Students must start practicing the questions from CBSE Sample Papers for Class 9 Hindi A with Solutions Set 9 are designed as per the revised syllabus.
CBSE Sample Papers for Class 9 Hindi A Set 9 with Solutions
समय: 3 घंटे
पूर्णांक: 80
सामान्य निर्देश
निम्नलिखित निर्देशों को बहुत सावधानी से पढ़िए और उनका सख्ती से अनुपालन कीजिए
- इस प्रश्न-पत्र में चार खंड है-क, ख, ग और घ।
- इस प्रश्न-पत्र में कुल 17 प्रश्न हैं। सभी प्रश्न अनिवार्य हैं।
- प्रश्न-पत्र में आंतरिक विकल्प दिए गए हैं।
- प्रश्नों के उत्तर दिए गए निर्देशों का पालन करते हुए लिखिए।
खंड ‘क’
(अपठित बोध) (14 अंक)
इस खंड में अपठित गद्यांश व काव्यांश से संबंधित तीन बहुविकल्पीय (1×3=3) और दो अतिलघूत्तरात्मक व लघूत्तरात्मक (2×2=4) प्रश्न दिए गए हैं।
प्रश्न 1.
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर लिखिए। (7)
भारत एक बड़ा देश है। बहुसांस्कृतिक, बहुजातीय, बहुभाषीय लोगों का देश। प्रत्येक हिस्से के अलग रीति-रिवाज, पोशाक की विभिन्नताएँ आदि मौजूद हैं, लेकिन देश के किसी हिस्से में भी चले जाइए, सारी विभिन्नताओं के बीच एक समानता अवश्य है-सोने को लेकर गजब का प्यार। सौभाग्य का प्रतीक है-सोना। हमारी परपराओं, मान्यताओं, रीति-रिवाज़ों, त्योहारों और संस्कारों से जुड़ा हुआ है। युगों-युगों से ये हमें सम्मोहित करता रहा है। गजब की कशिश है इसकी चमक में, न जाने क्या जादू है इसमें। यह शुद्ध, कालजयी, अजर और अमर है।
हिंदुओं की मान्यता है कि सोना भगवान सूर्य का अंग है। उनकी अश्रुधारा से निकला हुआ, इसलिए उन्हीं के समान तेजवान और तीव्र ओज से भरपूर है। वैसे सोना न जाने कितनी पीढ़ियों से विरासत की भूमिका निभाता आ रहा है। माँ से बेटी और फिर इस तरह आगे की पीढ़ियों तक। यह महज़ एक धातु नहीं, बल्कि जीवन का एक हिस्सा है। सुख-दु:ख का साथी। हमेशा संबल और आत्मविश्वास देने वाला। ये राजाओं का प्यारा रहा और रंकों का भी तथा आध्यात्मिकता से भरपूर महात्माओं का भी।
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(क) प्रस्तुत गद्यांश में सोना किसका प्रतीक माना गया है? (1)
(i) चमक
(ii) सौभाग्य
(iii) आभा
(iv) धातु
उत्तरः
(ii) सौभाग्य सोना सौभाग्य का प्रतीक है, क्योंकि यह हमारी मान्यताओं, परंपराओं, रीति-रिवाजों, त्योहारों और संस्कारों से जुड़ा हुआ है।
(ख) सोने के प्रति हिंदुओं की क्या मान्यता है? (1)
(i) भगवान सूर्य के अश्रुओं से उत्पन्न हुआ है
(ii) सूर्य के समान तेजवान है
(iii) भगवान सूर्य का अंश है
(iv) ये सभी
उत्तरः
(iv) ये सभी सोने के प्रति हिंदुओं की मान्यता है कि यह भगवान सूर्य के अश्रुओं से उत्पन्न हुआ है, इसलिए यह सूर्य के समान तेजवान है। सोने को भगवान सूर्य का अंश भी माना गया है।
(ग) कथन (A) सोना पीढ़ी-दर-पीढ़ी धरोहर की भूमिका निभाता आ रहा है।
कारण (R) सोना महज धातु न होकर सुख-दुःख का साथी है। (1)
कूट
(i) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या करता है।
(ii) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं, परंतु कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या नहीं करता है।
(iii) कथन (A) सही है, किंतु कारण (R) गलत है।
(iv) कथन (A) गलत है, किंतु कारण (R) सही है।
उत्तरः
(i) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण $(\mathrm{R})$, कथन (A) की सही व्याख्या करता है। सोना अनेक पीड़ियों से धरोहर की भूमिका निभाता आ रहा है, इसलिए सोने को लोग महज धातु नहीं मानते हैं, बल्कि यह जीवन का एक भाग एवं सुख-दु:ख का साथी भी है।
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(घ) भारत में विविधताओं के बावजूद कौन-सी एक समानता दिखाई देती है? (2)
उत्तरः
भारत एक विस्तृत एवं व्यापक देश है। यहाँ बहुसांस्कृतिक, बहुजातीय, बहुभाषीय लोगों का वास है। भारत के प्रत्येक भाग में अलग रीति-रिवाज, परिधान की विभिन्नताएँ आदि देखने को मिलती हैं। किंतु यहाँ विभिन्नताओं के होते हुए भी एक समानता देखने को मिलती है और वह समानता है सोने के प्रति अनन्य प्रेम।
(ङ) भारत में सोना सभी वर्गों के लोगों को प्रिय क्यों है? किन्हीं दो बिंदुओं में लिखिए। (2)
उत्तरः
भारत में सोना सभी वर्गों के लोगों को प्रिय है। निम्नलिखित दो बिंदुओं में इसका उल्लेख है
- भारत में सोना समस्त भारतवासियों; जैसे-राजाओं, रंकों, आध्यात्मिकता से भरपूर महात्माओं आदि सभी को प्रिय है।
- यह शुद्ध, कालजयी एवं अजर-अमर है तथा संबल और आत्मविश्वास देने वाला है, इसलिए यह सभी भारतीयों को प्रिय है।
प्रश्न 2.
निम्नलिखित काव्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर लिखिए। (7)
तिल-तिल मिट्टूँगा पर दया की भीख मैं लूँगा नहीं।
वरदान मायूँगा नहीं।
क्या हार में क्या जीत में, किंचित नहीं भयभीत मैं,
संघर्ष पथ पर जो मिले वह भी सही, यह भी सही।
वरदान मागूँगा नहीं।
लघुता न मेरी अब छुओ,
तुम हो महान्, बने रहो,
अपने हृदय की वेदना मैं व्यर्थ त्यायूँगा नहीं।
वरदान मागूँगा नहीं।
चाहे हृदय को ताप दो,
चाहे मुझे अभिशाप दो,
कुछ भी करो कर्त्तव्य-पथ से किंतु भागूँगा नहीं।
वरदान मागूँगा नहीं।
(क) प्यांश में कवि ने हार किसे माना है? (1)
(i) त्याग को हार माना है।
(ii) विराम को हार माना है।
(iii) वरदान को हार माना है।
(iv) अभिशाप को हार माना है।
उत्तरः
(ii) विराम को हार माना है। पद्यांश में कवि ने विराम को हार माना है, क्योकि गति उन्नति और जीत की प्रतीक होती है तथा विराम हार का प्रतीक होता है।
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(ख) प्रस्तुत पद्यांश में कवि ने क्या न त्यागने की बात की है? (1)
(i) सुख
(ii) हृदयगत वेदना
(iii) वरदान
(iv) संघर्ष पथ
उत्तरः
(ii) हृदयगत वेदना प्रस्तुत पद्यांश में कवि ने हुदयगत वेदना को न त्यागने की बात की है, क्योंकि हृदयगत वेदना को त्यागने से व्यक्ति अपने मूल उद्देश्य से भटक जाता है।
(ग) ‘वरदान मागूँगा नहीं’ पंक्ति के माध्यम से कवि के व्यक्तित्व की किस विशेषता का पता चलता है? (1)
(i) अहंकारी
(ii) कायर
(iii) दयावान
(iv) आत्मविश्वासी व स्वाभिमानी
उत्तरः
(iv) आत्मविश्वासी व स्वाभिमानी ‘वरदान माँगूगा नहीं’ पंक्ति के माध्यम से कवि के व्यक्तित्व के आत्मविश्वासी व स्वाभिमानी होने की विशेषता का पता चलता है।
(घ) काव्यांश का मूल भाव 25-30 शब्दों में लिखिए। (2)
उत्तरः
इस काव्यांश का मूल भाव यह है कि कवि आत्मसम्मान, साहस और कर्त्तव्य-निष्ठा से जीवन जीने का संकल्प करता है। वह कठिनाइयों, पीड़ा और अभिशापों से नहीं डरता और किसी से दया या वरदान माँगना नहीं पसंद करता।
(ङ) कवि ने हार और जीत के माध्यम से क्या बताने का प्रयास किया है? (2)
उत्तरः
कवि ने हार और जीत के माध्यम से यह बताने का प्रयास किया है कि जीवन के पथ पर हार-जीत जो भी मिले उसे सहर्ष स्वीकार कर लेना चाहिए। कवि ने हार और जीत को गौण मानते हुए कर्त्तव्य और आत्मसम्मान को सबसे ऊपर रखा है।
खंड ‘ख’
(व्यावहारिक व्याकरण) (16 अंक)
व्याकरण के लिए निर्धारित विषयों पर अतिलघूत्तरात्मक 20 प्रश्न दिए गए हैं, जिनमें से केवल 16 प्रश्नों (1×16=16) के उत्तर देने हैं।
प्रश्न 3.
निर्देशानुसार ‘शब्द निर्माण’ पर आधारित पाँच प्रश्नों में से किन्हीं चार प्रश्नों के उत्तर दीजिए। (1×4=4)
(क) ‘प्रकृति’ में से उपसर्ग और मूल शब्द अलग कीजिए। (1)
उत्तरः
‘प्रकृति’ शब्द में ‘प्र’ उपसर्ग और ‘कृति’ मूल शब्द है।
(ख) ‘सु’ उपसर्ग लगाकर दो शब्द लिखिए। (1)
उत्तरः
‘सु’ उपसर्ग से बने दो शब्द निम्न हैं
(i) सु + जान = सुजान
(ii) सु + रुचि = सुरुचि
(ग) ‘राजनैतिक’ में मूल शब्द और प्रत्यय अलग कीजिए। (1)
उत्तरः
‘राजनैतिक’ शब्द में ‘राजनीति’ मूल शब्द है तथा ‘इक’ प्रत्यय है।
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(घ) ‘औना’ प्रत्यय लगाकर दो शब्द लिखिए। (1)
उत्तरः
‘औना’ प्रत्यय से बने दो शब्द निम्न हैं
(i) बिछ + औन = बिछौना
(ii) खिल + औन = खिलौना
(ङ) ‘उपकारी’ शब्द में प्रयुक्त उपसर्ग व प्रत्यय को अलग करके लिखिए। (1)
उत्तरः
‘उपकारी’ शब्द में ‘उप’ उपसर्ग है, ‘कार’ मूल शब्द व ‘ई’ प्रत्यय है।
प्रश्न 4.
निर्देशानुसार ‘समास’ पर आधारित पाँच प्रश्नों में से किन्हीं चार प्रश्नों के उत्तर दीजिए। (1×4=4)
(क) ‘पढ़ाई और लिखाई’ का समस्त-पद बनाकर समास का नाम लिखिए। (1)
उत्तरः
‘पढ़ाई और लिखाई’ का समस्त-पद ‘पढ़ाई-लिखाई’ है। यहाँ द्वंद्व समास प्रयुक्त है।
(ख) ‘प्रतिपल’ का समास-विग्रह कीजिए और समास का नाम लिखिए। (1)
उत्तरः
‘प्रतिपल’ समस्त-पद का समास-विग्रह ‘पल-पल या हर-पल’ है। यहाँ अव्ययीभाव समास है।
(ग) ‘दोपहर’ का समास-विग्रह कीजिए और समास का नाम लिखिए। (1)
उत्तरः
‘दोपहर’ समस्त पद का समास-विग्रह ‘दो पहरों का समूह है। यहाँ द्विगु समास है।
(घ) ‘ग्रामगत’ का समास-विग्रह कीजिए और समास का नाम लिखिए। (1)
उत्तरः
‘ग्रामगत’ का समास-विग्रह ‘ग्राम को गया हुआ’ है। यहाँ कर्म तत्पुरुष समास है।
(ङ) दशानन का समास-विग्रह करके समास का नाम लिखिए। (1)
उत्तरः
दशानन का समास-विग्रह है दस हैं आनन जिसके अर्थात् रावण। इसमें बहुब्रीहि समास है।
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प्रश्न 5.
निर्देशानुसार अर्थ की दृष्टि से ‘वाक्य भेद’ पर आधारित पाँच प्रश्नों में से किन्हीं चार प्रश्नों के उत्तर दीजिए। (1×4=4)
(क) ‘यदि वह गया तो मैं चला आऊँगा।’ अर्थ के आधार पर वाक्य भेद बताइए। (1)
उत्तरः
प्रस्तुत वाक्य अर्थ के आधार पर संकेतवाचक वाक्य है।
(ख) ‘वह जूते खरीदने के लिए बाजार नहीं गया।’ (विधानवाचक वाक्य में बदलिए।) (1)
उत्तरः
वह जूते खरीदने के लिए बाजार गया है।
(ग) ‘वाह! कितना मनमोहक दृश्य है’ अर्थ के आधार पर वाक्य भेद बताइए। (1)
उत्तरः
प्रस्तुत वाक्य अर्थ के आधार पर विस्मयवाचक वाक्य है।
(घ) ‘क्या तुम यह कार्य नहीं कर सकते?’ (आज्ञावाचक वाक्य में बदलिए।) (1)
उत्तरः
तुम यह कार्य करो।
(ङ) ‘मेरी लड़की के लिए वर आप तय करेंगे।’ (निषेधवाचक वाक्य में बदलिए।) (1)
उत्तरः
मेरी लड़की के लिए वर आप तय नहीं करेंगे।
प्रश्न 6.
निर्देशानुसार ‘अलंकार’ पर आधारित पाँच प्रश्नों में से किन्हीं चार प्रश्नों के उत्तर दीजिए। (1×4=4)
(क) “रसवती रसना करके कही,
कथित की कथनीय गुणावली।”
रेखांकित काव्य पंक्ति में निहित अलंकार कौन-सा है? (1)
उत्तरः
यहाँ ‘र’ तथा ‘क’ वर्ण की आवृत्ति के कारण अनुप्रास अलंकार है।
(ख) मुक्ताफल मुक्ता चुगै, अब उड़ि अनत न जाहिं। रेखांकित काव्य पंक्ति में कौन-सा अलंकार है। (1)
उत्तरः
प्रस्तुत काव्यांश में पहले मुक्ता का अर्थ ‘मोती’ तथा दूसरे ‘मुक्ता’ का अर्थ ‘मुक्त या स्वच्छंद होकर’ है। अतः यहाँ यमक अलंकार है।
(ग) “चरण धरत चिंता करत, चितवत चहुँ ओर।
सुबरन को खोजत फिरत, कवि, व्यभिचारी, चोर।।”
रेखांकित काव्य पंक्ति में अलंकार कौन-सा है? (1)
उत्तरः
यहाँ ‘सुबरन’ के तीन अर्थ है- सुंदर अक्षर, सुंदर चेहरा और स्वर्ण। अतः यहाँ श्लेष अलंकार है।
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(घ) “तरनि तनूजा तट तमाल तरुवर बहु छाए” रेखांकित काव्य पंक्ति में अलंकार कौन-सा है? (1)
उत्तरः
रेखांकित काव्य पंक्ति में ‘त’ वर्ण की आवृत्ति होने के कारण यहाँ अनुप्रास अलंकार है।
(ङ) प्रेमी को प्रेमी मिलै, सब विष अमृत होई। (1)
रेखांकित काव्य पंक्ति में अलंकार कौन-सा है?
उत्तरः
उपर्युक्त काव्यांश में ‘प्रेमी’ शब्द दो बार आया है। पहले प्रेम का अर्थ ‘ईश्वर की भक्ति करने वाला’ तथा दूसरे प्रेम का अर्थ ईश्वर या प्रभु है। अत: यहाँ यमक अलंकार है।
खंड ‘ग’
(पाठ्यपुस्तक एवं पूरक पाठ्यपुस्तक) (30 अंक)
इस खंड में पाठ्यपुस्तक एवं पूरक पाठ्यपुस्तक से प्रश्न पूछे गए हैं, जिनके निर्धारित अंक प्रश्न के सामने अंकित हैं।
प्रश्न 7.
निम्नलिखित पठित गद्यांश पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त विकल्प चुनकर लिखिए। (1×5=5)
टोपी आठ आने में मिल जाती है और जूते उस ज़माने में भी पाँच रुपये से कम में क्या मिलते होंगे। जूता हमेशा टोपी से कीमती रहा है। अब तो जूते की कीमत और बढ़ गई है और एक जूते पर पचीसों टोपियाँ न्योछावर होती हैं। तुम भी जूते और टोपी के आनुपातिक मूल्य के मारे हुए थे। यह विडंबना मुझे इतनी तीव्रता से पहले कभी नहीं चुभी, जितनी आज चुभ रही है, जब मैं तुम्हारा फटा जूता देख रहा हूँ। तुम महान कथाकार, उपन्यास-सम्राट, युग-प्रवर्तक, जाने क्या-क्या कहलाते थे, परंतु फोटो में भी तुम्हारा जूता फटा हुआ है।
(क) ‘जूता हमेशा टोपी से कीमती रहा है।’ कथन का क्या आशय है (1)
(i) सम्मान और ताकत एक समान है
(ii) ताकत सदैव सम्मान पर भारी होती है
(iii) जूता महँगा होता है
(iv) टोपी सस्ती होती है
उत्तरः
(ii) ताकत सदैव सम्मान पर भारी होती है गद्यांश के अनुसार, प्रस्तुत कथन का आशय यह है कि ताकता सदैव सम्मान पर भारी होती है। अकसर शक्ति को सम्मान से अधिक महत्व दिया जाता है।
(ख) ‘प्रेमचंद न जाने क्या-क्या कहलाते थे?’ से लेखक क्या स्पष्ट करना चाहता है? (1)
(i) प्रेमचंद को अनेक नामों से जाना जाता था
(ii) प्रेमचंद को लोकप्रिय होने का शौक था
(iii) प्रेमचंद की यथार्थ स्थिति उनकी लोकप्रियता के विपरीत थी
(iv) प्रेमचंद की ताकत यथार्थ स्थिति को दर्शाती है
उत्तरः
(iii) प्रेमचंद की यथार्थ स्थिति उनकी लोकप्रियता के विपरीत थी। गधांश के अनुसार, प्रेमचंद को महान कथाकार, उपन्यास सम्राट, युग प्रवर्तक अनेक नामों से जाना जाता था, लेकिन उनके जीवन की यथार्थ स्थिति उनकी लोकप्रियता व महान व्यक्तित्व के विपरीत थी।
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(ग) टोपी व जूता किसका प्रतीक है? (1)
(i) सस्ता, महँगा
(ii) बल, सरलता
(iii) चतुराई, योग्यता
(iv) सम्मान, ताकत
उत्तरः
(iv) सम्मान-ताकत टोपी सम्मान व जूता ताकत का प्रतीक है।
(घ) लेखक को कौन-सी बात चुभ रही है? (1)
(i) प्रेमचंद की सरलता व चतुराई
(ii) प्रेमचंद की खराब आर्थिक स्थिति की यथार्थता
(iii) प्रेमचंद के पास कई प्रकार की सुविधाएँ होना
(iv) प्रेमचंद की लोकप्रियता व श्रेष्ठता
उत्तरः
(ii) प्रेमचंद की खराब आर्थिक स्थिति की यथार्थता लेखक को प्रेमचंद की खराब्य आर्थिक स्थिति की यधार्थता चुभ रही है।
(ज) कथन (A) जूता हमेशा टोपी से कीमती रहा है। (1)
कारण ( R ) यह विडंबना मुझे आज नहीं चुभ रही है।
कूट
(i) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या करता है।
(ii) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं, परंतु कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या नहीं करता है।
(iii) कथन (A) सही है, कितु कारण (R) गलत है।
(iv) कथन (A) गलत है, किंतु कारण (R) सही है।
उत्तरः
(iii) कथन (A) सही है, किंतु कारण (R) गलत है। जूता हमेशा टोणी से कीमती रहा है, क्योंकि पुराने समय में टोपी आठ आने की मिल जाती थी, जबकि जूता पाँच रुपये से कम नहीं मिलता होगा। लेखक को प्रेमचंद की वाधार्थ स्थिति की विडंबना आज भी बहुत चुभ रही है।
प्रश्न 8.
निर्धारित गद्य पाठों के आधार पर निम्नलिखित चार प्रश्नों में से किन्हीं तीन प्रश्नों के उत्तर लगभग 25-30 शब्दों में लिखिए। (2×3=6)
(क) ‘साँवले सपनों की याद’ पाठ के आधार पर लिखिए कि सालिम अली की दृष्टि में पक्षियों एवं प्रकृति को मनुष्य की दृष्टि से देखना मनुष्य की भूल क्यों है? (2)
उत्तरः
सालिम अली की दृष्टि में पश्षियों एवं प्रकृति को मनुष्य की दृष्टि से देखना मनुष्य की भूल इसलिए है, क्योंकि वह पक्षी जगत की संवेदनाओं और प्रकृति के सौंदर्य को भावना के स्तर पर नहीं देख पाता। वह स्वार्थवज अपने हित और लाभ के सीमित परिवेश में जकड़ा रहता है। इसलिए वह न तो पक्षियों से त्रेम कर पाता है और न प्रकृति के सौंदर्य का अनुभव करके रोमांचित हो पाता है।
(ख) लेखिका के छात्रावास के बहुभाषी वातावरण की क्या विशेषता थी और वहाँ की छात्राओं का आपसी व्यवहार किस प्रकार का था? ‘मेरे बचपन के दिन’ पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए। (2)
उत्तरः
प्रस्तुत पाठ में लेखिका ने अपने छात्रावास के बहुभाषी परिवेश के बारे में बताते हुए कहा है कि वहां देश के अलग-अलग हिस्सों से छात्राएँ पढ़ने आती थीं। वहाँ हिंदी और उर्दू की पढ़ाई होती थी, लेकिन वे आपस में अपनी भाषा में ही बोलती थीं। इससे कथी कोई विवाद नहीं होता था। यह एक बहुत बड़ी बात थी। वास्तव में उस समय सांप्रदायिकता नहीं थी।
(ग) छोटी बच्ची को अपनी और बैलों की स्थिति एक समान क्यों लगती थी तथा इसका क्या परिणाम हुआ? ‘दो बैलों की कथा’ पाठ के संदर्भ में लिखिए। (2)
उत्तरः
छोटी वच्ची की माँ सौतेली थी, जिसका व्यवहार उस बच्ची के प्रति अच्छा नहीं था। वह बात-बात पर उसे मारती थी। इंधर गया भी बैलों को बात-बात पर मारता और अत्याचार करता था। छोटी बच्ची अपनी ही रारह बैलों के दर्द को भी महलूस कर सकती धी। अत: उसे बैलों की और स्वयं की स्थिति एक समान, लगने लगी, जिसके परिणामस्वरूप उसके मन में बैलों के प्रति प्यार उमझे लगा।
(घ) ‘ल्हासा की ओर’ पाठ में लेखक ने किस यात्रा मार्ग का वर्णन किया है और इस मार्ग की क्या विशेषताएँ बताई हँँ? स्पष्ट कीजिए। (2)
उत्तरः
‘ल्हासा की ओर’ पाठ में लेखक ने अपनी तिब्बत यात्रा का वर्णन किया है। तिब्बत यात्रा मार्ग की विशेषताएँ बताते हुए लेखक कहता है कि नेपाल के जिस रास्ते से वह तिब्यत गया, वह त्रिज्बत जाने का प्राचीन मार्ग धा। तब नेपाल के रास्ते से तिब्बवत में हिंदुस्तान का व्यापार होता था। वह जिस समय तिब्यत गया, उस समय फरी-कलिङ्पोड् का मार्ग भी नहीं खुला था। वस्तुत: इस यात्रा के दौरान लेखक को कई नखीन अनुभव प्राप्त हुए।
प्रश्न 9.
निम्नलिखित पठित काव्यांश पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त विकल्प चुनकर लिखिए। (1×5=5)
हिंदू मूआ राम कहि, मुसलमान खुदाइ।
कहै कबीर सो जीवता, जो दुहुँ के निकटि न जाइ।।
(क) प्रस्तुत साखी से हमें क्या प्रेरणा मिलती है? (1)
(i) ईश्वर का ध्यान चिंतन करने की
(ii) खुदा और राम के नाम पर भेदभाव न करने की
(iii) धार्मिक अंधविश्वासों के मार्ग पर चलने की
(iv) ये सभी
उत्तरः
(ii) खुदा और राम के नाम पर भेदभाव न करने की प्रस्तुत साखी से कवि वह संदेश देना चाहता है कि हमें धार्मिक कट्टरता से बचना चाहिए तथा खुद्या व राम के नाम पर भेदभाव नहीं करना चाहिए।
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(ख) कबीर के अनुसार कौन जीवित है? (1)
(i) राम के भक्त
(ii) खुदा के भक्त
(iii) जो भेदभाव, अंधविश्वास और सांप्रदायिकता से दूर रहता है
(iv) जो कट्टर विरोधी बनकर ईश्वर को भूल गए हैं
उत्तरः
(iii) जो भेदभाव, अंधविश्वास और सांप्रदायिकता से दूर रहता है कबीर के अनुसार, जो साधक धार्मिक अंधविश्वासों, सांग्रदायिकता, हिंदु-मुस्लिम के भेदभाव आदि मार्गों से दूर रहता है, वही ईश्वर के सच्चे साधक के रूप में जीवित रहता है।
(ग) ‘दुहुँ’ शब्द किस ओर संकेत करता है? (1)
(i) सांप्रदायिकता की ओर
(ii) साधक की ओर
(iii) व्रत, कीर्तन जाप की ओर
(iv) हिंदू-मुस्लिम की ओर
उत्तरः
(iv) हिंदू-मुस्लिम की ओर ‘दुहु’ शब्द का अर्थ है दोनों अर्थात् यहाँ यह शब्द ‘हिंदू-मुस्लिम की और संकेत करता है।
(घ) उपर्युक्त साखी में कबीरदास ने किस बात की निंदा की है? (1)
(i) सांप्रदायिकता की भावना से जकड़ी मानसिकता की
(ii) बँटवारे की भावना की
(iii) धर्म चिह्नों में फँसने की
(iv) ये सभी
उत्तरः
(iv) ये सभी उपर्युक्त साखी में कबीरदास ने सांभ्रदायिकता की भावना से जकड़े मनुष्य की मानसिकता की भावना की निदा की है, जो धर्म चिहों में फँसकर प्रभु को भूलता चला आता है एवं बँटवारे की भावना को विकसित करता है, ऐसा मनुष्य निंदनीय है।
(ङ) कथन (A) ईश्वर की सच्ची भक्ति के लिए निष्पक्षता बहुत आवश्यक है। (1)
कारण (R) जो साधक हिंदू-मुस्लिम रूपी कृत्रिम मार्गों से दूर रहता है, वही ईश्वर को प्राप्त करता है। कूट
(i) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या करता है।
(ii) कथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं, परंतु कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या नहीं करता है।
(iii) कथन (A) सही है, कितु कारण (R) गलत है।
(iv) कथन (A) गलत है, किंतु कारण (R) सही है।
उत्तरः
(i) कथन (A) और कारण (R) दोनों सहीं हैं तथा कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या करता है। प्रस्तुत पद्यांश में कबीरदास ने कहा है कि ईश्वर की सच्ची भक्ति के लिए निष्यक्षता बहुत आवश्यक है, क्योंकि जो साधक हिंदू-पुस्लिम रुपी कृत्रिम मागों से दूर रहता है, इनको त्याम देता है, वह ईश्वर को प्राप्त करता है और जीवनपर्यत एवं जीवन के बाद भी जीवित रहता है।
प्रश्न 10.
कविताओं के आधार पर निम्नलिखित चार प्रश्नों में से किन्हीं तीन प्रश्नों के उत्तर लगभग $25-30$ शब्दों में लिखिए। (2×3=6)
(क) ‘भोगी बनने’ और ‘वैरागी बनने’ से क्या संभावना है? ‘वाख’ कविता के आधार पर स्पष्ट कीजिए। (2)
उत्तरः
भोगी बनने से व्यक्ति को कुछ हासिल नहीं होता और वैरागी बनने से उसमें स्वयं के तपस्थी होने का अहंकार उत्पन्न होने लगता है, इसलिए कवयित्री ने ये दोनों मार्ग जीवन में बाधक बताए है। भोग और वाक्यांश दोनों मनुष्य को राम देखी बनाते है।
(ख) ‘कैदी और कोकिला’ कविता में कवि ने कोयल के बोलने के किन कारणों की संभावना बताई? (2)
उत्तरः
कविता में कवि ने कोयल के बोलने की अनेक संभावनाएँ बताई हैं; जैसे वह पागल हो गई है, जो आधी रात को चीख रही है, क्योकि
- अंग्रेजों द्वारा भारतीयों की अमानवीय प्रताइना देख लेना।
- वह कैद स्वतंत्रता सेनानियों के दु:ख से पीड़ित है।
- कवि के शरीर एवं हाथों में लोहे की बंजीरे देख लेना।
- कवि की दीन-दशा देव लेना।
(ग) ‘बच्चे काम पर जा रहे हैं’ कविता के आधार पर समाज व लेखक का बाल मजदूरी के प्रति दृष्टिकोण को स्पष्ट कीजिए। (2)
उत्तरः
समाज वाल-मश्रदूरी को सामान्य मानकर इसको अनदेखा करता रहता है। समाज के लोगों के लिए बाल मजदूरी सामान्य-सी बात है। लेखक इस बात को बहुत भयानक मानता है कि लोग वाल-म्जनूरी की समस्या सुनकर चौंकते नहीं, चितित नहीं होते। वे इसे सामान्य-सी बात कहकर अपनी ज्रिम्मेदारी से बच निकलते हैं।
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(घ) गोपियाँ श्रीकृष्ण की किस वस्तु को धारण नहीं करना चाहतीं और क्यों? ‘सवैये’ पाठ के आधार पर उत्तर दीजिए। (2)
उत्तरः
गोपियाँ श्रीकृष्ण की मुरती धारण नहीं करना चाहती हैं, क्योंकि गोपी भुरली को अपनी सौतन मानती है, वह उससे ईर्ष्यां करती है, क्योकि श्रीकृष्ण सदैव मुरली बजाने में तल्लीन रहते हैं, जिससे वे गोपियों से दूर हो जाते हैं। इसी कारण गोपियाँ मुरत्नी को अपनी सौत्तन समझती हैं और उससे उत्पन्न ईर्ष्या के कारण वह मुरली को धारण नहीं करना चाहरी।
प्रश्न 11.
पूरक पाठ्यपुस्तक के निर्धारित पाठों के आधार पर निम्नलिखित तीन प्रश्नों में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 50-60 शब्दों में लिखिए। (4×2=8)
(क) “सद्व्यवहार और आत्मीय व्यवहार के द्वारा किसी को भी सद्मार्ग पर लाया जा सकता है।” इस प्रसंग के द्वारा किस कथन की पुष्टि होती है? ऐसे व्यवहार से समाज में किस प्रकार के सकारात्मक परिवर्तन संभव हैं? ‘मेरे संग की औरते’ पाठ के संदर्भ में लिखिए। (4)
उत्तरः
सद्व्यवह्रार और आत्मीयता से किसी को भी सही मार्ग पर लाया जा सकता है। प्रस्तुत पाठ में चोर के आगमन के प्रसंग द्वारा इस कथन की पुष्टि होती है। लेखिका की माँजी के सौहादपूर्ण और आत्मीय व्यवहार ने चोर का हृदय परिवर्तन कर दिया। चोर के आने पर उन्होंने शोर नहीं मचाया, अपितु मी-बेटे का संबंध स्थापित कर उसे सही मार्ग पर लाने का प्रयास किया, जिसके परिणामस्वल्प उस चोर ने चोरी छोड़कर कृपि का कार्य अपना लिया। ऐसे क्यवहार से समाज में आपसी विश्चास, प्रेम और सहानुभूति की भावना बड़ती है। इससे भटके लोग सही मार्ग अपनाकर समाज के लिए उपयोगी बन सकते है।
(ख) ‘रीढ़ की हड्डी’ एकांकी के आधार पर बताइए कि लेखक के अनुसार किस मानसिकता के कारण समाज प्रगति की दिशा में अग्रसर नहीं हो पाता तथा इससे महिलाओं की स्थिति पर क्या प्रभाव पड़ता है? ‘रीढ़ की हड्डी’ एकांकी के आधार पर तर्कसम्मत उत्तर दीजिए। (4)
उत्तरः
‘रीढ़ की हड्डी’ एकांकी के माध्यम से लेखक पुरुषवादी मानसिकता का विरोध करता है। पुरुष्वादी मानसिकता के कारण ही हमारा समाज प्रगति की दिशा में अप्रसर नहीं हो पाता। इस कारण हमारे समाज में महिलाओं की स्थिति अस्यंत दयनीय है। उन्हें विभिन्न प्रकार के सामाजिक बंधनों में बाँधकर रखा जाता है, उन्हें किसी भी प्रकार का निर्णय लेने की स्वतंश्रता नहीं दी जाती, साथ ही विभिन्न प्रकार के नियम भी उन पर लागू किए जाते है। लेखक इस पाठ के माध्यम से समाज में ख्याप्त इन्हीं विसंगतियों की ओर ध्यान आकृष्ट करना चाहता है।
(ग) प्राकृतिक आपदा जैसी कठिन परिस्थिति में व्यक्ति को साहस और निडरता का परिचय क्यों देना चाहिए? इस आपदा से आपको क्या प्रेरणा मिलती है? ‘इस जल प्रलय में’ पाठ के संदर्भ में लिखिए। (4)
उत्तरः
प्राकृतिक आपदा जैसी कठिन परिस्थिति में व्यक्ति को साहस और निडरता का परिचय इसलिए देना चाहिए, क्योंकि ऐसी विपत्तियों में घबराने से स्थिति और अधिक बिगद सकती है। व्यक्ति को षैर्य और विवेक से काम लेकर समस्या का समाधान खोजने का प्रयास करना चाहिए। कठिन समय में साहस और निडरता ही वह शक्ति है, जो मनुष्य को आत्मविश्वास देती है तथा दूसरों की सहाखता करने के लिए प्रेरित करती है। ‘इस जल प्रलय में’ पाठ के अंतर्गत बाद की विभीषिका का चित्रण किया गया है। बाद का पानी जितने अधिक समय तक रहता है, उतनी ही अधिक कठिनाइयाँ उत्पन्न होती हैं। बाद को रोकने हेतु दीर्घकालीन योजना पर अपने मित्रों व संगे संबंधियों से चर्चा की जानी चाहिए। इस पाठ से हमें दूसरों की सहायता करने की प्रेरणा मिलती है कि किसी भी आपदा के समय हमें हमेशा दूसरों का सहयोग करना चाहिए।
खंड ‘घ’
(रचनात्मक लेखन) (20 अंक)
इस खंड में रचनात्मक लेखन पर आधारित प्रश्न पूछे गए हैं, जिनके निर्धारित अंक प्रश्न के सामने अंकित हैं।
प्रश्न 12.
निम्नलिखित तीन विषयों में से किसी एक विषय पर लगभग 120 शब्दों में अनुच्छेद लिखिए।
(क) युवाओं में बढ़ता मानसिक तनाव
संकेत बिंदु
- भूमिका
- मानसिक तनाव के कारण
- तनाव से मुक्ति के उपाय
उत्तरः
युवाओं में बड़ता मानसिक तनाव
मानसिक तनाव का अर्थ है-मन संबंधी बंद्ध की स्थिति। आज का किशोर, युवावस्था में कदम रखे ही मानसिक तनाव से घिर जाता है। यदि युवा निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त नहीं कर पाता या इच्छित वस्तु को प्राप्त नहीं कर पाता, तो वह असंतुष्ट हो जाता है, यहीं से मानसिक तनाव की झुरुआत होती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के अनुसार, भारत मानसिक अवसाद के मरीजों के मामले में दुनिया के अग्रणी देशों में से एक है। सामान्यत: गरीबी, अशिक्षा, बेरोजगारी, विफलता जैसी समस्याओं से जूझने वाले युवा मानसिक अवसाद ड्रेलते हैं। साथ ही बढ़ती इच्छाओं और आवश्यकताओं की पूर्ति करने में असमथ युवा मानसिक तनाव का शिकार हो जाते है। इसके साथ ही उसस्त जीवन शैली, परस्पर प्रतिस्पर्द्धी और निरंतर सफलता प्राप्त करने की कोशिश युवाओं में बढ़ते मानसिक अवसाद के प्रमुख कारण हैं, जिसके चलते वे आस्महत्या जैसा निंदनीय कदम भी उठा लेते है।
प्रतियोगिता और प्रतिस्थद्धा की दौड में शामिल युवा परिवार व समाज से दूर होता जा रहा है। कमी-कभी वही अकेलापन अवसाद का कारण बन जाता है। अत: यह आवश्यक है कि वह अपनी समस्या को अपने परिवार, मित्र आदि शुभचितकों के साथ साझा करे। मानसिक तनाव से मुक्ति का सबसे महत्यूपर्ण उपाय है वियेक्शीलता। असफलताओं से घबराना नहीं चाहिए, वरन् उनसे शिक्षा लेते हुए धैर्य के साथ जीवन की राह में अगे बढ़ते रहना चाहिए। सकारालक जितन ही जीवन को सही दिशा दे सकता है। अतः मानसिक तनाव से दूर रहने के लिए आज के बुवाओं को धैर्व, आत्मसंतुष्टि, आत्मविश्वास, अथक परिश्रम जैसे गुणों को अपनाने की नितांत आवश्यकता है।
(ख) गाँवों का देश : भारत
संकेत बिंदु
- गाँवों का देश से तात्पर्य
- किसानों की भूमिका
- गाँवों का वर्तमान स्वरूप
- उपसंहार
उत्तरः
गाँवों का देश : भारत
भारतमाता ग्रगमवासिनी।
खेतों में फैला दृग श्यामल
शस्थ भरा जन-जीवन आँवल
गंगा-यमुना में शीचि श्रम जल
सीलमूर्ति सुख-दुःख उदासिनी।
भारत गाँवों का देश है। यहाँ की 70% जनसंख्या आज भी गाँवों में निवास करती है। हमारे गाँव सभ्यता और संस्कृति के वाहक हैं। गाँवों में भारतीय संस्कृति की लंबी परंपरा का इतिहास है। गाँवों का जीवन स्वच्छ, प्रदूषण रहित तथा कृषि आधारित है। अधिकांश लोग कृषि पर निर्भर है। किसान ही गाँवों के रवरूप का निर्धारण करते हैं। चिलाचलाती धूप, आंधी और वर्षा में भी किसान कार्यरत रहते हैं। सुबह से शाम तक मेहनत करने वाले किसान खेतों में काम करते हैं। वे कुपिजन्व उत्पादों पर ही निर्भर रहते हैं। खेतों में चलते ट्यूबवेल, बहती नालियाँ और नालियों में दौडता ठंडा पानी जिस झीतलता की अनुभूति कराता है, वही गाँवों की चेतना का निर्माण करते हैं।
गाँवों के वर्तमान स्वरूप में अब काफी परिवर्तन हुए हैं तथा सरकार की नीतियों ने गाँव की समस्याओं को कम किया है। कीचड से भरी सडकों की जगह पक्की सड़कें, चिकित्सा के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तथा सिधा के लिए विद्यालयों की स्थापना हुई है, परंतु बेकारी और गरीबी का संजाल अब भी व्याप्त है। आर्थिक विषमता ने गाँवों में दुविधाएँ उत्पन्न की हैं। गाँव राजनीति की युद्धभूमि बनते जा रहे हैं। राजनीतिक दलों ने अपने लाभ के लिए लोगों को बाँट दिया है। गाँवों में जातिवाद और संप्रदायवाद का बोलबाला अधिक है। सरकार ग्रामीण विकास को प्राथमिकता दे रही है, यह गाँवों के विकास के लिए एक सकारालक पहलू है।
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(ग) जीवन में खेलों का महत्त्व
संकेत बिंदु
- भूमिका
- खेलों के लाभ
- खेलों का महत्त्व
उत्तरः
जीवन में खेलों का महत्त्व
मनुष्य की एक महत्वपूर्ण विशेषता सभी प्राणियों की अपेक्षा इसके मस्तिष्क का सर्वांधिक विकसित होना है। स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क का निवास होता है। अत्र: मस्तिष्क का शरीर से और शरीर का खेल से पारस्परिक संबंध को देखते हुए यह स्पष्ट हो जाता है कि खेल-कुद्र व्यक्ति के बहुमुखी विकास के लिए आवश्यक है। स्वास्थ्य की दृष्टि से खेल-कूद के अनेक लाभ है-इससे शरीर की मासपेशियाँ एवं हहि्डयाँ मज्रवूत रहती हैं। रक्त का संचार सुचार रूप से होता है। पाचन-क्रिया नियमित रहती है। शरीर को अतिरिक्त ऑक्सीजन मिलती है और फेफडे भी सुदृद रहते हैं।
खेल-कूद के दौरान शारीरिक अंगों के सक्रिय रहने के कारण शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ जाती है। जीवन में जिस प्रकार शिक्षा महत्त्वपूर्ण है, उसी प्रकार मनोरंजन के महत्त्व को भी नकारा नहीं जा सकता। नियमित दिनचर्यां में यदि खेल-कूद का समावेश कर लिया जाए, तो व्यक्ति के जीवन में उल्लास-ही-उल्लास छा जाता है। अवकाश के समय घर के अंदर खेले जाने वाले खेलों से न केवल स्वस्थ मनोरंजन होता है, बल्कि ये आपसी मेल-जोल को बड़ाने में भी सहायक सिद्ध होते हैं। खोलों से लोगों में मिल-जुलकर रहने की भावना का विकास होता है। अत: मनुष्य के सदांगीण एवं संतुलित विकास के लिए खेल-कूद को जीवन में पर्याप्त स्थान दिया जाना चाहिए।
प्रश्न 13.
दुर्घटनाग्रस्त होने के कारण 15 दिनों के अवकाश हेतु प्रधानाचार्य को लगभग 100 शब्दों में एक प्रार्थना-पत्र लिखिए। (5)
अथवा
अपने मित्र को निबंध प्रतियोगिता में प्रथम आने पर बधाई देते और स्वयं उस प्रतियोगिता में भाग न ले पाने की बात बताते हुए लगभग 100 शब्दों में पत्र लिखिए।
उत्तरः
परीक्षा भवन,
नई दिल्ली।
दिनांक 04 मई, 20XX
सेवा में,
प्रथानाचार्य महोदय,
ही.ए.वी. पब्लिक स्कूल,
द्वारका, नई दिल्ली।
बिषय 15 दिनों के अवकाश हेतु प्रार्थना-पत्र।
महोदय,
सविनय निवेदन यह है कि मै नौवीं कक्षा के सेक्शन ‘सी’ का छात्र है। कल दुर्यटना में मेरे वाएँ पैर की हड्डी टूट गई है, जिस पर प्लास्टर चड़ा दिया गया है। डॉक्टर के परामर्श के अनुसार, मै कम-से-कम 15 दिनों तक आराम करने के लिए विवश हूँ। अतः इस दौरान मैं विच्चालय भी नहीं आ सकता। आशा है कि मेरी स्थिति को देखते हुए, आप मुझे 04 मई से 18 मई तक का अवकाश प्रदान करने की कृपा करें।
इसके लिए मैं आपका आभारी रहुँगा।
सघन्यवाद।
आपका आज्ञाकारी शिष्य
कहा. गे.
अथवा
परीक्षा भवन,
उत्तर प्रदेश-282001
दिनांक 04 अगस्त, 20XX
प्रिय मित्र दिव्यांशु,
सप्रेम नमस्कार,
आज ही पता चला कि हाल ही में संपन्न राज्य स्तरीय निबंध प्रतियोगिता के घोधित परिणाम में तुमने प्रथम स्थान प्राप्त किया है। मेरी ओर से बहुत-बहुत बधाई और मिलने पर मिठाई खिलाने के लिए तैयार रहना। मित्र दिव्यांशु, तुमने तो सचमुच कमाल कर दिया। हालांकि किसी कारणवश में इस प्रतियोगिता में सम्मिलित नहीं हो पाया था, लेकिन यदि सम्मिलित होता, तब भी मुझे यह विश्वास था कि तुम ही प्रथम स्थान प्राप्त करते। तुम्हारी लेखन-शैली से तो मैं बहुत पहले से ही प्रभावित था, अब सभी को तुम्हारी लेखन शैली की विशेषताओं का पता चल गया है। मेरे माता-पिता तथा छोटा भाई भी तुम्हें ढेर सारी वधाइयाँ एवं शुभकामनाएँ भेज रहे है। आगरा आने पर घर पर मिलने अवश्व आना।
अपने घर के सभी लोगों को मेरा यथोचित अभिवादन कहना।
तुम्हारा मित्र,
कहा.ग.
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प्रश्न 14.
आप अंकिता शर्मा हैं। बस में यात्रा के दौरान आपका एटीएम कार्ड कहीं गिर गया है तथा बहुत खोजने पर भी नहीं मिल रहा है। बैंक प्रबंधक महोदय को इसकी जानकारी देते हुए उस एटीएम कार्ड को बंद करके उसके स्थान पर नया एटीएम कार्ड बनाने के लिए लगभग 100 शब्दों में ई-मेल लिखिए। (5)
अथवा
लगभग 100 शब्दों में एक ऐसी लघुकथा लिखिए, जिसके अंत में यह वाक्य लिखा गया हो-“संघर्षों से हार न मानना ही जिंदगी का दूसरा नाम है।”
उत्तरः
From: Ankitasharma4818gmail.com
To : [email protected]
CC : [email protected]
BCC :
विषय : एटीएम कार्ड गुम हो जाने पर नया कार्ड बनाने हेतु।
मान्यवर,
निवेदन यह है कि मैं दस वर्ष से आपके बैंक की खाताधारिका हुं। कल बस में यात्रा करने के दौरान मेरा एटीएम कार्ड कहीं गिर गया था। मैंने
दूँडने की बहुत कोशिश की, परंतु मुक्रे वह नहीं मिला। मुक्रे हर है कि कहीं कोई मेरे एटीएम कार्ड का दुरुपयोग न कर ले।
अत: आपसे विनम्र निवेदन है कि आप मेरे खाते का वह एटीएम कार्ड तुरंत बंद कर दें और उसके स्थान पर मुझे नया एटीएम कार्ड बनाकर देने की कृपा करें। इसके लिए मैं सदा आपकी आभारी रहृँगी।
घन्यथाद।
प्राथी
अंकिता शर्मा
खातानं. 3425 XXXXXX
मोबाइल न. 9425XXXXXX
दिनांक 12 अगस्त, 20 XX
अधवा
लघु कथा सुनील एक गरींब बालक था। माता-पिता के देहांत के बाद घर की आर्थिक स्थिति बहुत खराब हो गई थी। इस कारण उसकी पढ़ाई भी बाधित हो गई यी। अपना पेट पालने के लिए उसे एक मिल कारखाने में नौकरी करनी पड़ी। सुनौल अपनी पढ़ाई अधूरी छोड़ना नहीं चाहता था। अत: कारखाने में आने के बाद वह पढ़ाई में लीन हो जाता। दिनभर काम की थकान और रात्भर पढ़ाई उसे बोझिल बना देती थी।
परंतु लक्ष्य की प्राप्ति संघर्ष के पथ पर अप्रसर होने को प्रेरित करती व साथ ही उसे अपने पिताजी की वे संघर्षपूर्ण कहानियाँ याद आतीं, जो वह उसे बचपन में सुनाते थे। अपने पिताजी द्वारा किया गया जीवन संघर्ष, उसकी मूल प्रेरणा धी। रात भर कठिन मेहनत के परिणामस्वरूप उसने अपने कॉलेज में सर्वोंच्च स्थान प्राप्त किया। उसके पित्ताजी का सपना था कि वह बड़ा होकर उच्च दर्जो का डॉक्टर बने।
अतः अपने पिताजी का सपना साकार करने के लिए उसे आगे कठिन संघर्ष की आवश्यक्ता थी। पुस्तकें खरीदने के लिए उसके पास पर्याप्त पैसे न थे। इसीलिए वह अपने मित्र से पुस्तकें पढने के लिए ले लेता धा। वह पूरी-पूरी रात पढ़ाई करता रहता और सुवह उठकर नौकरी पर चला जाता। लक्ष्य को प्राप्त करने की चिता में वह कुछ ही क्षण आराम करता। उसके आदर्श उसके पिताजी थे, जिनकी संघर्षमय जीवन यात्रा देखते-देखते ही वह बड़ा हुआ था। अतः संघर्षों से घबराना उसने नहीं सीखा था। जैसे-जैसे परीक्षा का समय नजदीक आता जा रहा था, वैसे-वैसे उसकी मेहनत भी बढ़ती जा रही थी।
अब उसने आराम बिल्कुल त्याम दिया था तथा कुछ समय के लिए कारखाने से छुट्टी भी ले ली थी, ताकि परीक्षा की तैयारी अच्छे से हो सके। अंततः उसकी मेहनत रंग लाई। उसने एथ. बी. वी. एस. की परीक्षा अच्छे अंकों से उच्चीर्ण कर ली। कॉलेज की ओर से उसे छात्रवृत्ति की सहायता मिलने लगी। कुछ वर्षों के बाद अर्थ्यत संघर्ष करके वह एक बहुत बड़ा डॉक्टर बन गया।
वह बहुत खुश था। जीवन के इतने कठिन संघर्षों के बाद लक्ष्व प्राप्ति होने पर उसे यह अनुभव हुआ कि “संघर्षों से हार न मानना ही जिंदगी का दूसरा नाम है।”
सीख्र इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए कठिन संघर्ष की आवश्यकता होती है। यदि मनुष्य संघर्षों से घबराकर हार मान लेता है, तो मानव जीवन व्यर्थ है। अत्र: संघर्षों से लडकर ही हम अपना जीवन सफल बना सकते है।
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प्रश्न 15.
आप शोभित हैं और अपने पिताजी से अपने विद्यालय की ओर से भ्रमण पर जाने के लिए अनुमति देने के लिए कह रहे हैं। उनसे हुए संवाद को लगभग 80 शब्दों में लिखिए। (4)
अथवा
आपका नाम अनुराग मेहता है और आप डी. ए. वी. स्कूल, दिल्ली के प्रबंधक हैं। विद्यार्थियों को शैक्षिक यात्रा पर ले जाने के संबंध में लगभग . शब्दों में सूचना लिखिए।
उत्तरः
शोभित पिताजी, मेरे विद्यालय के अनेक छात्र झैक्षिक अमण के लिए जयपुर जा रहे हैं। मैं भी जाना चाहता हूँ।
पिताजी ये सभी बच्चे स्वयं ही योजना बना रहे हैं या फिर विद्यालय के निर्देशन में जा रहे हैं?
शोभित नहीं, नहीं, पिताजी! उन बच्चों को विद्यालय की ओर से ले जाया जा रहा है। इस शैंक्षिक अमण का आधा खर्च छात्र देगा और आधा विद्यालय। पिताजी अच्छा, यदि ऐसा है तो जाओ, लेकिन हमेशा शिक्षकों की देख-रेख में रहना और किसी भी प्रकार की शिकायत का अवसर मत देना।
शोभित पिताजी, आप निश्चित रहें। मैं अपने शिक्षकों के प्रत्येक निर्देश का पालन करूँगा।
पिताजी अच्छी बात है। तुम अपनी पूरी तैयारी कर लो और किसी चीज्ञ की आवश्यकता हो, तो बता देना।
शोभित धन्यवाद, पिताजी!
अथवा
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डी. ए. वी. स्कूल, दिल्ली दिनांक 15 सितंबर, 20XX शैक्षिक यात्रा का आयोजन सभी विद्यार्थियों को सूचित किया जाता है कि हमारे विद्यालय ने शैक्षिक जानकारी हेतु ‘भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान’ (इसरो) ले जाने का निर्णय लिया है, जहाँ छात्र-छात्राओं को वैज्ञानिक तकनीकी क्षेत्र में हो रही नित्य नई-नई खोनों से अवगत करवाया जाएगा। झैक्षिक यात्रा का आयोजन 26 सितंबर, 20 XX व 27 सितंबर, 20 XX को कक्षा क्रमानुसार निश्चित की गई तिथि को किया जाएगा। अतः शैक्षिक यात्रा के लिए जाने के इच्छुक विद्यार्थी विद्यालय के प्रयोगिक कक्ष के प्रभारी अध्यापक से संपर्क करें। अनुराग मेहता |