Students must start practicing the questions from CBSE Sample Papers for Class 12 Hindi Elective with Solutions Set 2 are designed as per the revised syllabus.
CBSE Sample Papers for Class 12 Hindi Elective Set 2 with Solutions
निर्धारित समय : 3 घंटे
पूर्णांक : 80
सामान्य निर्देश :
- इस प्रश्न पत्र तीन खण्डों – खंड ‘क’, ‘ख’ और ‘ग’।
- दिए गए निर्देशों का पालन करते हुए प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
- तीनों खण्डों के कुल 13 प्रश्न हैं। तीनों खण्डों के प्रश्नों के उत्तर अनिवार्य है।
- यथासंभव तीनों खण्डों के प्रश्नों के उत्तर क्रम से लिखिए।
खण्ड – ‘क’
(अपठित बोध) (18 अंक)
प्रश्न 1.
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर दीजिए – (10)
विश्व की आबादी बढ़ने के साथ ही कृषि योग्य भूमि की कमी एक बड़ी समस्या बनकर उभरी है। ऐसे में लोगों को कृषि के संदर्भ में अधिक रचनात्मकता और कुशलता अर्जित करने की आवश्यकता है। इसके तहत कम भूमि के उपयोग से ही फ़सल की उपज और उत्पादकता को बढ़ाने पर विशेष जोर देना होगा। कृषि सुधार के कई बड़े प्रयासों के बावजूद यह क्षेत्र आज भी अनेक समस्याओं से जूझ रहा है। इस संदर्भ में जलवायु परिवर्तन और खाद्य असुरक्षा जैसी समस्याओं के बीच कृत्रिम बुद्धिमत्ता (ए.आई.) उत्पादकता को बढ़ाने में सहायक हो सकती है।
कृत्रिम बुद्धिमता किसी कंप्यूटर या मशीन द्वारा मानव मस्तिष्क के सामर्थ्य की नकल करने की क्षमता है। भारत में मृदा के प्रकार, जलवायु और स्थलाकृति विविधता के कारण यहाँ से प्राप्त डेटा कृषि के लिए अत्याधुनिक ए.आई. उपकरण तया अन्य कृषि समाधान विकसित करने में सहायक सिद्ध होगा। कृषि के विभिन्न घटकों में प्रतिदिन सैकड़ों और हजा़ प्रकार के डेटा (जैसे मृदा, उर्वरकों की प्रभाविकता आदि) उपलब्ध होते हैं।
ए.आई. की मदद से किसान मौसम, तापमान, पानी के उपयोग या अपने खेत की मिट्टी का विश्लेषण कर, समस्याओं को पहचानकर बेहतर निर्णय ले सकेंगे। ए.आई. सेंसर खरपतवारों की पहचान कर सकते हैं और फिर उसकी पहचान के आधार पर उपयुक्त खरपतवारनाशक का चुनाव कर सटीक मात्रा में खरपतवारनाशक का छिड़काव कर सकते हैं। जिससे कृषि क्षेत्र में स्वास्थ्य के लिए हानिकारक विषाक्त पदार्थों के अनावश्यक प्रयोग को सीमित करने में सहायता मिलती है।
कृषि आय में गिरावट के कारण इस क्षेत्र को श्रमिकों द्वारा बहुत कम प्राथमिकता दी जाती है। श्रमिकों की इस कमी को दूर करने में ए.आई. कृषि बॉट्स एक उपयुक्त समाधान हो सकते हैं। किसानों द्वारा कृषि से जुड़े परामर्श के लिए ए.आई. की सहायता ली जा रही है।
हाल ही में कृषि क्षेत्र में हुए बड़े सुधारों के परिणामस्वरूप भविष्य में कृषि क्षेत्र में प्रौद्योगिकी के प्रसार की भी संभावनाएँ हैं। इन प्रयासों के माध्यम से कृषि में ए.आई. को अपनाए जाने की पहलों को बढ़वा मिलेगा।
(i) इस गद्यांश का वर्यं विषय ……………. है (1)
उत्तर देने के लिए सर्वधिक उपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए।
(क) कृषि क्षेत्र में बढ़ती संभावनाएँ
(ख) कृषि क्षेत्र से जुड़ी समस्याएँ
(ग) कृत्रिम वुद्धिमत्ता : एक वरदान
(घ) कृषि क्षेत्र और कृत्रिम बाँद्धिकता
उत्तर :
विकल्प (घ) सही है।
व्याख्या-इस गद्यांश का वर्ण्य विषय कृषि क्षेत्र और कृत्रिम बौद्धिकता है।
(ii) निम्नलिखित कथन (A) तथा कारण (R) को ध्यानपूर्वक पढ़िए। उसके बाद दिए गए विकल्प में से कोई एक सही विकल्प चुनकर लिखिए।
कथन (A) : कृषि आय में गिरावट के कारण इस क्षेत्र को श्रमिकों द्वारा बहुत कम प्राथमिकता दी जाती है।
कारण (R) : श्रमिकों की इस कमी को दूर करने में ए. आई. कृषि बॉडस एक उपयुक्त समाधन हो सकता हैं।
(क) कथन (A) और कारण (R) दोनों ही सही है।
(ख) कारण (A) और कारण (R) दोनों ही गलत है।
(ग) कथन (A) सही है और कारण (R) गलत है।
(घ) कथन (A) गलत है किंतु कारण (R) सही है। (1)
उत्तर :
विकल्प (क) सही है।
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(iii) विश्व की बढ़ती आबादी को खाद्य सुरक्षा प्रदान करने के लिए आवश्यक ……….. है। (1)
(क) कम लागत वाली फुसलों का उत्पादन बढ़ाना
(ख) कृषि क्षेत्र में श्रम-बल को बढ़ावा देना
(ग) कृषि क्षेत्र में अधिक रचनात्मकता और कुशलता अर्जित करना
(घ) मृदा की उर्वरता को बद्नाने के लिए उर्वरकों का प्रयोग करना
उत्तर :
विकल्प (ग) सही है।
(iv) मृदा की उर्वरता का क्या अर्थ है ? (1)
उत्तर :
मृदा की उर्वरता का अर्थ मिट्टी का उपजाऊपन है।
(v) भारतीय कृषि, कृषि वैज्ञानिकों के लिए कृषि समाधान सम्बन्धी ए.आई़. उपकरण विकसित करने में सहायक क्यों है ? (2)
उत्तर :
भारतीय कृषि, कृषि वैज्ञानिकों के लिए कृषि समाधान सम्बन्धी ए. आई. उपकरण विकसित करने में सहायक इसलिए हैं क्योंकि वे कृषि सम्बन्धी विशाल संसाधनों को आसानी से उपलब्ध करा देते हैं।
(vi) कृषि क्षेत्र में कार्य बल की कमी क्यों है ? (2)
उत्तर :
कृषि क्षेत्र में होने वाली कम आय के कारण कृषि क्षेत्र में कार्य बल की कमी है।
(vii) गद्यांश के आधार पर कृषि क्षेत्र में अधिक सटीकता लाने के लिए क्या आवश्यक है ? (2)
उत्तर :
गद्यांश के आधार पर कृषि क्षेत्र में अधिक सटीकता लाने के लिए कृषि क्षेत्र में ए. आई. तकनीक का प्रयोग में लाना आवश्यक है।
प्रश्न 2.
निम्नलिखित पद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए प्रश्नों के सर्वांधिक उपयुक्त उत्तर दीजिए – (8)
संशय-
इस भाव को मिटा दो
रोशनी जल उठेगी
तुममें निर्भय।
पीठ पर रखा छुरा
लगेगा प्रोत्साहन का स्पर्श
और तुम बिजली की तरह
आगे बढ़ जाओगे अक्षय।
उस आँख में देखो अपनी आँख
लौ तेज़ होगी बनेगी एक दृष्टिलय
उस हाथ में रख दो अपना हाथ
सेतु निर्मित होगा मिटेगा प्रलय।
विपत्ति में तुम अकेले नहीं हो,
असंख्य सोते कुलबुलाते हैं
चट्टानों में
मिलकर एक धारा बनाने को,
इसे पहचचानो
राह निकलेगी निश्चय।
(i) पद्यांश का मुख्य भाव क्या है ? (1)
(क) संशय की स्थिति में आगे की राह नहीं मिलेगी।
(ख) संशय रहित होने पर ही आगे बढ़ने की राह निकलेगी।
(ग) संदेह की स्थिति में विनाश की ओर कदम बढ़ेंगे।
(घ) पौरुष का आश्रय कभी निरर्थक नहीं जाएगा।
उत्तर :
विकल्प (ख) सही है।
व्याख्या-संशय रहित होने पर ही आगे बढ़ने की राह निकलेगी यही पद्यांश का मुख्य भाव है।
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(ii) संदेह की स्थिति नहीं रहने पर- (1)
(क) व्यक्ति भयाक्रांत रहता है।
(ख) उसके सामने चतुर्दिक अंधकार होता है।
(ग) प्रकाश की किरणें जल उठती हैं।
(घ) व्यक्ति दुःखी रहता है।
उत्तर :
विकल्प (ग) सही है।
(iii) कविता में कवि ने ‘प्रोत्साहन का स्पर्श शब्द का प्रयोग किया है। प्रोत्साहन का स्पर्श का अर्थ बताने वाले कथन है/है- (1)
I. उत्साहहीन हो जाने की शंका
II. मन में उदासीनता का झाव
III. आगे बढ़ने हेतु प्रेरणा
(क) (II) और (III)
(ख) केवल (II)
(ग) केवल (III)
(घ) केवल (I)
उत्तर :
विकल्प (ग) सही है।
(iv) कवि ने किस हाथ में अपऩा हाथ रखने को कहा है ? (1)
उत्तर :
कवि ने प्रेरणा देने वाले हाथ में अपना हाथ रखने को कहा है।
(v) दो आँखों की दृष्टि मिलने पर क्या स्थिति होगी ? (2)
उत्तर :
दो आँखों की दृष्टि मिलने पर समन्वित शक्ति से प्रकाश की तीव्रता की स्थिति होगी।
(vi) ‘उस आँख’ का क्या तात्पर्य है ? (2)
उत्तर :
‘उस औँख’ का तात्पर्य अदृश्य प्रेरणा शक्ति से है अर्थात बह प्रेरणा शक्ति जो दिखाई नहीं देती है ।
खण्ड-‘ख’
(अभिव्यक्ति और माध्यम पुस्तक के आधार पर) (22 अंक)
प्रश्न 3.
निम्नलिखित प्रश्नों में ध्यानपूर्वक पढ़कर सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर लिखिए- [1 + 2 + 2 = 5]
(क) महेश को अंग्रेज़ी भाषा के शब्दों का अर्थ समझने में कठिनाई का अनुभव होता है। रुक-रुक कर अपनी पंसद के समाचार जानने के लिए संचार के साधनों में से उसके लिए कौन-सा साधन उपयुक्त रहेगा ? (शब्द सीमा – लगभग 20 शब्द) (1)
उत्तर :
अपनी पसंद के समाचार जानने के लिए संचार के साधनों में से उसके लिए समाचार-पत्र उपयुक्त रहेगा।
(ख) समाचार-पत्रों को लंबे समय तक सुरक्षित रखने और उसे संदर्भ की तरह इस्तेमाल करने का क्या कारण है ? (शब्द सीमा – लगभग 40 शब्द) (2)
उत्तर :
समाचार-पत्रों को लम्बे समय तक सुरक्षित रखने और उसे संदर्भ की तरह इस्तेमाल करने का कारण उसके स्थायित्व का गुण है। इसमें तथ्यों को आधार बनाया जाता है।
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(ग) समाचार माध्यमों में काम करने वाले पत्रकार अपने पाठकों तथा श्रोताओं तक सूचनाएँ पहुँचाने के लिए लेखक के विविध रूपों का इस्तेमाल करते हैं, वह क्या कहलाता है ? (शब्द सीमा – लगभग 40 शब्द) (2)
उत्तर :
पत्रकार श्रोताओं तक सूचनाएँ पहुँचाने के लिए लेखन के विविध रूपों का इस्तेमाल करते हैं। वह पत्रकारीय लेखन कहलाता है। यह वस्तुनिष्ठ होता है। इसमें तथ्यों पर ज़ोर दिया जाता है।
जनसंचार और सृजनात्मक लेखन पर आधारित प्रश्न
प्रश्न 4.
निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 60 शब्दों में दीजिए – (3 × 2 = 6)
(क) पत्रकारीय लेखन के किस रूप को पाठकों का अपना स्तंभ कहा जा सकता है और क्यों ? (3)
उत्तर :
पत्रकारीय लेखन में सम्पादक के नाम पत्र को पाठकों का अपना स्तम्भ कहा जा सकता है क्योंकि पाठकों द्वारा विभिन्न मुद्दों पर अपनी राय को व्यक्त करने के लिए जन समस्याओं को उठाया जाता है तथा उन समस्याओं को उठकर जनमत को प्रतिबिम्बत किया जाता है। पत्रकारीय लेखन नए लेखकों के लिए लेखन की शुरुआत करने का एक अच्छ अवसर होता है, इसलिए इसे पाठकों का अपना स्तम्भ कहना उचित है।
(ख) तकनीकी प्रगति के बावज्यूद हिन्दी की वेब पत्रकारिता अपने शैशवकाल में ही क्यों हैं ? इसकी प्रगति के लिए क्या आवश्यक है ? (3)
उत्तर :
तकनीकी प्रगति के बाबजूद हिन्दी की वेब पत्रकारिता अपने शैशवकाल में ही है क्योंकि हिन्दी कें फॉन्ट सहज रूप से उपलब्ध नहीं होते हैं। हिन्दी का अभी अपना कोई ‘की-बोर्ड’ नहीं है। हिन्दी का डायनमिक (सर्वमान्य) फॉन्ट भी नहीं है। इसकी प्रगति के लिए यह आवश्यक कदम उठने चाहिए-
- हिन्दी फॉन्ट को सहजता से उपलब्ध कराया जाना चाहिए।
- हिन्दी के ‘की-बोर्ड’ का मानकीकरण हो।
(ग) टेलीविजन के विषय में अपने विचार प्रस्तुत कीजिए। (3)
प्रश्न 5.
निम्नलिखित तीन विषयों में से किसी एक विषय पर लगभग 100 शब्दों में रचनात्मक लेख लिखिए- [5 × 1=5]
(क) भीड़ भरी बस में यात्रा का अनुभव (5)
उत्तर :
विषयवस्तु : 3 अंक
भाषा : 1 अंक
प्रस्तुति : 1 अंक
भीड़ भरी बस में यात्रा का अनुभव
हम सभी को बिहार परीक्षा देने के लिए अगले ही दिन घर से निकलना था तो मैंने बस की टिकट करा ली क्योंकि ट्रेन में सीट उपलब्ध न थी। पापा मुझ़े छेड़ने के लिए बस स्टैण्ड तक आए। बस धीरे-धीरे भरते लगी। कुछ समय के पश्चात् ऐसी स्थिति हो गई थी मानों कि साँस ही न ली जा रही हो। गर्मी के कारण और भीड़ की वजह से हालत बरी तरह ख़राब हो गई। थोड़ी-थोड़ी देर पर मुझे उल्टी आनी शुरू हो गई। लखनऊ पहुँचते ही मँने बस बदलने का निर्णय लिया क्योंकि वह बस कुछ देर के लिए लखनऊ रुकी थी। मँने वहाँ पता किया और मुझे वहाँ से बिहार तक के लिए ट्रेन की टिकट मिल गई। तब जाकर मुझ़े थोड़ी राहत महसूस हुई। ट्रेन 1 घण्टे के बाद ट्रेक पर आ गई, जिससे सकुशल मैं समय पर परीक्षा देने के लिए अपने गंतव्य तक पहुँच गई।
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(ख) अंतर्राष्ट्रीय मंच पर भारत का बढ़ता कद (5)
उत्तर :
अन्तर्राष्ट्रीय मंच पर भारत का बढ़ता कद
अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत का कद निरन्तर बढ़ता जा रहा है क्योंकि भारत निरन्तर प्रग्गति कर रहा है। हाल ही के वर्षो में भारत ने जी 20 शिखर सम्मेलन में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया है। जलवायु परिवर्तन को आधार बनाकर पेरिस समझँते पर हस्ताक्षर किए है। वैखिक शांति दे लिए भी अपना समर्थन दिया है। भारत की संस्कृति को सभी से परिचित कराया है। देश की आर्थिक स्थिति को सुदृढ करने के लिए कई समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। भारत, कृषि, निबान, औद्योगिक क्षेत्रा में प्रगति के पथ पर अग्रसर हो रहा है। अंतरिक्ष की तरफ भी अपने कदमों को मजबूत कर रहा है। इसरो द्वारा निरन्तर नई खोज को बढ़ावा मिल रहा है।
(ग) युद्ध ही अंतिम विकल्प नहीं (5)
उत्तर :
युद्व ही अंतिम विकल्प नहीं
किसी भी झगड़े को समाप्त करने दे लिए युद्ध ही अंतिम विकल्प नही होता है। युद्ध के कारण द्दे वल डिसी एक व्यक्ति को या शासक वर्ग को ही हानि नहीं पहुंचती बल्कि वहीं की आम जनता भी प्रभावित होती है। हाल ही में रूस और यूद्धे न के मध्य युद्ध हुआ क्योंकि रूस यूद्ध न को स्वयं में शामिल करना चाहता था। उस युद्ध का प्रभाव दोनों ही। देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़।। युद्ध कभी भी किसी का भला नहीं कर सकता, इसलिए युद्ध के स्थान पर सभी की भलाई के लिए समझौता कर लेना चाहिए जिससे आम जनता को कोई परेशानी न हो। युद्ध को अंतिम विकल्प दे रूप में कभी नहीं देखना चाहिए।
प्रश्न 6.
निम्नलिखित प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर तीन प्रश्नों में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 60 शब्दों में लिखिए- (3 × 2 = 6)
(क) ‘शब्दों से जुड़ना कविता की दुनिया में प्रवेश करना है।’ सिद्ध कीजिए। (3)
उत्तर :
शब्दों से जुड़ना कविता की दुनिया में प्रवेश करना है। इस कथन का तात्पर्य यह है कि –
- शब्दों से खोलना अर्थात कविता के माध्यम् से हम शब्दों से खेल सकते हैं।
- शब्दों कविता की अनजानी दुनिया का पहला एक उपकरण है।
- शब्दों से मेल जोल करना क़विता की पहली शर्त हेती है।
- शब्दों के भीतर छिपे अर्थों की परतों को भी खोला जाता है।
- शब्दों की तुकबंरी से छंद, लय और व्यवस्था की दुनिया में पहींच सकते हैं।
(ख) कहानी में संवादों की भूमिका स्पष्ट कीजिए। (3)
उत्तर :
कहानी में संवादों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। संवाद द्वारा कहानी के पात्रा को स्थापित किया जाता है तथा उसे विकसित भी किया जाता है। संवाद ही कहानी को गति प्रदान करते हैं। जो घटना या प्रतिकिया कहानीकार होते हुए नहीं दिखा सकता उसे संवाद हे माध्यम से सामने लाया जा सकता है। संबाद हे बिना पात्र की कल्पना भी मुशकिल है।
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(ग) नाटक में स्वीकार एवं अस्वीकार की अवधारणा से क्या तात्पर्य है ? (3)
उत्तर :
नाटक में स्वीकार से अधिक अस्वीकार की धारणा का अधिक महत्व है। जिस नाटक में असंतुष्टि, छटपटाहट, प्रतिरोध और अस्वीकार जैसे नकारात्मक तत्वों की जितनी ज्यादा उपस्थिति, वह नाटक उतना ही रोचक और प्रभावशाली होता है। किसी भी तात्कालिक बिचार व्यवस्था अथवा समस्याओं को यथास्थिति स्वीकार करने वाले नाटक अधिक लोकप्रिय नहीं होते हैं।
खण्ड-‘ग’
(पाठ्य पुस्तकों अंतरा, अंतराल के आधार पर) (40 अंक)
प्रश्न 7.
निम्नलिखित काव्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उस पर आधारित दिए गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए- [1 × 5 = 5]
इस शहर में धूल
धीरे-धीरे उड़ती है
धीरे-धीरे चलते हैं लोग
धीरे-धीरे बजते हैं घंटे
शाम धीरे-धीरे होती है
यह धीरे-धीरे होना
धीरे-धीरे होने की सामूहिक लय
दृढ़ता से बाँधे है समूचे शहर को
इस तरह कि कुछ भी गिरता नहीं है
कि हिलता नहीं है कुछ भी
कि जो चीज जहाँ थी
वहीं पर रखी है
कि गंगा वहीं है
कि वहीं पर बँधी है नाव
कि वर्हीं पर रखी है तुलसीदास की खड़ाऊँ सैकड़ों बरस से
(i) बनारस शहर में हर काम का ‘धीरे-धीरे’ होना दर्शाता _______ है। (1)
(क) पारंपरिक जीवन-शैली को
(ख) काम करने की धीमी गति को
(ग) वहाँ के लोगों की आलसी प्रवृत्ति को
(घ) आधुनिकता से बेख्नबर होने को
उत्तर :
विकल्प (क) सही है।
व्याख्या-बनारस शहर में हर काम का ‘धीरे-धीर’ होना पारंपरिक शैली को दर्शाता है।
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(ii) निम्नलिखित कथन कारण को ध्यानपूर्वक पढिए तथा उत्तर के लिए सही विकल्प का चयन कीजिए । (1)
कथन – कवि ने कहा है ‘ कि गंगा वहीं है।’
कारण – गंगा के प्रति आस्था और विश्वास पहले जैसा है।
(क) कथन गलत है, किंतु कारण सही है।
(ख) कथन और कारण दोनों गलत हैं।
(ग) कथन और कारण दोनों सही हैं। कारण कथन की सही व्याख्या है।
(घ) कथन सही है किंतु कारण कथन की सही व्याख्या नहीं है। (1)
उत्तर :
विकल्प (ग) सही है।
(iii) ‘कि वहीं बँधी है नाव’ – से अभिप्राय है- (1)
(क) गंगा के दूसरे तर पर जाने के लिए नाव का प्रयोग करते हैं।
(ख) गंगा सम्बन्धी परंपराएँ और मान्यताएँ उसी रूप में विद्यमान हैं।
(ग) घाटों के किनारे नाव बाँधने का स्थान वहीं है।
(घ) गंगा के घाटों में कोई बदलाव नहीं है।
उत्तर :
विकल्प (ख) सही है।
(iv) ‘तुलसीदास की खड़ाऊँ भी सैकड़ों वर्षों से वहीं रखी है’ – पंक्ति का भाव ______. (1)
(क) बनारस शहर में कोई किसी चीज़ को नहीं छूता।
(ख) मंदिर के वातावरण में कोई परिवर्तन नहीं है।
(ग) तुलसीदास के प्रति लोगों की श्रद्धा में कौई कमी नहीं है।
(घ) वहाँ का धार्मिक और ऐतिहासिक वातावरण वैसा ही बना हुआ है।
उत्तर :
विकल्प (घ) सही है।
(v) बनारस शहर में धरोहर के रूप में सुरक्षित है- (1)
कथन 1 – गंगा के किनारे घाटों पर बँधी नाव
कथन 2 – मंदिरों में रखी तुलसीदास की खड़ाऊँ
कथन 3 – प्राचीनता, आध्यात्मिकता, आस्था और विश्वास
(क) कथन 1 और 2
(ख) केवल कथन 1
(ग) केवल कथन 3
(घ) केवल कथन 2
उत्तर :
विकल्प (ग) सही है।
व्याख्या-बनारस शहर में धरोहर के रूप में प्राचीनता, आध्यात्मिकता, आस्था और विश्वास सुरक्षित है।
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प्रश्न 8.
निम्नलिखित तीन प्रश्नों में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 40 शब्दों में लिखिए- (2 × 2 = 4)
(क) ‘कार्नेलया का गीत’ से उद्धृत – ‘लहरें टकराती अनंत की – पाकर जहाँ किनारा’ – पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए। (2)
उत्तर :
‘लहरें टकराती अनंत की – पाकर जहाँ किनारा’ पंक्ति से का आशय है कि अनंत से आती हुई लहरों का यहाँ किनारा प्राप्त कर शांत हो जाना अर्थात् अनजानों को भी यहाँ आकर आश्रय मिल जाता है। इसमें कवि ने भारत की प्राकृतिक और सांस्कृतिक विशेषता का गुणगान किया है।
(ख) ‘सागर’ और ‘बूँद’ शब्द की प्रतीकात्मकता स्पष्ट करते हुए लिखिए कि ‘मैंने देखा, एक बूँद’ कविता में किसके महत्त्व को व्याख्यायित किया है ? (2)
उत्तर :
‘सागर’ को समाज के रूप में और बूँद को व्यक्ति के रूप में प्रतीकात्मक तौर पर स्पष्ट किया है। जीवन में प्रत्येक क्षण को महत्त्व दिया गया है। अनगिनत बूँदों से ही सागर का निर्माण हुआ है उसी प्रकार व्यक्तियों के समूह से समाज का निर्माण हुआ है।
(ग) ‘रहि चकि चित्रलिखी-सी’ पंक्ति के संदर्भ में राम के वियोग से माता कौशल्या की मनःस्थिति का वर्णन कीजिए। (2)
उत्तर :
राम वन-गमन का स्मरण करते हुई माता कौशल्या चित्रवत् हो जाती हैं। ‘रहि चकि चित्रलिखी-सी’ पंक्ति में माता कौशल्या के वात्सल्य-वियोग की पराकाष्ठा को दिखाया गया है। राम के वियोग में उनकी मन: स्थिति ठीक नहीं है।
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प्रश्न 9.
निम्नलिखित में से किसी एक काव्यांश की सप्रसंग व्याख्या लगभग 100 शब्दों में कीजिए- (6 × 1 = 6)
(क) जैसे बहन ‘दा’ कहती है
ऐसे किसी बँगले के किसी तरु (अशोक?) पर कोई चिड़िया कुऊकी
चलती सड़क के किनारे लाल बजरी पर चुरमुराए पाँव तले
ऊँचे तरुवर से गिरे
बडे-बड़े पियराए पत्ते
कोई छह बजे सुबह जैसे गरम पानी से नहाई हो-
खिली हुई हवा आई, फिरकी-सी आई, चली गई। (6)
उत्तर :
सन्दर्भ-प्रस्तुत पंक्तियाँ ‘वसंत आया’ से अवतरित हैं, जिसके रचयिता रघुवीर सहाय हैं।
प्रसंग-कवि ने मनुष्य के प्रकृति से टूटते रिश्तों के बारे में बताया है।
व्याख्या-कवि कहता है कि जिस प्रकार बहन अपने भाईयों से वर्तालाप करती हैं उसी स्नेहपूर्ण आवाज़ में किसी बंगले के अशोक के वृक्ष पर बैठी चिड़िया भी कूकती है। चलती हुई सड़क के किनारे लाल बजरी पर चुरमुराए पच्ते भी पाँव के तले आ जाते हैं। हवा भी ऐसी लगती है मानों कि सुबह छ: बजे गर्म पानी से नहा कर आई हो । गोल-गोल घूमती हुई फिरंकी जैसी चली आई है।
विशेष-
- आर्धुनिक जीवन-शैली पर तीखा व्यंग्य किया है।
- अनुप्रास अलंकार है।
- उपमा अलंकार है।
- भाषा सरल एवं सहज है।
अथवा
(ख) कुसुमति कानन हेरि कमलमुखि
मूदि रहए दु नयान।
कोकिल-कलरव, मधुकर-
धुनि, सुनि,
कर देई झाँपइ कान ॥ (6)
उत्तर :
सन्दर्भ – प्रस्तुत पद विद्यापति द्वारा रचित ‘पदावली’ से अवतरित है।
प्रसंग – कवि ने नायिका की विराहावस्था का चित्रण किया है। व्याख्या-नायिका कहती है कि हे कृष्ण! विकसित वन को देखकर कमल मुखी राधा अपने दोनों नेत्रों को बन्द कर लेती है। कोयल की मीठी कूक और भौरों कि मधुर आबाज़ को सुनकर भी वह अपने हार्थों से अपने कानों को बन्दु कर लेती है।
विशेष-
- अतिश्योक्ति अलंकार है।
- भाषा मैथिली है।
प्रश्न 10.
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उस पर आधारित दिए गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए- (1 × 5 = 5)
कुटज क्या केवल जी रहा है। वह दूसरे के द्वार पर भीख माँगने नही जाता, कोई निकट आ गया तो भय के मारे अधमरा नर्हीं हो जाता, नीति और धर्म का उपदेश नहीं देता फिरता, अपनी उन्नति के लिए अफ़सरों का जूता नहीं चाटता फिरता, दूसरों को अवमानित करने के लिए ग्रहों की खुशामद नहीं करता। आत्मोन्नति हेतु नीलम नहीं धारण करता, अंगूठियों की लड़ी नहीं पहनता, दाँत नहीं निपोरता, बगलें नहीं झाँकता। जीता है और शान से जीता है, काहे वास्ते, किस उद्देश्य से ? कोई नहीं जानता। मगर सुख बड़ी बात है। स्वार्थ के दायरे से बाहर की बात है। भीष्म पितामह की भाँति अवधूत की भाषा में कह रहा है ‘चाहे सुख हो या दुःख, प्रिय हो या अप्रिय’, जो मिल जाए उसे शान के साथ हुदय से बिल्कुल अपराजित होकर, सोल्लास ग्रहण करो। हार मत मानो।
(i) गद्यांश में लेखक ने उजागर ______ किया है। (1)
(क) कुटज की भिक्षावृत्ति को
(ख) कुटज के स्वाभिमान को
(ग) कुटज के स्वार्थ को
(घ) कुटज की चाटुकारिता को
उत्तर :
विकल्प (ख) सही है।
व्याख्या-गद्यांश में लेखक ने कुटज के स्वाभिमान को उजागर किया है।
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(ii) ‘अवधूत’ शब्द का अर्थ है- (1)
(क) धूनी रमाने वाला
(ख) धुआँ पीने वाला
(ग) विरक्त संन्यासी
(घ) सिद्ध महात्मा
उत्तर :
विकल्प (ग) सही है।
व्याख्या-‘अवद्यूत’ शब्द का अर्थ विरक्त संन्यासी है।
(iii) निम्नलिखित कथन और कारण पर विचार कीजिए और सर्वाधिक उचित विकल्प चुनकर लिखिए- (1)
कथन : जो मिल जाए उसे शान के साथ हदय से बिल्कुल अपराजित होकर, मोल्मास ग्रहण करो।
कारण : परिस्थिति से कभी हारना नर्हीं चाहिए।
(क) कथन ग़लत है, किंतु कथन सही है।
(ख) कथन और कारण दोनों सही है, कारण, कथन की सही व्याख्या है।
(ग) कथन और कारण दोनों गलत हैं।
(घ) कथन सही हैं किंतु कारण कथन की सही व्याख्या नहीं है।
उत्तर :
विकल्प (ख) सही है।
(iv) गद्यांश में भीष्म पितामह की तुलना _____ की गई है । (1)
(क) शान्तिदूत से
(ख) देवदूत से
(ग) अवधूत से
(घ) मेघदूत से
उत्तर :
विकल्प (ग) सही है।
(v) ‘हार मत मानो।’ इस वाक्य में लेखक कहना चाहता है – (1)
(क) कुटज की भौँति हार मान लो ।
(ख) कुटज की भौंति कमजोर हो जाओ।
(ग) कुटज की भौति विनम्र न बनो।
(घ) कुटज की भाँति विभिन्न परिस्थिति में डटे रहो, परिस्थितियों का मुकाबला करो।
उत्तर :
विकल्प (घ) सही है।
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प्रश्न 11.
निम्नलिखित तीन प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर किन्ही दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 40 शब्दों में दीजिए- [2 × 2 = 4]
(क) ‘प्रेमघन की छया-स्मृति’ पाठ में रामचंद्र शुक्ल ने चौधरी साहब के व्यक्तित्व के किन पहलुओं का वर्णन किया है ? (2)
उत्तर :
‘प्रेमघन की छया-स्मृति’ पाठ में रामचन्द्र’ शुक्ल ने चौधरी साहब के व्यक्तित्व के निम्न पहलुओं का वर्णन इस प्रकार किया है-
- वे हिन्दुस्तानी रईस हैं।
- उनके यहाँ तीज-त्यौहारों पर नाच-गाना होता है।
- उनकी अदाओं से रियासतदारी टपकती है।
- उनके कन्धों तक लम्बे बाल हैं।
- उनका नौकरों के साथ मज़ाकिया व्यवहार है।
(ख) ‘ढेले चुन लो’ पाठ में जीवन साथी का चुनाव मिट्टी के छेलों के आधार पर करने की वैदिक कालीन परंपरा का उल्लेख किया है। इस विषय में आपकी क्या राय है ? स्पष्ट कीजिए। (2)
उत्तर :
‘ढेले चुन लो’ पाठ में जीवन साथी का चुनाव मिट्टी के ढेलों के आधार पर करने की वैदिक कालीन परम्परा का उल्लेख किया गया है। प्रत्येक छेले अलग-अलग स्थान से लाए जाते थे। नर जानता था कि वह ये ढेले कहाँ से लाया है ? इस बारे में स्त्री कुछ नहीं जानती थी। इन्हीं ढेलों के आधार पर पंडित, जर्मींदार इत्यादि के पुत्र को जीवन साथी के रूप में चुना जाता था।
(ग) ‘संवदिया’ पाठ में बड़ी बहुरिया ने अपने मायके क्या संदेश भेजा ? (2)
उत्तर :
‘संवृदिया’ पाठ में बड़ी बहुरिया ने अपने मायके यह संदेश भेजा कि “और कितना कड़ा करूँ दिल ? …. माँ से कहना, मैं भाई भाभियों की नौकरी करके पेट पालूँगी। बच्चों की जूठन खाकर एक कोने में पड़ी रहूँगी, लेकिन यहाँ अब नहीं … अब नहीं रह सकूँगी। … कहना, यदि माँ मुझे यहाँ से नहीं ले जाएगी ताँ मैं किसी दिन गले में घड़ा बाँधकर पोखरे में डूब मरूँगी।”
प्रश्न 12.
निम्नलिखित गद्यांशों को ध्यानपूर्वक पढ़कर किसी एक गद्यांश की सप्रसंग व्याख्या लगभग 100 शब्दों में कीजिए – (6 × 1 = 6)
(क) विकास का यह ‘उजला पहलू’ अपने पीछे कितने व्यापक पैमाने पर विनाश का अंधेरा लेकर आया था, हम उसका छोटा-सा जायजा लेने दिल्ली में स्थित ‘लोकायन’ संस्था की ओर से सिंगरौली गए थे। सिंगरौली जाने से पहले मेरे मन में इस तरह का कोई सुखद भ्रम नहीं था कि औद्योगीकरण का चक्का, जो स्वतंत्रता के बाद चलाया गया, उसे रोका जा सकता है। शायद पैतीस वर्ष पहले हम कोई दूसरा विकल्प चुन सकते थे, जिसमें मानव सुख की कसौटी भौतिक लिप्सा न होकर जीवन की जुरूरतों द्वारा निर्धारित होती। पश्चिम जिस विकल्प को खो चुका था भारत में उसकी संभावनाएँ खुली थी, क्योंकि अपनी समस्त कोशिशों के बावड़ुद अंग्रेज़ीराज हिंदुस्तान को संपूर्ण रूप से अपनी सांस्कृतिक कॉलोनी बनाने में असफल रहा था। (6)
उत्तर :
सन्दर्भ – प्रस्तुत गद्यांश ‘जहाँ कोई’ वापसी नहीं, पाठ से अवतरित है जिसके लेखक निर्मल वर्मा हैं।
प्रसंग – औद्योगीकरण के उपरान्त परिवर्तन को इसमें दर्शाया गया है।
व्याख्या – लेखक बताता है कि विकास के साथ विनाश का अँधेरा भी सिंगरौली में आया। वह इसका जायज़ा लेने के लिए दिल्ली में स्थित ‘लोकायन’ संस्था की ओर से गए थे। उन्होंने ऐसा कुछ न सोचा था कि औद्योगीकरण का जो चक्का स्वतंत्रता के बाद” चलाया गया, उसे रोका जा सकता है। मानव सुख की कसौटी जीवन की ज़रूरतों द्वारा ही निर्धारित होती है। पश्चिम की होड़ से विकास कार्य यहीं शुरू किया गया। लेकिन यहाँ की जलवायु उसके अनुकूल न थी। अंग्रेज़ीरात भी हिन्दुस्तान को सम्पूर्ण रूप से अपनी सांस्कृतिक कॉलोनी बनाने में असफल रहा था। विशेष-
- खड़ी बोली हिन्दी का प्रयोग किया है।
- विकास के साथ विनाश का अंन्धेरा भी सिंगरौली में आया।
अथवा
(ख) आरती से पहले स्नान ! हर-हर बहता गंगाजल, निर्मल, नीला, निष्पाप। औरतें डुबकी लगा रही हैं। बस उन्होंने तट पर लगे कुंड़ों से बँधी ज़ंजीरें पकड़ रखी हैं। पास ही कोई-न-कोई पंडा जजमानों के कपड़ों-लत्तों की सुरक्षा कर रहा है। हर एक के पास चंदन और सिंदूर की कटोरी है। मर्दों के माथे पर चंदन का तिलक और औरतों के माथे पर सिंदूर का टीका लगा देते हैं पंडे। कहीं कोई दादी-बाबा पहला पोता होने की खुशी में आरती करवा रहे हैं, कहीं कोई नई बहू आने की खुशी में। अभी पूरा अंधेरा नहीं घिरा है। गोधूलि बेला है। (6)
उत्तर :
सन्दर्भ – प्रस्तुत गद्यांश ‘दूसरा देवदास’ पाठ से अवतरित है जिसकी लेखिका ममता कालिया हैं।
प्रसंग – लेखिका ने आरती से पहले स्नान का सजीव चित्रण किया है।
व्याख्या – लेखिका ने बताया है कि आरती से पूर्व औरतें बहते गंगा जल में डुबकी लगा रही हैं। उन्होंने तट पर लगे कुंडों से बँधी जंजीरों को पकड़ा हुआ है। पास में कपड़ों की सुरक्षा के लिए जजमान खड़े हैं। वहाँ पर प्रत्येक पंडे के पास चंदन और सिंदूर की कटोरी हैं। वहाँ पर पण्डित पुरुषों के तो चंदन का तिलक लगाते हैं और स्त्रियों के माथे पर सिंदूर का टीका लगाते हैं। कुछ्ड लोग पोता होने की खुशी में या नई बहू के आने की खुशी में आरती करवाते है। इस समय पूरा अंधेरा अभी नहीं घिरा है। क्योंकि गोधूलि का समय है।
विशेष-
- गंगाघाट पर होने वाले क्रियाकलापों का सजीव चित्रण किया है।
- भाषा खड़ी बोली हिन्दी है
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प्रश्न 13.
निम्नलिखित तीन प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 100 शब्दों में दीजिए- [5 × 2 = 10]
(क) झोपड़ी जलने के कारण सूरदास अपनी अर्थिक हानि को गुप्त क्यों रखना चाहता था ? (5)
उत्तर :
झोपड़ी जलने के कारण सूरदास अपनी आर्थिक हानि को गुप्त इसलिए रखना चाहता था क्योंकि अंधे भिखारी द्वारा धनसंचय करना, पाप संचय से कम अपमान की बात नहीं थी। भिखारी के पास धन होने की बात प्रकट होने पर उसे भीख न मिलने की सम्भावना भी थी। भिखारी के पास यदि धन होगा तो वह कहीं लज्जा का विषय न बन जाए। क्योंकि सभी व्यक्ति सोचेंगे कि अंधे भिखारी के पास धन कहाँ से आया ? हो सकता है शायद उसे फिर कोई भीख भी न दे, इसलिए उसने अपनी आर्थिक हानि के बारे में किसी को कुछ नहीं बताया।
(ख) ‘बिस्कोहर की माटी’ पाठ से साँपों के विषय में क्या जानकारी मिलती है ? इस जानकारी में किन अंधविश्वासीं का उल्लेख है ? स्पष्ट कीजिए। (5)
उत्तर :
गाँव में घास-पात से भरे मेड़ों पर, मैदानों में, तालाब के भीटों पर नाना प्रकार के साँप मिलते थे। वहाँ कुछ साँप अधिक विषैले होते थे। तो कुछ साँप विषहीन भी मिलते थे। उन स्थानों पर दो मुँहा साँप का होना भी आम बात थी। इस जानकारी में निम्न अंधविश्वासों का उल्लेख है-
- साँपों का जातिगत विभाजन
- डोंड़हा जाति के साँप को वामन जाति का मानने के कारण न मारना
- धामिन विषहीन लेकिन इस जाति के साँप के मुँह से कुश पकड़कर पूँछ से मारने पर अंग का सड़ जाना।
(ग) प्रभाष जोशी में मालवा की मिट्टी के संस्कार गहरे तक बसे थे। इस कथन की पुष्टि कीजिए। (5)
उत्तर :
प्रभाष जी में मालवा की मिट्टी के संस्कार गहरे तक बसे थे और वे इसी से ताकृत पाते थे। देशज भाषा के शब्दों को मुख्यधारा में लाकर उन्होंने हिन्दी पत्रकारिता को एक नया तेवर दिया और उसे अनुवाद की कृत्रिम भाषा की जगह बोलचाल की भाषा के करीब लाने का प्रयास किया। प्रभाष जी ने पत्रकारिता में खेल, सिनेमा, संगीत, साहित्य जैसे गैर पारंपरिक विषयों पर गंभीर लेखन की नींव डाली। क्रिकेट टेनिस हो या कुमार गंधर्व का गायन, इन विषयों पर उनका लेखन मर्मस्पर्शी है।