पत्र लिखकर विद्यालय की जानकारी लगभग 100 शब्दों में दीजिए। (5)
अथवा
अपने मित्र को एक पत्र लिखकर इंटरनेट के प्रयोग से होने वाले लाभ और हानियों पर प्रकाश डालते हुए साथ में उसे यह भी बताइए कि इसका सदुपयोग किस प्रकार किया जा सकता है? (लगभग 100 शब्दों में)
उत्तर:
परीक्षा भवन,
मेरठ।
दिनांक 14 मार्च, 20XX
प्रिय मित्र,
संग्रेम नमस्कार!
आशा है, तुम कुशल होगी। मैने डी. ए. वी. स्कूल, दिल्ली में प्रवेश ले लिया है। यह विद्यालय अपने आप में विशिष्ट है। इसका भवन बहुत सुंदर एवं भळ्व है।
हरे-भरे प्रांगण से चिरा इसका साफ-सुथरा मज्ञबूत भवन मन को मोह लेता है। हमारे विद्वालय में लगभग 2,000 बच्चे पदते है। हमारी प्राचायां अत्यंत विदुर्षी, कुशल तथा स्नेही महिला हैं। वे अत्यंत अनुशासित व्यक्तित्व की महिला हैं।
हमारे विद्यालय में अनुशासन का पालन बहुत कठोरता से किया जाता है। सभी बच्चे अध्यापकों का सम्भान करते हैं। इस विद्यालय में खेल, मनोरंजन तथा बौद्धिक विकास की सारी व्यवस्थाएँ हैं। इनडोर गेम के लिए सुस्जित हॉल है। यहाँ का पुस्तकालय और कला-कक्ष दर्शनीय है। मैं यहाँ बहुत प्रसन्न हूँ। शेष बातें बाद में लिखूँगा।
अंकल-आंटी को मेरा नमस्कार कहना।
तुम्हारा अभिन्न मित्र
ক.ख.ग.
अथवा
परीक्षा भवन,
दिल्ली।
दिनांक 12 माच, 20 XX
प्रिय मित्र राज,
नमस्कार।
आज बाज़ार में तुम्हारे पिताजी से मुलाकात हुई। उनसे वार्ता के दौरान तुम्हारे लिए कंप्यूटर खरीदने की जानकारी मिली, परंतु साथ ही उचित जानकारी न होने के कारण इंटरनेट के सही उपयोग तथा लाभ-हानि संबंधी तुम्हारी समस्या का भी पता चला।
प्रिय राज! मैं तुम्हारा मित्र हैं। अतः आशा करता हैं कि तुम स्वयं नि:संकोच मुझसे पूछ लिया करो, फिर भी कुछ जानकारी दे रहा हूँ। तुम्हें बस एक कनेक्शन लेना होगा, फिर एक अपना ई-मेल ‘पत्ता’ बनाना होगा। तब तुम सब जानकारी स्वयं ही प्राप्त कर सकोगे।
इंटरनेट और कंप्यूटर से समय और धन दोनों की बचत होती है। सावधानीपूर्वक उपयोग करने पर तुम्हारी सुचना भी सुरक्षित रहती है। इंटरनेट के माध्यम से तुम स्वयं आत्मनिर्भर होकर एक स्थान से कार्य कर सकते हो।
बैंक कार्य, पानी-बिजली के बिल भी घर पर रहकर ही भर सकते हो, परंतु हानि वस बही है कि कभी-कभी अत्यंत जल्दबाज़ी में हमारी सूचना ब धन इत्यादि किसी और के पास पहुँच सकते हैं। अतः इसका प्रयोग करते समय अल्यंत सावधानी की आवश्यकता है।
शेष समी कुशलमंगल है।
पत्रोत्तर की प्रतीक्षा में।
तुम्हारा मित्र
कहाग.
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प्रश्न 16.
चित्र में दिखाए गए दृश्य या घटना का कल्पनाशक्ति के आधार पर लगभग 100 शब्दों में वर्णन कीजिए। (5)

उत्तर:
चित्र में एक कंप्यूटर लैब का दृश्य दिखाया गया है, जहाँ कुछ छात्राएँ कंप्यूटर पर कार्य कर रही हैं। एक शिक्षिका उन्हें निर्देश दे रही है। छात्राएँ ध्यानपूर्वक स्क्रीन पर विभिन्न आकारों को देख रही हैं और उसे बनाना सीख रही हैं। पृष्ठभूमि में कुछ और छात्राएँ अपनी बारी का इंतजार कर रही हैं। यह दृश्य आधुनिक शिक्षा प्रणाली की ओर संकेत करता है, जहाँ बच्चों को डिजिटल साक्षरता सिखाई जा रही है। यह सुनिरिचत करता है कि बच्चे तकनीकी ज्ञान के साथ आगे बढ़ें।
इस प्रकार की शिक्षा बच्चों को तकनीक के साथ सुजनात्मकता और समझ विकासित करने में मदद करती है। कंप्यूटर शिक्षा आज की आवश्यकता बन गई है। यह न केवल छात्रों को तकनीकी ज्ञान प्रदान करती है, यल्कि उनकी सुजनात्मकता और समस्या-समाधान कौशल को भी विकसित करती है। डिबिटल साक्षरता के माध्यम से वच्चे भविष्य की चुनौतियों के लिए बेहतर तरीके से तैयार हो सकते हैं। आधुनिक युग में, प्रत्येक विद्यालय में बच्चों के लिए कंप्यूटर शिक्षा की व्यवस्था होनी चाहिए।
प्रश्न 17.
आपका नाम अनिल है। आप अपने मित्र रोहन के साथ परीक्षा की तैयारी पर बातचीत कर रहे हैं। इस विषय पर लगभग 100 शब्दों में एक संवाद लेखन कीजिए। (5)
अथवा
खाद्य पदार्थों में होने वाली मिलावट के संबंध में दो व्यक्तियों के मध्य संवाद को लगभग 100 शब्दों में लिखिए।
उत्तर:
अनिल मित्र रोहन! बहुत दिनों के बाद दिखा रहे हो। क्या हाल है?
रोहन मैं ठीक हूँ। मैं आजकल पढ़ाई पर अधिक ध्यान केंद्रित कर रहा हूँ, क्योंकि परीक्षाएँ नज़दीक है।
अनिल हाँ, मित्र! तुम सही कह रहे हो। तुम कितने घंटे तक पढ़ाई कर रहे हो?
रोहन मैं षंटों पर ध्यान नहीं देता। प्रत्येक दिन के लिए मै अपना लक्ष्य अर्थात् पाट्यक्रम निश्चित कर लेता हूँ और उसे उसी दिन अवश्य पूरा करता हूँ।
अनिल ये तो बहुत अच्छी रणनीति है।
रोहन हाँ, मैं इस बात का भी ध्यान रखता हूँ कि सभी विषयों को संतुलित एवं पर्याप्त समय मिले।
अनिल आज से में इसी रणनीति पर चलूँगा और विभिन्न विषयों में अपने कमझोर क्षेत्रों पर अधिक ष्यान दूँगा। अच्छा, अब चलते हैं। तुमसे मिलकर बहुत अच्छी जानकारी मिली। धन्यवाद!
रोहन अच्छा मित्र, नमस्कार।
अथवा
पहला उ्यक्ति नमस्ते! कैसे हो?
दूसरा व्यक्ति नमस्ते! मै ठीक हैं। तुम कैसे हो?
पहल व्यक्ति मै भी ठीक हूँ। आजकल खाच पदार्थों में मिलावट बहुत बढ़ गई है। इस बारे में क्या सोचते हो?
दूसरा व्यक्ति हाँ, बिल्कुल! यह बहुत गंभीर समस्या बन गई है। लोग सेहतमंद खाने के लिए पैसे खर्च करते हैं और उन्हें मिलावटी चीजें मिलती हैं।
पहल्ला व्यक्ति सही कहा। दूध में पानी मिलाना, मसालों में रंग मिलाना और बहाँ तक कि फलों और सब्जियों पर केमिकल छिड़कना भी आम हो गया है।
दूसरा व्यक्ति इससे न केवल हमारी सेहत को नुकसान होता है, बल्कि हमें बीमारिवाँ भी हो सकती हैं। यह सरकार और प्रशासन की जिन्मेदारी है कि वे इस पर सखत कार्रवाई करें।
पहला व्यक्ति हाँ और हमें भी जागरूक रहना चाहिए। हमेशा प्रमाणित ब्रांड और दुकानों से ही सामान खरीदना चाहिए।
दूसरा व्यक्ति विल्कुल सही। इसके साथ ही हमें अपने आसपास के लोगों को भी इसके बारे में जागरूक करना चाहिए।
पहला व्यक्ति चलो, मिलकर इस समस्या के खिलाफ आवाज उठाते हैं।
दूसरा व्यक्ति हाँ, यह जरूरी है। मिलाखट को रोकना हम सभी का कर्तंख्य है।