Students must start practicing the questions from CBSE Sample Papers for Class 12 Hindi Elective with Solutions Set 3 are designed as per the revised syllabus.
CBSE Sample Papers for Class 12 Hindi Elective Set 3 with Solutions
निर्धारित समय : 3 घंटे
पूर्णाक : 80
सामान्य निर्देश :
- इस प्रश्न पत्र तीन खण्डों – खंड ‘क’, ‘ख’ और ‘ग’।
- दिए गए निर्देशों का पालन करते हुए प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
- तीनों खण्डों के कुल 13 प्रश्न हैं। तीनों खण्डों के प्रश्नों के उत्तर अनिवार्य है।
- यथासंभव तीनों खण्डों के प्रश्नों के उत्तर क्रम से लिखिए।
खण्ड-‘क’
(अपठित बोध) (18 अंक)
प्रश्न 1.
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए प्रश्नों के सर्वांधिक उपयुक्त उत्तर दीजिए – (10)
सत्य ! कितना भोला-भाला, कितना सीधा-सादा, जो कुछ अपनी आँखों से देखा, बखान कर दिया, जो कुछ जाना बिना नमक-मिर्च लगाए बोल दिया। यही तो सत्य है न ! इतना सरल। सत्य सृष्टि का प्रतिबिम्ब है, ज्ञान की प्रतिलिपि है, आत्मा की वाणी है। सत्यवादिता के लिए केवल निष्कपट मन चाहिए। एक झूठ के लिए हजारों झूठ बोलने पड़ते हैं, झूठ की लंबी शृखला मन में बैठानी पड़ती है और कहीं तारतम्य न बैठा, पोल खुली तो अविश्वास का आघात सहना पड़ता है। अवमानना का कडुआ घूँट पीना पड़ता है। हाँ, सत्य बोलने और करने में भी किसी का अकारण अहित करने का उद्देश्य नहीं होना चाहिए।
संसार में जितने महान् व्यक्ति हुए हैं, सबने सत्य का सहारा लिया है – सत्य की उपासना की है। ‘चन्द्र टैै सूरज टरै, टरै जगत व्यवहार’ के उद्घोषक राजा हरिश्चन्द्र की सत्यनिष्ठा जगद्विख्यात है। यह ठीक है कि उन्हें सत्य के मार्ग पर चलने में अनेक कठिनाइयों के दलदल में फँसना पड़ा, लेकिन उनकी कीर्ति आज चाँद की चाँदनी और सूरज की रोशनी से कम प्रकाशपूर्ण नहीं है। राजा दशरथ ने सत्यवचन निर्वाह के लिए अपना प्राणोत्सर्ग तक किया। महात्मा गाधी ने सत्य की शक्ति से ही विदेशी शासन की जड़ काट दी। उनका कथन है – सत्य एक विशाल वृक्ष है, उसकी ज्यों-ज्यों सेवा की जाती है, त्यों-त्यों उसमें अनेक फल आते हुए नज़र आते हैं। उनका अन्त नहीं होता। वस्तुतः, सत्यभाषण ओर सत्यपालन के अमित फल होते हैं। सत्य बोलने का अभ्यास बचपन से ही डालना चाहिए।
झूठ बोलने वालों से लोगों का विश्वास उठ जाता है। उनकी उपेक्षा सर्वत्र होती है। उनकी उन्नति के द्वार बंद हो जाते हैं। कभी-कभी तो उन्हें अपनी बेशकीमती ज़िंदगी से भी हाथ धोना पड़ता है।
सत्य की महिमा अपार है। सत्य महान् और परम शक्तिशाली है। संस्कृत की सूक्तियाँ हैं – ‘सत्यमेव जयते नानृतम् – नहि सत्यात् परी धर्म:’ – सत्य की ही विजय होती है, असत्य की नहीं – तथा ‘सत्य से बढ़कर कोई धर्म नहीं है।’ सत्य की एक चिंगारी से असत्य के फूस का अम्बार एक क्षण में भस्मसात् हो जाता है।
(i) सत्य को उसी रूप में प्रस्तुत करने में ……. इन्द्रिय सहयोग करती है । (1)
उत्तर देने के लिए सर्वंधिक उपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए।
(क) नाक
(ख) कान
(ग) आँख
(घ) मुख
उत्तर :
विकल्प (घ) सही है।
व्याख्या-सत्य को उसी रूप में प्रस्तुत करने में मुख इन्द्रिय सहयोग करती है।
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(ii) निम्नलिखित कथन (A) तथा कारण (R) को ध्यानपूर्वक पढ़िए। उसके बाद दिए गए विकल्प में से कोई एक सही विकल्प चुनकर लिखिए। (1)
कथन (A) : संमार में जितने महान् व्यक्ति हुए हैं, सबने सत्य का सहारा लिया है।
कारण (R) : सत्यावादिता के लिए केवल निष्कपट मन चाहिए।
(क) कथन (A) गलत है, किंतु कारण (R) सही है।
(ख) कारण (A) सही है और कारण (R) गलत है।
(ग) कथन (A) और कारण (R) दोनों ही गलत है।
(घ) कथन (A) और कारण (R) दोनों ही सही है।
उत्तर :
विकल्प (घ) सही है।
(iii) गद्यांश में आए ‘तारतम्य’ का अर्थ …….. है। (1)
(क) ताँबे का तार
(ख) जोड़मेल
(ग) तत्परता
(घ) तीरकमान
उत्तर :
विकल्प (ख) सही है।
(iv) झुठी बात पकड़ में आ जाने पर क्या परिणाम होता है ? (1)
उत्तर :
झूठी बात पकड़ में आ जाने पर यह परिणाम होता है कि अविश्वास और अपमान बढ़ता है।
(v) गद्यांश के अनुसार सत्य बोलने वाला क्या नहीं करता है? (2)
उत्तर :
गद्यांश के अनुसार सत्य बोलने वाला किसी का अहित नहीं करता है।
(vi) राजा हरिश्चंद्र के यश की तुलना किससे की गई है ? (2)
उत्तर :
राजा हरिश्चन्द्र के यश की तुलना चाँद और सूरज के प्रकाश से की गई है।
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(vii) गद्यांश के संदर्भ में बिना नमक-मिर्च लगाए बोलने सें आशय क्या है ? (2)
उत्तर :
गद्यांश के सन्दर्भ में बिना नमक-मिर्च लगाए बोलने से आशय है-स्पष्ट शब्दों में सत्य का उल्लेख करना।
प्रश्न 2.
निम्नलिखित पद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर दीजिए- (8)
परमगुरु,
दो तो ऐसी विनम्रता दो
कि अंतहीन सहानुभूति की वाणी बोल सकूँ
और यह अंतहीन सहानुभूति पाखंड न लगे।
दो तो ऐसा कलेजा दो
कि अपमान, महत्त्वाकांक्षा और भूख
की गाँठों में मरोड़े हुए
उन लोगों का माथा सहला सकूँ
और इसका डर न लगे
फिर हाथ ही काट खाएगा।
दो तो ऐसी निरीरहता दो
कि इस दहाड़ते आतंक के बीच
फटकार कर सच बोल सकूँ
और इसकी चिंता न हो
कि इस बहुमुखी युद्ध में
मेरे सच का इस्तेमाल
कौन अपने पक्ष में करेगा
यह भी न दो
तो इतना ही दो
कि बिना मरे चुप रह सकूँ।
(i) पद्यांश में कवि ने कैसी विनम्रता की याचना की है ? (1)
(क) छल-कपटपूर्ण सहानुभूति दिखाने वाली
(ख) मृत्युपर्यंत सहानुर्भूति दिखाने वाली
(ग) छल करने वाली
(घ) अनैतिकता दिखलाने वाली
उत्तर :
विकल्प (ख) सही है।
व्याख्या-पद्यांश में कवि ने मृत्यु पर्यन्त सहानुभूति दिखाने वाली विनम्रता की याचना की है।
(ii) ‘माथा सहला सकू’ का आशय है- (1)
(क) सांत्वना देना
(ख) दु:ख दूर करना
(ग) सिर सहलाना
(घ) मस्तिष्क ठीक करना
उत्तर :
विकल्प (क) सही है।
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(iii) ‘कवि ने लोगों को सांत्वना देने की बात की है।’ लोगों को सांत्वना देने वाले कथन है/ है-
I. सम्मानपूर्ण और संतोषपूर्ण जीवन जीने वालों को
II. अपमान, भूख से पीड़ित आगे बढ़ने की इच्छ वालों को
III. दरिद्रतापूर्ण जीवन जीने वालों को
(क) (III) और (I)
(ख) केवल (II)
(ग) (II) और (III)
(घ) केवल (I) (1)
उत्तर :
विकल्प (ख) सही है।
व्याख्या-कवि ने अपमान, भूख से पीड़ित आगे बढ़ने की इच्छा रखने वालों को सांत्वना देने की बात की है।
(iv) ‘निरीहता’ का अर्थ क्या है ? (1)
उत्तर :
‘निरीहता’ का अर्थ निष्पक्षता होता है।
(v) इस कविता के केंद्रीय भाव को बताइए। (2)
उत्तर :
इस कविता का केन्द्रीय भाव इस प्रकार है-
- दीन-दु:खियों की सहायता करने की याचना करना।
- निडर होकर सत्य बोलने की याचना करना।
(vi) ‘बहुमुखी’ शब्द का अर्थ क्या है ? (2)
उत्तर :
‘बहुमुखी’ शब्द का अर्थ अनेक विषयों से सम्बन्ध रखने वाला है।
खण्ड- ‘ख’
(अभिव्यक्ति और माध्यम पुस्तक के आधार पर) (22 अंक)
प्रश्न 3.
निम्नलिखित प्रश्नों कों ध्यानपूर्वक पढ़कर सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर लिखिए- (1 + 2 + 2 = 5)
(क) किसी घटना की सूचना देने और उसके दृश्य दिखाने के साथ ही उस घटना के बारे में प्रत्यक्षदिर्शयों का कथन दिया और सुनाकर खबर को प्रमाणिकता दी जाती है। इसे क्या कहते हैं ? (शब्द सीमा – लगभग 20 शब्द) (1)
उत्तर :
प्रत्यक्षदर्शियों को कथन दिखा और सुनाकर खबर को प्रमाणिकता दी जाती है, उसे एंकर बाइट कहते हैं।
(ख) भुगतान के आधार पर अलग-अलग समाचार पत्रों एवं संगठनों में लिखने वाले पत्रकारों को क्या कहते हैं ? (शब्द सीमा – लगभग 40 शब्द)
उत्तर :
भुगतान के आधार पर अलग-अलग समाचार पत्रों एवं संगठनों में लिखने वाले पत्रकारों को फ्री लांसर पत्रकार कहते हैं। यह एक स्वतंत्र पत्रकार होता है। वह अपने समय के अनुरुप ही कार्य करता है। उसे कोई सेवानिवृत्ति जैसी योजनाओं का लाभ नहीं मिलता।
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(ग) अनामिका कुमार विशेषीकृत रिपोर्टिंग करने वाली रिपोर्टर हैं। इन्हें क्या कहा जाएगा ? (शब्द सीमा – लगभग 40 शब्द) (2)
उत्तर :
विशेषीकृत रिपोर्टिंग करने वाली रिपोर्टर को विशेष सम्वाददाता कहा जाएगा। इसमें किसी खास समस्या, घटना या मुद्दे का विश्लेषण किया जाता है। पाठकों को अर्थ स्पष्ट करने में मददगार है।
जनसंचार और सृजनात्मक लेखन पर आधारित प्रश्न
प्रश्न 4.
निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 60 शब्दों में दीजिए – (3 × 2 = 6)
(क) समाचार माध्यमों में प्रिंट माध्यम की विशेषताएँ लिखिए। (3)
उत्तर :
समाचार माध्यमों में प्रिंट माध्यम की विशेषताएँ इस प्रकार हैं-
- प्रिंट माध्यम में छपे हुए शब्दों में स्थायित्व होता है।
- प्रिंट माध्यम में पढ़ने और सोचने का पूरा अवसर प्राप्त होता है।
- प्रिंट माध्यम को साक्ष्य के रूप में लम्बे समय तक संग्रहित करके रखा जा सकता है।
- प्रिंट माध्यम में पढ़ते हुए किसी भी विषय पर सोच विचार भी कर सकते हैं।
(ख) रेडियो समाचार लेखन की भाषा पर प्रकाश डालिए। (3)
उत्तर :
रेडियो समाचार लेखन की भाषा इस प्रकार है-
- रेडियो समाचार लेखन की भाषा एकदम सरल होती है। उसमें आम बोलचाल के शब्दों का प्रयोग किया जाता है।
- रेडियो समाचार लेखन की भाषा को आसानी से समझा जा सकता है क्योंकि उसमें सहजता होती है।
- रेडियो समाचार लेखन की भाषा मानकीकरण होती है।
- रेडियो समाचार लेखन की भाषा दृश्यात्मकता के तत्त्व को भी समाहित किए हुए होती है।
(ग) मुद्रित माध्यमों की सीना क्या है? (5)
उत्तर :
मुद्धित माध्यमों की सीना या कमजोरी भी है। विरारों के लिए मुद्रित माध्यम किसी भी काम का नहीं है। साथ ही, मुद्धित माध्यमों के लिए लेखन करने वालों को अपने पाठकों के भाषा जान के साथ-साथ उनके शैक्षिक ज्ञान और योग्यता का विशेष ध्यान रखना पडता है। मुत्रित माध्यमों कि एक और सीमा यह हे कि वे रेड़ियो टि.वी या इंटरनेट की तरह तुरंत घटी, घटनाओं की संचालित नहीं कर सकते। ये एक निश्चित अवधि पर प्रकाशित होते हैं। जैसे अखबार हर घंटे में एक बार या सात्पाहिक पत्रिका सप्ताह में एक बार प्रकाशित होते हैं।
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प्रश्न 5.
निम्नलिखित तीन विषयों में से किसी एक विषय पर लगभग 100 शब्दों में रचनात्मक लेख लिखिए- (5 × 1 = 5)
(क) समाज में बढ़ती आर्थिक असमानताएँ (5)
उत्तर :
विषयवस्तु : 3 अंक
भाषा : 1 अंक
प्रस्तति : 1 अंक
समाज में बढ़ती आर्थिक असमानताएँ
समाज लोगों के समूह से निर्मित होता है। आज समाज में आर्थिक असमानताएँ तेज़ी से बढ़ रही हैं। कोई व्यक्ति गरीब होता जा रहा है, तो कोई व्यक्ति अमीर। आर्थिक असमानताएँ के कई कारण हो सकते हैं। जैसे-जातिवाद, शिक्षा, आर्थिक कमज़ोरी, लैंगिक असमानता इत्यादि। कुछ व्यक्ति योग्य होते हैं लेकिन उन्हें अवसर नहीं मिल पाता जिसके कारण भी आर्थिक असमानता जैसी समस्या समाज में उत्पन्न हो रही है। महिलाओं को आर्थिक समृद्धि के कम अवसर प्राप्त होते हैं जबकि पुरुर्षों को अधिक प्राप्त होते हैं। प्रारम्भ में केवल पुरुर्षो को ही शिक्षा प्राप्त करने की अनुमति थी, स्त्रियों को नहीं थी जिसके कारण भी समाज में आर्थिक असमानता उत्पन्न हो रही थी। समाज में बढ़ती आर्थिक असमानता को दूर करने के लिए पर्याप्त शिक्षा व्यवस्था का संचालन करना चाहिए। रोज़गार के अवसर सभी को प्रदान करने चाहिए तथा लँगिक असमानता को समाप्त करना चाहिए।
(ख) आटांफिशियल इंटेलीजेंस का समाज पर प्रभाव (5)
उत्तर :
आर्टीफिशियल इंटेलीजेंस का समाज पर प्रभाव
आर्टीफिशियल इंटेलीजेंस वह तकनीक है जो मानव बुद्धि से जुड़े कौशल का उपयोग करके बुद्धिमानी से व्यवहार करती है, जिससें स्वमत रूप से देखने, सीखने, तर्क करने और कार्य करने की क्षमता शामिल है।
इस तकनीक से एक्सरे लीडिंग, डॉक्टर्स को अनुसंधान में मदद, मरीज़ों का बेहतर तरीके से इलाज सम्भव है। यह तकनीक भविष्य में इंसानों के लिए मददगार या फिर नुकसान दायक भी हो सकती है। दरअसल, आर्टीफिशियल इंटेलिजेंस मिल जाने के बाद मशीनें यदि स्वयं निर्णय ले सकेंगी तो उनकी इंसानों पर निर्भरता खत्म हो जाएगी, ऐसे में इससे हानि भी सम्भव हैं। इसके आने से सबसे ज्यादा बेरोज़गाऱी बढ़ेगी, क्योंकि आने वाले समय में इंसानों की जगह मशीनों से काम कराया जाएगा, इससे मानव जाति का अन्त हो सकता है। क्योंकि रोबोट्स इस तकनीक के माध्यम से अपने आप को विकसित करके स्वयं खतरनाक हथियार बना सकते हैं।
(ग) परीक्षा के दिन (5)
उत्तर :
परीक्षा के दिन
छात्र जीवन, जीवन का सबसे सुनहरा दौर होता है। जब बच्चे मौज़-मस्ती के साथ-साथ खूब मेहनत कर अपने जीवन को एक दिशा देने के लिए प्रयासरत् रहते हैं। लेकिन छात्र जीवन में “परीक्षा” नाम के शब्द से सभी छत्रों को बहुत अधिक डर लगता हैं क्योंकि इन्हीं परीक्षाओं के मूल्यांकन के आधार पर हमारे भविष्य की रूपरेखा तय होती है इसलिए जैसे-जैसे परीक्षाएँ नज़दीक आती हैं विद्यार्थियों के मन के अंदर का डर बढ़ता जाता है। उनके परिश्रम का सफलता परीक्षा के परिणाम पर निर्भर करती है इसीलिए विद्यार्थियों पर उसका दबाब बढ़ जाता है।
मेरी वार्षिक परीक्षा से पूर्व मेरी भी कुछ ऐसी ही मनोदशा थी। इस समय खेलकूद, टी. वी. और मनोरंजन को छ्रेड़कर मेरा पूरा ध्यान केवन पढ़ाई पर केंद्रित था। मेरे माता-पिता भी इसमें मेरां पूरा सहयोग कर रहे थे। यद्यपि मेरी सभी विषयों को तैयारी बहुत अच्छी थी फिर भी मन में आशंका रहती थी कि कोई प्रश्न ऐसा न हो जिसे मैं हल न कर सकूँ इसीलिए प्रथम परीक्षा के दिन मैंने अपने सहपाठियों से भी अधिक बात नहीं की। परीक्षा कक्ष में पहुँचकर मैंने ईश्वर का स्मरण करके अपने मन को एकाग्र किया। उसे देखते ही मैं खुशी से झूम उठी क्योंकि सभी प्रश्न मुझे बहुत अच्छी तरह आते थे। मैने अपना प्रश्न-पत्र निर्धारित समय में आसानी से हल किया।
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प्रश्न 6.
निम्नलिखित प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर तीन प्रश्नों मे से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 60 शब्दों में लिखिए- (3 × 2 = 6)
(क) कविता में बिंब की भूमिका को स्पष्ट कीजिए। (3)
उत्तर :
कविता में बिम्ब की भूमिका अत्यन्त महत्त्वपूर्ण होती है जो इस प्रकार है।-
- कविता में बिम्ब कविता को इंद्रियों से पकड़ने में सहायक बनाता है।
- कविता में बिम्ब द्वारा शब्दों के माध्यम से मन के भीतर चित्र को नर्मित किया जा सकता है।
- कविता में बिम्ब कविता को जीवंत बनाने में सहायक होते हैं।
(ख) नाटक के विभिन्न तत्त्वों पर प्रकाश डालिए। (3)
उत्तर :
नाटक के तत्त्वों में कथावस्तु, पात्र, संवाद (कथोपकथन) देश काल वातावरण इत्यादि को शामिल किया गया है। कथावस्तु नाटक की कथा को प्रस्तुत करती है। कथावस्तु के दो भेद हैं-
आधिकारिक कथा और प्रासंगिक कथा। पात्र भी नाटक का प्रमुख तत्त्व है जिसमें कुछ मुख्य पात्र और कुछ गौण पात्र निहित होते हैं। नायक और नायिका भी नाटक में होते हैं संवाद के माध्यम से कथा को आगे बढा़ने का बखूबी प्रयास किया जाता है।
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(ग) कहानी का हमारे जीवन से क्या संबंध है ? परिभाषित कीजिए। (3)
उत्तर :
कहानी का हमारे जीवन से गहरा सम्बन्ध होता है। कहानी अपने जीवन के अनभुवों को प्रकट करने में सहायक होती है। साथ ही साथ दूसरों के अनुभवों को जानने की प्राकृतिक इच्छा की भी पूरिं करती है। कहानी के द्वारा व्यक्ति की कल्पना शक्ति का विकास होता है। कहानी व्यक्ति के भीतर नैतिक मूल्यों को जाग्रत करने में सहायक होती है। साथ ही एक आदर्श जीवन जीने की प्रेरणा भी देती है।
खण्ड-‘ग’
(पाठ्य पुस्तकों अंतरा, अंतराल के आधार पर) (40 अंकं)
प्रश्न 7.
निम्नलिखित काव्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उस पर आधारित दिए गए प्रश्नों के सर्वांधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए- (1 × 5 = 5)
इस शहर में वसंत
अचानक आता है
और जब आता है तो मैंने देखा है
लहरतारा या मडुवाडीह की तरफु से
उठता है धूल का बवंडर
और इस महान् पुराने शहर की जीभ किरकिराने लगती है
जो है वह सुगबुगाता है
जो नहीं है वह फेंकने लगता है पचखियाँ
आदमी दशाश्वमेध पर जाता है
पाता है घाट का आखिरी पत्थर
कुछ और मुलायम हो गया है
सीढ़ियों पर बैठे बंदरों की आँखों में
एक अजीब-सी नमी है
और एक अजीब-सी चमक से भर उठा है
भिखारियों के कटोरों का निचाट खालीपन
(i) काव्यांश में बनारस शहर के …….. परिवेश का चित्रण हुआ है। (1)
(क) आध्यात्मिक व सामाजिक
(ख) आध्यात्मिक व सांस्कृतिक
(ग) सामाजिक व दार्शनिक
(घ) दार्शनिक व आधुनिक
उत्तर :
विकल्प (ख) सही है।
व्याख्या-काव्यांश में बनारस शहर के आध्यात्मिक व सांस्कृतिक परिवेश का चित्रण हुआ है।
(ii) निम्नलिखित कथन कारण को ध्यानपूर्वक पढिए तथा उत्तर के लिए सही विकल्प का चयन कीजिए। (1)
कथन – दशाश्पमेध घाट का आखिरी पत्थर कुछ और मुलायम हो गया है।
कारण – पाषण हृदय व्यक्ति के व्यवहार में भी सहजता आ गई है।
(क) कथन और कारण दोनों सही हैं। कारण कथन की सही व्याख्या है।
(ख) कथन सही है किंतु कारण कथन की सही व्याख्या नहीं है।
(ग) कथन और कारण दोनों गलत हैं।
(घ) कथन गलत है, किंतु कारण सही है।
उत्तर :
विकल्प (क) सही है।
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(iii) ‘जो है वह सुगबुगाता है’ पंक्ति के संदर्भ में ‘सुगबुगाना’ का आशय है- (1)
(क) तीव्र गति से आग का भड़कना
(ख) भीतर ही भीतर क्रोध में जलना
(ग) धीमी गति से आग का जलना
(घ) चेतना का संचार होना
उत्तर :
विकल्प (घ) सही है।
(iv) घाट पर बैठे ….. आँखों में अजीब-सी नमी है ।
(क) बंदरों की
(ग) स्नानार्थियों की
(ख) भिखारियों की
(घ) पुजारियों की
उत्तर :
विकल्प (क) सही है।
व्याख्या-घाट पर बैठे बंदरों की आँखों में अजीब-सी नमी है।
(v) कवि ने ‘कटोरों का खालीपन’ कहा है तथा उसकी चमक के विषय कहा है। 1
कथन 1- वसंत के आगमन से चमक से भर उठता है।
कथन 2 – श्रद्वालुओं के आगमन से चमक से भर उठता है।
कथन 3 – भिक्षा मिलने की उम्मीद से चमक से भर उठता है।
(क) केवल कथन 2 और 3
(ख) कथन 1 और 2
(ग) केवल कथन 3
(घ) केवल कथन 1
उत्तर :
विकल्प (ग) सही है।
प्रश्न 8.
निम्नलिखित तीन प्रश्नों में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 40 शब्दों में लिखिए- (2 × 2 = 4)
(क) ‘सरोज स्मृति’ कविता के आधार पर लिखिए कि सरोज के विवाह पर कवि को ‘शकुंतला’ का स्मरण क्यों हो आया। (2)
उत्तर :
सरोज के विवाह पर कवि को ‘शकुन्तला’ का स्मरण इसलिए आ गया क्योंकि मातृविहिन कन्या शकुन्तला का पालन-पोषण एवं विवाह ऋषि कण्व द्वारा सम्पन्न किया गया, उसी प्रकार सरोज भी मातृविहीन कन्या थी जिसका पालन-पोषण कवि ने किया। मातृविहीन कन्या सरोज का विवाह आदि रस्मों को पिता ने सम्पन्न किया।
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(ख) ‘तोड़ो’ कविता का कवि मन में व्याप्त ऊब और खीझ को तोड़ने की बात क्यों कहता है ? (2)
उत्तर :
कवि मन में व्याप्त ऊब और खीझ को तोड़ने की बात इसलिए कहता है क्योंकि मन के भीतर ऊब (उकताहट), खीझ (झुंझलाहट) सुजन में बाधक होती है। कवि सृजन का आकांक्षी है, इसलिए कवि सृजन के दौरान और ऊब को तोड़ने की बात करता है।
(ग) विद्यापति रचित ‘पद’ के आधार पर लिखिए कि श्रीकृष्ण के वियोग में प्राकृतिक उपादानों को देखकर राधा क्या करती है ? (2)
उत्तर :
श्रीकृष्ण के वियोग में राधा की विरह व्यथा और अधिक तीव्र हो जाती है। वह प्राकृतिक उपादानों जैसे फूलों का वन, कोयल और भैवरों को देखकर अपनी आँखें और कान बन्द कर लेती है क्योंकि उसे लगता है कि प्राकृतिक उपादान उसकी पीड़ा को और अधिक बढ़ा रहे हैं।
प्रश्न 9.
निम्नलिखित में से किसी एक काव्यांश की सप्रसंग व्याख्या लगभग 100 शब्दों में कीजिए- (6 × 1 = 6)
(क) यह जन है – गाता गीत जिनें फिर और कौन गाएगा ?
पनद्डुब्बा – ये मोती सच्चे फिर कौन कृती लाएगा ?
यह समिधा – ऐसी आग हठीला बिरला सुलगाएगा।
यह अद्वितीय – यह मेरा – यहु में स्वयं विसर्जित यह दीप, अकेला, स्नेह भरा
है गर्व भरा मदमाता, पर इसको भी पंक्ति को दे दो। (6)
उत्तर :
सन्दर्भ – प्रस्तुत पद्यांश ‘यह दीप अकेला’ कविता से अवतरित है जिसके रचयिता सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन अज़ेय हैं।
प्रसंग – इस कविता में कवि ने अपने दृढ़ विश्वास के माध्यम से ऊपर उठने की बात बताई है।
व्याख्या – कवि ही ऐसा व्यक्ति है जो नस-नस गीतों का सृजन कर सकता है। कोई साधारण व्यक्ति काव्य की रचना भली-भाँति नहीं कर सकता है। अपने रचनात्मक कार्य से वह सच्चे मोती चुनकर ला सकता है। किसी साधारण व्यक्ति के लिए यह कार्य सम्भव न होगा। कवि कहता है कि ऐसा कौन व्यक्ति है जो सात्विक मोती को दूँद पाएगा। यह जलती हुई एक समिधा (लकड़ी) है जो अन्य समिधाओं से अद्वितीय है। इसके जैसा कोई अन्य नहीं है। यह स्वयं की भावना सामाजिक कार्यों में विसर्जित हो जाती है। यह दीप अकेला है लेकिन स्नेह से परिपूर्ण है। गर्व से भरा है। इसके बाबजूद भी उसे इस पंक्ति में शामिल कर लो।
विशेष :
- कवि ने व्यक्तिगत सत्य को सामाजिक सत्य के साथ जोड़ने का प्रयास किया है।
- रूपक अलंकार विद्यमान है।
- भाषा खड़ी बोली हिन्दी है।
अथवा
(ख) सियरि अगिनि बिरहिनि हिय जारा।
सुलगि सुलगि दगधे भै छरा॥
यह दुःख दगध न जानै कंतू।
जोबन जनम करै भसमंतू॥।
पिय सौं कहेहु संदिसड़ा, ऐ भँवरा ऐ काग।
सो धनि बिरहें जरि मुई, तेहिक धुआँ हम लाग॥ 6
उत्तर :
सन्दर्भ – प्रस्तुत पंक्तियाँ ‘नागमती वियोग खंड’ के अन्तर्गत ‘बारहमासा’ से अवतरित हैं जिसके रचयिता मलिक मुहम्मद जायसी हैं।
प्रसंग – नागमती के विरह का वर्णन किया है।
व्याख्या – नागमती कहती है कि शीत से बचने के लिए जो अग्नि जलाई जा रही है, उससे उनका हुदय जल रहा है। यह अग्नि सुलग-सुलग कर उनके तन को जला रहा है। उनके इस तरह से जलने के दु;ख को कोई नहीं समझ पा रहा है। इस अग्नि ने उनके इस यौवन को भस्म कर दिया है। नागमती भाँरा और काग से कहती है कि तुम दोनों उनके पति को यह सन्देश देना कि उनकी पत्नी विरह की अग्नि में जल कर मर रही है। उसी अग्नि से जो धुआँ निकल रहा है, उसी से हमारा शरीर काला हो गया है।
विशेष-
- भैरि और कौए के माध्यम से अपनी बात अपने पति तक पहुँचाना।
- विरह की तीव्रता का वर्णन किया है।
- चौपाई और दोहा छन्द है।
- भाषा अवधी है।
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प्रश्न 10.
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उस पर आधारित दिए गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए- (1 × 5 = 5)
यह जो मेरे सामने कुटज का लहराता पौधा खड़ा है वह नाम और रूप दोनों में अपनी अपराजेय शक्ति की घोषणा कर रहा है। इसलिए यह इतना आकर्षक है। नाम है कि हज़ारों वर्ष से जीता चला आ रहा है। कितने नाम आए और गए। दुनिया उनको भूल गई, वे दुनिया को भूल गए। मगर कुटज है कि संस्कृत की निरंतर स्फीयमान शब्दराशि में जो जमके बैठा, सो बैठा ही है। और रूप की तो बात ही क्या है। बलिहारी है इस मादक शोभा की। चारों ओर कुषित यमराज के दारुण नि:श्वास के समान धधकती लू में यह हरा भी है और भरा भी है, दुर्जन के चित्त से भी अधिक कठोर पाषाण की कारा में रुद्ध अज्ञात जलस्रोत से बरबस रस खींचकर सरस बना हुआ है और मूर्ख के मस्तिष्क से भी अधिक सूने गिरि कांतार में भी ऐसा मस्त बना है कि ईष्या होती है। कितनी कठिन जीवनी-शक्ति है। प्राण ही प्राण को पुलकित करता है, जीवनी-शक्ति ही जीवनी-शक्ति को प्रेरणा देती है।
(i) कुटज के आकर्षक होने का प्रमुख कारण ………. है। (1)
(क) उसका नाम
(ख) उसका रूप-सौँदर्य
(ग) उसकी मादक शोभा
(घ) उसकी जिजीविषा
उत्तर :
विकल्प (घ) सही है।
व्याख्या-कुटज के आकर्षक होने का प्रमुख्व कारण उसकी जिजीविषा है।
(ii) कुटज हरा-भरा बना हुआ है- (1)
(क) वायुमंडल से रस प्राप्त कर
(ख) चट्टानों की छाती से रस खींचकर
(ग) आकाश से बरसने वाली जलराशि प्राप्त कर
(घ) पर्वतों पर बहने वाली नदियों से जल प्राप्त कर
उत्तर :
विकल्प (ख) सही है।
(iii) निम्नलिखित कथन और कारण पर विचार कीजिए और सर्वाधिक उचित विकल्प चुनकर लिखिए- (1)
कथन : गर्मी से जलती, तपती चट्टानों के बीच भी कुटज प्रसन्नतापूर्वक जी रहा है।
कारण : उसने संघर्ष किया और जीवन के कुरक्षेत्र से विजयी होकर निकला।
(क) कथन तथा कारण दोनों गलत हैं।
(ख) कथन ग़लत है, किंतु कथन सही है।
(ग) कथन तथा कारण दोनों सही हैं, किंतु कारण, कथन की सही व्याख्या नहीं करता है।
(घ) कथन तथा कारण दोनों सही हैं तथा कारण, कथन की सही व्याख्या करता है।
उत्तर :
विकल्प (क) सही है।
(iv) ‘जीवनी-शक्ति ही जीवनी-शक्ति को प्रेरणा देती है।’ – पंक्ति का आशय …….. है। (1)
(क) संघर्ष-शक्ति ही मनुष्य को जीवनी-शक्ति प्रदान करती है।
(ख) जीने की इच्छा ही मनुष्य को भयभीत न होने की शक्ति प्रदान करती है।
(ग) जीने की इच्छा ही मुनष्य को संघर्ष करने की शक्ति प्रदान करती है।
(घ) जीवन शक्ति ही मनुष्य को मृत्यु से लड़ने की शक्ति प्रदान करती है।
उत्तर :
विकल्प (ग) सही है।
व्याख्या-उपर्युक्त पंक्ति से आशय यह है कि जीने की इच्छा ही मनुष्य को विभिन्न परिस्थितियों में संघर्ष करने की शक्ति देती है।
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(v) ‘कितनी कठिन जीवनी – शक्ति है। प्राण ही प्राण को पुलकित करता है, जीवनी शक्ति ही जीवनी- शक्ति को प्रेरणा देती है। पंक्ति में लेखक ने किसके विषय में बात की है। (1)
(क) कुटज
(ख) कमल
(ग) पर्वत
(घ) नदी
उत्तर :
विकल्प (घ) सही है।
प्रश्न 11.
निम्नलिखित तीन प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 40 शब्दों में दीजिए- (2 × 2 = 4)
(क) ‘अपनी आँखों से देखी है चीर-हरण लीला’ – ‘संवदिया’ कहानी से उद्धत इस पंक्ति में किस लीला की बात हो रही है ? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
‘अपनी आँखों से देखी है चीर-हरण लीला’ पंक्ति से आशय यह है-
- बड़े भैया की मृत्यु के बाद छोटे भाइयों द्वारा संपत्ति का बँटवारा किया गया था।
- बड़ी बहुरिया के शरीर पर धारण किए जाने वाले आभूषण के साथ-साथ बनारसी साड़ी तक के भी टुकड़े-टुकड़े करके बँटवारा किया गया।
(ख) ‘शेर’ कहानी के संदर्भ में ‘सींग निकलना’ का अर्थ स्पष्ट करते हुए लिखिए कि लेखक शहर से जंगल की ओर क्यों भागा ? (2)
उत्तर :
‘शेर’ कहानी के सन्दूर्भ में ‘सींग निकलना’ का अर्थ हैव्यवस्था से अलग रहना अर्थात् उनकी बनी बनाई लीक से अलग सोचना और चलना। लेखक अपने समाज की व्यवस्था से दुःखी था क्योंकि वहाँ केवल स्वार्थ का बोलबाला था।
(ग) ‘दूसरा देवदास’ कहानी के संदर्भ में लिखिए कि ‘हर की पौड़ी’ पर, मंदिर में होने वाले खर्च पर, भक्तों के चेहरे पर कोई मलाल क्यों नहीं था ? (2)
उत्तर :
जो खर्च अपने और अपनों की मंगलकामना के लिए किए जाते हैं वे कष्टदाई नहीं लगते हैं हर की पौड़ी पर आने वाले भक्त भी अपने और अपनों की मंगलकामना के लिए वहाँ पूजा-अर्चना और चढ़ावे के रूप में धन खर्च करते हैं इसलिए उन्हें इस खर्च पर कोई मलाल नहीं होता है। उन्हें ईश्वर के प्रति श्रद्धा भाव से किए गए खर्च सुखद लगते हैं।
प्रश्न 12.
निम्नलिखित गद्यांशों को ध्यानपूर्वक पढ़कर किसी एक गद्यांश की सप्रसंग व्याख्या लगभग 100 शब्दों में कीजिए- (6 × 1 = 6)
(क) स्वातंत्योत्तर भारत की सबसे बड़ी ट्रेजेडी यह नही है कि शासक वर्ग ने औद्योगीकरण का मार्ग चुना, ट्रेजेडी यह रही है कि पश्चिम की देखादेखी और नकल में योजनाएँ बनाते समय-प्रकृति, मनुष्य और संस्कृति के बीच का नाजुक, संतुलन किस तरह नष्ट होने से बचाया जा सकता है – इस ओर हमारे पश्चिम-शिक्षित सत्ताधारियों का ध्यान कभी नहीं गया। हम बिना पश्चिम को मॉडल बनाए, अपनी शर्तों और मर्यादाओं के आधार पर, औँ्योगिक विकास का भारतीय स्वरूप निर्धारित कर सकते हैं, कभी इसका ख़याल भी हमारे शासकों को आया हो, ऐसा नहीं जान पड़ता। (6)
उत्तर :
सन्दर्भ – प्रस्तुत गद्यांश ‘जहाँ वापसी नहीं’ पाठ से अवतरित है जिसके लेखक निर्मल शर्मां।
प्रसंग – औँयोगीकरण के उपरान्त बिगड़ते प्राकृतिक सन्तुलन के विषय में बताया गया है।
व्याख्या – लेखक बताता है कि स्वाततेत्र्रयोत्तर भारत की सबसे बड़ी ट्रैजेडी यह है कि वह पश्चिम की देखादेखी और नकल में योजनाओं को बनाती है जिससे प्रकृति मनुष्य और संस्कृति के मध्य का नाजुक सन्तुलन नष्ट हो रहा है। पश्चिम की जलवायु और भारत की जलवायु में काफ़ी अन्तर है। कोई भी योजना बनाई जाए तो उस देश की जलवायु को ध्यान में रखना चाहिए। लेखक बताता है कि इस ओर हमारे पश्चिम-शिक्षित सत्ताधारियों का ध्यान कभी नहीं गया। हम बिना पश्चिम का मॉडल बनाए, अपनी शर्तो और मर्यादाओं के आधार पर भी औद्योगिक विकास का भारतीय स्वरूप निर्धारित कर सकते हैं। इस बारे में हमारे शासकों को कभी ख्याल तक नहीं आया।
विशेष-
- खड़ी बोली हिन्दी भाषा का प्रयोग किया है।
- लेखक ने बताया है कि पश्चिमी योजनाओं के अनुकरण से प्रकृति, मनुष्य और संस्कृति के मध्य सन्तुलन बिगड़ रहा है।
अथवा
(ख) आप कह सकते हैं कि जन्मभर के साथी की चुनावट मिट्टी के ढेलों पर बेड़ना कैसी बुद्धिमानी है! अपनी आँखों में जगह देखकर, अपने हाथ से चुने हुए मट्टी के डगलों पर भरोसा करना क्यों बुरा है और लाखों-करोड़ों कोस दूर बैठे बड़े-बड़े मट्टी और आग के ठेलों-मंगल ओर शनैश्चर और बृहस्पति-की कल्पित चाल के कल्पित हिसाब का भरोसा करना क्यों अच्छा है, यह मैं क्या कह सकता हूँ ? बकौल वात्स्यायन के, आज का कबूतर अच्छा है कल के मोर से, आज का पैसा अच्छु है कल के मोहर से। आँखों देखा ढेला अच्छा ही होना चाहिए लाखों कोस की तेज़ पिण्ड से। (6)
उत्तर :
सन्दर्भ – प्रस्तुत गद्यांश ‘सुमिरिनी के मनके (ढेले चुन लो) पाठ से अवतरित है, जिसके लेखक पं. चन्द्रधर शर्मा गुलेरी हैं। प्रसंग-इस गद्यांश के माध्यम से लेखक ने आडम्बरों पर चोट की है।
व्याख्या – लेखक कहता है कि जन्मभर के साथी की चुनावट मिट्टी के ढेलों पर छोड़ना कोई बुद्धिमानी नह़ं है। अपने हाथ से चुने गए मिट्टी के डगलों पर भरोसा करना उचित नहीं है। आप यह मानते हैं कि यही स्थिति ग्रह चालों की है। हम लोग मिट्टी और आग के ढेलों-मंगल, शनीचर ओर बृहस्पति की चाल की कल्पना करके अपने भाग्य का मिलान उससे करते हैं। यह कोई अच्छी स्थिति नहीं है। कर्म पर भरोसा करना चाहिए। काल्पनिक बातों के आधार पर जीवन व्यर्थ नहीं करना चाहिए। लेखक कहता है कि मैं आज का कबूतर कल के मोर से अच्छु मानता हूँ। कल के मोहर से आज का पैसा अच्छा है। आँखों देखी चीज़ पर ही विश्वास करना चाहिए न कि लाखों कोस की तेज़ पिण्ड पर।
विशेष-
- व्यक्ति को कर्मशील बनाने की बात कही है।
- कल्पना के स्थान पर आँखों देखा साक्ष्य महत्त्वपूर्ण माना गया है।
- भाषा खड़ीबोली हिन्दी है।
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प्रश्न 13.
निम्नलिखित तीन प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 100 शब्दों में दीजिए- (5 × 2 = 10)
(क) ‘ये सदानीरा नदियाँ अब मालवा के गालों के आँसू भी नहीं बहा सकर्ती।’ इस कथन के आधार पर लिखिए कि वर्तमान समय में देश के अन्य भागों में नदियों की क्या स्थिति हैं ? (5)
उत्तर :
‘ये सदानीरा नदियाँ अब मालवा के गालों के आँसू भी नहीं बहा सकतीं। इस कथन से यह आशय है कि देश के अन्य भागों में भी नदियों की स्थिति मालवा के समान हो गई है। नदियों में केवल चौमासे में ही पानी आता है। कुछ नदियाँ तो ऐसी हैं जो विलुप्त होने की कगार पर आ गई हैं। शहरी और रासायनिक कचरे की वजह से सभी नदियों का जल प्रदूषित हो गया है जिससे नदियों में रहने वाले जीवों की भी मृत्यु हो रही है। वायु प्रदूषण भी अधिक हो रहा है। पहाड़ों से मैदानों तक पहुँचते-पहुँचते नदियों का जल विषैला हो रहा है। इस प्रकार वर्तमान समय में देश के अन्य भागों में नदियों की स्थिति सामान्य नहीं है।
(ख) ‘सूरदास की झोपड़ी’ पाठ से ली गई पंक्ति – “खेल में रोना कैसा ?” – में किस खेल की बात हो रही है ? जीवन में मिलने वाली असफलताओं के संदर्भ में इससे क्या प्रेरणा मिलती है ? (10)
उत्तर :
‘खेल में रोना’ – यहाँ जीवन रूपी खेल की बात हो रही है क्योंकि जीवन में व्यक्ति को सफलता और असफलता मिलती रहती है जो उनके सुख और दुःख की स्थिति का निर्धारण करती है। व्यक्ति को असफलता से कभी नहीं घबराना चाहिए। उसे सकारात्मकता के साथ चुनौतियों का सामना करना चाहिए और धैर्यपूर्वक प्रत्येक कार्य करना चाहिए। व्यक्ति अपनी दृढ़-इच्छशक्ति के माध्यम से ही किसी भी कार्य को पूरा कर सकता है। यदि उनकी दृढ़-इच्छर्शक्ति मज़बूत न होगी तो वे अपने कार्य को पूरा करने में असफल रहेगा। इसलिए व्यक्ति को असफलता से सबक लेकर सफलता की ओर अग्रसर होना चाहिए।
(ग) विश्वनाथ त्रिपाठी की रचनाओं के विषय में अपने विचार व्यक्त कीजिए। (5)
उत्तर :
उनकी रचनाओं में प्रारंभिक अवधी, हिन्दी आलोचना हिन्दी साहित्य का संक्षिप्त इतिहास, लोकवादी तुलसीदास, मीरा का काव्य, देश के इस दौर में, कुछ कहानियाँ-कुछ विचार प्रमुख आलोचना और इतिहास सम्बन्धी ग्रंथ हैं। पेड़ का हाथ, जैसा कह सका प्रमुख कविता-संग्रह ग्रंथ हैं। उन्होंने आरम्भ में आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी के साथ अद्दहमाण (अब्दुल रहमान) के अपंभ्रश काव्य संदेश रासक का संपादन किया तथा कविताएँ 1963 , कविताएँ 1964 कविताएँ 1965 अजित कुमार के साथ व हिन्दी के प्रहरी रामविलास शर्मा अरुण प्रकाश के साथ संपादित कीं। हाल ही में उनकी एक और पुस्तक व्योमकेश दरवेश प्रकाशित हुई है जो हिन्दी के सुप्रसिद्ध आलोचक एवं साहित्यकार आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी पर केंद्रित है।