Students must start practicing the questions from CBSE Sample Papers for Class 12 Hindi Elective with Solutions Set 4 are designed as per the revised syllabus.
CBSE Sample Papers for Class 12 Hindi Elective Set 4 with Solutions
निर्धारित समय : 3 घंटे
पूर्णांक : 80
सामान्य निर्देश :
- इस प्रश्न पत्र तीन खण्डों – खंड ‘क’, ‘ख’ और ‘ग’।
- दिए गए निर्देशों का पालन करते हुए प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
- तीनों खण्डों के कुल 13 प्रश्न हैं। तीनों खण्डों के प्रश्नों के उत्तर अनिवार्य है।
- यथासंभव तीनों खण्डों के प्रश्नों के उत्तर क्रम से लिखिए।
खण्ड-‘क’
(अपठित बोध) (18 अंक)
प्रश्न 1.
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए प्रश्नों के सर्वांधिक उपयुक्त उत्तर दीजिए –
10 भाषा अपने समाज का प्रतिबिंब होती है, यदि वह संरक्षित नहीं रहेगी तो प्रतिबिंब की कल्पना नहीं की जा सकती। आज न जाने कितनी बोलियाँ आम लोगों की जुबान और व्यवहार से दूर जाती दिख रही हैं। बोलियों की एक गूद्र बात यह है कि इनमें पारंपरिक ज्ञान का विशाल भंड्डार छिपा रहता है। किंतु इस खासियत से बेपरवाह दुनिया में प्रचलित सात हजार भाषाओं में से लगभग 300 को लुप्तप्राय माना जाता है। जनजातीय भाषाएँ वहाँ की वनस्पतियों, जीवों और औषधीय पौधों के बारे में ज्ञान का खजाना हैं। आमतौर पर यह ज्ञान’ पीढ़ी-दर-पीढ़ी हस्तांतरित होता है। ऐसे में, भाषाओं का विलुप्त होना गंभीर समस्या है। पृथ्वी की मौजूदा भाषाई विविधता का करीब आधा हिस्सा खतरे में है।
किसी भी देश या समाज की मूलभाषा के विलुप्त होने के कई कारण हैं-जैसे-प्राकृतिक या मानवीय कारणों से लोगों का एक स्थान से दूसरे स्थान पर पलायन करना, आधुनिक शिक्षा प्रणाली, अंग्रेज़ी का बढ़ता वर्चस्व और तकनीक का बढ़ता प्रसार। भाषा किसी भी सभ्यता व संस्कृति तथा उसके रहन-सहन को पहचान देती हैं। ईसाइयों और यहूदियों के धर्म ग्रंथों की मूल भाषा हिब्रू, जैन और बौद्ध धर्म की भाषा प्राकृत और पाली सहित अनेक भाषाओं का अस्तित्व खो गया है। इसलिए यदि सही अर्थों में किसी संस्कृति की प्रगाढ़ता को समझना है तो उसकी भाषा को समझना होगा, संरक्षित करना होगा। लोकतंत्र के समुचित विकास के लिए भी विभिन्न भाषाओं का समृद्ध होना बहुत ज़रूरी है क्योंकि इनके माध्यम से देश के एक कोने से दूसरे कोने की समस्या को समझकर उसका समाधान किया जा सकता है। स्थानीय भाषाओं का संरक्षण कर ही समाज का समावेशी विकास हो पाता है।
भारतीय भाषाओं का केंद्रीय संस्थान खतरे में पड़ी देश की भाषाओं और बोलियों के संरक्षण के उपाय में जुट गया है। ये सब वे भाषाएँ हैं जिन्हें दस हजार से भी कम लोग बोलते हैं। जल-जंगल-जामीन के लिए जाग्रत समाज भी अब समझने लगा है कि अपनी संस्कृति को बचाने के लिए इन तीनों की सुरका के अलावा भी बहुत कुछ करने की आवश्यकता है। वे समझ गए हैं कि जब किसी भाषा का पतन होता है तो उसमें बसी ज्ञान-प्रणाली भी पूरी तरह समाप्त हो जाती है।
(i) प्रस्तुत गद्यांश का वणर्य विषय ……. है। (1)
उत्तर देने के लिए सर्वधिक उपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए।
(क) विश्व की प्राचीन भाषाएँ और बोलियाँ
(ख) आम जुबान से दूर होती मातृ-भाषा
(ग) विदेशी भाषा के प्रति बढ़ता मोह
(घ) विलुप्त होती बोलियाँ और भाषाएँ
उत्तर :
विकल्प (घ) सही है।
व्याख्या-प्रस्तुत गद्यांश का वर्ण्य विषय विलुप्त होती बोलियाँ और भाषाएँ हैं।
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(ii) निम्नलिखित कथन (A) तथा कारण (R) को ध्यानपूर्वक पढ़िए । उसके बाद दिए गए विकल्प में से कोई एक सही विकल्प चुनकर लिखिए।
कथन (A): जनजातीय भाषाएँ वहाँ की वनस्पतियों, जीवों और औषधीय पौष्यों के बारे में ज्ञान का खजाना है।
कारन (R): आमतौर पर यह ज्ञान पीढ़ी दर पीढ़ी हस्तांतरित होता है।
(क) कथन (A) गलत है, किंतु कारण (R) सही है।
(ख) कारण ( A ) और कारण ( R ) दोनों ही सही है।
(ग) कथन (A) और कारण (R) दोनों ही गलत है।
(घ) कथन (A) सही है किंतु कारण ( R$)$ गलत है। (1)
उत्तर :
विकल्प (ख) सही है।
(iii) किसी भी भाषा का अस्तित्व समाप्त होना, समाप्त होना है वहाँ के/की ……. (1)
(क) जल-जंगल-ज़मीन का
(ख) परंपरागत ज्ञान-प्रणाली का
(ग) विचार-विनिमय के साधन का
(घ) स्थानीय भाषा के शब्द-भंडार का
उत्तर :
विकल्प (ख) सही है।
(iv) इस गद्यांश का क्या उद्देश्य है ?
उत्तर :
इस गद्यांश का उद्देश्य बोलियों और भाषाओं को संरक्षण प्रदान करना है।
(v) ‘समावेशी विकास’ से क्या तात्पर्य है ?
उत्तर :
‘समावेशी विकास’ से तात्पर्य प्रत्येक व्यक्ति का विकास करना है।
(vi) जल-जंगल-ज़मीन के साथ-साथ और किसे बचाने की आवश्यकता है ? (2)
उत्तर :
जल-जंगल-ज़मीन के साथ-साथ जनजातीय भाषाओं को भी बचाने की आवश्यकता है।
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(vii) किसी भी समाज की मूलभाषा के विलुप्त होने का कारण क्या है ? (2)
उत्तर :
किसी भी समाज की मूलभाषा के विलुप्त होने का कारण है – तकनीक का बढ़ता विस्तार।
प्रश्न 2.
निम्नलिखित पद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उस पर आधारित दिए गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर दीजिए- (8)
चलते चलो, चलते चलो
सूरज के संग-संग चलते चलो, चलते चलो।
तम के जो बंदी थे
सूरज ने मुक्त किए
किरनों से गगन पोंछ
धरती को रंग दिए,
सूरज को विजय मिली,
ऋतुओं की रात हुई
कह दो इन तारों से
चंदा के संग-संग चलते चलो।
रलमयी वस्षुधा पर
चलने को चरण दिए
बैठी उस क्षितिज पार
लक्ष्मी श्रृंगार किए
आज तुम्हें मुक्ति मिली,
कौन तुम्हें दास कहे
स्वामी तुम ऋतुओं के,
संवत् के संग-संग चलते चलो।
नदियों ने चलकर ही
सागर का रूप लिया
मेघों ने चलकर ही
धरती को गर्भ दिया
रुकने का मरण नाम,
पीछे सब प्रस्तर है।
आगे है देवयान, युग के ही
संग-संग चलते चलो।
मानव जिस ओर गया नगर बसे,
तीर्थ बने तुमसे है
कौन बड़ा गगन-सिंधु मित्र बने
भूमा का भोगो सुख,
नदियों का सोम पियो
त्यागो सब जीर्ण बसन,
नूतन के संग-संग चलते चलो।
(i) ‘तम के बंदी’ किनें कहा गया है ?
(क) पृथ्वी के जीव-जंतुओं को
(ख) आकाश के चाँद-तारों को
(ग) रात्रि में विचरण करने वाले जंतुओं को
(घ) आकाश में पाए जाने वाले नक्षत्रों को
उत्तर :
विकल्प (क) सही है।
व्याख्या-‘तम के बंदी’ पृथ्वी के जीव-जन्तुओं को कहा गया।
(ii) ‘किरणों से गगन पोंछने’ का अभिप्राय है-
(क) सूर्य की किरणों द्वारा आकाश की कालिमा को दूर करना
(ख) चाँद-तारों की उपस्थिति की हटाना
(ग) रात्रि की भयावहता की दूर हटाना
(घ) सूर्य द्वारा अपना स्वर्णिम प्रकाश आकाश में फैला, कालिमा को दूर करना
उत्तर :
विकल्प (घ) सही है।
व्याख्या-‘किरणों से गुगन पोंछने’ का अभिप्राय सूर्य द्वारा अपना स्वर्णिम प्रकाश आकाश में फैला, कालिमा को दूर करना है।
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(iii) ‘कवि ने चलते चलो का संदेश दिया है।’ संदेश जिसे दिया गया है वह कथन है/हैं-
I. सागर से मिलने जाने वाली नदियों को संदेश दिया है।
II. चंद्रमा के साथ-साथ चलने वाले तारों को संदेश दिया है।
III. जीवनरूपी मार्ग पर बढ़ने वाले यात्री की संदेश दिया है।
(क) केवल (I)
(ख) केवल (II)
(ग) केवल (III)
(घ) (II) और (III) (1)
उत्तर :
विकल्प (ग) सही हे।
(iv) वसुधा को रत्लमयी कहने का क्या आधार है ? (1)
उत्तर :
वसुधा को रत्नमयी कहने का आधार अनेक बहुमूल्य रत्नों को धारण करना है।
(v) ‘मेघों ने चलकर ही धरती को गर्भ दिया’ – पंक्ति का भाव क्या है ? (2)
उत्तर :
‘मेघों ने चलकर ही धरती को गर्भ दिया’- पंक्ति का भाव यह है कि मेघों ने ही धरती को फ़लवती किया है।
(vi) किस पंक्ति में मनुष्य के सामर्थ्य का उल्लेख हुआ है ? (2)
उत्तर :
‘तुमसे है कौन बड़ा, गगन-सिंधु मित्र बने। पंक्ति में मनुष्य के सामर्थ्य का उल्लेख हुआ है।
खण्ड-‘ख’
(अभिव्यक्ति और माध्यम पुस्तक के आधार पर) (22 अंक)
प्रश्न 3.
निम्नलिखित प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पड़कर सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर लिखिए- (1+2+2 = 5)
(क) ‘इंटरनेट पर समाचार’ के क्या लाभ हैं ? (शब्द सीमा – लगभग 20 शब्द) (1)
उत्तर :
इंटरनेट पर समाचार पढ़ने, सुनने और देखने की सुविधा होती है। इंटरनेट पर तुरंत हमें दुनिया की जानकारी प्राप्त हो जाती है। सूचनाएँ कई क्षेत्रों से सम्बन्धित होती हैं। कुछ सामग्री हमारा मनोरंजन भी करती है।
(ख) सोहम एक पत्रकार हैं। उन्होंने राजनीति विज्ञान में एम.ए. किया है। राजनीति में उनकी बड़ी रुचि है। उनकी रुचि और रुझान के आधार पर उन्हें कौन-सी बीट दी जाने की संभावना है ? (शब्द सीमा – लगभग 40 शब्द) (2)
उत्तर :
सोहम एक पत्रकार है। उन्होंने राजनीतिक विज्ञान में एम.ए. किया है। राजनीतिक में उनकी बड़ी रुचि है। सोहम की रूचि और रुझान के आधार पर उन्हें राजनीतिक बीट दी जाने की संभावना है।
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(ग) समाचार के मुखड़े (इंट्रो) में ख़बर कैसे लिखी जाती है ? (शब्द सीमा – लगभग 40 शब्द) (2)
उत्तर :
समाचार के मुखड़े (इंट्रो) में खबर क्या, कौन, कब तथा कहाँ को आधार बनाकर लिखी जाती है। घटना का पूरा विश्लेषण भी किया जाता है।
जनसंचार और सृजनात्मक लेखन पर आधारित प्रश्न
प्रश्न 4.
निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 60 शब्दों में दीजिए – (3 × 2 = 6)
(क) रेडियो समाचार लेखन में किन बुनियादी बातों का ध्यान रखना आवश्यक होता है ? (3)
उत्तर :
रेडियो समाचार लेखन में निम्नलिखित बुनियादी बातों का ध्यान रखना आवश्यक होता है-
खूबियाँ-
- रेडियो समाचार लेखन साफ-सुथरा एवं टंकित होना चाहिए।
- हाशिया छोड़कर उसमें ट्रिपल स्पेस में टंकित प्रति होनी चाहिए।
- पृष्ठ के अंत में कोई भी पंक्ति को अधूरी नहीं छेड़ना चाहिए।
- अंकों (आँकड़ों/संख्याओं) का लेखन शब्दों में होना चाहिए।
- डेडलाइन, सन्दर्भ और संक्षिप्ताक्षर का सतर्कता से प्रयोग करना चाहिए।
(ख) समाचार लेखन की उल्टा पिरामिड शैली क्या है ? इसे समाचार लेखन की सर्वाधिक लोकप्रिय शेली क्यों मानते हैं ? (3)
उत्तर :
उल्टा पिरामिड शैली समाचार लेखन की एक महत्त्वपूर्ण शैली है जिसके माध्यम से समाचार का महत्त्वपूर्ण तथ्य पहले लिखा जाता है उसके पश्चात् अन्य तथ्यों को उसमें जोड़ा जाता है। उल्टा पिरामिड शैली समाचार लेखन की सर्वाधिक लोकप्रिय शैली है क्योंकि इसका उपयोग अधिक किया जाता है। इस शैली में इंट्रो, बॉडी और समापन के अनुरूप ही क्लाइमेक्स तक पहुँचा जाता है।
(ग) मुद्रित माध्यमों की विशेषताएँ बताइए। (3)
उत्तर :
मुद्रित माध्यमों की सबसे बड़ी विशेषता या सवित यह है कि छोे हुए शब्दों में स्थायित्व होता है। उसे आराम से और धीरे भीरे पढ़ सकते हैं। पढ़ते हुए उस पर सोच सकते हैं। अगर कोई बात समझ में नहीं आई तो उसे दोबारा या जितनी बार इच्छाणारे, उतनी बार पर सकते हैं। यही नहीं, अगर हम अखबार या पत्रिका पढ़ रहे हों तो हम अपनी पसंद के अनुसार किसी भी पृष्ठ और उस पर प्रकाशित किसी भी समाचार या रिपोर्ट से पढ़ने की शुरुजात कर सकते हैं।
प्रश्न 5.
निम्नलिखित तीन विषयों में से किसी एक विषय पर लगभग 100 शब्दों में रचनात्मक लेख लिखिए- (5 × 1 = 5)
(क) सुख बाँटने से बढ़ता है। (5)
उत्तर :
विषयवस्तु : 3 अंक
भाषा : 1 अंक
प्रस्तुति 1 अंक
सुख बाँटने से बढ़ता है।
खुश रहना जीवन के लिए लाभदायक होता है लेकिन सुख-दुःख का चक्र मनुष्य के जीवन में चलता रहता है। इसलिए दुःख से हमें कभी नहीं घबराना चाहिए। यदि हम खुशियाँ बाँटते हैं तो इससे हमारे सुख में ही वृद्धि होती है। हमें खुशी किसी भी वस्तु से प्राप्त हो सकती है। यदि हमारे पास दो घड़ी हैं तो एक घड़ी हम ज़रूरतमंद व्यक्ति को दे सकते हैं जिससे उसे भी लाभ प्राप्त हो सके। भारत विकासशील देश है फिर भी वह यूरोप के देशों का आतिथ्य सत्कार करने में कोई कमी नहीं बेड़ता है। दान देने से जो सुख प्राप्त होता है, वह अद्भुत है। स्वामी विवेकानन्द, कबीर, बुद्ध इत्यादि विचारकों ने अपने विचारों से सुख के मार्ग पर चलने का रास्ता दिखाया है। उन्होंने लोगों के कष्टों को दूर करने का कार्य किया। वास्तव में परोपकार की भावना ही व्यक्ति को सुख के मार्ग पर ले जाती है।
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(ख) पिंजरे में जीवन (5)
उत्तर :
पिंजरे में जीवन
पिंजरे में कोई भी नहीं रहना चाहता है। चाहे वे पक्षी हो या फिर मनुष्य। सभी को स्वतंत्रता प्रिय होती है। पिंजरे में कैद पक्षी का जीवन सदैव दुःख से परिपूर्ण होता है। क्योंकि उसे आज़ादी नहीं होती उड़ने की । दुनिया को अपनी आँखों से देखने की। बेशक उस पक्षी को सारी सुविधाएँ पिंजरे के अन्दर क्यों न प्राप्त करा दी जाएँ। फिर भी वह घुटन महसूस करता है। उसी प्रकार स्त्री को भी सदैव घर की चार दीवारी के भीतर कैद करके रखा गया है। समय-समय पर उनकी शक्ति को दबाया गया है। जिससे उनका व्यक्तित्व सही तरह से उभर कर नहीं आ सका है। स्वेच्छा से कोई भी पिंजरे के जीवन को स्वीकार नहीं करना चाहता है। चाहे पक्षी, जानवर या मनुष्य क्यों न हो, सभी अपनी आज़ादी से प्रेम करते हैं। स्वतंत्रता ही उनके अस्तित्व को सही रूप में सामने लाती है। आज स्त्रियाँ यह पिंजरा तोड़ कर शिक्षा प्राप्त करने के लिए घर से बाहर निकल रही हैं तथा देश के विकास में अपना महत्त्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।
(ग) किताबी कीड़ा (5)
उत्तर :
किताबी कीड़ा
मेरे पड़ोस में एक सुरेश नाम का लड़का रहता था। वह किताबी कीड़ा था। जब भी हम उसे खेलने के लिए बुलाते तो वह साफ़ ईकार कर देता। उसे खेल से अधिक किताबों का अध्ययन करने में रुचि थी। एक दिन हम सोहन के जन्मदिन में गए। वहाँ सुरेश भी आया हुआ था। सभी लोग सुरेश से अल्यन्त खुश रहते थे क्योंकि वह पढ़ाई में होशियार था। सोहन के पिता कुछ किताबी प्रश्न सुरेश से करते हैं जिसका वह सही उत्तर देता है, लेकिन उसे व्यावहारिक ज्ञान बिलकुल न था। केक कटने के पश्चात् सभी को केक बाँटा गया। सुरेश ने जल्दी-जल्दी सारा केक हाथों से ही खा लिया, चम्मच आने का इंतज़ार तक न किया। फिर उसे हाथों को साफ़ करने के लिए कुछ न दिखा तो उसने अपनी कमीज़ से ही हाथों को साफ़ कर लिया। यह देखकर सोहन के पिता ने कहा कि यह बच्चा केवल किताबी कीड़ा है। इसे व्यावहारिक ज्ञान होना भी आवश्यक है।
प्रश्न 6.
निम्नलिखित प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर तीन प्रश्नों में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 60 शब्दों में लिखिए- (3 × 2 = 6)
(क) कविता रचना में किन घटकों का महत्त्व होता है ? (3)
उत्तर :
कविता रचना में निम्नलिखित घटकों का महत्त्व होता है-
- कविता रचना में भाषा का सम्यक् ज्ञान होना आवश्यक है।
- कविता रचना के दौरान उचित शब्द-विन्यास का ध्यान रखना चाहिए।
- कविता रचना के दौरान प्रचलित एवं सहु-भाषा शैली का प्रयोग करना चाहिए ।
- आवश्यकता के अनुरूप संकेतों या फिर चिहों का भी प्रयोग करना चाहिए।
- कविता रचना के दौरान बिम्ब और छंद के अनुशासन का भी ध्यान रखना चाहिए।
- समय विशेष की प्रचलित प्रवृत्तियों की जानकारी शामिल करनी चाहिए।
(ख) नाटक में संवाद की उन विशेषताओं का उल्लेख कीजिए जिनके कारण दर्शकों तक आसानी से उन्हें संप्रेषित किया जा सकता है। (3)
उत्तर :
नाटक में संवाद की विशेषताएँ इस प्रकार हैं-
- संवाद संक्षिप्त, स्वाभाविक तथा सांकेतिक होता है।
- संवाद क्रियात्मकता से परिपूर्ण होता है तथा दृश्य को बनाने में योग्य होता है।
- संवाद् में शाब्दिक अर्थ अधिक महत्त्वपूर्ण व्यंजना होती है।
- नाटक में संवाद शब्दों के भीतर ध्वन्यात्मकता लाने का कार्य करते हैं।
- नाटक में मौन तथा अंधकार अथवा ध्वनि से प्रभावित संवाद होते हैं।
- नाटक में संवाद पात्र एवं चरित्र के अनुकूल होते हैं।
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(ग) कहानी में किन तत्त्वों का महत्त्व होता है ? (3)
उत्तर :
कहानी के तत्त्व कथानक, पात्र और चरित्र-चित्रण, संवाद, देशकाल और वातावरण, भाषा शैली, उद्देश्य इत्यादि महत्त्वपूर्ण होते हैं।
- कथानक-किसी भी कथावस्तु का आधार होता है। कथा, आरम्भ, चरम स्थिति तथा समापन से होकर गुजरती है।
- पात्र चरित्र-चित्रण-चरित्र-चित्रण भी एक महत्त्वपूर्ण तत्त्व है। इसके द्वारा यह्ठ पता लगाया जा सकता है कि कहानी में कितने पात्र हैं। कौन-कौन मुख्य पात्र की श्रेणी में हैं पात्रों के क्रियाकलापों के आधार पर उनका चरित्र-चित्रण किया जाता है।
- संवाद-संवाद के माध्यम से कहानी को आगे बढ़ाया जाता है। यह अत्यक रोचक होने चाहिए। लम्बे वाक्यों का प्रयोग कम किया जाना चाहिए।
खण्ड-‘ग’
(पाठ्य पुस्तकों अंतरा, अंतराल के आधार पर) (40 अंक)
प्रश्न 7.
निम्नलिखित काव्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उस पर आधारित दिए गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए- (1 × 5 = 5)
तुमने कभी देखा है
खाली कटोरों में वसंत का उतरना।
यह शहर इसी तरह खुलता है
इसी तरह भरता
इसी तरह रोज़-रोज़ अनंत शव
और खाली होता है यह शहर
ले जाते हैं कंधे
अँधेरी गली से
चमकती हुई गंगा की तरफ़
(i) ‘खाली कटोरों में वसंत का उतरना’ से अभिप्राय ……. है। (1)
(क) शहर में वसंत का आगमन होना
(ग) जीवन में प्रसन्नता का छा जाना
(ख) खाली कटोरों का पैसों से भर जाना
(घ) वसंत में पेड़ों का फूलों से लद जाना
उत्तर :
विकल्प (ग) सही है।
व्याख्या-‘खाली कटोरों में बसंत का उतरना’ से अभिप्राय जीवन में प्रसन्नता का छ जाना है।
(ii) निम्नलिखित कथन कारण को ध्यानपूर्वक पढिए तथा उत्तर के लिए सही विकल्प का चयन कीजिए ।
कथन – यह शहर इसी तरह खुलता है।
कारण – प्रत्येक दिन की शुरुआत उल्लास के साथ होती है।
(क) कथन और कारण दोनों सही हैं। कारण कथन की सही व्याख्या है।
(ख) कथन सही है किंतु कारण कथन की सही व्याख्या नहीं है।
(ग) कथन और कारण दोनों गलत हैं।
(घ) कथन गलत है, किंतु कारण सही है।
उत्तर :
विकल्प (क) सही है।
व्याख्या-‘यह शहर इसी तरह खुलता है।’ -इस पंक्ति से आशय है कि प्रत्येक दिन की शुरूआत उल्लास के साथ होती है।
(iii) ‘इसी तरह भरता और खाली होता है यह शहर’ – इस पंक्ति में ‘ भरने और खाली’ होने से अभिप्राय है- (1)
(क) शहर की पूर्णता और रिक्तता से
(ख) कटोरों के भरने और खाली होने से
(ग) तीर्थयात्रियों के आवागमन से
(घ) सैलानियों के घूमने-फिरने से
उत्तर :
विकल्प (क) सही है।
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(iv) ‘चमकती हुई गंगा’ प्रतीकार्थ …….. है।
(क) झिलमिल करती गंगा का
(ख) चाँदी-सी चमकती गंगा का
(ग) जीवनदायिनी गंगा का
(घ) मोक्षदायिनी गंगा का
उत्तर :
विकल्प (घ) सही है।
(v) ‘अंधेरी गली’ से अभिप्राय है।
कथन 1 – अंधकारयुक्त रास्ते से है।
कथन 2 – सुनसान रास्ते से है।
कथन 3 – मृत्युरुपी अंधकार से है।
(क) केवल कथन 2
(ख) कथन 1 और 2
(ग) केवल कथन 3
(घ) कथन 2 और 3
उत्तर :
विकल्प (ग) सही है।
प्रश्न 8.
निम्नलिखित तीन प्रश्नों में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 40 शब्दों में लिखिए- (2 × 2 = 4)
(क) ‘जहाँ पहुँच अनजान क्षितिज को मिलता एक सहारा’ पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए। (2)
उत्तर :
‘जहाँ पहुँच अनजान क्षितिज को मिलता एक सहारा’ पंक्ती का आशय है कि भारत आने पर सर्वथा अनजान एवं अपरिचित व्यक्ति को भी पूर्ण स्नेह एवं आश्रय प्राप्त हो जाता है। भारत की संस्कृति में अतिथि सेवा को महत्त्वपूर्ण माना गया है। यहाँ अपरिचितों को भी पूरा आदर, सम्मान एवं प्रेम दिया जाता है।
(ख) माघ के मास में विरहिणी के भावों को अपने शब्दों में लिखिए। (2)
उत्तर :
माघ के मास में ठंड विरहिणी को और भी अधिक व्यथित करती है। उसका हृदय बार-बार कौपने लगता है। विरहिणी को अपने प्रियतम की याद सताती है, इसलिए प्रियतम के विरह में अश्रुपात होने लगता है। अश्रुपात के कारण उसे वस्त्र भीग जाते हैं जिसकी वजह से भीगे वस्त्र उसे तीर की तरह चुभने लगते हैं।
(ग) भारत का आत्म परिताप उनके व्यक्तित्व के किस पक्ष की ओर संकेत करता है ? वर्तमान में ऐसे व्यक्तित्व की आवश्यकता सिद्ध कीजिए। (2)
उत्तर :
उज्जवल पक्ष की और संकेत
- राम को वनवास दिलाने में उनका हाथ न होना
- राम को वनवास से वापस लाने के लिए चित्रकूट जाना
- राम को स्वामी एवं स्वयं को सेवक मानना
- बड़े भाई के प्रति अथाह प्रेम व श्रद्धा
- वर्तमान समय में आवश्यकता-वर्तमान युग भौतिकतावादी युग है। धन-संपत्ति जीवन का मूलाधार बन गई है। ऐसे समय में भरत जैसे विनम्र, त्यागी और निर्लोभी व्यक्तित्व की समाज को आवश्यकता है।
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प्रश्न 9.
निम्नलिखित में से किसी एक काव्यांश की सप्रसंग व्याख्या लगभग 100 शब्दों में कीजिए- (2)
(क) ये पत्थर ये चट्टानें
ये झूठे बंधन टूटें
तो धरती को हम जानें
सुनते हैं मिट्टी में रस है जिससे उगती दूब है
अपने मन के मैदानों पर व्यापी कैसी ऊब है
आधे-आधे गाने
तोड़ो-तोड़ो-तोड़ो
ये ऊसर बंजर तोड़ो
ये चरती परती तोड़ो
सब खेत बनाकर छोड़ो
मिट्टी में रस होगा ही जब वह पोसेगी बीज को
हम इसको क्या कर डालें इस अपने मन की खोज को ?
गोड़ो-गोड़ो-गोड़ो (6)
उत्तर :
सन्दर्भ – प्रस्तुत पंक्तियाँ ‘तोड़ो’ कविता से अवतरित हैं जिसके रचयिता रघुवीर सहाय हैं।
प्रंसग – इसमें कवि सृजन हेतु भूमि को तैयार करने के लिए चटट्नों, ऊसर और बंजर को तोड़ने का आह्वान करता है।
व्याख्या – कवि कहता है कि हमें मिट्टी का उर्वरक बनाने के लिए झूठी मान्यताओं, बंधनों, पत्थयों, चट्टानों इत्यादि को तोड़ना होगा। बंजर ज़मीन को उपजाऊ बनाने के लिए अपने मन के मैदानों को भी व्यापक करना होगा। मिट्टी में एक प्रकार का रस है जिससे दूब उगती है लेकिन बिना परिश्रम के कुछ भी सम्भव नहीं है। हमें दूब से छुटकारा पाना होगा।
कवि चाहता है कि खेत बनाने के लिए परती, बंजर ज़मीन को तोड़कर उसे उपजाऊ बनाना होगा। मिट्टी में ऐसा एक रस है जो बीज को पोषित करता है जिससे अच्छी फ़सल विकसित होती है। इसलिए हमें अपने मन की खीज को दूर करना चाहिए। खीज की भावना को समाप्त करके मन में नए पौथें के भाव को उत्पन्न करना चाहिए। जिससे एक सुन्दर रचना उत्पन्न हो सके।
विशेष-
- कवि ने मिट्टी के माध्यम से नई रचना का सृजन करने की प्रेरणा दी है।
- भाषा खड़ीबोली हिन्दी है।
- मुक्त छन्द का प्रयोग हुआ है।
अथवा
(ख) पुलकि सरीर सभाँ भए ठाढ़े। नीरज नयन नेह जल बाढ़े॥
कहब मोर मुनिनाथ निबाहा। एहि तें अधिक कहों मैं काहा।।
मैं जानडँ निज नाथ सुभाऊ। अपराधिहु पर कोह न काऊ॥
मो पर कृपा सनेहु बिसेषी। खेलत खुनिस न कबहूँ देखी।। (6)
उत्तर :
सन्दर्भ – प्रस्तुत पंक्तियाँ ‘भरत-राम का प्रेम’ से अवतरित हैं जिसके रचयिता तुलसीदास जी हैं।
प्रंसग – इसमें कवि ने भरत की मनोभूमि के विषय में बताया है। व्याख्या-जब वे अपने मन के भावों को व्यक्त करने के लिए श्रीराम के दर्शन करते हैं, तब उनका शरीर भरी सभा में पुलकित हो जाता है। उनकी अँखों से अश्रु की धारा निकलने लगती है। उनके मुख से निकले शब्द बड़े कठिन प्रतीत होते हैं, फिर भी ध्वस्त हो जाते हैं। इसलिए मैं इससे अधिक और क्या ही कह सकता हूँ। मुनि वशिष्ठ ने कहा है कि वे श्रीराम के स्नेह के कारण पहले ही भावविभोर हो जाते हैं। वे अपने निज नाथ को भली-भाँति जानते हैं। उनके स्वभाव के बारे में उन्हें सब पता है। वे अपमान होने पर भी क्रोध नह्ही करते हैं। मुझ पर तो उनकी विशेष कृपा है। मैंने विशेष स्नेह प्राप्त किया है और स्नेह के दौरान भी अप्रसन्नता नहीं देखी है।
विशेष-
- चौपाई छन्द है।
- शान्त रस विद्यमान है।
- अवधी भाषा का प्रयोग हुआ है।
- रूपक और अनुप्रास अलंकार का प्रयोग हुआ है।
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प्रश्न 10.
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उस पर आधारित दिए गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए- (1 × 5 = 5)
दुःख और सुख तो मन के विकल्प हैं। सुखी वह है जिसका मन वश में है, दुःखी वह है जिसका मन परवश है। परवश होने का अर्थ है खुशामद करना, दौँत निपोरना, चाटुकारिता, हाँ-हजूरी। जिसका मन अपने वश में नहीं है वही दूसरे के मन का छंदावर्तन करता है, अपने को छिपाने के लिए मिथ्या आडंबर रचता है, दूसरों को फँसाने के लिए जाल बिछता है। कुटज इन सब मिथ्याचारों से मुक्त है। वह वशी है। वह वैरागी है। राजा जनक की तरह संसार में रहकर, संपूर्ण भोगों को भोगकर भी उनसे मुक्त है। जनक की ही भाँति वह घोषणा करता है – मैं स्वार्थ के लिए अपने मन को सदा दूसरे के मन में घुसाता नहीं फिरता, इसलिए मैं मन को जीत सका हूँ, उसे वश में कर सका हूँ ….. कुटजं अपने मन पर सवारी करता है, मन को अपने पर सवार नहीं होने देता। मनस्वी मित्र, तुम धन्य हो।
(i) सुखी …….. है। (1)
(क) जिसका मन अपने नियंत्रण में है।
(ख) जिसके पास सुख-सुविधा के साधन हैं।
(ग) जो शारीरिक-मानसिक दृष्टि से स्वस्थ है।
(घ) जिसे किसी प्रकार का कोई कष्ट नहीं है।
उत्तर :
विकल्प (क) सही है।
व्याख्या-जिनका मन अपने नियंत्रण में होता है, वही व्यक्ति सुखी होता है।
(ii) दुःखी व्यक्ति क्या करता है ? (1)
(क) अपने मन को नियंत्रण में करने की कोशिश
(ख) अपनी कमज़ोरियों को छिपाने की कोशिश
(ग) दूसरों को प्रसन्न करने की कोशिश
(घ) दूसरों में दोष निकालने की कोशिश
उत्तर :
विकल्प (ख) सही है।
व्याख्या-दुःखी व्यक्ति अपनी कमज़ोरियों को सदैव छिपाने की कोशिश करता है।
(iii) निम्नलिखित कथन तथा कारण पर विचार कीजिए और सर्वाधिक उचित विकल्प चुनकर लिखिए – (1)
कथन : कमज़ोर अस्थिर, चंचल मन वाला व्यक्ति बाह्य परिस्थितियों से जल्दी प्रभावित होता है।
कारण : उसकी इंद्रियाँ उसके नियंत्रण में नहीं रहतीं, वह सदैव असंतुष्ट रहता है।
विकल्प:
(क) कथन और कारण दोनों गलत हैं।
(ख) कथन गलत है, किंतु कारण सही है।
(ग) कथन और कारण दोनों सही हैं, किंतु कारण, कथन की सही व्याख्या नहीं करता है।
(घ) कथन और कारण दोनों सही हैं तथा कारण, कथन की सही व्याख्या करता है।
उत्तर :
विकल्प (घ) सही है।
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(iv) ‘कुटज अपने मन पर सवारी करता है, मन को अपने पर सवार नहीं होने देता’ – कथन में निहित संदेश ….. (1)
(क) मन के कहे अनुसार जीवन में सभी कार्य करें।
(ख) कामनाओं की पूर्ति हेतु चुनौतियों का सामना करें। .
(ग) यद्यपि मन चंचल है पर मन को अनदेखा न करें।
(घ) स्वयं पर नियंत्रण रखें, मन पर विजय प्राप्त करें।
उत्तर :
विकल्प (घ) सही है।
(v) ‘जिसका मन अपने वश में नहीं है वही दूसरे के मन का द्वयावर्तन करता है, अपने को छिपाने के लिए मिध्या आंडम्बर रचता है। इस पंक्ति के माध्यम लेखक कुटज के विषय में कहना चाहता है कि- (1)
(क) कुटज हीन है।
(ख) कुटज कमजोर है।
(ग) कुटज मिथ्याचारों से युक्त है।
(घ) कुटज मिथ्याचारों से मुक्त है।
उत्तर :
विकल्प (घ) सही है।
प्रश्न 11.
निम्नलिखित तीन प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 40 शब्दों में दीजिए- (2 × 2 = 4)
(क) ‘बालक बच गया’ प्रसंग में ‘जीवित वृक्ष के हरे पत्तों का मर्मर’ किसे कहा गया है ? उसे सुनकर लेखक को कैसा लगा ? (2)
उत्तर :
‘बालक बच गया’ प्रसंग में ‘जीवित वृक्ष के हरे पत्तों का मर्मर’ बालक द्वारा इनाम में लडड् की माँग को कहा गया है। उसे सुनकर लेखक ने सुख की साँस ली क्योंकि बालक थोपे गए ज्ञान के बोझ से मुक्त हो गया था। उसकी बाल सुलभ प्रवृत्तियाँ, स्वाभाविकता उसे जीवित बना रही थीं।
(ख) ‘संवदिया’ कहानी के आधार पर लिखिए कि बिंहपुर स्टेशन पहुँचने पर हरगोबिन की मन:स्थिति कैसी थी ? (2)
उत्तर :
बिंहपुर स्टेशन पहुँचने पर हरगोबिन की मनःस्थिति इस प्रकार थी-
- उसका मन भारी हो रहा था।
- संवाद सुनाने में वह स्वयं को असमर्थ महसूस कर रहा था।
- बड़ी बहुरिया के दुःखों के प्रति उसकी सहानुभूति थी।
- जलपान करते समय उसे ऐसा प्रतीत हो रहा था कि मेरे सामने भरी थाली रखी है जबकि बड़ी बहुरिया दालान पर भूखी-प्यासी बैठी उसकी राह देख रही होगी।
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(ग) हर की पौड़ी की भीड़ और शहर की भीड़ के अंतर को ‘दूसरा देवदास’ कहानी के आधार पर लिखिए। (2)
उत्तर :
हर की पौड़ी की भीड़-यहाँ भीड़ में एकसूत्रता थी। सबका गंतव्य एक ही था। सभी जीवन के प्रति कल्याण की कामना लिए आगे बढ़े जा रहे थे। यहाँ कोई दौड़ न थी।
शहर की भीड़—इस भीड़ में अपने-अपने गंतव्य स्थान पर पहुँचने की शीघ्रता होती है । साथ ही एक-दूसरे से आगे निकलने की होड़ भी रहती है।
प्रश्न 12.
निम्नलिखित गद्यांशों को ध्यानपूर्वक पढ़कर किसी एक गद्यांश की सप्रसंग व्याख्या लगभग 100 शब्दों में कीजिए (6 × 1 = 6)
(क) चौधरी साहब से तो अब अच्छी तरह परिचय हो गया था। अब उनके वहाँ मेरा जाना एक लेखक की हैसियत से होता था। हम लोग उन्हें एक पुरानी चीज़ समझा करते थे। इस पुरातत्त्व की दृष्टि में प्रेम और कोतूहल का एक अद्भुत मिश्रण रहता था। यहाँ पर यह कह देना आवश्यक है कि चौधरी साहब एक खासे हिंदुस्तानी रईस थे। वसंत पंचमी, होली इत्यादि अवसरों पर उनके यहाँ खु्र नाचरंग और उत्सव हुआ करते थे। उनकी हर एक अदा से रियासत और तबीयतदारी टपकती थी। कंधों तक बाल लटक रहे हैं। आप इधर से उधर टहल रहे हैं। एक छोटा-सा लड़का पान की तश्तरी लिए पीछे-पीछे लगा हुआ है। (6)
उत्तर :
सन्दर्भ – प्रस्तुत गद्यांश, प्रेमघन की छया-स्मृति, पाठ से अवतरित है जिसके लेखक रामचन्द्र शुक्ल हैं।
प्रसंग – चौधरी साहब के विषय में बताया गया है।
व्याख्या – लेखक बताते हैं कि बद्रीनारायण चौँधरी प्रेमघन से उनका अच्छ्र परिचय हो गया था। उनके यहाँँ वह लेखक की हैसियत से जाते थे। वे लोग उन्हें एक पुरानी चीज़ समझा करते थे। इस पुरातत्व की दृष्टि में ही प्रेम और कोतहल का एक विशेष मिश्रण रहता था जो किसी भी रचना के सृजन में सहायक है। लेखक चौधरी साहब के बारे में बताते हैं कि वह एक अच्छे-खासे हिन्दुस्तानी रईस थे। उनके यहाँ वसंत पंचमी, होली इत्यादि त्यौहारों पर खूब नाचरंग हुआ करता था। उनके यहाँ हर एक अदा में रियासत और तबीयतदारी टपकती थी। उनके उस समय कंधे तक बाल लटकते थे। हम लोगों के पीछे एक छोटा-सा लड़का पान की तश्तरी लिए पीछे लगा रहता था।
विशेष-
- बद्रीनारायण चौधरी ‘प्रेमधन’ के जीवन पर प्रकाश डाला है।
- खड़ी बोली हिन्दी का प्रयोग किया है।
- वर्णनात्मक एवं चित्रात्मक शैली विद्यमान है।
अथवा
(ख) इन्हीं गाँवों में एक का नाम है – अमझर – आम के पेड़ों से घिरा गाँव – जहाँ आम झरते हैं। किंतु पिछले दो-तीन वर्षों से पेड़ों पर सूनापन है, न कोई फल पकता है, न कुछ नीचे झरता है। कारण पूछने पर पता चला कि जब से सरकारी घोषणा हुई है कि अमरौली प्रोजेक्ट के अंतर्गत नवागाँव के अनेक गाँव उजाड़ दिए जाएँगे, तब से न जाने कैसे, आम के पेड़ सूखने लगे। आदमी उजड़ेगा, तो पेड़ जीवित रहकर क्या करेंगे ? (6)
उत्तर :
सन्दर्भ – प्रस्तुत गद्यांश ‘जहाँ कोई वापसी नहीं’ पाठ से अवतरित हैं जिसके लेखक निर्मल वर्मा है।
प्रसंग – इसमें लेखक ने अमझर गाँव और गाँव के उजड़ने के विषय में बताया है।
व्याख्या – लेखक बताता है कि इन्हीं गाँवों में एक गाँव का नाम अमझर है। ‘अमझर’ नाम इसलिए पड़ा क्योंकि ये आम के पेड़ों से घिरा गाँव है, जहाँ सदैव आम झड़ते रहते हैं। कुछ वर्षो से इन पेड़ों पर सूनापन कायम है। कोई फल भी नहीं पकता है और न ही फल नीचे झड़ते हैं। यहाँ के लोगों से कारण पूछ्छ तो पता चला कि जब से सरकारी घोषणा हुई है कि अमरौली प्रोजेक्ट के अन्तर्गत नवागाँव के अनेक गाँव उजाड़ दिए जाएँगे, तब से यहाँ आम के पेड़ सूखने लगे हैं। यदि व्यक्ति ही अपने स्थान से विस्थापित हो जाएगा तो वे पेड़ को कैसे जीवित कर पाएगा।
विशेष-
- भाषा खड़ी बोली है।
- प्रकृति का सहज चित्रण किया गया है।
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प्रश्न 13.
निम्नलिखित तीन प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 100 शब्दों में दीजिए- (5 × 2 = 10)
(क) ‘अब मालवा में वैसा पानी नहीं गिरता जैसा गिरा करता था।’ कथन के संदर्भ में लिखिए कि देश के अन्य भागों में बारिश की क्या स्थिति है और इसके क्या कारण हैं ? स्पष्ट कीजिए। (5)
उत्तर :
‘अब मालवा में वैसा पानी नहीं गिरता जैसा गिरा करता था’ देश के अन्य भागों की स्थिति भी मालवा से बिलकुल अलग नहीं है। देश के अन्य भागों में कही अनावृष्टि है तो कहीं अतिबृष्टि है। यह स्थिति इसलिए है क्योंकि बारिश का चक्र बिल्कुल बिगड़ गया है। इसके कई कारण हैं जो इस प्रकार हैं-
- औद्योगीकरण के कारण पर्यावरण को अधिक नुकसान पहुँचा है जिससे पर्यावरण में अनेक परिवर्तन परिलक्षित हो रहे हैं। इससे जल और थल दोनों ही प्रभावित हो रहे हैं।
- वन्य प्रदेश का कटाव होने के कारण भी प्रकृति का सन्तुलन बिगड़ रहा है। मालवा की धरती पर भी पेड़ों की अधिक कटाई हुई है।
- जलवायु परिवर्तन भी एक मुख्य कारण है क्योंकि वायुमण्डल में कार्बन डाईऑक्साइड गैस की अधिकता हो रही है जिससे ओजोन परत को नुकसान पहुँच रहा है।
(ख) ‘बिस्कोहर की माटी’ पाठ के आधार पर लिखिए कि क्या फूल केवल प्राकृतिक सौँदर्य की सामग्री ही हैं या उनकी कोई अन्य उपयोगिता है? (5)
उत्तर :
फूल औषधीय गुणों से परिपूर्ण होता है। फूल ही फल-सब्जियों के रूप में परिवर्तित होकर खाघ सामग्री के रूप में बन जाता है। फूलों का उपयोग प्रसाधन-सामग्री के रूप में भी किया जाता है। फूल से केवल सुगन्ध नहीं प्राप्त होती बल्कि दवा भी प्राप्त होती है। पीली सरसों से तेल निकलता है। आँखे आने पर अर्थात् आँखें दुःखने पर भी माँ उसका दूध औँख में लगती है जिससे राहत मिलती है। नीम के फूल-पत्तों से चेचक जैसी समस्या से निजात मिलती है। बेर के फूल को सँघूने से ततैया का डंक भी निकल जाता है। इस प्रकार ऐसे कई फूल हैं जो न केवल प्राकृतिक सौन्दर्य की ही सामग्री हैं, बल्कि उनकी उपयोगिता अन्य दैनिक क्रियाकलाप में भी है।
(ग) प्रेमचन्द के विषय में अपने विचार व्यक्त कीजिए। (5)
उत्तर :
प्रेमचन्द्र ने अपने लेखन की शुरुआत पहले उर्दू में नवाबराय के नाम से की, बाद में हिन्दी में लिखने लगे। उन्होंने अपने साहित्य में किसानों, दलितों, नारियों की वेदना और वर्ण-व्यवस्था की कुरीतियाँ का मार्मिक चित्रण किया है। वे साहित्य को स्वांतः सुखाया न मानकर सामाजिक परिवर्तन का एक सशक्त माध्यम मानते थे। वे एक ऐसे साहित्यकार थे, जो समाज की वार्तविक स्थिति को पैनी दृष्टि से देखने की शक्ति रखते थे। उन्होंने समाज-सुधार और राष्ट्रीय-भावना से ओपप्रोत अनेक उपन्यासों एवं कहानियों की रचना की। कथा-संगठन, चरित्र-चित्रण, कथोपकथन आदि की दृष्टि से उनकी रचनाएँ बेजोड़ हैं। उनकी भाषा सजीव, मुहावरेदार और बोलचाल के निकट है। हिन्दी भाषा को लोकप्रिय बनाने में उनका विशेष योगदान है। संस्कृत के प्रचलित शब्दों के साथ-साथ उर्दू की रवानी इसकी विशेषता है, जिसने हिन्दी कथा-भाषा को नया आयाम दिया।