Students must start practicing the questions from CBSE Sample Papers for Class 12 Hindi Elective with Solutions Set 5 are designed as per the revised syllabus.
CBSE Sample Papers for Class 12 Hindi Elective Set 5 with Solutions
निर्धारित समय : 3 घंटे
पूर्णांक : 80
सामान्य निर्देश :
- इस प्रश्न पत्र तीन खण्डों – खंड ‘क’, ‘ख’ और ‘ग’।
- दिए गए निर्देशों का पालन करते हुए प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
- तीनों खण्डों के कुल 13 प्रश्न हैं। तीनों खण्डों के प्रश्नों के उत्तर अनिवार्य है।
- यथासंभव तीनों खण्डों के प्रश्नों के उत्तर क्रम से लिखिए।
खण्ड-‘क’
(अपठित बोध) (18 अंक)
प्रश्न 1.
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर दीजिए – (10)
‘किसी भी राष्ट्र की सांस्कृतिक धरोहर उसकी आत्मा है।’ यह उक्ति भारत जैसे प्राचीन राष्ट्र के संदर्भ में और भी अधिक महत्त्वपूर्ण हो जाती है। संस्कृति राष्ट्र के जीवन मूल्यों, आदर्शो, दर्शन आदि को मानसिक धरातल पर अभिव्यक्त करने का महत्त्वपूर्ण साधन है। भारत में इसके पीछे हजारों वर्षों के आचरण, व्यवहार, अनुभव, चिंतन, मनन आदि की पूँजी लगी हुई है। कालचक्र के सैकड़ों सुखद एवं दुःखद घटनाकमों के दौरान कसौटी पर खरे उतर कर उन्होंने अपनी सत्यता व विश्वसनीयता अनेक बार सिद्ध की है।
ल्याग, संयम, परहित एवं अहिंसा या जीवों पर दया आदि भारतीय संस्कृति के सर्वोच्च मूल्यों में से हैं। संस्कृति और सभ्यता दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं। अपने आयु, पद और अनुभव में बड़ों के प्रति आदर भाव, श्रद्धा व सम्मान रखना ही संस्कृति की आत्मा है, उसकी पहचान है। संस्कृति और उसके आदर्श एवं मूल्य एक दिन में निर्मित नहीं होते, वें हज़ारों वर्षों की अनुभूतियों तथा सिद्धांतों के परिणाम होते हैं। इन आदर्शों व मूल्यों के आधार पर ही राष्टीय संस्कृति निर्मित होती है। इसका निर्माण कार्य ही पर्याप्त नहीं, बल्कि उसका आचरण, व्यावहारिक ज़िंदगी में सहज रूप से अभिव्यक्त होना अर्थात् उसका अंगीभाव हो जाना, संस्कृति कहलाता है।
भारतीय संस्कृति का सर्वोच्च मूल्य त्याग है, वह मूल्य हमें पाश्चात्य संस्कृति तथा साम्यवादी संस्कृति की भोगवादी वृत्ति से दूर रखता है। इनकी इस भोगवादी संस्कृति ने आज संपूर्ण मानव जाति को विनाश के कगार पर पहुँचा दिया है और इसी प्रवृत्ति ने मनुष्य और प्रकृति के बीच एक खाई पैदा कर दी है । भारतीय संस्कृति सर्वसमावेशक है, जीवमात्र में ईश्वरीय सत्ता की अनुभूति करने वाली है। भारतीय संस्कृति अपने सुखों के लिए दूसरों को नष्ट करने की बर्बरता नहीं रखती। भारतीय संस्कृति में विश्वास करने वाले लोग, राजा से भी अधिक उस संन्यासी को समादृत करते हैं, जो विश्व कल्याण के लिए संयम नियम का पालन करते हुए अपना सर्वस्वार्पण करते हैं।
(i) ‘भारत में आचरण, व्यवहार, चिंतन और मनन आदि की पूँजी लगी हुई है’ पंक्ति से आशय है ………..। (1)
उत्तर देने के लिए सर्वंधिक उपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए।
(क) जीवन मूल्यों का महत्त्व
(ख) ईश्वरीय सत्ता का योगदान
(ग) राष्ट्रीय संस्कृति की चेतना
(घ) त्याग का उदात्त रूप
उत्तर :
विकल्प (ग) सही है।
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(ii) निम्नलिखित कधन (A) तथा कारण (R) को ध्यानपूर्वक पढ़िए। उसके बाद दिए गए विकल्प में से कोई एक सही विकल्प चुनकर लिखिए। (1)
कथन (A): भारतीय संस्कृति का सवॉच्च मूल व्याग है।
कारण (R): वह मूल्य हमें पाश्चात्य संस्कृति तथा साम्यवादी संस्कृति की भोगवादी वृत्ति से दूर रखता है।
(क) कथन (A) गलत है, किंतु कारण (R) सही है।
(ख) कारण (A) और कारण (R) दोनों ही गलत है।
(ग) कथन (A) सही है और कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या है।
(घ) कथन (A) सही है किंतु कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या नहीं है।
उत्तर :
विकल्प (ग) सही है।
(iii) संस्कृति और सभ्यता एक-दूसरे के पूरक हैं, क्योंकि. ……….. ।(1)
(क) सभ्यता के भीतर ही संस्कृति का विकास
(ख) सांस्कृतिक निर्धारक तत्व ही सभ्यता को परिभाषित करते हैं।
(ग) सभ्यता व संस्कृति का प्रभाव एक-दूसरे पर पड़ता है।
(घ) सभ्यता उन्नति है और संस्कृति उदात्तता
उत्तर :
विकल्प (क) सही है।
व्याख्या-संस्कृति और सभ्यता एक-दूसरे के पूरक हैं क्योंकि सभ्यता के भीतर ही संस्कृति का विकास होता है।
(iv) संस्कृति के मूल में क्या समाहित है ? (1)
उत्तर :
संस्कृति के मूल में राष्ट्र की आत्मा, जीवन मूल्य, दर्शन का आईना इत्यादि समाहित हैं।
(v) प्रस्तुत गद्यांश के आधार पर सांस्कृतिक संरक्षण के विषय में क्या कहा जा सकता है ? (2)
उत्तर :
प्रस्तुत गद्यांश के आधार पर सांस्कृतिक संरक्षण के विषय में यह कहा जा सकता है कि यह संरक्षण को व्यावहारिक रूप प्रदान करता है।
(vi) राष्टीय संस्कृति का निर्माण किस आधार पर होता है ? (2)
उत्तर :
राष्ट्रीय संस्कृति का निर्माण आदर्शों व मूल्यों के आधार पर होता है।
(vii) भारतीय संस्कृति में राजा से अधिक संन्यासी को आदर देने का प्रबल कारण क्या है ? (2)
उत्तर :
भारतीय संस्कृति में राजा से अधिक संन्यासी को आदर देने का प्रबल कारण परोपकार है।
प्रश्न 2.
निम्नलिखित पद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर दीजिए – (8)
रात यों कहने लगा मुझसे गनन का चाँद
आदमी भी क्या अनोखा जीव है!
उलझनें अपनी बनाकर आप ही फँसता,
और फिर बेचैन हो जगता, न सोता है।
जानता है तू कि मैं कितना पुराना हूँ ?
मैं चुका हूँ देख मनु को जनमते-मरते
और लाखों बार तुझ-से पागलों को भी
चाँदनी में बैठ स्वप्नों पर सही करते।
आदमी का स्वप्न है ? वह बुलबुला जल का
आज उठता और कल फिर फूट जाता है
किन्तु फिर भी धन्य, उहरा आदमी ही तो ?
बुलबुलों से खेलता, कक्तिा बनाता है।
मैं न बोला किन्तु मेरी रागिनी बोली,
देख फिर से, चाँद ! मुझको जानता है तू ?
स्वप्न मेरे बुलबुले हैं ? है यही पानी ?
आग को भी क्या नहीं पहचानता है तू ?
मैं न वह जो स्वप्न पर केवल सही करते,
आग में उसको गला लोहा बनाता हूँ।
और उस पर नीवव रखता हैँ नए घर की,
इस तरह दीवार फ़ौलादी उठाता हैँ।
मनु नहीं, मनु पुत्र है यह सामने, जिसकी
कल्पना की जीभ में भी धार होती है,
बाण ही होते विचारों के नहीं केवल,
स्वप्न के भी हाथ में तलवार होती है।
स्वर्ग के सम्राट को जाकर खबर कर दे,
रोज ही आकाश चढ़ते जा रहे हैं वे,
रोकिए, जैसे बने इन स्वप्नवालों को,
स्वर्ण की ही ओर बढ़ते आ रहे हैं वे।
(i) चाँद को किस बात का अहंकार है ? (1)
(क) अपने साँदर्य का
(ख) आदिमानव को देखने का
(ग) सृष्टि में प्राचीनतम होने का
(घ) कवि को कविता लिखते देखने का
उत्तर :
विकल्प (ग) सही है।
व्याख्या-चाँद को इस बात का अहंकार है कि वह सूष्टि में प्राचीनतम है।
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(ii) चाँद के अनुसार मनुष्य का स्वप्न किसके समान है ? (1)
(क) पानी
(ख) आग
(ग) बुलबुले
(घ) लोहे
उत्तर :
विकल्प (ग) सही है।
व्याख्या-चाँद के अनुसार मनुष्य का स्वप्न बुलबुले के समान है।
(iii) ‘आदमी को धन्य कहा गया है।’ धन्य का कारण बताने वाले कथन है/ हैं – (1)
I. नित नई कल्पना करने के कारण
II. सपनों पर कविता लिखने के कारण
III. नए-नए सृजन करने के कारण
(क) केवल (II)
(ख) (II) और (III)
(ग) केवल (III)
(घ) केवल (I)
उत्तर :
विकल्प (ग) सही है।
(iv) मैं न वह जो ……….. लोहा बनाता हूँ – पंक्तियों में मनुष्य की किस शक्ति को महत्त्व दिया है ? (1)
उत्तर :
मैं न वह जो …… लोहा बनाता हूँ। पंक्ति में मनुष्य की क्रियात्मक प्रतिभा शक्ति को महत्त्व दिया है।
(v) नए घर की नींव रखकर उसे फौलादी बनाने से क्या अभिप्राय है ? (2)
उत्तर :
नए घर की नीव रखकर उसे फ़ौलादी बनाने से यह अभिप्राय है कि उससे सुदृढ़ समाज की रचना की जाए।
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(vi) ‘मनु नहीं, मनु पुत्र है यह सामने’ पंक्ति में ‘ मनु पुत्र’ किसे कहा गया है ? (2)
उत्तर :
‘मनु नहीं, मनु पुत्र है यह सामने’ पंक्ति में ‘मनु पुत्र’ क्रियात्मक शक्ति से युक्त मानव को कहा गया है।
खण्ड-‘ख’
(अभिव्यक्ति और माध्यम पुस्तक के आधार पर) (22 अंक)
प्रश्न 3.
निम्नलिखित प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर लिखिए- (1 + 2 + 2 = 5)
(क) किस तरह के लेखन में लेखक को काफ़ी छूट होती है ? (शब्द सीमा – लगभग 20 शब्द) (1)
उत्तर :
साहित्यिक लेखन में लेखक को काफी छ्ट्ट होती है। वह अपने मन की बातों को बड़ा कर भी लिख सकता है।
(ख) आपके क्षेत्र में जल भराव की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। आए दिन लोगों को इसके कारण कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इस समस्या की ओर प्रशासन का ध्यान दिलाने के लिए आप समाचार-पत्र के किस शीर्षक के अंतर्गत छपने के लिए लेख भेजेंगे ? (शब्द सीमा – लगभग 40 शब्द) (2)
उत्तर :
हमारे क्षेत्र में जल भराव की समस्या लम्बे समय से बनां हुई है। आए दिन लोगों को इसके कारण कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। जलभराव की समस्या की ओर प्रशासन का ध्यान दिलाने के लिए ‘हम समाचार-पत्र के संपादक के नाम पत्र’ शीर्षक के अन्तर्गत छपने के लिए लेख भेजेंगे।
(ग) प्रकाशन के लिए जाने वाली सामग्री से गलतियों और अशुद्धियों को हटाकर उसे प्रकाशन योग्य बनाने की ज़िम्मेदारी किसकी होती है ? (शब्द सीमा – लगभग 40 शब्द) (2)
उत्तर :
प्रकाशन के लिए जाने वाली सामग्री से गलतियों और अशुद्धियों को हटाकर उसे प्रकाशन योग्य बनाने की जि़्मेदारां सम्पादक और उसकी टीम की होती है। संपादक ही पूरे दाविन्व को निभाता है।
जनसंचार और सृजनात्मक लेखन पर आधारित प्रश्न
प्रश्न 4.
निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 60 शब्दों में दीजिए – (3 × 2 = 6)
(क) इंटरनेट पत्रकारिता की खूबियों और कमियों का उल्लेख कीजिए। (3)
उत्तर :
इंटरनेट पत्रकारिता की खूबियाँ और कमियाँ निम्नलिखिन हैं-
खूबियाँ-
- इंटरनेट पत्रकारिता द्वारा तत्काल सूचनाओं को उपलक्ध कराया जाता है।
- इंटरनेट पत्रकारिता में दृश्य और प्रिंट दोनों ही माध्यम्मों से तत्काल लाभ मिलता है।
- इंटरनेट पत्रकारिता संवादों के तत्काल आदान-प्रदान का प्रमुख स्त्रोत है।
कमियाँ-
- इंटरनेट पत्रकारिता के द्वारा हम शारीरिक गतिविधियों से कट जाते हैं।
- इंटरनेट पत्रकारिता अधिक खर्चीली और महँगी भी होती है।
- इंटरनेट पत्रकारिता गुरीब और अनपढ़ों के लिए अनुपयोगी होती है।
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(ख) रेडियो समाचार लेखन में किन बुनियादी बातों का ध्यान रखना आवश्यक होता है ? (3)
उत्तर :
रेडियो समाचार लेखन में निम्नलिखित बुनियादी बातों का ध्यान रखना आवश्यक होता है-
- रेडियों समाचार लेखन में साफ-सुथरी और टंकित कॉपी का होना जुरूरी है।
- उसमें अंकों को शब्दों में लिखा जाना चाहिए।
- इसमें ऑकड़ों तथा संख्याओं का प्रयोम अधिक नह्ं करना चाहिए।
- इसमें केवल प्रचलित शब्दों के संक्षिप्ताक्षर का ही प्रयोग करना चाहिए जिससे रोचकता बनी रहे।
- पृष्ठ के अंत में अधूरे वाक्यों का प्रयोग नहीं करना चाहिए।
(ग) प्रिंट माध्यम के विषय में बताते हुए इसके आविष्कार पर भी प्रकाश डालिए। (3)
उत्तर :
प्रिंट यानी मुद्रित माध्यम जनसंचार के आधुनिक माध्यमों में सबसे पुरुना है। असल में आधुनिक युग की शुरुआत ही मुद्रण यानी छपाई के आविष्कार से हुई। हाल्लाँकि मुद्रण की शुरूआत चीन से पूर्व लेकिन आज हम जिस छिपेखाने को देखते हैं, इसके आविष्कार का श्रेय जर्मन के गुटेनबर्ग को जाता है। छापारखाना यानी प्रेस के आविष्कार ने दुनिया की तस्वीर बदल दी। यूरोप में पुनर्जागरण की रेनसँ की शुरुआत में छिपेखाने की अहम भूमिका थी।
प्रश्न 5.
निम्नलिखित तीन विषयों में से किसी एक विषय पर लगभग 100 शब्दों में रचनात्मक लेख लिखिए- (5 × 1 = 5)
(क) घर से किसी तीर्थ स्थान की यात्रा (5)
उत्तर :
विषयवस्तु: 3 अंक
भाषा : 1 अंक
प्रस्तुति : 1 अंक
घर से किसी तीर्थ स्थान की यात्रा
हम सभी लोग सुबह 10 बजे ही मथुरा-वृन्दावन की ओर घर से निकल पड़े। मथुरा का वर्णन अधिकतर लोक कथाओं और हिन्दू धर्म के ऐतिहासिक परिपेक्ष्य से भी जुड़ा हुआ है। हम लोगों ने सर्वप्रथम मथुरा पहुँच कर श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर का भ्रमण किया। उसके पश्चात् हम लोग इस्कॉन मंदिर भी गए। वहाँ के भजन हमारे मन को छू गए। ऐसा प्रतीत हो रहा था। कि हम धीरे-धीरे कृष्ण में रमते जा रहे हैं। उससे कुछ दूरी पर प्रेम मंदिर भी था लेकिन हमने शाम को देखने का निर्णय किया क्योंकि शाम को उसके भीतर की रोशनी अत्यन्त अद्भुत प्रतीत होती है। इसलिए हम लोग दिन में एक धर्मशाला में ही रुक गए। वहाँ बैठकर हमने भोजन किया तथा थोड़ा आराम भी किया। शाम 6 बजे हम लोग प्रेम मंदिर देखने के लिए निकले। इस मंदिर की वास्तुकला अत्यन्त अद्भुत है। रात होते ही हम वापस घर चले आए।
(ख) वह ऐतिहासिक इमारत (5)
उत्तर :
वह ऐतिहासिक इमारत
आगरा में स्थित ताजमहल एक ऐतिहासिक इमारत है जिसे विश्व के सात अजूबों में भी शामिल किया गया है। इस इमारत को मुगल बादशाह शाहजहाँ ने अपनी प्रिय पत्नी मुमजात महल की याद में निर्मित करवाया था। यह सफेद संगमरमर से निर्मित किया गया है, इसलिए यह आकर्षण का विषय रहता है। दुनिया भर के लोग ताजमहल की खूबसूरती के दर्शन करने के लिए आते हैं। इसके चारों ओर साफु-सुथरे बगीचे हैं। सन् 1982 में यूनेस्को ने ताजमहल को एक हेरिटेज साइट के रूप में घोषित किया था। इसकी वास्तुकला अत्यन्त अद्भुत है। संगमरमर पर रंगीन पत्थरों की डिज़ाइन लोगों को वास्तुकला के तौर पर अधिक आकर्षित करती है। अतः कहा जा सकता है कि इस ऐतिहासिक इमारत का आज भी भारत की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने में महत्त्वपूर्ण योगदान है।
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(ग) पहाड़ी झरना (5)
उत्तर :
पहाड़ी झरना
कॉलेज समाप्त होने से पूर्व हम सभी दोस्तों ने मसूरी जाने का निर्णय किया। अगले ही दिन हम चारों ट्रेन पकड़ देहरादून पहुँच गए। क्योंकि मसूरी जाने के लिए निकटतम स्टेशन देहरादून ही है। वहाँ से हम लोगों ने एक कैब बुक की। क्योंकि बस में बिल्कुल भी स्थान न था। कैब से हम लोग आराम से होटल पहुँच गए जो केम्प्टी फॉल के पास था। वहाँ से हम झरना देखने के लिए निकल पड़े। चारों ओर पहाड़, हरियाली देखकर ऐसा लगा कि सदैव के लिए ही वहीं रुक जाऊँ। मैं जब कैम्ट्टी फॉल में उतरा तो देखा कि वहाँ का जल अत्यन्त शीतल है जो केवल शरीर को ही ठंडक नहीं दे रहा बल्कि मन को भी दे रहा है। 2 घण्टे तक हम चारों दोस्त कैम्प्टी फॉल में बैठे रहे। वहाँ से बिल्कुल आने का मन ही नहीं कर रहा था। लेकिन शाम होते ही हम होटल वापस आ गए क्योंकि रात में हमारी ट्रेन थी। यह अद्भुत नज़ारा मैं कभी नहीं भूल सकता।
प्रश्न 6.
निम्नलिखित प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर तीन प्रश्नों में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 60 शब्दों में लिखिए- (3 × 2 = 6)
(क) कविता में बिंब का निर्माण कैसे होता है ? उदाहरण देकर समझाइए। (3)
उत्तर :
कविता मं बिम्ब का निर्माण इस प्रकार होता है-
- बाह्या सम्वेदनाओं का मन से स्तर पर बिम्ब रूप धारण करना।
- कुछ खास शब्दों से मन में कुछ चित्रों का कौध जाना।
- स्मृति-चित्रों का शब्दों के माध्यम से कविता का बिम्ब निर्मित करना।
कविता में बिम्ब का उदाहरण इस प्रकार है-
सुमित्रानंदन पंत की कविता ” तट पर बगुलों-सी वृद्धाएँ-विधवाएँ जप ध्यान में मगन” में बगुले का आकार और सफ़ेदी-विधवाओं के घुटे सिर, स्वेत वस्त्र का एकाकार होना इत्यादि।
(ख) साहित्य की अन्य विधाओं से नाटक विधा के रूप में अंतर का कारण बताते हुए, नाटक के तत्त्वों पर विचार कीजिए। (3)
उत्तर :
नाटक एक दृश्य विधा है जिसका मंचन किया जाता है। इसमें मंचन के दौरान समय का विशेष ध्यान रखा जाता है, इसलिए कहा जा सकता है कि इसमें समय का बंधन होता है। नाटक के भीतर भूत या भविष्य की घटनाओं को वर्तमान में ही संयोजित किया जाता है। नाटक की प्रस्तुति आँखों के समक्ष घटित होती है, इसलिए इसे दृश्य विधा के अन्तर्गत रखा जाता है। अन्य विधाओं में ऐसा नहीं होता है। इसलिए साहित्य की अन्य विद्याओं से नाटक विद्या अलग है। नाटक के तत्त्वों में कथानक, संवाद, पात्र, चरित्र-चित्रण, देशकाल वातावरण और अभिनेयता को शामिल किया गया है।
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(ग) ‘कहानी’ क्या है ? प्राचीन काल में इस संचार माध्यम का प्रयोग लोकप्रिय क्यों था और किसलिए होता था ? (3)
उत्तर :
कहानी किसी घटना, पात्र अथवा समस्या का क्रमबद्ध ब्यौरा प्रस्तुत करती है जिसका अपना एक परिवेश होता है। कहानी में कथा का क्रमिक विकास होता है जिसके सहारे कथा अपने चरम बिन्दु पर पहुँचती है। प्राचीन काल में इसे संचार माध्यम के रूप में प्रयोग में लाया जाता था जिसके कारण यह अधिक लोकप्रिय हुई। मानव की सहज-स्वाभाविक वृत्ति होने के कारण कहानी जीवन का अविभाग्य अंग बन गई। कहानी के माध्यम से धर्मप्रचारकों ने अपने सिद्धान्तों और विचारों को लोगों तक पहुँचाया। यह शिक्षा देने का एक अच्छा माध्यम बनकर उभरी।
खण्ड-‘ग’
(पाठ्य पुस्तकों अंतरा, अंतराल के आधार पर) (40 अंक)
प्रश्न 7.
निम्नलिखित काव्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उस पर आधारित दिए गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए- (1 × 5 = 5)
तोड़ो तोड़ो तोड़ो
ये ऊपर बंजर तोड़ो
ये चरती परती तोड़ो
सब खेत बनाकर छोड़ो
मिट्टी में रस होगा ही जब वह पोसेगी बीज को
हम इसको क्या कर डालें इस अपने मन क्या खोज को
गोड़ो गोड़ो गोड़ो
(i) काव्यांश में ‘चरती परती’ शब्द का अर्थ ……….. है। (1)
(क) उपजाऊ ज़मीन
(ख) ऊसर ज़मीन
(ग) चरागाह के लिए छोड़ी गई ज़मीन
(घ) मकान बनाने वाली ज़मीन
उत्तर :
विकल्प (ग) सही है।
व्याख्या-काव्यांश में ‘चरती परती’ शब्द का अर्थ चरागाह के लिए छेड़ी गई जमीन है।
(ii) निम्नलिखित कथन कारण को ध्यानपूर्वक पढ़िए तथा उत्तर के लिए सही विकल्प का चयन कीजिए। (1)
कथन – काव्यांश में मिट्टी के रस का गुण बताया गया है।
कारण – मिट्टी का रस बीज को पोषण प्रदान करता है।
(क) कथन गलत है, किंतु कारण सही है।
(ख) कथन और कारण दोनों गलत है।
(ग) कथन सही है कितु कारण कथन की सही व्याख्या नहीं है।
(घ) कथन और कारण दोनों सही हैं। कारण कथन की सही व्याख्या है।
उत्तर :
विकल्प (घ) सही है।
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(iii) ‘मन की खोज’ से कवि का क्या आशय है ? (1)
(क) मन की ईर्ष्या
(ख) मन की झुंझलाहट
(ग) मन का अहंकार
(घ) मन का आलस्य
उत्तर :
विकल्प (ख) सही है।
(iv) मन की खीज हटाकर कवि ……….. करना चाहता है ? (1)
(क) सृजन कार्य
(ख) गीत गायन
(ग) प्रायश्चित्त
(घ) तीर्थाटन
उत्तर :
विकल्प (क) सही है।
(v) खेतों की गुड़ाई करने पर क्या होगा ? (1)
कथन 1 – गुड़ाई करने से हल चलाना आसान हो जाएगा।
कथन 2 – खेतों की सिंचाई करना आसान हो जाएगा।
कथन 3 – खेतों की उर्वरा शक्ति बढ़ जाएगी।
(क) केवल कथन 1
(ख) केवल कथन 2
(ग) केवल कथन 3
(घ) केवल कथन 3
उत्तर :
विकल्प (ग) सही है।
प्रश्न 8.
निम्नलिखित तीन प्रश्नों में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 40 शब्दों में लिखिए- (2 × 2 = 4)
(क) जयशंकर प्रसाद की काव्यपंक्ति ‘जहाँ पहुँच अनजान क्षितिज को मिलता एक सहारा’ – के माध्यम से भारतवर्ष की किस विशेषता का पता चलता है ? (2)
उत्तर :
जयशंकर प्रसाद की काव्यपंक्ति ‘जहाँ पहुँच अनजान क्षितिज को मिलता एक सहारा’ के माध्यम से भारतवर्ष की इस विशेषता का पता चलता है कि भारत में अनजान लोगों को भी आश्रय मिलता है। यहीं आतिथ्य सत्कार को परम धर्म माना गया है, इसीलिए भारत में विश्वबंधुत्व की भावना क्यम है। यहाँ की संस्कृति अत्यन्त समृद्ध है जो सभी को सहारा देती है।
(ख) ‘बनारस’ कविता के आधार पर वसंतागमन पर बनारस शहर की गतिविधियों का उल्लेख कीजिए। (2)
उत्तर :
‘बनारस’ कविता के आधार पर वसंतागमन पर बनारस शहर की गतिविधियाँ इस प्रकार हैं-
- बनारस में बसंत का आगमन अचानक होता है।
- लहरतारा और मडुआडीह की ओर से धूल का बवंडर उठता है जिसके कारण शहर में धूल ही धूल परिलक्षित होती है।
- वसंत आगमन के कारण बनारस शहर में उल्लास छा जाता है।
- दशाश्वमेद्य घाट के आखिरी पत्थर भी मुलायम प्रतीत होते हैं।
- वसंत आगमन से बंदरों को आँखों में नमी परिलक्षित होती है तथा भिखारियों के कटोरों में आश्चर्यजनक चमक आ जाती है।
(ग) ‘बारहमासा’ कविता जायसी की किस रचना का अंश है ? इस कविता में कवि ने नागमती के विरह की उपमा किससे और कैसे की है ? (2)
उत्तर :
‘बारहमासा’ कविता जायसी की ‘पद्मावत’ महाकाव्य रचना का अंश है। इस कविता में कवि ने नागमती के विरह की उपमा चकवी, मादा सारस से की है जो इस प्रकार हैं-
- चकवी-चकवे से न मिल पाना
- कोयल-दिन-रात विरह से व्यथित रहना
- मादा सारस-पति का नाम रट-रट कर मर जाना इसी प्रकार नागमती भी विरह के कारण अत्यन्त व्याकुल हैं। उनकी पीड़ा अत्यन्त कष्टदायक है जो अपने प्रिय से न मिलने के कारण और अधिक बढ़ रही है।
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प्रश्न 9.
निम्नलिखित में से किसी एक काव्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए- (6 × 1 = 6)
(क) माँ की कुल शिक्षा मैंने दी,
पुष्प-सेज तेरी स्वयं रची,
सोचा मन में, “वह शकुंतला,
पर पाठ अन्य यह, अन्य कला।”
कुछ दिन रह गृह तू फिर समोद,
बैठी नानी की स्नेह-गोद।
मामा-मामी का रहा प्यार,
भर जलद धरा को ज्यों अपार;
वे ही सुख-दुःख में रहे न्यस्त,
तेरे हित सदा समस्त, व्यस्त;
वह लता वहीं की, जहाँ कली
तू खिली, स्नेह से हिली, पली,
अंत भी उसी गोद में शरण ली,
मूँदि दृग पर महावरण ! (6)
उत्तर :
सन्दर्भ-प्रस्तुत पंक्तियाँ ‘ सरोज स्मृति’ कविता से अवतरित हैं जिसके रचयिता सूर्यकांत त्रिपाठी निराला हैं।
प्रसंग-इन पंक्तियों में कवि ने अपनी प्रिय पुत्री सरोज के विषय में बताया है कि विवाह के उपरान्त उसकी स्थिति क्या है।
व्याख्या-कवि कहते हैं कि माँ की कुल शिक्षा उन्होंने अपनी पुत्री सरोज को दी है क्योंकि सरोज की माँ बचपन में ही उसे छोड़कर स्वर्ग सिधार गई थीं। विवाह के पश्चात् मैंने ही तेरी पुष्प सेज तैयार की है। उस वक्त मैं यह सोच रहा था कि मैं भी कण्व ऋषि की भाँति शकुन्तला की तरह तुझे विदा करूँगा। तुम्हारे जीवन की जितनी भी कलाएँ हैं वे भिन्न हैं क्योंकि कुछ दिन तुमने अपनी सुसराल में समय व्यतीत किया, फिर नानी की स्नेहमयी गोद में, फिर मामा-मामी का भी तुम्हे खूब प्यार मिला। उन्होंने तुझ्न पर प्रेम रूपी वर्षा की। जिस प्रकार बादल धरती पर जल बरसाते हैं। वे सदैव तेरे सुख-दुःख में ही व्यस्त रहे। तेरीं माँ भी उसी परिवार की एक लता थी जहाँ तू एक कली की भाँति खिली है। जहाँ तुझे असीम स्नेह प्राप्त हुआ है। अन्त में भी तुझे उस गोद में शरण मिली जहाँ तूने अपने दृगों को मूँद लिया और दुनिया से महाप्रयाण किया।
विशेष-
- अत्यन्त मार्मिक वर्णन किया है।
- कवि की हदय की पीड़ा का वर्णन है।
- उत्र्रेक्षा अलंकार विद्यमान है।
- छंद मुक्त कविता है।
अथवा
(ख) के पतिआ लए जाएत रे मोरा पिअतम पास।
हिए नहि सहए असह दु:ख रे भेल साओन मास।
एकसरि भवन पिआ बिनु रे मोहि रहलो न जाए।
सखि अनकर दु:ख दारुन रे जग के पति आए।
मोर मन हरि हर लए गेल रे अपनो मन गेल।
गोकुल तेज्जि मधुपुर बस रे कन अपजस लेल।।
विद्यापति कवि गाओल रे धनि धरु मन आस।
आओत तोर मन भावन रे एहि कातिक मास॥ (6)
उत्तर :
सन्दर्भ – प्रस्तुत पद ‘पदावली’ से अवर्तरित है जियके रचयिता विद्यापति हैं।
प्रसंग – इस पद के अन्तर्गत नायिका की विरहावस्था का माभिंक चित्रण हुआ है।
व्याख्या – विरहिणी राधा अपनी सहेलियों से कह रही है कि हे सखि! यहाँ ऐसा कौन है जो मेरा पत्र प्रियतम के पास ले जाएगा। इस सावन के महीने में मेरा हुदय वियोग के कारण असीम दुःख सहन नहीं कर पा रहा है। प्रियतम के बिन यह घर भी भुझे सूना-सा प्रतीत होता है। इसलिए मुझ़े यहाँ एकाकी नहीं रहा जा रहा है। हे सखि! ऐसा कौन है जो मेरे कठोर दुःख पर विश्वास करेगा। श्रीकृष्ण मेरे मन को हरकर अपने साथ ले गए हैं। उनका मन भी उसी स्थान पर लग गया है इसलिए उन्हें मेरा कोई ध्यान ही नहीं है। वे गोकुल को छोड़कर मथुरा में बस गए हैं। इस प्रकार उन्होंने अधिक अपयश ले लिया है। कवि विद्यापति कहते हैं कि आप अपने प्रिय की आशा मन में रखो। श्री कृष्ण इसी कार्तिक मास में आपके पास ज़रूर आएँगे।
विशेष –
- मैथिली भाषा का प्रयोग हुआ है।
- वियोग शृंगार रस विद्यमान है।
- कई स्थानों पर अनुप्रास अंलकार है।
प्रश्न 10.
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उस पर आधारित दिए गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए- (1 × 5 = 5)
चौधरी साहब एक खासे हिंदुस्तानी रईस थे। बसंत पंचमी, होली इत्यादि अवसरों पर उनके यहाँ खूब नाचरंग और उत्सव हुआ करते थे। उनकी हर एक अदा से रियासत और तबीयतदारी टपकती थी। कंधों तक बाल लटक रहे हैं। आप इधर से उधर टहल रहे हैं। एक छेटा-सा लड़का पान की तश्तरी लिए पीछे-पीछे लगा हुआ है। बात की काट-छँट का क्या कहना है। जो बातें उनके मुँह से निकलती थी, उनमें एक विलक्षण वक्रता रहती थी। उनकी बातचीत का छंग उनके लेखों के ढंग से एकदम निराला होता था। नौकरों तक के साथ
(i) प्रस्तुत गद्यांश में ……….. विशेषताओं का वर्णन किया गया है। (1)
(क) भारतेंदु की
(ख) राधेश्याम की
(ग) रामचंद्र की
(घ) बदरीनारायण की
उत्तर :
विकल्प (घ) सही है।
व्याख्या – प्रस्तुत गद्यांश में बदरीनारायण की विशेषताओं का वर्णन किया गया है।
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(ii) चौधरी साहब एक खासे हिन्दुस्तानी रईस थे, खासे रईस से तात्पर्य है- (1)
(क) दिखावा करने वाला
(ख) उत्सव मनाने वाला
(ग) गंभीर व्यक्तित्व वाला
(घ) व्यंग्य करने वाला
उत्तर :
विकल्प (ख) सही है।
(iii) निम्नलिखित कथन तथा कारण पर विचार कीजिए और सर्वाधिक अचित विकल्प चुनकर लिखिए – (1)
कथन – चौधरी साहब हिंदुस्तानी रईस थे।
कारण – उनके यहां होली, वसंत पंचमी इत्यादि अवसरों पर खूब उत्सव हुआ करता था।
(क) कथन गलत है, किंतु कारण सही है।
(ख) कथन और कारण दोनों गलत हैं।
(ग) कथन सही है किंतु कारण कथन की तही व्याख्या नहीं है।
(घ) कथन और कारण दोनों सही हैं। कारण कथन की सही व्याख्या है।
उत्तर :
विकल्प (घ) सही है।
(iv) प्रस्तुत गद्यांश में ‘विलक्षण वक्रता’ से तात्पर्य ……….. है। (1)
(क) मुहावरेदार
(ख) कुटिलता
(ग) वाक् चातुर्य
(घ) अनोखी वचन भंगिमा
उत्तर :
विकल्प (ग) सही है।
व्याख्या-प्रस्तुत गद्यांश में ‘विलक्षण वक्रता’ से तात्पर्य वाक् चातुर्य है।
(v) ‘आप इधर से उधर टहल रहे हैं। एक छोटा-सा लड़का पान की तस्तरी लिए पीछे-पीछे लगा हुआ है। पंक्ति के माध्यम से लेखक के बारे में पता चलता है – (1)
(क) रियासत और तबीयतवारी
(ख) फूहड़पन
(ग) गरीब
(घ) अनाथ
उत्तर :
विकल्प (क) सही है।
प्रश्न 11.
निम्नलिखित तीन प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर किन्ही दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 40 शब्दों में दीजिए- (2 × 2 = 4)
(क) ‘शेर’ कहानी में उद्धुत व्यंग्य को स्पष्ट करते हुए लेखक के उद्देश्य का वर्णन कीजिए। (2)
उत्तर :
शेर कहानी में निहित व्यंग्य को लेखक ने इस प्रकार स्पष्ट किया है-
- ‘शेर’ कहानी प्रतीकात्मक तथा व्यंग्यात्मक लघुकथा है जो जनमानस को अपनी ओर अधिक आकर्षित करती है।
- इस कहानी में ‘शेर’ व्यवस्था का एक प्रतीक है। सत्ता तभी तक खामोश रहती हैं जब तक सब उसकी आज्ञा का पालन कर रहे हैं।
- लेखक ने जनसाधारण को मूर्ख बनाकर उसका शोषण करने की प्रवृत्ति पर तीखा व्यंग्य किया है।
लेखक का उद्देश्य – लेखक असगर वज़ाहत ने सुविधाभोगियों, छ्द्म अहिंसावादियों और सह-अस्तित्ववादियों के ढोंग पर प्रहार किया है। जन साधारण को जागरूक करने का बख्बूबी प्रयास किया है।
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(ख) घड़ीसाज़ी का इम्तहान पास करने से लेखक के अभिप्राय को स्पष्ट कीजिए। (2)
उत्तर :
घड़ीसाजी का इम्तहान पास करने से लेखक का अभिप्राय यह है कि वह व्यक्ति अपने कार्य का पूर्ण ज्ञाता हो जाता है अर्थात् घड़ीसाज़ी का इम्तहान पास करने के पश्चात् उसे धर्म के रहस्यों की पूरी जानकारी प्राप्त हो जाती है। इससे उसे अनुभव भी प्राप्त होता है कि किस प्रकार धर्म का इम्तहान पास किया जाता है। लेखक का मानना है कि धर्म के वास्तविक रूप को भी समझना चाहिए।
(ग) ‘बड़ी बहुरिया का संवाद हरगोबिन सुना सकने में असमर्थ था’ कथन के माध्यम से हरगोबिन की तत्कालीन स्थिति की विवेचना कीजिए। (2)
उत्तर :
‘बड़ी बहुरिया का संवाद हरगोबिन सुना सकने में असमर्थ था। क्योंकि वह सोच रहा था कि मेरे संवाद से ये लोग बहुरिया को अपने यहाँ ले आएँगे। बड़ी बहुरिया गाँव की लक्ष्मी है और यदि गाँव की लक्ष्मी ही गाँव से चली जाएगी तो सब कुछ समाप्त हो जाएगा। वहाँ कुछ भी नहीं रह जाएगा। वह बूढ़ी माता को बहुरिया की दशा बताकर व्यथित नहीं करना चाहता था। वह अत्यन्त भावुक एवं किंकर्तव्यविमूढ़ हो गया था।
प्रश्न 12.
निम्नलिखित गद्यांशों को ध्यानपूर्वक पढ़कर किसी एक गद्यांश की सप्रसंग व्याख्या लगभग 100 शब्दों में कीजिए- 6 × 1 = 6
(क) मेरे लिए एक दूसरी दृष्टि से भी यह अनूठा अनुभव था। लोग अपने गाँवों से विस्थापित होकर कैसी अनाथ, उन्मूलित जिंदगी बिताते है, यह मैंने हिंदुस्तानी शहरों के बीच बसी मज़दूरों की गंदी, द्म घुटती, भयावह बस्तियों ओर स्लम्स में कई बार देखा था, कितु विस्थापन से पूर्व वे कैसे परिवेश में रहते होंगे, किस तरह की जिंदगी बिताते होंगे, इसका दृश्य अपने स्वच्छ, पवित्र खुलेपन में पहली बार अमझर गाँच में देखने को मिला। (6)
उत्तर :
सन्दर्भ – प्रस्तुत गद्यांश ‘जहाँ कोई वापसी नहीं’ पाठ से अवतरित है जिसके लेखक निर्मल वर्मा हैं।
प्रसंग – प्रस्तुत गद्यांश के लेखक ने विस्थापितों की समस्या का वर्णन किया है।
व्याख्या – लेखक को सिंगरौली में जाकर अनूठा अनुभव हुआ था। लेखक सोचता है कि लोग अपने गाँव से विस्थापित होकर एक अनाथ की भाँति अपना जीवन व्यतीत करते हैं। लेखक ने हिन्दुस्तानी शहरों के बीच बसी मज़दूरों की दम घुटती जि़्दगी को देखा है जो अत्यन्त भयावह प्रतीत होती है। वह सोचता है विस्थापन से पहले लोग प्रकृति की गोद में किस प्रकार अपना जीवन व्यतीत करते होंगे। क्योंकि प्रकृति में उन्हें स्वच्छता का आभास होता है। यह पवित्रता उन्हें पहली बार अमझर गाँव में देखने को मिली, जहाँ कोई स्लम्स बस्तियाँ न थी।
विशेष
- भाषा में खड़ी बोली हिन्दी का प्रयोग हुआ है।
- अमझर गाँव की पवित्रता का वर्णन किया है।
अथवा
(ख) बालक के मुख पर विलक्षण रंगों का परिवर्तन हो रहा था, हुदय में कृत्रिम और स्वाभाविक भावों की लड़ाई की झलक आखों में दिख रही थी। कुछ खाँसकर, गला साफ़ कर नकली पर्दे के हट जाने पर स्वयं विस्मित होकर बालक ने धीरे से कहा, ‘लड्डू’। पिता और अध्यापक निराश हो गए। इतने समय तक मेरा श्वास घुट रहा था। अब मैने सुख से साँस भरी। उन सबने बालक की प्रवृत्तियों का गला घोंटने में कुछ उठा नहीं रखा था। पर बालक बच गया। उसके बचने की आशा है क्योंकि वह ‘लड्डू’ की पुकार जीवित वृक्ष के हरे पत्तों पर मधुर मर्मर था, मरे काठ की अलमारी की सिर दुःखाने वाली खड़खड़ाहट नहीं। (6)
उत्तर :
सन्दर्भ – प्रस्तुत गद्यांश ‘सुमिरिनी के मनके’ पाठ से अवतरित है जिसके लेखक पं. चन्द्रधर शर्मा गुलेरी हैं।
प्रसंग – प्रस्तुत गद्यांश ‘बालक बच गया’ प्रसंग से लिया गया है जिसमें बालक को केन्द्र में रखा गया है।
व्याख्या – बालक के मुख पर विलक्षण परिवर्तन का वर्णन लेखक ने किया है। बालक के भीतर कृत्रिम और स्वाभाविक भावों की लड़ाई आँखों में झलक रही थी। बालक गला साफ़ कर नकली पर्दे से हट जाता है। सबके पूहने पर वह बताता है उसे ‘लड्डू’ चाहिए। सभी को लगा कि वह शायद कोई पुस्तक माँगेगा। पिता और अध्यापक निराश हो गए। लेखक ने बताया कि तब तक मेरा श्वास घुट रहा था जब वह बालक पुस्तकों के ज्ञान के विषय में बता रहा था लेकिन जब उसने ‘लड्डू’ के बारे में कहा तब मेंने सुख से साँस भरी। उन सबने बालक की प्रवृत्तियों का गला घोंटने में कुछ उठा नहीं रखा था, फिर भी वह बच गया। उसके बचने की आशा लद्ड्डू थी जिसने वृक्ष के हरे पत्तों पर मधुर मर्मर का कार्य किया न कि सिर दुःखाने वाली खड़खड़ाहट की।
प्रश्न 13.
निम्नलिखित तीन प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 100 शब्दों में दीजिए- (5 × 2 = 10)
(क) ‘सूरदास की झोपड़ी’ पाठ के आधार पर तत्कालीन समाज में नारी की स्थिति का वर्णन कीजिए। आज उनकी स्थिति में क्या कोई परिवर्तन आया है ? स्पष्ट कीजिए। (5)
उत्तर :
तत्कालीन समाज में नारी की स्थिति सम्मानजनक नहीं है। उसके चरित्र पर सन्देह किया जाता है जिस प्रकार ‘सूरदास की झोंपड़ी’ में सुभागी और सूरदास पर किया गया। नारी को तत्कालीन समाज में पुरुर्षों द्वारा पीटा जाता था। जिस प्रकार भैरों अपनी पत्नी को पीटता था। नारी को केवल तिरस्कार ही मिला है। सास भी उसे प्रेम न करती थी।
आज नारी की स्थिति में कई परिवर्तन आएँ हैं जो इस प्रकार हैं-
- वर्तमान समाज में शिक्षा, अधिकारों के प्रति नारी सचेत है।
- महिला कानून आदि के कारण भी नारी की स्थिति में सुधार आया है।
- इन सबके होने के बावजूद नारी का चरित्र आज भी संदेहास्पद है तथा समाज में लैंगिक भेद्भाव आज भी विद्यमान है।
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(ख) ‘बिस्कोहर की माटी’ के आधार पर गाँव वालों का प्रकृति के साथ संबंध स्पष्ट कीजिए। (5)
उत्तर :
‘बिस्कोहर की माटी’ पाठ में गाँव वालों का सम्बन्ध प्रकृति के साथ गहरा दिखाया गया है। प्रकृति गाँब वालों की सहचरी है क्योंकि गाँव के लोंगों को दैनिक आवश्यकता होती है तो उनकी पूर्ति के लिए वे प्रकृति पर निर्भर रहते हैं। वे ईधन, भोजन, जलापूर्ति इत्यादि प्रकृति से प्राप्त करते हैं। प्राकृतिक जड़ी-बूटियों से वे लोगों का इलाज भी करते हैं। प्रकृति का कण-कण उनके लिए सजीव है, इसलिए वे उससे बात भी करते हैं, उसे महसूस भी करते हैं तथा प्रकृति के साथ जीना उनके लिए सहज बन चुका है।
(ग) धरती का वातावरण गरम क्यों हो रहा है ? इससे यूरोप और अमेरिका की क्या भूमिका है ? टिपनी कीजिए। (5)
उत्तर :
‘नई दुनिया’ की ही लाइब्रेरी में कमलेश सेन और अशोक जोशी ने धरती के वातावरण को गर्म करने वाली इस खाऊ-उजाडू सभ्यता की जो कतरनें निकाल रखी हैं वे बताने को काफ़ी हैं कि मालव धरती गहन गंभीर क्यों नहीं है और क्यों यहाँ डग-डग रोटी और पग-पग नीर नहीं है। क्यों हमारे समुद्रों का पानी गर्म हो रहा है ? क्यों हमारी धरती के ध्रुवों पर जमी बर्फ़ पिघल रही है ? क्यों हमारे मौसमों का चक्र बिगड़ रहा है ? क्यों लद्दाख में बर्फ़ के बजाय पानी गिरा और क्यों बाड़मोर में गाँव डुब गए ? क्यों यूरोप और अमेरिका में इतनी गर्मी पड़ रही है ?
क्योंकि वातावरण को गर्म करने वाली कार्बन डाइऑक्साइड गैसों ने मिलकर धरती के तापमान को तीन डिग्री सेल्सियस बड़ा दिया है। ये गैंसे सबसे ज़्यादा अमेरिका और फिर यूरोप के विकसित देशों से निकलती हैं। अमेरिका इन्हें रोकने को तैयार नहीं हैं। वह नहीं मानता है कि धरती के वातावरण के गर्म होने से सब गड़बड़ी हो रही है। अमेरिका की घोषणा है कि वह अपनी खाऊ-उजाड़ू जीवन पद्धति पर कोई समझौता नहीं करेगा। लेकिन हम अपने मालवाकी गहन गंभीर और पग-पग नीर की डग-ड्ग रोटी देने वाली धरती को उजाड़ने में लगे हुए हैं। हम अपनी जीवन पद्धति को क्या समझते हैं।