The latest CBSE Sample Papers for Class 8 hindi with Solutions Set 2 include questions based on the updated syllabus.
CBSE Sample Papers for Class 8 Hindi Set 2 with Solutions
अधिकतम अंक : 30
निर्धारित समय : 90 min.
सामान्य निर्देश:
- प्रश्न-पत्र चार खण्डों, खण्ड- ‘क’, ‘ख’, ‘ग’ और ‘घ’ में है।
- चारों खण्डों के प्रश्नों के उत्तर देना अनिवार्य हैं।
- उत्तर लिखने से पहले प्रश्न संख्या अवश्य लिखिए।
- यथासंभव प्रत्येक खंड के प्रश्नों के उत्तर क्रमश: दीजिए।
खण्ड- ‘क’ : अपठित बोध
प्रश्न 1.
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए: ( कोई तीन ) 1 × 3 = 3
राष्ट्रीयता का विकास सबसे पहले पश्चिम में हुआ, विशेषतया इंग्लैण्ड में। किंतु वहाँ पराधीनता की समस्या नहीं थी, इसलिए वहाँ राष्ट्रीयता के जो तत्व उभरे, वे भारत में उभरने वाले तत्वों से थोड़े भिन्न थे। भारतीय राष्ट्रीयता में स्व-रक्षा का भाव प्रधान था, जबकि स्वतंत्र पश्चिमी देशों में स्व- विकास का । भारत एक विशाल देश है, जहाँ अनेक संस्कृतियों, भाषाओं, रीति रिवाजों के लोग रहते हैं। ऊपर-ऊपर से वे एक दूसरे से अलग-अलग दीखते हैं, परंतु सबका मूल स्रोत एक ही है, जो आंतरिक रूप से सबको बाँधता है, वह मूल स्रोत है-अपनी प्राचीन संस्कृति।
(i) गद्यांश के अनुसार राष्ट्रीयता का सबसे पहले विकास कहाँ हुआ था?
(क) पूर्व में
(ख) उत्तर में
(ग) दक्षिण में
(घ) पश्चिम में
उत्तर:
(घ) पश्चिम में
(ii) भारतीय राष्ट्रीयता में किस भाव की प्रधानता थी?
(क) मन-बल
(ख) मन स्थिति
(ग) मन-भाव
(घ) स्व-रक्षा
उत्तर:
(घ) स्व-रक्षा
(iii) भारतीय राष्ट्रीयता बोध तथा पश्चिम की राष्ट्रीयता
(क) पश्चिमी में पराधीनता है।
(ख) पश्चिमी देश सबल है।
(ग) पश्चिमी देशों में पराधीनता की समस्या नहीं है।
(घ) उपर्युक्त कोई नहीं
उत्तर:
(ग) पश्चिमी देशों में पराधीनता की समस्या नहीं है।
(iv) सभी भारतीयों को एक सूत्र में बाँधे रखने का प्रमुख
(क) प्राचीन धर्म
(ख) प्राचीन किताब
(ग) प्राचीन संस्कृति
(घ) उपर्युक्त कोई नहीं स्रोत क्या है?
उत्तर:
(ग) प्राचीन संस्कृति
अथवा
भारत का अपना कौन-सा धर्म है?
(क) जैन धर्म
(ख) हिंदू धर्म
(ग) बहुधर्मी देश
(घ) उपर्युक्त कोई नहीं
उत्तर:
(ग) बहुधर्मी देश
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प्रश्न 2.
निम्नलिखित पद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए : (कोई तीन )
वैसोई राज-समाज बने, गज, बाजि घने मन संभ्रम छायो।
कैधों पर्यो कहुँ मारग भूलि, कि फैरि कै मैं अब द्वारका आयो ||
भौन बिलोकिबें को मन लोचत, सोचत ही सब गाँव मझायो ।
पूँछत पाँडे फिरे सब सों, पर झोपरी को कहूँ खोज न पायों ।
(i) इस पद्यांश में किसकी मनोदशा का वर्णन है?
(क) गोपी
(ख) सुदामा
(ग) राधा
(घ) उपर्युक्त कोई नहीं
उत्तर:
(ख) सुदामा
(ii) सुदामा ने कुटिया के स्थान पर क्या देखा?
(क) छोटा घर
(ख) बड़ा घर
(ग) विष्णु भगवान
(घ) उपर्युक्त कोई नहीं
उत्तर:
(ग) विष्णु भगवान
(iii) सुदामा के लिए भव्य महल किसने बनाया?
(क) शिव भगवान
(ख) श्रीकृष्ण भगवान
(ग) महल.
(घ) उपर्युक्त कोई नहीं
उत्तर:
(ख) श्रीकृष्ण भगवान
अथवा
श्रीकृष्ण व सुदामा के बीच कौन-सा रिश्ता था?
(क) भाई का
(ख) पिता का
(ग) मित्रता का
(घ) उपर्युक्त कोई नहीं
उत्तर:
(ग) मित्रता का
खण्ड- ‘ख’ : व्याकरण प्रश्न
प्रश्न 3.
निम्नलिखित व्याकरणिक प्रश्नों के उत्तर लिखिए :
(i) निम्नलिखित शब्द में से प्रत्यय अलग करो : गतिशीलता।
(क) लता
(ख) ता
(ग) गति
(घ) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(ख) ता
(ii) रेखांकित शब्द में विशेषण के भेद पहचानिए : थोड़ी खाद डाल दो।
(क) थोड़ी
(ख) खाद
(ग) डाल
(घ) दो
उत्तर:
(क) थोड़ी – परिणामवाचक विशेषण,
(iii) निम्नलिखित में से ‘शेरनी’ शब्द का पुल्लिंग शब्द पहचानिए :
(क) शेरा
(ख) शेर
(ग) शेरों
(घ) उपर्युक्त सभी
उत्तर:
(ख) शेर
(iv) सर्वनाम की परिभाषा लिखो।
उत्तर:
संज्ञा के स्थान पर प्रयुक्त होने पर शब्दों को सर्वनाम कहते हैं।
(v) निम्नलिखित वाक्य में आए सर्वनाम शब्दों के स्थान संज्ञा शब्द लिखकर वाक्यों को पुनः लिखिए: तुम आ जाओ, तो हम सब साथ चलेगें।
उत्तर:
गीता आ जाओ तो मीना सब साथ चलेगें।
(vi) ‘हवाई किले बनाना’ मुहावरे का अर्थ लिखकर वाक्य बनाओ।
उत्तर:
शौक लगना : सीधे सादे पुनीत को कॉलेज पहुँचते ही वहाँ की हवा लग गई।
खण्ड- ‘ग’ : रचनात्मक प्रश्न
प्रश्न 4.
निम्नलिखित में से किसी एक विषय पर अनुच्छेद लिखिए :
(क) सदाचार
(ख) राष्ट्रभाषा हिंदी
(ग) कंप्यूटर
उत्तर:
(क) सदाचार
सदाचार का अर्थ है- अच्छा आचरण। अच्छा आचरण वह है जिसमें व्यक्ति व समाज दोनों का हित हो । सत्य, अहिंसा, प्रेम, उदारता, सदाशयता आदि सदाचार के प्रमुख लक्षण हैं। सदाचार का संबंध मनुष्य के मन की भावनाओं से है। जो मनुष्य मन से सत्यनिष्ठ व अच्छे विचारों वाला नहीं है, उसे सदाचारी नहीं माना जा सकता। बड़ों के प्रति आदर-प्रदर्शन करना सभी समाजों में मान्य है।
वाणी में मधुरता, अतिथि सत्कार की भावना के आवश्यक अंग हैं। जो मनुष्य सदाचार के नियमों का यथासंभव पालन करता है, वही समाज में प्रतिष्ठा पाता है। सदाचारी व्यक्ति स्वयं भी सुख का अनुभव करता है तथा औरों का भी भला करता है। अतः जीवन में सदाचार का अनुसरण करना अति आवश्यक है।
(ख) राष्ट्रभाषा हिंदी
हिंदी देश की राष्ट्रभाषा व केंद्र की राजभाषा है। इसे हम संपर्क भाषा भी कह सकते हैं। यह एक ऐसी समृद्ध भाषा है, जिसमें हर प्रकार के साहित्य का निर्माण हो चुका है। सूर, तुलसी, बिहारी आदि हिंदी के वरद पुत्र हुए हैं। हिंदी के आधुनिक साहित्यकारों में निराला, पंत, महादेवी वर्मा, दिनकर व प्रेमचंद आदि का नाम ले सकते हैं।
एक अनुमान के अनुसार हिंदी पच्चीस करोड़ से अधिक लोगों द्वारा बोली जाती है। वर्तमान समय में इसका व्यावहारिक रूप अधिक विकसित है। आवश्यकता यह है कि इसे सर्वत्र काम-काज की भाषा के रूप में भी अपनाया जाए। हम अंग्रेज़ी के मोह से ऊपर उठें व अपनी राष्ट्रभाषा को गले से लगाएँ। तभी यह अपनी विकास-यात्रा में उन्नति के शिखर तक पहुँच पाएगी।
(ग) कंप्यूटर
कंप्यूटर के आविष्कार ने विश्व के प्रत्येक क्षेत्र में क्रांति ला दी है। यह मानव-निर्मित यंत्र एक विकसित मस्तिष्क के समान है, जिसकी सहायता से अनेक कठिन समस्याएँ सुलझाई जा सकती हैं। अंग्रेज वैज्ञानिक चार्ल्स बाबेज ने कंप्यूटर की कल्पना को साकार रूप प्रदान किया। आजकल कंप्यूटर का प्रयोग बड़े-बड़े व्यवसायों व तकनीकी संस्थानों में किया जाता है।
लेखा-जोखा गणनाएँ, भविष्यवाणियाँ, मौसम की जानकारी, परीक्षा- फलों का विवेचन, रेल आरक्षण तथा रॉकेट संचालन आदि में इसका जवाब नहीं है। इसके अलावा चिकित्सा क्षेत्र में भी कंप्यूटर की महत्ता दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। भविष्य में कंप्यूटर मानव-जाति के लिए और भी उपयोगी सिद्ध होगा।
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प्रश्न 5.
निम्नलिखित में से किसी एक विषय पर पत्र लिखिए:
आपने पिछले दिनों अपने विद्यालय का वार्षिक उत्सव बहुत ही उत्साह से मनाया। इसकी विस्तृत जानकारी देते हुए अपने दादा जी को एक पत्र लिखिए।
उत्तर:
न्यू कान्वेंट हाई स्कूल,
उत्तम नगर (दिल्ली)
दिनांक ………
पूज्य दादा जी.
सादर प्रणाम।
मैं यहाँ पर कुशलपूर्वक हूँ और आशा करता हूँ कि घर पर भी सब कुशल होंगे। मेरी पढ़ाई सही चल रही है, पढ़ाई के साथ-सा थ स्कूल में अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों का दौर भी जारी रहता है, अभी हाल ही में 23 फरवरी 2017 को हमारे विद्यालय में वार्षिक उत्सव का आयोजन किया गया। इस उत्सव में विद्यालय को विशेष रूप से सजाया गया। विद्यार्थियों द्वारा नाटक, भाषण, प्रतियोगिता व गायन, नृत्य आदि कार्यक्रम पेश किये गये।
वार्षिक उत्सव में प्रिंसिपल व अन्य सहायक अध्यापकों द्वारा कार्यक्रम में प्रथम, द्वितीय व तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को पुरस्कृत किया गया। इस बार में भी प्रतियोगिता में भाग अवश्य लूँगा। मुझे इस वार्षिक उत्सव का सबसे आर्कषण बिंदु यह लगा जब हम सब विद्यार्थियों व अध्यापकों द्वारा एक समूह गान जो देश की भक्ति को समर्पित किया गया था, वह बहुत अच्छा मैं इस प्रकार के कार्यक्रमों की चर्चा आपसे करता रहूँगा, आप अपना व दादी जी के स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखना।
आपका प्रिय
इकबाल मोहम्मद
अथवा
अपनी भूल के लिए क्षमा माँगते हुए पिताजी को पत्र।
जवाहर नेहरू छात्रावास, प्रयागराज (उ. प्र. )
दिनांक ………..
पूज्य पिताजी,
सादर चरण स्पर्श।
आपका कृपा-पत्र मिला। आपको मेरे स्कूल से मेरे बारे में जो शिकायत मिली है, उसके लिए मैं क्षमा माँगता हूँ। मैं कुछ गलत साथियों के संपर्क में आकर पढ़ाई के प्रति लापरवाह हो गया था। इसी कारण गृहकार्य समय पर पूरा नहीं कर पा रहा था। इससे मेरी कक्षा अध्यापिका मुझसे रुष्ट हो गई थी और यह स्वाभाविक भी था। इसी कारण उन्होंने मेरी शिकायत आप तक पहुँचा दी। मैं अपने व्यवहार के लिए शर्मिंदा हूँ। मैं आपको विश्वास दिलाता हूँ कि भविष्य में ऐसी भूल पुनः नहीं होगी। मुझे आशा है कि इस बार आप मुझे क्षमा कर देंगे।
आपका प्रिय पुत्र,
अर्नव
खण्ड- ‘घ’ : पाठ्यपुस्तक प्रश्न
प्रश्न 6.
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए : 1 × 3 = 3
वैसे तो मेरे मामा के गाँव का होने के कारण मुझे बदलू को ‘बदलू मामा’ कहना चाहिए था परंतु मैं उसे ‘बदलू मामा’ न कहकर बदलू काका कहा करता था जैसा कि गाँव के सभी बच्चे उसे कहा करते थे। बदलू का मकान, कुछ ऊँचे पर बना था। मकान के सामने बड़ा-सा सहन था जिसमें एक पुराना नीम का वृक्ष लगा था। उसी के नीचे बैठकर बदलू अपना काम किया करता था । बगल में भट्टी दहकती रहती जिसमें वह लाख पिघलाया करता । सामने एक लकड़ी की चौखट पड़ी रहती जिस पर लाख के मुलायम होने पर वह उसे सलाख के समान पतला करके चूड़ी का आकार देता। पास में चार-छह विभिन्न आकार की बेलननुमा मुँगरियाँ रखी रहतीं जो आगे से कुछ पतली और पीछे से मोटी होतीं। लाख की चूड़ी का आकार देकर वह उन्हें मुँगरियों पर चढ़ाकर गोल और चिकना बनाता और तब एक-एक कर पूरे हाथ की चूड़ियाँ बना चुकने के पश्चात वह उन पर रंग करता।
(i) लेखक बदलू को ‘बदलू काका’ क्यों कहता था ?
(क) वह लेखक के गाँव का था।
(ख) गाँव के सभी बच्चे उसे बदलू काका ही कहते थे।
(ग) वह इसी नाम से खुश होता था।
(घ) वह लेखक का चाचा था।
उत्तर:
(ख) गाँव के सभी बच्चे उसे बदलू काका ही कहते थे।
(ii) बदलू कहाँ बैठकर अपना काम करता था ?
(क) नीम वृक्ष के नीचे
(ख) घर के अंदर
(ग) कारखाने में
(घ) मट्ठी के ऊपर
उत्तर:
(क) नीम वृक्ष के नीचे
(iii) मट्ठी में बदलू क्या पिघलाया करता था?
(क) चूड़ी
(ख) लाख
(ग) ईंधन
(घ) कोयला
उत्तर:
(ख) लाख
अथवा
हम पाँच मित्रों ने तय किया कि शाम चार बजे की बस से चलें। पन्ना से इस कंपनी की बस सतना के लिए घंटे भर बाद मिलती है जो जबलपुर की ट्रेन से मिला देती है। सुबह घर पहुँच जाएँगे। हममें से दो को सुबह काम पर हाजिर होना था इसीलिए वापसी का यह रास्ता अपनाना जरूरी था। लोगों ने सलाह दी कि समझदार आदमी इस शाम वाली बस से सफर नहीं करते। क्या रास्ते में डाकू मिलते हैं? नहीं, बस डाकिन है।
(i) कुल कितने व्यक्ति शाम की बस से यात्रा करने वाले थे?
(क) तीन
(ख) चार
(ग) पाँच
(घ) छह
उत्तर:
(ग) पाँच
(ii) पन्ना से सतना के लिए बस कितनी देर बाद मिलती है?
(क) आधा घंटा बाद
(ख) एक घंटे बाद
(ग) दो घंटे बाद
(घ) प्रातः काल
उत्तर:
(ख) एक घंटे बाद
(iii) यह बस कहाँ की ट्रेन से मिला देती है?
(क) सतना की
(ख) पन्ना की
(ग) जबलपुर की
(घ) भोपाल की
उत्तर:
(ग) जबलपुर की
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प्रश्न 7.
निम्नलिखित पद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए : 1 × 3 = 3
हम भिखमंगों की दुनिया में, स्वच्छंद लुटाकर प्यार चले,
हम एक निशानी-सी उर पर ले असफलता का भार चले।
(i) यह दुनिया किनकी हैं?
(क) भिखमंगों की
(ख) दीवानों की
(ग) कवि की
(घ) सभी की
उत्तर:
(क) भिखमंगों की
(ii) ‘असफलता’ शब्द कैसे बना है?
(क) अ + सफल + ता
(ख) अस + फल + ता
(ग) असफल + ता
(घ) असफलता
उत्तर:
(क) अ + सफल + ता
(iii) दीवाने को क्या पछतावा है?
(क) भिखमंगे बनने का
(ख) लोगों को मस्त न बना पाने का
(ग) स्वच्छंद प्यार लुटाने का
(घ) कोई नहीं
उत्तर:
(ख) लोगों को मस्त न बना पाने का
प्रश्न 8.
निम्नलिखित में से किन्हीं तीन प्रश्नों के उत्तर लिखिए 1× 3 = 3
1. ‘भगवान के डाकिए’ कविता से आपको क्या संदेश मिलता है?
2. कवि ने अपने आने को ‘उल्लास’ और जाने को ‘आँसू बनकर बह जाना’ क्यों कहा है?
3. “मैंने उस कंपनी के हिस्सेदार की तरफ पहली बार श्रद्धाभाव से देखा ।” लेखक के मन में हिस्सेदार साहब के लिए श्रद्धा क्यों जग गई?
4. मशीनी युग में अनेक परिवर्तन आए दिन होते रहते हैं। इस प्रकार के किसी परिवर्तन का उदाहरण चुनिए और उसके बारे में लिखिए।
उत्तर:
1. इस कविता से हमें यह संदेश मिलता है कि हमें अपना स्वार्थ, अपने पराये की भावना, गाँव घर की सीमा छोड़कर सभी के साथ समानता, सद्भाव तथा प्रेम का व्यवहार करना चाहिए, जिससे हमारे कार्यों की महक चारों ओर फैल जाए।
2. कवि अपने आने को उल्लास इसलिए कहता है क्योंकि किसी भी नए स्थान पर वह बड़े उत्साह के साथ जाता है। वहाँ जाकर उसे प्रसन्नता होती है। पर जब वह उस स्थान को छोड़कर आगे जाता है तब उसे दुःख होता है। विदाई के क्षणों में उसकी आँखों से आँसू बह निकलते हैं।
3. लेखक के मन में बस कैंपनी के हिस्सेदार साहब के लिए श्रद्धा इसलिए जाग गई कि वह इतनी खटारा बस को चलाने का साहस जुटा रहा था। कंपनी का हिस्सेदार अपनी पुरानी बस की खूब तारीफ कर रहा था। ऐसे व्यक्ति के प्रति श्रद्धा भाव ही उमड़ता है। लेखक को उसमें उत्सर्ग की भावना दिखाई दे रही थी। वह घिसे टायर लगवाकर भी बस को चलाने की हिम्मत जुटा रहा था।
4. मशीनी युग में अनेक परिवर्तन आए दिन होते रहते हैं। हमारे आस-पास भी इस प्रकार के परिवर्तन होते रहते हैं। मशीनों के आने से अनेक लोगों का रोजगार छिन गया है। प्रथम हमारे घर के पास कई स्त्रियाँ दाल पीसने का काम करती थीं। वे बड़ी-बड़ी सिलों पर पत्थर के बट्टों से दाल पीसकर कुछ रुपए कमा लेती थीं। प्रायः हलवाई उनसे दाल पिसवाते थे। अब दाल पीसने की मशीनें आ गई हैं। अब वही काम मशीन थोड़ी ही देर में कर देती है। इससे उनका काम छिन गया है।
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प्रश्न 9.
निम्नलिखित में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लिखिए 2 × 2 = 4
1. आप घरेलू उद्योग धंधों के चौपट होने पर क्या सोचते हैं? उनकी दशा कैसे सुधारी जा सकती है? अपने विचार लिखिए।
2. बस के चलने पर लेखक को क्या लगा? कैसे कहा जा सकता है कि बस सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौर से गुजर रही थी? चलती बस को देखकर लेखक को क्या लगता था? आठ-दस मील चलने के बाद क्या भेदभाव मिट गए?
3. जीवन में मस्ती होनी चाहिए, लेकिन कब मस्ती हानिकारक भी हो सकती है ? चर्चा कीजिए।
उत्तर:
1. घरेलू उद्योग-धंधों का चौपट होना एक दुखदायी समस्या है। यह सब मशीनीकरण का एक दुखद पहलू है। सरकार ने घरेलू उद्योगों को जीवित रखने का कोई कारगर उपाय नहीं किए। हाथ से बनी वस्तुओं का अपना विशेष महत्त्व होता हैं। इनमें लगे कारीगरों को सरकारी सहायता एवं प्रोत्साहन की आवश्यकता है।
हथकरघे पर बने कपड़े भी पसंद किए जाते हैं। इसी प्रकार कुम्हारों के बर्तनों को भी महत्त्व मिलना चाहिए। कुछ वर्ष से लोगों में घरेलू दस्तकारी की चीजों को खरीदने के प्रति रुझान बढ़ा है। इसको और प्रोत्साहन मिलना चाहिए। गलीचा बुनना भी ऐसा ही व्यवसाय है।
2. बस के चलने पर लेखक को लगा कि यह बस गाँधी जी के असहयोग और सविनय अवज्ञा आंदोलनों के वक्त अवश्य जवान रही होगी। क्योंकि बस का हर हिस्सा एक-दूसरे से असहयोग कर रहा था। बस पूरी तरह से सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौर से गुजर रही थी।
चलती बस को देखकर लेखक को कभी यह लगता था कि सीट बॉडी को छोड़कर आगे निकल गई है तो कभी लगता था कि सीट को छोड़कर बॉडी आगे भागी जा रही है। आठ-दस मील चलने के बाद सीट और लेखक का भेदभाव मिट गया। यह पता ही नहीं चलता था कि लेखक सीट पर बैठा है या सीट लेखक पर बैठी है।
3. जीवन में मस्ती का अपना महत्त्व है लेकिन कभी हमारी यह मस्ती हानिकारक रूप भी ग्रहण कर लेती है। हमारी अत्यधिक मस्ती जब शोर-शराबा करने लगे तब वृद्धों बीमारों के आराम में खलल पहुँचाने का काम करती है। हमारी अनियंत्रित स्वतंत्रता कई बार दूसरों के अधिकारों का हनन करने लगती है। हमें अपनी मस्ती के बीच भी दूसरों की भावनाओं का ख्याल रखना चाहिए।
प्रश्न 10.
नारा लेखन लड़कियों को पढ़ाने संबंधी नारे लिखिए।
उत्तर:
- ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’
- ‘लड़कियों की शिक्षा, तरक्की का आधार’
- ‘एक लड़की शिक्षित, पूरा परिवार शिक्षित’
- ‘लड़कियों की शिक्षा – सशक्तिकरण की ओर एक कदम’
- ‘लड़कियों की आत्मनिर्भरता – शिक्षा के माध्यम से ‘
अथवा
भारत की एकता अंखडता संबंधी नारे लिखिए।
- भारत की एकता-अखंडता – आज की आवश्यकता’
- ‘लोगों को दो एकता का ज्ञान’
- ‘उनके अंदर जमाओ नया सम्मान’
- ‘मेरे सीमाएँ देश की, बने एक परिवार फिर देखो एकता का चमत्कार’|